ना मुझे उसका रहन सहन पसंद था,और ना ही उसकी बातें कोई लंबी बातें नहीं होती हमारे बीच,जब वो परेशान होती तो परेशानी लिए मेरे पास आ जाती,मुझे कुछ नहीं चाहिए था उससे,कुछ भी नहीं बस उसकी परेशानी और उसकी बेचैन आँखे मैं नहीं देख सकता था...!
पुरुषों को रोने की अनुमति नहीं होती, रोते हुए पुरुष को कायर समझा जाता है पर असल में वो रोना चाहता है, उसे भी दर्द होता है पर उसके पास कोई जगह नहीं होती जहां वो रो सके फलस्वरूप अधिकांश पुरुष दुःख की अति से भर जाते हैं और आत्महत्या करते हैं...!!!