Sir, the parents of Aditya Prabhu, a Bengaluru student who died by suicide in 2023 after his own professors told him to kill himself, called your office EVERY SINGLE DAY for SIX MONTHS just to get an appointment to expose the college's misconduct.
You didn't give them those five minutes. Their cries went unheard. I have witnessed years of agony that they've lived through since then.
Because of your apathy, three more students died by suicide at the same "University" that year. The chargesheeted accused still show up to that campus every morning and teach. You did nothing. You are still doing nothing.
This rage was not built in a day. It was built by your silence while children were dying. This has nothing to do with any political party, so please don't make it about politics.
Do the right thing for once and pave the way for someone who is more competent and is actually interested in running the Education Ministry properly.
It's the only thing anyone wants from you anymore 🙏
निजीकरण का विफल प्रयोग उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर न थोपा जाय: संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें जिससे देश के अन्य हिस्सों में विफल हो चुके निजीकरण के प्रयोग को उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर न थोपा जाय। बिजली कर्मचारियों ने आज लगातार 270 वें दिन निजीकरण के विरोध में विरोध में अवकाश के बावजूद व्यापक जनसंपर्क जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील करते हुए कहा है कि उनके मार्गदर्शन में बिजली कर्मचारियों ने रिकॉर्ड विद्युत आपूर्ति की है और लाइन हानियां में कमी कर उसे राष्ट्रीय मानक के नीचे कर दिया है। महाकुंभ के दौरान बिजली कर्मियों ने अथक परिश्रम कर 65 दिनों तक चले महाकुंभ में पल मात्र के लिए भी विद्युत आपूर्ति में व्यवधान नहीं आने दिया। आंदोलन रत रहते हुए भी बिजली कर्मियों ने भीषण गर्मी के दौरान लगातार बेहतर विद्युत आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में निजीकरण का प्रयोग एक विफल प्रयोग है। प्रांत के स्तर पर सबसे पहले वर्ष 1999 में उड़ीसा में विद्युत वितरण का निजीकरण किया गया था। निजीकरण का यह प्रयोग उड़ीसा के सबसे अधिक औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में एक वर्ष में ही विफल हो गया। अमेरिका की एईएस कंपनी एक वर्ष बाद ही काम छोड़कर भाग गई और उसने महा चक्रवात के दौरान टूटे बिजली के ढांचे का पुनर्निर्माण करने से इनकार कर दिया। रिलायंस पावर अन्य तीन विद्युत वितरण निगमों में काम करता रहा। फरवरी 2015 में उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खराब परफॉर्मेंस के चलते रिलायंस पावर के भी तीनों लाइसेंस रद्द कर दिये। उड़ीसा में यह दूसरी विफलता थी।
कोरोना के दौरान जून 2020 में उड़ीसा के चारों विद्युत वितरण निगमों का लाइसेंस टाटा पावर को दे दिया गया। इसी माह 15 जुलाई को उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बेहद खराब परफॉर्मेंस के कारण टाटा की चारों कंपनियों को नोटिस जारी किया है और उनके परफॉर्मेंस पर जनसुनवाई का आदेश जारी कर दिया है ।उड़ीसा में यह निजीकरण की तीसरी विफलता है। उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी टाटा पावर के विरोध में लगातार आंदोलन कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पड़ोसी प्रांत बिहार में गया, भागलपुर और समस्तीपुर में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के नाम पर निजीकरण का प्रयोग किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके पूरी तरह असफल रहने के चलते इसे एक साल बाद ही रद्द कर दिया। महाराष्ट्र में औरंगाबाद, जलगांव, नागपुर और झारखंड में रांची और जमशेदपुर में निजीकरण के विफल प्रयोग निरस्त किए जा चुके है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा और आगरा में निजीकरण का प्रयोग असफल रहा है। ग्रेटर नोएडा में आए दिन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही है। ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी का लाइसेंस निरस्त कराने हेतु स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ रही है। आगरा में टोरेंट पावर कंपनी अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के करार का खुलेआम उल्लंघन कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती है और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 42 जनपदों में बेहद गरीब जनता रहती है। अतः प्रदेश के और आम जनता के व्यापक हित में निजीकरण का विफल प्रयोग उत्तर प्रदेश में न लागू किया जाए और तत्काल इसे निरस्त किया जाए।
