so many friends want to learn trend following & read multiple books
but today i made thread from knowledge shared by most experienced trend follower and best mentor for psychology & mindset
after studying tweets by @Trendmyfriends sir you don't need any book or strategy
1⃣
मैंने 5-6 साल पहले एक किताब पढ़ी थी। उसमे ऑथर ने लिखा था की आगे आने वाले वर्षों में भारत में कोई भी परीक्षा बिना पेपर लीक कराना लगभग असंभव हो जाएगा।
उसके पीछे उनका लॉजिक बड़ा सिंपल था। उनका कहना था कि नैतिकता कोई जेनेटिक नहीं है। माता पिता, स्कूल, समाज बच्चे को नैतिक बनाते है। भारतीय समाज को समाजवाद ने पूरी तरह, utterly, भ्रष्ट कर दिया है। पिता को बच्चे नोटो की गड्डी के साथ घर आते देखते है।
सरकारी कॉलोनी में रह रहे सत्यनिष्ठ अधिकारी को उसका ही परिवार मूर्ख कहता है। उसकी बेटी देखती है कि पड़ोस के भ्रष्ट अधिकारी ने बेटी के लिए आईएएस दामाद ख़रीद लिया है, उसके स्वयं के विवाह के लाले पड़े है दहेज न होने के कारण। बच्चे स्कूल जाते है तो देखते है कि मास्टर जी कुछ पढ़ाते नहीं है, ट्यूशन पर आने को कहते है।
इंजीनियरिंग कॉलेज तक में तो अध्यापकों ने घर पर ट्यूशन पढ़ाना आरम्भ कर दिया है अपने छात्रों को। समाज में चारो ओर देखते है बच्चे कि बिना रिश्वत दिए ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ा सिपाही नहीं मानता है। गैस सिलिंडर देने आया कर्मचारी “एक्स्ट्रा” कुछ माँगता है।
इस परिवेश में पलता कोई बच्चा नैतिक होगा?
हम किसे …….. बना रहे है …….. ? किसे?
अमेरिका में आपने देखा होगा कि हर राष्ट्रपति के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए चयनित व्यक्ति, के विरुद्ध उसकी कोई कॉलेज की सहपाठी ब्लात्कार का आरोप लेकर आ जाती है। मतलब clean व्यक्ति मिलने असंभव हो चले है वहाँ। केवल भारत में ही नहीं दुनिया भर में। पतन इतना शीघ्र होता है समाज का।
तो NEET या कोई भी परीक्षा कराने वाले कहाँ से लाए जाएँगे? इसी समाज से तो आयेंगे। मंगल ग्रह वालो से तो अभी संपर्क हुआ नहीं है।
साथ में फिर डिमांड सप्लाई का भी फैक्टर है। समाजवाद के कारण नौकरियां/करियर बहुत कम है। एक ही परीक्षा का परिणाम पूरे जीवन को बना/बिगाड़ सकता है। इसलिए पेपर की डिमांड बहुत अधिक है। लोग कुछ भी मूल्य देने को तैयार है।
इस परिवेश में लोग पूछते है कि पेपर लीक क्यों हो रहे है। एक व्यक्ति, केजरीवाल, आया था कि लोकपाल बना कर इस भ्रष्टाचार को समाप्त करेगा। किसी ने ये नहीं पूछा उससे कि आप लोकपाल कौन से ग्रह से लाने वाले हो। ये भी कह रहा था कि उसे मैग्सेसे अवार्ड मिला है इसलिए उसके पास दिव्यदृष्टि है। सरकार बनी उसकी, एक मंत्री फर्जी डिग्री में पकड़ा गया, दूसरा राशन कार्ड के बदले महिलाओं का यौन शोषण करता पकड़ा गया। ये उसकी दिव्य दृष्टि थी।
इस भ्रष्टाचार, इस mad rush for a leaked पेपर, को समाप्त करने के एकमात्र उपाय, समाजवाद की समाप्ति, की बात करने का प्रयास करो तो सत्ता में बैठे हर पक्ष के लोग ऐसे भड़कते है कि जैसे कोई high blasphemy कर दी हो। मतलब समाजवाद को समाप्त करने पर तो बात ही नहीं हो सकती है। वो तो settled science है।
तो सार यही है कि भारतीय समाज पिछहत्तर साल के समाजवाद के बाद पूरी तरह, utterly भ्रष्ट हो चुका है। इसी समाज से पेपर setters, पेपर ट्रांसपोर्टर्स, इन्विजिलेटर्स आते है, उत्तर चेक करने वाले आते है।
