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सुप्रीम कोर्ट ने कहा दिल्ली NCR में डीजल कार नहीं चलने देंगे। तो पेट्रोल कार खरीद लो। पेट्रोल मंत्री ने पेट्रोल का अधिकार सड़क मंत्री को दे दिया है जो असल में गन्ना मंत्री है। दोनों ने कहा शुद्ध पेट्रोल नहीं देंगे। 20% मिलावट वाला ही देंगे। तो E20 पेट्रोल कार खरीद ली। मिलावट इतनी है कि अब फ्यूल पंप का इश्यू हो गया। सब कह रहे हैं नई इलेक्ट्रिक कार ले लो। हाउसिंग सोसाइटी ने कहा चार्जिंग सिस्टम नहीं लगेगा, उससे आग लग जाती है। कह रहे हैं कहीं और नया घर ले लो। इधर पेट्रोल वाली गाड़ी कहीं भी खड़ी हो जा रही। फिर टो कर के सर्विस सेंटर में खड़ी रह रही। पेट्रोल की बचत हो रही है। मोदीजी आह्वान करते उसके पहले ही गडकरी जी ने इंतजाम कर दिया। ऐसी दूरदर्शिता से ही देश चलेगा। दादा कोंडके कहे रहे आगे की सोच। काहे की तुम्हारे पीछे क्या हो रहा है देख लोगे तो तन बदन में आग लग जाएगी। सदन में ठण्डक बनी रहेगी। वहां तुम्हारे चुने गए चन्द्रवदन को�� क्रंदन नहीं करेंगे। क्रंदन तुम्हारे माथे पर लिखा है जिसे वो पढ़ चुका है। तीन आखर का ही है वो भी। तुमको नहीं अखरेगा। तुम यूज़्ड टू हो। जो लिखा गया है नहीं बदलेगा। तुम्हारा भाग्य, बाबासाहब का संविधान, और सरकार की नीतियां। सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए। गाड़ियां आएंगी, जाएंगी, पॉलिसियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर इथेनॉल रहना चाहिए। काहे कि एक बार हमने कमिटमेंट कर दी तो अपने आप की भी नहीं सुनते। जनता का फीडबैक घंटा सुनेंगे, मीटिंग की मिनिट्स लेंगे और एक सेकंड में एंटी नेशनल कह कर खारिज़ कर देंगे। सब सहन करो। अपने कर्मों का फल वहन करो। वाहन तुम्हारा गारत, बोलो जय भारत। देश के लिए इतना नहीं कर सकते। तुम पर लाख लानत।
वैश्विक ऊर्जा संकट माँ ध्यान केवल आम जन को रखना है, नेता नूती लोगन का काफ़िला में ना प्रोटोकॉल कम होगा ना उनके क़ाफ़िले की गाड़ियाँ
क्या ही फ़र्क़ पड़ता है!
जागो जनता जागो
बड़ा आए ऐसे बात नहीं कर सकते
पिछली बार एक एसडीएम ने सेक्टर मजिस्ट्रेट (जिसमें लगभग सभी असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के लोग थे) कहा तुम लोग यहाँ क्या मक्खी मारने आए हो जाओ अपने अपने सेक्टर में, जबकि उसी व्यक्ति के बुलावे पर सभी तहसील पर पहुँचे थे।
तो ऐसे होते हैं चुनाव देश में
~इति
अनुराग यादव को उनके अधिकारी की बात ख़राब लग गई, कोई इनसे पूछे जब ये अध्यापकों को सेक्टर मजिस्ट्रेट/ पीठासीन बनाकर मीटिंग बुलाते हैं तो कैसी भाषा में बात करते हैं ये लोग ?
ये मेरा सौभाग्य रहा है कि IGCAR कल्पक्कम के साथ मैंने FBR के लिए कुछ दिनों तक 2010-11 में काम किया, वो काम अब फलीभूत होता देख बहुत ही ख़ुशी हो रही है |
वैज्ञानिक कामों में लंबा वक्त लगता है, तुरंत नहीं होता कोई काम । विश्वास, धैर्य, समर्पण और पूरी मेहनत हमेशा फलीभूत होते हैं।
दुनिया मिसाइल मिसाइल और ड्रोन ड्रोन खेल रही, और हमारे ��हाँ की पीढ़ी आईपीएल 😂
ना पढ़ेंगे, ना उन्नति करेंगे बस आई पी एल देखे देखे नौकरी की तलाश करेंगे और व्यवस्था को गाली देंगे
~इति