आंदोलन के 270 वें दिन आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने व्यापक जनसंपर्क कर निजीकरण से होने वाले नुकसान से आम लोगों को और कर्मचारियों को अवगत कराया ।
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बिजली अभियंताओं पर लगातार उनके कार्यालयों में घुसकर हो रहे जानलेवा हमले पर विद्युत अभियंता संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कियाः फील्ड में कार्य कर रहे अभियंताओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के लिए इंजीनियर प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की मांग:
आज दिनांक 23 अगस्त 2025 को अधीक्षण अभियंता जनपद बलिया के कार्यालय में घुसकर हमलावरों द्वारा गाली गलौज करते हुए मारपीट की गई।
अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि अधीक्षण अभियंता जिले का सबसे बड़ा अधिकारी होता है और अगर उसी के साथ उसके कार्यालय में घुसकर जानलेवा हमला होता है तो यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। अगर जिले का सबसे बड़ा अधिकारी ही सुरक्षित नही है तो अन्य बिजली कर्मी कैसे सुरक्षित रहेंगें।
संघ ने उपरोक्त घटना पर कड़ा विरोध दर्ज करते हुए हमलावरों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार कराए जाने की मांग की है।
जितेंद्र सिंह गुर्जर ने यह भी कहा कि इससे पूर्व थाना तमकुहीराज जनपद कुशीनगर के अंतर्गत दिनांक 24 जुलाई 2025 को अपने सरकारी कार्यालय में कार्य कर रहे उपखंड अधिकारी (विद्युत) श्री शुभम अग्रहरी पर नामजद हमलावरों द्वारा सरकारी कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की तथा उपखंड अधिकारी के साथ गाली गलौज करते हुये मारपीट की, जिसका वीडियो प्रदेश भर मे वायरल हो रहा था। उपखंड अधिकारी के द्वारा उपरोक्त घटना की तहरीर तत्काल थाना तमकुहीराज जनपद कुशीनगर में दे दी गई थी, परन्तु आज एक माह व्यतीत होने के उपरांत भी उपरोक्त घटना की एफआईआर तक भी दर्ज नहीं की गयी है जिससे हमलावरों के हौंसले लगातार बढ़ रहे हैं। उपरोक्त घटना की सूचना संघ द्वारा ऊर्जा प्रबंधन को समय-समय पर दी गयी है लेकिन ऊर्जा प्रबंधन फील्ड में राजस्व बढ़ाने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का कार्य कर रहे अभियंताओं को सुरक्षा देने हेतु गंभीर नही है और यह उनके प्रबंधकीय दायित्वों का निर्वहन करने में भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। ऊर्जा प्रबंधन मारपीट की घटनाओं के मामले में मूक दर्शक बना बैठा है। ऊर्जा प्रबंधन बिजली अभियंताओं को सुरक्षा मुहैया कराने में पूर्ण रुप से विफल रहा है।
उपरोक्त घटनाक्रम से विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे अभियन्ताओं एवं कर्मचारियों में इस प्रकार की घटनाओं के उपरांत प्रबंधन से उचित सहयोग न मिलने तथा जिला प्रशासन से न्याय न मिलने के कारण घोर निराशा व्याप्त हो गयी है तथा फील्ड पर कार्य कर रहे अभियंताओं का मनोबल गिर रहा है।
संघ के महासचिव ने माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से मांग की है कि ऊर्जा निगमों में लगातार बिजली अभियंताओं पर उनके कार्यालयों में घुसकर हो रही मारपीट की घटनाओं में शामिल हमलावरों पर कठोर कार्यवाही की जाए तथा अभियंताओं को प्रर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के दृष्टिगत शासन स्तर पर लंबित ’’इंजीनियर प्रोटेक्शन एक्ट’’ को लागू किया जाए जिससे प्रदेश के विद्युत अभियंता प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने में अपना पूर्ण योगदान देते रहें।
