सरकार अगर आप सबके लिए समान कानून नहीं रख सकते सरकार होते हुए भी भेदभाव कर रहे हो तो कृपा करके सामान्य वर्ग के लिए अलग अस्पताल,स्कूल,कॉलेज खुलवा दो हम सब वही पढ़े लिखे अपना इलाज कराएं।हम क्यों फालतू का भेदभाव भी सहे एससी एसटी एक्ट भी सहे और इल्जाम भी हम ओर लगे कि हम भेदभावकरते हैं
@thisdisha क्योंकि अधिकतर मां बाप बेटी की शादी को बस एक जिम्मेदारी और बोझ समझते हैं । उन्हें ये नहीं रहता कि बेटी खुश है या नहीं । उसे अपने लिए खड़ा होना नहीं सिखाते सिर्फ कॉम्प्रोमाइज करना सिखाते हैं ।
लड़कियों के घर वाले क्यों नहीं समझते कि अगर लड़की आपको कुछ बता रही है तो इसका मतलब वो बहुत कुछ झेल चुकी है अब जो है बर्दाश्त से बाहर है तब उसने आपको बताया है।
रात में भाई से मांगी मदद, सुबह अस्पताल में मिला विवाहिता का शव, पति समेत 5 पर केस दर्ज
राजस्थान के सवाई माधोपुर के लक्ष्मी विहार कॉलोनी खेरदा में एक विवाहिता ने फंदे से लटक कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. पीहर पक्ष ने पति और उसके परिवार पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. मृतका के परिजनों का दावा है कि वह लंबे समय से बाइक और कार की मांग को लेकर परेशान थी.
पूरी खबर : https://t.co/ZH8kwrZb4c
#SawaiMadhopur #DowryHarassment #RajasthanNews
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित।
अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया।
यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है।
हमारी माँग आज भी वही है: शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो - ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती - धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।
कंपनी को बचाने के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’ क्लॉज हटाया गया?
आज @cbseindia29 की यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि इसने एक ऐसी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जिसने इस स्केल पर न तो काम किया था, न कोई पायलट प्रोजेक्ट। कंपनी तेलंगाना में जिस नाम से थी, और जो डायरेक्टर थे, उन्हें ही आगे कर के ये कॉन्ट्रैक्ट लिया गया।
टेंडर के नियम बदले गए, ढील दी गई, शिक्षकों ने मना किया फिर भी पैन इंडिया परीक्षा कराई गई। आज पता चला है कि @dpradhanbjp की प्रिय कंपनी को CBSE ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकती।
अगस्त 2025 में जो नियम थे, उसमें यह संभावना थी कि कंपनी का पेमेंट रोक सकते हैं, पैनल्टी लगा सकते हैं, ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं। परंतु, अगले महीने में नियमों से ‘ब्लैकलिस्ट’ शब्द हटा दिया गया।
प्रश्न यह है कि किसके कहने से ब्लैकलिस्ट शब्द हटाया गया? क्या CBSE या शिक्षा मंत्रालय/मंत्री को यह बात पता थी कि OSM हैंडल नहीं हो पाएगा? और अगर ऐसा हुआ भी तो कंपनी बची रहेगी?
और फाइन कितना है? यदि आपने बेसिक समस्याओं का निदान नहीं किया तो ₹5,000/घंटा; समस्या पता होने पर निदान न आने पर लाख रुपये प्रति पंद्रह मिनट; रूटकॉज एनालिसिस और उसे सही करने की योजना न जमा करने पर लाख रुपये/घंटा की पैनल्टी है।
अधिकांश समस्याएँ ₹5000/घंटा वाले में ही हैं: लॉगिन, हैंडहोल्डिंग डॉक्स, यूजर मैनुअल्स, ऑन साइट
सपोर्ट, ऑनबोर्डिंग असिस्टेंस या और कुछ जो CBSE के साइट को ठीक से चलाने के लिए आवश्यक है।
यह सड़ाँध अत्यंत गहरी है, इसकी जाँच होनी चाहिए कि जिस परीक्षा में पूरे देश के 18 लाख बच्चे बैठ रहे हों, उसे सुचारू रूप से न करा पाने की स्थिति में CBSE ने ‘ब्लैकलिस्ट’ का विकल्प क्यों नहीं हटाया?
