बिहार के मोतिहारी इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में शुक्रवार सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब नाश्ता करने पहुंची तीन छात्राएं गर्म तेल की चपेट में आकर झुलस गईं. इस घटना के बाद कॉलेज परिसर में छात्रों ने जमकर हंगामा किया. कॉलेज प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए किचन के रसोइया को पुलिस के हवाले कर दिया. छात्राओं ने बताया कि, हॉस्टल में नाश्ता तैयार करने के दौरान रसोइया और कुछ लोगों के बीच कहासुनी हो गई. इसी दौरान गुस्से में आकर रसोइया ने गर्म तेल से भरी कड़ाही छात्राओं की ओर फेंके दिया. गर्म तेल के छींटे पड़ने से तीन छात्राएं आंशिक रूप से झुलस गईं.
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बिहार : अरवल ज़िले के 75 सरकारी स्कूलों में परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया
◆ कीड़े निकलने के बाद बच्चों ने खाना फेंक दिया
◆ घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया और जिला शिक्षा पदाधिकारी असगर हुसैन ने मामले की जांच के आदेश दिए
◆ शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है
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🤔 जब BBC जैसे बड़े मीडिया हाउस प्राइमरी स्कूलों के मिड डे मील योजना पर सतही रिपोर्ट देने लगे तो आप किससे उम्मीद करें ? इन्होंने अपने रिपोर्ट में एक बार भी नहीं बताया कि 2026 में एक बच्चे के पौष्टिक मिड डे मील के लिये 6 रुपया 78 पैसा मिल रहा है, जबकि एक कप पानी वाली चाय भी 10 रुपये में मुश्किल से मिलता है। इसी 6 रुपये 78 पैसे में नमक, तेल, मसाला, सब्जी, दूध और गैस खरीदना है।
@BBCBreaking@aajtak@moinallahabad@ndtv
हरियाणा के फरीदाबाद में एक युवती के प्राइवेट पार्ट्स पर खौलता पानी डालकर उसके सौतेले माता-पिता ने जला दिया। जलने के बाद इलाज कराने के लिए बाहर नहीं जाने दिया।
दरअसल यह सौतेले माता-पिता इस युवती को 3 लाख रुपए में बेचकर एक बुजुर्ग से इसकी शादी करा रहे थे जिसका यह युवती विरोध कर रही थी। युवती गंभीर घायल है और दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती है।
DM से न्याय मांगने आया था फरियादी...साहब ने चतुर बताकर चलता कर दिया..!
आम आदमी क्या ही न्याय की उम्मीद करेगा -
पीड़ित दर्द बताते हुए फफक पड़ा !
सुनिए 👇👇
मामला यूपी के लखीमपुर खीरी का है...पीड़ित जमीनी विवाद के मामले में नायक किए कई दिनों से DM कार्यालय के चक्कर लगा रहा है..!.
आरोप सगे भाई पर है..भाई पीड़ित की जमीन प्लॉट पर कब्जा करना चाहता है..आए दिन परेशान करता रहता है... फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देता है..!
अपने ही खून से प्रताड़ित पीड़ित न्याय की आस में अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं...!
रात के 9 बजे रहे है, दिल्ली पुलिस कांग्रेस की महिला साथियों को अपनी हिरासत में लेकर बस में एक जगह से दूसरी जगह ले जा रही है।
किस कानून के तहत..? @DelhiPolice
ई रिक्शा चलने वाला अंकित, बीच चौराहे पर सड़क पर लेट कर जोर जोर से रोने लगा.
चारों तरफ ट्रैफिक जाम हो गया.
तब स्थानीय पुलिस वहां पहुंची. दरोगा ने उससे ऐसा करने की वजह पूछी तो पता चला कि वह अपनी पत्नी का इलाज कराने अस्पताल जा रहा था, बीच रस्ते में ही उसका 14 हजार रुपए का चलान काट दिया गया...
रोजाना दो चार सौ रुपए कमाने वाले अंकित पर जैसे पहाड़ टूट गया.
दारोगा के हस्तक्षेप के बाद अंकित की परेशानी दूर हुई...
यह वाकया औरैया जिले के दिबियापुर थाना क्षेत्र का है.
बिहार के अरवल सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में कीड़े मिलने से सभी बच्चों ने खाना फेंक दिया
बच्चों की थाली में पौष्टिक भोजन की जगह मिल रहे कीड़े, शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल!
राजस्थान : जयपुर में आज जहां CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका पर हमला हुआ, वहां सरकारी स्कूल एक टीनशेड के नीचे चल रहा है। इसी टीनशेड में पशुओं का तबेला है। स्कूल की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है, इसलिए तबेले में बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही थी।
क्षेत्रवाद का ये नया दौर है !
मुंबई में RTO का फ्लाइंग स्क्वॉड टैक्सी ड्राइवरों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर रहा है कि उन्हें मराठी क्यों नहीं आती? जल्द सीखें नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।
क्या मुंबई में हिंदी भाषी लोग नहीं रहते ?
निवाड़ी मध्यप्रदेश की नर्सिंग छात्रा ने प्रधानमंत्री से की अपील।, नर्सिंग करते- करते शादी हो गई बच्चे भी हो गया ''अब क्या बुड्ढे हो जाएंगे, कब आएगा रिजल्ट ?