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निजीकरण का टेण्डर होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन का संघर्ष समिति ने जारी किया एलर्ट : निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई निर्णय लेने के पहले संघर्ष समिति से बात की जाए- विद्युत नियामक आयोग को पत्र भेजकर संघर्ष समिति ने की मांग।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर मांग की है कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को विद्युत नियामक आयोग कोई मंजूरी न दे और इस मामले में संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने हेतु विद्युत नियामक आयोग वार्ता हेतु समय दें। संघर्ष समिति ने निजीकरण की गतिविधियां तेज होते देख बिजली कर्मचारियों को सचेत करते हुए एलर्ट जारी किया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर होने के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन की तैयारी रखी जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण होने के बाद बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा अतः निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई भी अभिमत देने के पहले विद्युत नियामक आयोग को संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने इस बावत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर वार्ता का समय मांगा है। संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण के बाद लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों की छटनी हो जायेगी और लगभग 16 हजार 500 नियमित कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जायेगी। कॉमन केडर के अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों पर नौकरी जाने और पदावनति का खतरा उत्पन्न होगा। ऐसी स्थिति में निजीकरण से सबसे अधिक दुष्प्रभाव बिजली कर्मियों पर पड़ने जा रहा है अतः बिना बिजली कर्मियों का पक्ष सुने नियामक आयोग को कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए अपितु सीधे सीघे पॉवर कार्पोरेशन द्वारा भेजे गये आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को निरस्त कर देना चाहिए।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जोर जबरदस्ती से निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाये जाने के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी। संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी बिजली कर्मियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को एलर्ट जारी करते हुए आह्वान किया है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर किया जाता है तो बिजली कर्मी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन के लिये तैयार रहें।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा अवैध ढंग से नियुक्त किये गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेन्ट ग्रांट थार्टन के साथ मिलीभगत कर आ.एफ.पी. डाक्यूमेंट कुछ निजी घरानों की मदद करने के लिए बनाया गया था। उ.प्र. शासन ने संभवतः इन्ही बातों को देखते हुए श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार देने से मना कर दिया और अब नए निदेशक वित्त श्री संजय मेहरोत्रा बन गये हैं। अतः श्री निधि नारंग द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के दस्तावेज को वैसे ही निरस्त कर देना चाहिए।
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निजीकरण का विफल प्रयोग उप्र की गरीब जनता पर न थोपा जाय: उप्र के सांसदों और विधायकों को पत्र भेजकर संघर्ष समिति ने की मांग
संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के सभी सांसदों और विधायकों को पत्र भेज कर मांग की है कि वे प्रभावी पहल करें जिससे उत्तर प्रदेश की जनता पर निजीकरण का विफल हो चुका प्रयोग थोपा न जाय और ग्रेटर नोएडा व आगरा की बिजली वितरण व्यवस्था को पॉवर कारपोरेशन टेकओवर करे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि बिजली के निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा और अन्य स्थानों पर पूरी तरह विफल हो चुका है। उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा और आगरा में बिजली के निजीकरण से पावर कारपोरेशन को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है और हो रहा है। ऐसे में विकसित भारत और विकसित उप्र के विजन में सबसे बड़ी प्राथमिकता पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करना और ग्रेटर नोएडा और आगरा की विद्युत वितरण व्यवस्था को तत्काल सरकारी क्षेत्र में टेकओवर करना होना चाहिए।