PS: और हाँ मंत्री जी, ₹150/पोस्ट वाले ट्रोल को नियंत्रण में रखो, बेहतर रहेगा वरना डॉकूमेंट्स खोदना मुझे आता है। उसी AI से सब कुछ निकालने में बहुत कम समय लगेगा।
सीबीएसई का सिस्टम ध्वस्त हुआ! पूरा सिस्टम एक्सपोज़ हुआ! और यह काम स्टूडेंट्स ने किया!
अब तक किसी दोषी के खिलाफ सामान्य एक्शन तक नहीं हुआ जिससे पता चलता है की सरकार इस मसले को कितने हलके तौर पर ले रही है!
अगर किसी राजीनतिक रैली में चूक हो जाए तो इससे अधिक और कड़ी कार्रवाई भी हो जाती है!
लेकिन इससे भी बड़ी शर्मनाक और गुस्सा देने वाली बात है की उनपर भी एक्शन नहीं हुआ जिन्होंने मामले को छिपाने और दबाने के लिए छिछोरा वाला PR करवाया! इसके लिए स्कूल टीचर को तो जोड़ा ही स्टूडेंट्स तक को नहीं छोड़ा!
ऐसा करने वाले अधिकारिओं पर क्रिमिनल केस दर्ज होना चाहिए!
Police detaining Secondary and Higher secondary school kids who were raising voice against CBSE OSM blunder
Vishwaguru is now scared of School kids also 😭
तो @dpradhanbjp जी की टीम हमें यह बताएगी कि बुकलेट #3, #5, #9, #10 समेत अन्य को किस डुप्लेक्स स्कैनर से स्कैन किया गया है? स्कैन कॉपी फ्लैट होती है, पंखे के हवा से उड़ती हुई नहीं, साइड से फूली हुई नहीं!
@cbseindia29 ने वस्तुतः जिस कंपनी को कांट्रैक्ट दिया, उसने स्कैन करने की जगह, कुछ लोगों को एक फ़ोन कैमरा दिया और कहा कि हर कॉपी के हर पन्ने की फोटो लो, एक साइज में क्रॉप करो और फलाने फोल्डर में डाल देना।
दूसरी बात, ये सारे बच्चों की उत्तर पुस्तिकाएँ कोई भी, कहीं से भी डाउनलोड कर सकता है! इतनी वाहियात सिक्योरिटी है इनके OSM पोर्टल की। अब मुझे लगने लगा है कि coempt edu tek वालों के संबंध किसी एक महत्वपूर्ण व्यक्ति से है, जैसा कि कुछ लोगों ने लिखा है!
@narendramodi जी ईगो का ढकिया माथे पर ले कर चलते रहिए, 10-20 लाख बच्चे ही तो हैं, अगली बार फिर दे देंगे! आपके व्यक्तिगत संबंध किसी मंत्री से हो सकते हैं, आपको वह अतिप्रिय भी हो सकते हैं, पर क्या उसके लिए आप लाखों विद्यार्थियों के साथ ये सब होते देख धृतराष्ट्र बन जाएँगे?
CBSE people didn't configure their AWS bucket properly and now we can paginate & enumerate all their media which has 2026 answersheets & question papers. ListObjectsV2 works without any auth and the bucket root is listable too — anyone on the internet can download any scanned booklet — across institutions. Multiple institutions are using the same bucket, insanely insecure.
@ni5arga@cbseindia29 good morning CBSE, you said you used scanners to scan these copies,
now since the copies are out to the public view, do you mind explaining
which copies when scanned through a scanner, have a drop shadow? and these 3 folds?
did you really use scanners?
हमारा लड़का इंग्लिश में कमजोर है, मैथ उसे समझ नहीं आती।
फिजिक्स का उसे कुछ समझ नहीं आता और केमिकल से डरता है तो केमिस्ट्री नहीं पढ़ सकता।
लेकिन हम उसे अमेरिका के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने भेज रहे।
सेम यही मेंटलिटी भाजपा की है जो उस भारत की हर चीज को बिना उचित तैयारी के पूरी तरह ऑनलाइन डिजीटल करने पर आमादा है जिस भारत की अस्सी करोड़ जनता फ्री का राशन लेती है, खेती अभी भी उसकी सबसे बड़ी महत्वपूर्ण चीज है तकनीकी शिक्षा देने की व्यवस्था प्राइमरी के सरकारी स्कूलों में नहीं बल्कि प्राइमरी स्कूल में कंप्यूटर भी नहीं।
हर चीज को बहुत जल्दी इतना जटिल इतना कठिन करने की जल्दी है कि समझ नहीं आता।
अगर बारहवीं की बच्चों की हस्तलिखित कॉपियों को भौतिक रूप से जांचने के लिये टीचर खुद तैयार हैं, शिकायत नहीं करते।
गलत कॉपी जांचने पर सजा को तैयार थे तो ये हस्तलिखित कॉपियों को ऑनलाइन कम्प्यूटर पर स्कैन करके जांचने की जरूरत क्या आन पड़ी थी?
