अगर आप चाहते हैं कि दुनिया अंधविश्वास और पाखंड से निकल कर तार्किक सोच अपनाए, तो घर से ही शुरुआत कीजिए।
दुनिया को उपदेश देने वाले बहुतेरे हैं। घर से शुरुआत करने वाले बहुत कम।
सहमत हैं तो RT करें।
@Logical_Society
बेह्तरीन दिमाग विचारों पर चर्चा करते हैं,
औसत दिमाग घटनाओं के बारे में चर्चा करते हैं,
और कमजोर दिमाग लोगों के बारे में चर्चा करते हैं।
— सुकरात
@hindi_notes @thebookworm@Yuwa_Bharat@thequote_in
लड़कियॉं
खुद की पसंद से शादी करें
तो समाज 'उसकी पसंद' कहकर
उससे पीछा छुड़ा लेता है
और परिवार की मर्ज़ी से शादी करें
तो समाज 'उसका नसीब' कहकर
पीछा छुड़ा लेता है
सच में
समाज लड़कियों के साथ
कभी रहा ही नहीं
और हम लड़कियों को
हिदायत देतें हैं कि
'तुम' समाज के साथ चलो।
— पिंकी गुप्ता
लोग दहेज में बीएमडब्ल्यू दे देते हैं, लेकिन बेटी को ड्राइविंग नहीं सिखाते। वह बीएमडब्ल्यू होने पर भी इंतज़ार करती है कि कब कोई फ़्री हो तो उसे बाहर ले जाए।
— अनुराधा बेनीवाल
'लोग जो मुझमें रह गए' पुस्तक से
@ambedkarite@thebookworm
⚡️ रूढ़ियों को लोग इसलिए मानते हैं, क्योंकि उनके सामने रूढ़ियों को तोड़ने वालों के उदाहरण पर्याप्त मात्रा में नहीं है। ⚡️
— राहुल सांकृत्यायन
@Logical_Society
आपके भाग्ये का फैसला कहीं आसमान या पूजाघरों में नहीं होता बल्कि राजदरबार (संसद या राजनीती) में होता है, राजनीती में हिस्सा लो उसे बदलो और अपने भाग्य विधाता खुद बनो....!!
— तान्या अम्बेडकर
@Tanu_Ambedkar
@Logical_Society
⚡️ रूढ़ियों को लोग इसलिए मानते हैं, क्योंकि उनके सामने रूढ़ियों को तोड़ने वालों के उदाहरण पर्याप्त मात्रा में नहीं है। ⚡️
— राहुल सांकृत्यायन
@Hindi_Notes
@Logical_Society
@Bhaktiyapa
"We are like books. Most people only see our cover, the minority read only the introduction, many people believe the critics. Few will know our content."
— Emile Zola
किसी चीज को सहज रूप में जैसी वह है, उसी रूप देखना संसार में सर्वाधिक कठिन चीजों में से एक है। क्योंकि हमारे दिमाग को बचपन से ही बिना ज्ञान और जिज्ञासा के ही मान लेने की आदत डाल दी गई है।
@TheBookWorm@Logical_Society
धर्म निजी आस्था का विषय है,किसी और को इससे तकलीफ़ पहुँचें तो यह धर्म नहीं अधर्म है।
धर्म के नाम पर फैल रही नफ़रत को देख कर मेरा यह विश्वास और दृढ़ हुआ है कि धर्मों में मुक्ति ढूँढने के बजाय धर्मों से मुक्ति पाने का समय आ गया है।
— भँवर मेघवंशी
@BhanwarMegh@Logical_Society
लोगों के नास्तिक होने के कई कारण मिल जायेंगे।
लेकिन लोगों के आस्तिक होने के दो ही कारण मिलेंगे।
'डर' का मिलना और 'कारण' का न मिलना।
— हरीश मानव
@NastikQuotes
इन्सान खुद ही मूर्ति बनाता है
खुद ही उसके लिए मंदिर बनाता है
खुद ही उसे पूजता है
खुद ही उससे मांगता है और
खुद ही उससे डरता भी है
वो बेवकूफ है या समझदार
#पाखंड_मुक्त_भारत@NastikBharat