आगरा डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी मेसर्स टोरेंट पावर कंपनी के बारे में सांसदों और विधायकों को भेजे गए पत्र में वर्ष 2010 से 2024 तक का प्रत्येक साल का विवरण दिया गया है। विवरण के अनुसार प्रत्येक वर्ष पॉवर कॉरपोरेशन ने महंगी दरों पर बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को सस्ती दर पर आपूर्ति की है और इससे भारी घाटा होता जा रहा है। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि यह कौन सा निजीकरण है जिसमें निजी क्षेत्र को बिजली आपूर्ति करने में ही पावर कारपोरेशन को 2434 करोड रुपए का नुकसान हो चुका है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दरअसल यह नुकसान लगभग 10000 करोड रुपए का है। आगरा एक औद्योगिक और व्यावसायिक शहर है। आगरा भारत की लेदर कैपिटल है। वर्ष 2023 - 24 में जहां पावर कारपोरेशन ने 05 रुपए 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को 04 रुपए 36 पैसे प्रति मिनट की दर पर बेचा। महंगी बिजली खरीद कर सस्ते में बेचने से पॉवर कॉरपोरेशन को वर्ष 2023 - 24 में 274 करोड रुपए का नुकसान हुआ है। आगरा औद्योगिक शहर होने नाते आगरा में बिजली विक्रय की दर 07 रुपए 98 पैसे प्रति यूनिट है। इस प्रकार सस्ती बिजली खरीद कर टोरेंट पावर ने केवल एक वर्ष में 800 करोड रुपए का मुनाफा कमाया है। यदि आगरा की बिजली व्यवस्था सरकारी क्षेत्र में रहती तो यह मुनाफा पावर कारपोरेशन को मिलता । इस प्रकार एक वर्ष में ही लगभग 1000 करोड रुपए का घाटा पावर कारपोरेशन को उठाना पड़ा है।
संघर्ष समिति ने पत्र मे लिखा है कि इसके अतिरिक्त 01 अप्रैल 2010 को पावर कारपोरेशन का आगरा शहर में बिजली राजस्व का 2200 करोड रुपए का बकाया था जिसे एग्रीमेंट के अनुसार टोरेंट पावर को एकत्र करके पावर कारपोरेशन को वापस करना था। इसके एवज में पावर कॉरपोरेशन 10% धनराशि टोरेंट पावर को इंसेंटिव के रूप में देती। आज 15 वर्ष व्यतीत हो गए हैं और टोरेंट पावर ने 2200 करोड रुपए की बकाया की धनराशि में एक पैसा भी पावर कारपोरेशन को वापस नहीं किया।
संघर्ष समिति ने कहा कि इस प्रकार आगरा के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी में हजारों करोड रुपए का नुकसान पावर कारपोरेशन को उठाना पड़ रहा है और पावर कारपोरेशन ने इस एग्रीमेंट को निरस्त करने के लिए एक बार भी टोरेंट पावर को नोटिस नहीं दिया।
ग्रेटर नोएडा के बारे मे संघर्ष समिति ने पत्र में लिखा है कि ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी मेसर्स नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को शेड्यूल के अनुसार विद्युत आपूर्ति नहीं करती क्योंकि यह घाटे वाले क्षेत्र हैं। इसी कारण और कई अन्य शिकायतों के चलते उत्तर प्रदेश सरकार नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का वितरण लाइसेंस निरस्त कराने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ रही है।
संघर्ष समिति ने पत्र में उदाहरण देकर बताया है कि उड़ीसा में निजीकरण का प्रयोग तीसरी बार विफल हो गया है। उड़ीसा का विद्युत नियामक आयोग टाटा पावर की चारों कंपनियों के बहुत खराब परफॉर्मेंस के चलते 15 अगस्त के बाद टाटा पावर के विरुद्ध जन सुनवाई करने जा रही है। इसके अतिरिक्त अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का प्रयोग उज्जैन,सागर,ग्वालियर,रांची,जमशेदपुर, औरंगाबाद,नागपुर,जलगांव,मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया में विफलता के चलते निरस्त किया जा चुका है।
संघर्ष समिति ने माननीय सांसदो और विधायको से मांग की है कि वे अपने पद का सदुपयोग करते हुए प्रभावी पहल करें और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त कराने की कृपा करें।
थाना तमकुहीराज जनपद कुशीनगर के अंतर्गत दिनांक 24 जुलाई को अपने सरकारी कार्यालय में कार्य कर रहे उपखंड अधिकारी (विद्युत) श्री शुभम अग्रहरी पर नामजद हमलावरों द्वारा सरकारी कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की तथा उपखंड अधिकारी के साथ गाली गलौज करते हुये मारपीट की, जिसका वीडियो प्रदेश भर मे वायरल हो रहा है। उपखंड अधिकारी के द्वारा उपरोक्त घटना की तहरीर तत्काल थाना तमकुहीराज जनपद कुशीनगर में दे दी गई थी, लेकिन 5 दिन व्यतीत हो गए अभी तक FIR तक दर्ज नहीं की गई है, जिससे प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे प्रदेश के बिजली अभियंताओं एवं कर्मचारियों में रोज व्याप्त हो रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कृपया हमलावरों के विरुद्ध FIR दर्ज कराए जाने की कृपा करें।
@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@UPGovt@dgpup@adgzonegkr@kushinagarpol@DmKushinagar@Uppolice@UPPCLLKO