बच्चों ने परीक्षा कॉपियां पेन से लिखी थीं।
कंप्यूटर पर ऑन लाइन नहीं।
पर इन कमीनों को इसमें भी स्कैम करके पैसे बनाने थे और बच्चों का भविष्य बिगाड़ने के प्रयास करने थे।
भ्रष्टाचार को ऑनलाइन करना कोई भाजपा से सीख सकता है।
17-year-old Sarthak Sidhant has exposed how CBSE manipulated its own selection process to benefit COEMPT, using CBSE’s own documents.
The details in his blog reveal how CBSE changed the RFP to unduly benefit COEMPT, at the cost of TCS.
He has revealed the hollowness of Dharmendra Pradhan ji’s denials. The PM remains silent, as usual. The question is simple: who are they protecting, and why?
An independent judicial inquiry is now essential to uncover the full extent of this scam.
Sarthak’s work shows that India’s Gen Z is brilliant and fearless. And sooner or later, they will find out the full truth.
केवल 17 साल के सिद्धांत का यह 3 मिनिट का वीडियो देश के हर छात्र को देखना चाहिए।
जिस उम्र में बच्चे बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते हैं, उस उम्र में सार्थक सिद्धांत ने CBSE के टेंडर दस्तावेज़ों की तुलना कर 15 से अधिक विसंगतियों का दावा किया है।
• 3 "Poor Performance" क्लॉज हटाए गए।
• "Previously Blacklisted" को बदलकर "Currently Blacklisted" कर दिया गया।
• 50 करोड़ टर्नओवर की पात्रता शर्त में Coempt कथित तौर पर महज़ 1.7% से क्वालिफाई करती दिखी।
• "Corrupt Practices" की समय-सीमा आधी कर दी गई।
• प्रोजेक्ट पात्रता मानदंडों में भी बदलाव किए गए।
17 साल का एक छात्र सवाल पूछ रहा है।
अब जवाब CBSE को देना चाहिए।
हमें तुम पर नाज़ है, सिद्धांत।
#CBSE
@RahulGandhi@Pawankhera@SupriyaShrinate
#WATCH | Ranchi, Jharkhand | A class 12th student, Sarthak Sidhant, says, “…I have written a blog that compares the tender documents of CBSE. I have uploaded and published it… There were at least 15 discrepancies, as per my blog. I would like to highlight three or four of them. Let me give a background about Coempt. It was known as Globarena, and they have a very shady background. 23 students killed themselves because of coempt… Now, I would like to tell you about RFP (Request for Proposal). What happens is the government issues a tender and asks the bidder to bid for it. CBSE issued this tender three times… I have compared the old RFP and the new RFP, and I found some discrepancies… The first discrepancy is that there were three clauses of poor performances which was completely wiped out from the new RFP. In the earlier RFP, there was a clause called blacklisted earlier, whereas in the new RFP, it was changed to blacklisted currently. Why would the board want a service provider which was blacklisted earlier? The third thing I found out is the 50 crore limit, which you needed to qualify, and coempt qualified that by 1.7% … The time frame of corrupt practices was halved, and there were project criteria changes… It shows a pattern that the industry giant TCS was not preferred, but coempt was preferred, which works as a very fragmented group of institutions…”
Read this story. Carefully.
CBSE called for OSM tenders thrice. Zero bids the first time. No qualified bidder the second time. And finally, the technical bar was lowered until COEMPT could clear it.
Scanning resolution cut. Robotic scanner requirement dropped. CMMI certification lowered from Level 5 to Level 3. Penalties for errors in answer sheets removed.
TCS, India’s biggest IT services company, qualified in the third round too. TCS lost. COEMPT - a company with a spectacular track record of failure - won.
