सब फैसले होते नहीं सिक्का उछाल के
ये दिल का मामला हैं ज़रा देखभाल के
मोबाइलों के दौर के आशिक़ को क्या पता
रखते थे कैसे ख़त में कलेजा निकाल के
ये कहके नई रोशनी रोएगी एक दिन,
अच्छे थे वही लोग पुराने ख़्याल के
आँधी उड़ा के ले गई ये और बात है,
कहने को हम भी पत्ते थे मज़बूत डाल के
तुमसे मिला है प्यार सभी रत्न मिल गए
अब क्या करेंगे और समंदर खंगाल के
- उदय प्रताप सिंह
इंडियन एक्सप्रेस क्या है? इसके मालिक संघ के दलाल हैं। आप क्या हैं? आप भी संघ के ही दलाल हैं। जनविरोधी हास्य कलाकारों, बहुरूपियों को बाहर ज़्यादा नहीं निकलना चाहिए। बारिश का मौसम है लड़के भी सड़कों पर हैं।
“जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।”
कोटा के बाद, देहरादून के बाद अब ‘छात्रों की गूंज’ प्रयागराज पहुंच रही है।
यह वो शहर है जहां लाखों नौजवान सालों से तैयारी कर रहे हैं - फ़ॉर्म भरते हैं, फीस देते हैं, और इंतज़ार करते रहते हैं।
पेपर लीक ने उनका आज छीना। रुकी हुई भर्तियों ने उनका कल। और अभी कुछ दिन पहले, दिल्ली में इन्हीं बच्चों पर लाठियां और पैलेट चलाए गए - सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने अपने हक़ की बात की।
हम उनकी आवाज़ उठाते रहेंगे और उन्हें इंसाफ़ दिलाकर रहेंगे। अब बहाने नहीं चलेंगे - जवाबदेही लीजिए, या कुर्सी छोड़िए।
8 अगस्त - प्रयागराज में मिलते हैं।
#ChhatronKiGoonj
8 वर्षों से उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती का इंतज़ार खत्म होना चाहिए।
20 लाख D.El.Ed./BTC अभ्यर्थियों की एक ही मांग है—ग्रामीण एवं नगरीय पदों को मिलाकर 1 लाख प्राथमिक शिक्षक भर्ती का संयुक्त विज्ञापन जारी किया जाए।
@thisissanjubjp@myogiadityanath@PrashantK_IPS90
अगर रिजर्वेशन हटाने के लिए आंदोलन करोगे तो फिर जाति भी हटानी पड़ेगी..इसका मतलब कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनानी पड़ेगी..या फिर इस पार्टी की अपने आप सरकार बन जायेगी ..क्योंकि jha@t भर की संख्या है तुम्हारी..
अभी भी देश के 80% संसाधन पर तुम्हारा ही कब्जा है, कम्युनिस्ट सरकार आने के बाद संसाधन भी देना होगा..
कोई इस मुगालते में मत रहना कि
मोदी जी बहुत रहमदिल हैँ,
लोकतंत्र के प्रति उनकी बड़ी आस्था है,
GEN Z से प्यार है,
इसलिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जनमत को देखते हुए ले लिया,
आंदोलन की आंच जब खुद तक पहुँचती दिखी,
तो मोदी जी अलर्ट हो गए,
और कोई रास्ता नहीं बचा तब मजबूर होकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया मज़बूरी में,
क्योंकि जनभावना की इतनी ही कद्र होती तो प्रधान का इस्तीफा एक महीना पहले ही हो गया होता,
“व्यक्ति की गरिमा” 🇮🇳
स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई,
पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई,
पात-पात झर गये कि शाख़-शाख़ जल गई,
चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई,
पुरानी सी टी-शर्ट पहने, गले में गमछा डाले.. ये कौन था जो इस प्रोटेस्ट में आया और अपनी आत्मा की गहराई से, भावनाओं में बहे बगैर देश के लोकतन्त्र और उसमें हिस्सेदारी का दावा पेश कर गया.
अभिव्यक्ति की आजादी का मौका मिला था इसे जंतर-मंतर पर. कह रहा है दौड़कर आया हूं. नीरज ने जो लिखा, वो जीवन की हकीकत है. उसी हकीकत को करीब से..बेहद करीब से देखा और चला आया. लाखों की भीड़ में जहां Gen-Z को लफंडर लिखा गया, दिखाया गया. वहां यह नौजवान सरकार को आईना दिखा गया. Gen-Z ही था, शायद किसी ने ठीक से इसे देखा नही. मंच पर क्यों नही बोलने दिया इसे, थोड़ा सा भगतसिंह और बाहर आता. इस देश के युवाओं को थोड़ा और जोश भर जाता. बता जाता कि मौका मिले तो खुद को इस दुनियां के सामने उड़ेल कर रख दो. बता दो सरकारों को संवाद के बिना कोई रास्ता नही है. हिंदू-मुस्लिम और जातियों में बंट चुकी सियासत और देश में ऐसे ही युवा इस लोकतंत्र को जिंदा रखे है.
किसी को इसका नाम पता चले तो जरूर बताना. इसका स्वागत करना है, इसे एक फूलों का हार पहनाना है.
@TheLallantop
>2016-17 में अखिलेश सरकार में जल निगम में 1300 भर्तियां आयीं,
>जिसमें 853 जूनियर इंजीनियर(JE) की भर्ती थी
>ये भर्तियां नगर विकास मंत्रालय के अंतर्गत आती थीं
>आज़म खान नगर विकास मंत्री थे
>बच्चों को ज्वाइनिंग मिली फिर एक साल बाद भर्ती कोर्ट में चली गयी
>आजम खान समेत उनके पंद्रह कर्मचारियों पर धांधली के आरोप लगे
>पंद्रह कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गयी
>बच्चे 10 साल बाद आज भी ज्वाइनिंग के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहे
>बच्चे पैसे जोड़ जोड़ कर वकीलों का खर्चा दे रहे
>सरकारी वकील डिपार्टमेंट से पैसा लेकर मलाई काट रहे,
>बच्चों की शादी रुकी हुई है
>कुछ की शादियाँ टूट गयीं
>कुछ बच्चे डिप्रेशन में हैं, लोग सूइसाइड attempt कर चुके
>दस साल बाद बच्चे न्याय की तलाश में भटक रहे,
अखिलेश भैया और पूरी समाजवादी पार्टी जंतर-मंतर पर बच्चों के साथ सीना से कंधा मिलाकर खड़ी थी