थाना तमकुहीराज जनपद कुशीनगर के अंतर्गत दिनांक 24 जुलाई को अपने सरकारी कार्यालय में कार्य कर रहे उपखंड अधिकारी (विद्युत) श्री शुभम अग्रहरी पर नामजद हमलावरों द्वारा सरकारी कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की तथा उपखंड अधिकारी के साथ गाली गलौज करते हुये मारपीट की, जिसका वीडियो प्रदेश भर मे वायरल हो रहा है। उपखंड अधिकारी के द्वारा उपरोक्त घटना की तहरीर तत्काल थाना तमकुहीराज में दे दी गई थी, लेकिन दो दिन व्यतीत हो गए अभी तक FIR तक दर्ज नहीं की गई है, जिससे प्रदेश के बिजली अभियंताओं एवं कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो रहा है, अगर प्रदेश में कार्यरत सरकारी अधिकारी अपने कार्यालय में ही सुरक्षित नहीं है तो प्रदेश की जनता का क्या हाल होगा। हमलावरों पर तत्काल कठोर कार्रवाई न होना प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। इससे प्रतीत होता है कि @Uppolice हमलावरों के सामने नतमस्तक है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उपखंड अधिकारी पर हमला करने वाले सभी हमलावरों पर FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई कराने की कृपा करें। तथा अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इस पर कुशीनगर पुलिस @kushinagarpol की जिम्मेदारी तय की जाए।
@narendramodi@myogiadityanath@dgpup@adgzonegkr
जो मंत्री अपने कर्मचारियों से नहीं मिल सकता, जो मंत्री जनता से नहीं मिल सकता है, जो मंत्री अपने समझौते का पालन नहीं करा सकता है, जो मंत्री लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न कर पुलिस की दम पर अपने ऊर्जा विभाग का निजीकरण करने पर तुला है उसे लोकतंत्र में मंत्री के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, उन्हें तत्काल व्यापक जनहित में अपना इस्तीफा देना चाहिए।
जब से ऊर्जा मंत्री जी आए हैं तब से प्रदेश की गरीब जनता परेशान है, बिजली कर्मचारी परेशान है, किसान परेशान है, युवा परेशान है, छात्र परेशान है, आरक्षण खतरे में है।
माननीय ऊर्जा मंत्री जी का एकमात्र उद्देश्य है कि कितनी जल्दी सरकारी संपत्तियों और सरकारी जमीनों को कौड़ियों के भाव अपने पूंजीपति मित्रों को सौंप दें, फिर ना रहेगा विभाग, ना रहेगी नौकरी, और ना रहेगा आरक्षण।
लेकिन ऊर्जा मंत्री जी बिजली कर्मचारी प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को नहीं बिकने देंगे, ऊर्जा विभाग नहीं बिकने देंगे, जनता को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे और बाबा साहब द्वारा दिया गया आरक्षण समाप्त नहीं होने देंगे।
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उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण पर छाया बड़ा संकट नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने निजीकरण के पूरे मसौदे की पत्रावली व सभी कागजात किया तलब छानबीन की शुरू पावर कारपोरेशन में मचा हड़कंप भ्रष्टाचारियों का फसना तय उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लाई।
चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में फर्जी आंकड़ों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के गांव-गांव घर-घर तक बिजली पहुंचाने का काम किया है अब बिजली के निजीकरण के बाद यह सारे गांव लालटेन युग में पहुंचने वाले हैं।
कुछ ब्यूरोक्रेट्स, राजनेता, बड़े पूंजीपतियों के साथ मिलकर बिजली के निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने की फिराक में है।
माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले को रोके तथा गरीबों के हित में, किसानो के हित में, छोटे व्यापारियों के हित में, कर्मचारियों के हित में, छात्रों के हित में, बेरोजगार के हित में, सरकारी विभागों में पिछड़ों एवं दलितों का आरक्षण बचाने के लिए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करने की कृपा करें।
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निजीकरण के विरोध में विद्युत नियामक आयोग पर मूक प्रदर्शन : निजीकरण के डॉक्यूमेंट को नामंजूर करने की मांग: सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय पर मूक प्रदर्शन किया और निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिया। प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर भी निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए।