And what are CBSE students complaining about today? Badly scanned answer sheets. Missing pages. A broken evaluation portal.
Teachers had warned CBSE that the OSM system needed at least a year or two for further preparation before nationwide implementation, yet it was rushed through.
So I ask again - who wanted COEMPT to win? Who lowered the bar, step by step, until this company could clear it?
Pradhan ji and CBSE say “due process was followed.” That is not an answer, that is not accountability. The question is whether the contract was honestly awarded to the best company which could do the job correctly.
The futures of 18.5 lakh children were handed to a company that could only qualify after the rules were bent for it.
To the BJP Ministers attacking me for asking questions - I have, from day one, demanded an independent judicial probe. Expand it from CBSE to every contract awarded to COEMPT. Our youth deserve the truth.
And Modi ji, your silence on the CBSE debacle and inaction against the Education Minister tells the country what you actually care about - not the futures of lakhs of students, only the survival of your own government.
हिसाब होगा, और सबका हिसाब होगा। किसी भी आततायी को याद रखना चाहिए कि उनकी सत्ता सदैव के लिए नहीं है। अमित शाह के रहने तो एकदम ही ऐसी ग़लतफ़हमी न पालें।
एक-एक करके 300 BJP कार्यकर्ताओं को मार डाला गया, जिन्होंने एक पर भी मुँह नहीं खोला वो आज अभिषेक बनर्जी पर कुछ अदद अंडे फेंके जाने के बाद भारत में लोकतंत्र न होने का दावा कर रहे हैं। ममता बनर्जी स्वयं उन तीन सौ मृतकों के परिजनों से मिलकर माफ़ी माँगें, घर-घर जाएँ - वरना जनता कहीं की नहीं छोड़ेगी।
बंगाल में अब अगले 20 साल तक भाजपा आराम से रहने वाली है, क्योंकि बंगाल जिधर झुकता है उधर झुका ही रहता है। तमाम पत्रकारों से लेकर भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष JP नड्डा तक, इन गुंडों ने वहाँ किसी को नहीं छोड़ा था। ED के अधिकारियों तक को दौड़ाया गया था। CBI के अधिकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया था। जबकि ये राजनीति से जुड़े नहीं होते, ये केवल अपना काम कर रहे थे।
अब समय बदल गया है। तृणमूल कांग्रेस की सत्ता सिर्फ़ और सिर्फ़ भय की निन्नव पर टिकी हुई थी। कैडर या विचारधारा आधारित पार्टी नहीं है ये, इसीलिए ध्वस्त हो रही है। भाजपा ने दरवाजे बंद कर रखे हैं फ़िलहाल, वरना बनर्जी परिवार को छोड़कर पूरी पार्टी ही स्वयं का भाजपा में विलय कर दे।
यही लोकतंत्र है, कर्मों का हिसाब देना पड़ता है।
NEET। CBSE। SSC। और आज CUET।
चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई।
दावे "विश्वगुरु" के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।
जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
एक भी परीक्षा ये सरकार सही से नहीं करवा पा रही है। इस सरकार का मकसद बस चुनाव सही समय से कराना रह गया है। इतने अव्यस्था के बाद भी अगली परीक्षा में फिर वही हाल रहता है इनको क्यों नहीं समझ आता ये बच्चे इस देश का भविष्य हैं और ये उनके भविष्य के साथ ही खेल रहे हैं।
इस बार अत्यधिक गर्मी व हीट वेव होगी, यह भारतीयों के लिए कोई अनजान बात नहीं थी। इस साल अधिक मास होने से दो ज्येष्ठ मास हैं, व अभी अधिक ज्येष्ठ चल रहा है। सबसे ज्यादा गर्म ज्येष्ठ मास होता है और दो ज्येष्ठ पड़ें तो गर्मी के आधिक्य से आसमान आग उगले और धरती अंगारे के समान बन जाए, यह कोई बच्चा भी आराम से समझ सकता है। अधिकांश पञ्चाङ्ग जानने वाले हिन्दू दो ज्येष्ठ देखकर यह पहले से ही जानते थे, यहां पंचांगकारों की नहीं बल्कि घर घर में पंचांग जानने वाली दादी नानियों की बात कर रहा हूँ।
इसी दो ज्येष्ठ के कारण पृथ्वी पर यह भयानक दाह उत्पन्न हुआ है।