अगर में डिप्रेशन में गई तो इसके जिम्मेदार, प्रधानमंत्री जी होंगे ,वोट भी नही दूंगी ,सुनिए क्या बोली आरती कुशवाहा
राज्य के सरकारी विद्यालयों में अनाधिकृत प्रवेश पर पाबंदी संबंधी विभागीय आदेश की प्रति कार्यालय कक्ष में टेबल पर रखिए। विद्यालय के whatsapp group में भी अग्रसारित करिए ताकि सभी शिक्षकों को इसकी सम्यक जानकारी रहे और गैर-कानूनी/ अनाधिकृत प्रवेश के खिलाफ वे भी निडर प्रतिरोध कर सकें।
तेजस्वी यादव पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचे छात्रों को समर्थन दिए जरूरत पड़ी तो छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा
छात्रों के आंदोलन के समर्थन में नेताओं ने सरकार से उनकी मांगों को जल्द पूरा करने और परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग की। उन्होंने परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तेजस्वी ने छात्र क्रेडिट कार्ड समेत महंगाई, बेरोजगारी और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे भी उठाए।
शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और सरकार को जनता व छात्रों की मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
मध्य प्रदेश : स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के पीएफ में फर्जीवाड़ा- ₹54 करोड़ पीएफ खाते में जमा ही नहीं हुआ
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वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय का तमाशा देखने वाले नवाज़ देवबंदी के इस शेर को ज़रूर याद रखें,,,,
“जलते घर को देखने वालों, फूस का छप्पर आपका है,
आग के पीछे तेज़ हवा है, आगे मुकद्दर आपका है,
उस के क़त्ल पे मैं भी चुप था, मेरा नम्बर अब आया,
मेरे क़त्ल पे आप भी चुप हैं, अगला नम्बर आपका है”
I with @upadhyayabhii@BJP4India@INCIndia
एक बात नोटिस किये है ?
सीआईडी अभी तक ना तो एसडीएम रवि को बुलाई है और ना ही डीएसपी मनीष, राजेश व रोबिन को । इन लोगों का नाम तो खुद अभय तिवारी ने कबूल किया है।
#jpsc#jssc
सरकारी शिक्षक की ऐसी हालत क्यों? स्कूल में बच्चों को पीटी, बाहर झालमुड़ी बेचकर चला रहे परिवार.!
यह तस्वीर सरकारी व्यवस्था की उस हकीकत को सामने लाती है, जिसे देखकर शायद आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। एक तरफ सरकारी स्कूल में बच्चों को पीटी कराने वाले शिक्षक और दूसरी तरफ उसी स्कूल के बाहर झालमुड़ी की दुकान। जी हां, भागलपुर के सन्हौला प्रखंड में एक सरकारी शारीरिक शिक्षक बच्चों को पढ़ाने और पीटी कराने के बाद स्कूल के बाहर झालमुड़ी और स्टेशनरी की दुकान लगाते हैं। वजह है महज 16 हजार रुपये की तनख्वाह में परिवार का खर्च नहीं चल पाना।
भागलपुर के सन्हौला प्रखंड के अमडंडा मध्य विद्यालय में बतौर शारीरिक शिक्षक एवं स्वास्थ्य अनुदेशक कार्यरत हैं निशांत कुमार। वर्ष 2022 में जब उनकी नौकरी लगी थी, तब उन्हें महज 8 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। करीब तीन साल तक संघर्ष और प्रदर्शन के बाद उनका वेतन बढ़कर 16 हजार रुपये हुआ, लेकिन महंगाई के दौर में यह रकम भी परिवार चलाने के लिए नाकाफी साबित हो रही है।
निशांत स्कूल में करीब दो घंटे की ड्यूटी करने के बाद विद्यालय के बाहर झालमुड़ी और स्टेशनरी की दुकान लगाते हैं। दुकान पर बच्चों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुटती है और उन्हें प्रतिदिन करीब 300 से 400 रुपये की अतिरिक्त कमाई हो जाती है। निशांत का कहना है कि शुरुआत में दुकान लगाने में शर्मिंदगी महसूस हुई, लेकिन परिवार की जरूरतों ने उन्हें यह काम करने को मजबूर कर दिया।
सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि जिन बच्चों को निशांत स्कूल में पीटी कराते हैं, उन्हीं बच्चों को वह स्कूल के बाहर झालमुड़ी बेचते हैं। बच्चे भी कहते हैं कि सर अच्छी पीटी करवाते हैं, लेकिन कम वेतन के कारण उन्हें दुकान लगानी पड़ रही है।
निशांत कहते हैं कि सरकार अगर उन्हें पूर्णकालिक करे और वेतन में उचित बढ़ोतरी करे, तो उन्हें अतिरिक्त काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका कहना है कि कई शारीरिक शिक्षक कोई डिलीवरी बॉय बनकर, तो कोई अन्य छोटा-मोटा काम कर परिवार चलाने को मजबूर है।
अब सवाल यह है कि बच्चों को स्वस्थ और अनुशासित रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले इन शिक्षकों की जिंदगी कब सुधरेगी? क्या 16 हजार रुपये में परिवार चलाने की चुनौती सरकार तक पहुंचेगी?