आज सायं 04 बजे सैकड़ो की संख्या में बिजली कर्मचारी विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। बिजली कर्मियों ने विद्युत नियामक आयोग के मुख्य द्वार के सामने निजीकरण के विरोध में तख्तियां लेकर मूक प्रदर्शन किया। नियामक आयोग के सचिव ने मुख्य द्वार पर आकर संघर्ष समिति का ज्ञापन लिया। ज्ञापन के जरिए संघर्ष समिति ने निजीकरण पर नियामक आयोग द्वारा सुनवाई पर अपनी आपत्ति और विरोध दर्ज किया।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के नाम दिए गए ज्ञापन में उनसे मांग की है कि वह पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु दिए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दें और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाए। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से यह भी मांग की है कि निजीकरण के मामले में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को भी नियामक आयोग के सामने अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाय।
ज्ञापन में कहा गया है कि विद्युत नियामक आयोग को अवैध ढंग से नियुक्त किए गए, झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाडा स्वीकार कर लेने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर पॉवर कॉरपोरेशन से कोई बात नहीं करनी चाहिए थी और न ही इस पर कोई अभिमत देना चाहिए।
एक अन्य मुख्य बात यह है कि श्री अरविंद कुमार ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद पर रहते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ 06 अक्टूबर 2020 को एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री माननीय श्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री माननीय श्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में हुआ था।
इस समझौते में लिखा गया है कि "पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जाएगी । कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।"
06 अक्टूबर 2020 के इस समझौते पर श्री अरविंद कुमार के हस्ताक्षर हैं जिसमें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की बात है और साफ लिखा है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। अतः उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष रहते हुए वे कैसे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर अपना अभिमत दे सकते हैं।
इसके अतिरिक्त विद्युत नियामक आयोग में दूसरे सदस्य श्री संजय सिंह उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के कर्मचारी रह चुके है। ऐसी स्थिति में पावर कॉरपोरेशन की सब्सिडियरी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट पर वे भी अपना अभिमत नहीं दे सकते।
विद्युत नियामक आयोग में आज की तारीख में कोई मेंबर लॉ नहीं है। इस तरह विद्युत नियामक आयोग का तकनीकी दृष्टि से कोरम ही पूरा नहीं है।
ज्ञापन में कहा गया है कि इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण के किसी भी डॉक्यूमेंट पर न ही कोई अभिमत देना चाहिए और न ही को कोई मंजूरी नहीं देनी चाहिए।
पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा नियामक आयोग के सामने निजीकरण के दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के समाचार से प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों में गुस्सा फैल गया है। आज समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और विद्युत नियामक आयोग से मांग की कि वह पॉवर कारपोरेशन के निजीकरण के प्रस्ताव को कोई मंजूरी न दे।
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सप्ताहांत में संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री और प्रबंधन से पूछे पांच नये सवाल: 22 जून की बिजली महा पंचायत में बिजली कर्मियों के परिवार भी सम्मिलित होंगे: अवकाश के दिन आवासीय कालोनियों में सभाओं का दौर:
निजीकरण के विरोध में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत संघर्ष समिति ने सप्ताहांत में निजीकरण को लेकर ऊर्जा मंत्री और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पांच नए सवाल पूछे हैं। 22 जून को लखनऊ में हो रही बिजली महापंचायत में बिजली कर्मियों के साथ उनके परिवार माता, पिता, पत्नी और बच्चे भी सम्मिलित होंगे।
घाटे के नाम पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है। पहला प्रश्न है - क्या यह सच है कि वर्ष 2024 - 25 में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने कई निजी घरानों के उत्पादन घरों से एक भी यूनिट बिजली नहीं खरीदी और इन निजी घरानों को फिक्स कॉस्ट के एवज में 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है ? यदि यह सच है तो इतने बड़े घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
सरकारी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन निगम से 04 रुपए 26 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलती है और जल विद्युत की बिजली मात्र 01रुपए प्रति यूनिट की दर पर मिलती है। सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम में नए बिजली घरों की स्थापना नहीं की ।इस कारण बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर निजी घरानों से काफी महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है । दूसरा प्रश्न है- क्या यह सच है कि के एस के महानंदी से 11 रुपए 58 पैसे प्रति यूनिट, बजाज के छोटे बिजली घरों से 10 रुपए प्रति यूनिट, ललितपुर से 06.50 रुपए प्रति यूनिट,रोजा से 06.05 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है ? यदि यह सच है तो इससे होने वाले हजारों करोड़ रुपए के घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं कि सरकार ने पाया है कि निजी कंपनियों के पास समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर तकनीक और प्रबंध कौशल है। दिल्ली में रिलायंस बीएसईएस की दो कंपनियां बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर पिछले 23 वर्ष से काम कर रही है। 23 वर्ष काम करने के बाद रिलायंस की इन दोनों कंपनियों का बेहतर प्रबंधन कौशल यह है कि इन कंपनियों पर दिल्ली जैसे छोटे राज्य में 25000 करोड रुपए से ज्यादा का दिल्ली की पावर यूटिलिटीज का बकाया हो गया है। दिल्ली ट्रांस्को का 10000 करोड रुपए का बकाया है, प्रगति पावर जनरेशन लिमिटेड का 5600 करोड रुपए का बकाया है और इंद्रप्रस्थ पावर जेनरेशन कंपनी का 5000 करोड रुपए का बकाया है। तीसरा प्रश्न है - क्या यह सच है कि दिल्ली की भाजपा सरकार निजी क्षेत्र की विफलता को देखते हुए बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करने जा रही है ? यदि यह सच है तो भारत की राजधानी में निजी क्षेत्र की इतनी बड़ी विफलता को देखते हुए भी उत्तर प्रदेश के बेहद गरीब 42 जनपदों पर निजीकरण क्यों थोपा जा रहा है ?
ग्रेटर नोएडा का निजीकरण 1993 में किया गया था। ग्रेटर नोएडा एक औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र है। ग्रेटर नोएडा में बिजली का लगभग 84% भार औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का है जिनसे मुनाफा मिलता है। ग्रेटर नोएडा में कार्य कर रही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का घाटे वाले क्षेत्र मसलन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के प्रति बिजली आपूर्ति का व्यवहार अच्छा नहीं है। चौथा प्रश्न है - क्या यह सच है कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोएडा में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कराने का मुकदमा लड़ रही है ? यदि यह सच है तो जो निजीकरण औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र में विफल हो गया है उसे पूर्वांचल और बुंदेलखंड की बेहद गरीब जनता पर क्यों थोपा जा रहा है ?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड कई निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीद रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लेने के बाद यह पता चला है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को सबसे सस्ते बिजली क्रय करार आवंटित किए गए हैं । पांचवा प्रश्न है - यदि यह सच है तो निजीकरण के ठीक पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की सबसे सस्ते पावर परचेज एग्रीमेंट आवंटित करना क्या प्रस्तावित निजीकरण के बाद निजी घरानों की परोक्ष रूप से मदद करना नहीं है ?
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घर परिवार की चिंता छोड़
मैदान में उतर गए सारे
जब तक सब कुछ न ठीक हुआ
एक पग पर खड़े रहे न्यारे।
🚨जो फूल खिले उजाले के
शबनम रात भर रोई है
जाने अपनी कितनी खुशियां
बिजलीकर्मी ने खोई है।
✍️इं०देवेंद्रप्रताप वर्मा(EE)
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