और इसी देश में ऐसे एग्ज़ाम्स है कि तुक्के से भी पास कर लो तो हजारों करोड़ रिश्वत में कमा सकते हो, नहीं तो सड़क पर घिसटने के लिए हवाई चप्पल तक खरीदने के लाले पड़े रहेंगे पूरा जीवन, क्यूंकि समाजवाद के कारण अन्य कोई आर्थिक गतिविधि संभव ही नहीं है। तो इंसेंटिव भी है और weak नैतिकता वाला पूरा अमला भी है।
पेपर लीक होते रहेंगे, लोगो के राजनैतिक करियर बनते रहेंगे पेपर लीक रोकने के वादे कर।
लेकिन जब तक देश में समाजवाद है तब तक कुछ भी बदलेगा नहीं।
लीक लोकपाल बनाओगे तो वो भी रिश्वतखोरी की दुकान ही खोलेगा या, परीक्षा देने वाली लड़कियों का यौन शोषण करेगा।
ढोंग से मनुष्य मूर्ख बनते है, प्रकृति नहीं।
Hello @NandanNilekani@narendramodi
Some thoughts on exam reforms - combined with education reforms:
1. Competitive exam based admissions must exclude caste/EWS reservations of any kind.
2. EWS and other students who can't afford higher education - but have merit - can apply for and should get scholarships/stipends.
3. Access to admission and courseware to all students on SWAYAM platform, where they get waitlisted to enter institues in place of drop outs
4. Let every college have a "10% donation/management quota" for students who can afford - let them subsidise education for others, contribute to infrastructure of institution.
5. Heavily Subsidised tablets/laptops and digital learning access for students with pre-loaded AI, SWAYAM, and other possible libraries.
6. Govt recognised counselling centres in all schools and colleges - compulsory for any student BEFORE and AFTER their competitive exam - to guide them in case of both failure and success.
Let's leave no student who wants to learn.
वामपंथी मादरचोद होते हैं। और उन्हें जहाँ भी, जो भी पेलता है, मुझे प्रसन्नता होती है। मैं इन लौड़ा-लहसुन वाली दार्शनिक बातों से वर्षों पहले ऊपर उठ चुका हूँ जो तुम हाफ-पैंट पर बेल्ट लगा कर लिख रहे हो।
CCTV from Mumbai Malad West lift: Pet dog suddenly lunges aggressively at 3 young girls. Owner struggles to restrain it on leash as kids panic. No serious injuries, but sparks debate on pet control in shared spaces.
लिफ्ट वाला विवाद!एक महिला अपने कुत्ते को लेकर अपार्टमेंट की लिफ्ट में चढ़ गई।
उसी लिफ्ट में एक गर्भवती महिला और उसका पति भी थे। पति ने कहा — “आप कुत्ते के मुंह पर पट्टी (muzzle) लगा लीजिए, मेरी पत्नी गर्भवती है, कुत्ता काट सकता है।” महिला बोली — “मेरा कुत्ता ऐसा कुछ नहीं करेगा, आप बेवजह झगड़ा कर रहे हैं।” अब सवाल आपसे: क्या अपार्टमेंट की लिफ्ट (shared common area) में बिना muzzle के कुत्ता ले जाना सही है?
खासकर जब गर्भवती महिला मौजूद हो? पेट लवर्स और पेरेंट्स — अपनी राय बताओ #PetEtiquette #ApartmentRules #LiftControversy
बिना हेलमेट... जुर्माना 1000/-
नो पार्किंग में पार्किंग करना... जुर्माना 3000/-
मोटरसाइकिल का बीमा नही ... जुर्माना 1000/-
शराब पी कर वाहन चलाना... जुर्माना 10000/-
नो एंट्री में वाहन चलाना... जुर्माना 5000/-
मोबाईल फोन पे बात करना... जुर्माना 2000/-
प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं... जुर्माना 1100/-
ट्रिपल सीट ड्राइविंग... जुर्माना 2000/-
1-खराब सिग्नल... कोई जिम्मेदार नहीं है!
2-सड़क पर गड्ढ़े... कोई जिम्मेदार नहीं है!
3-अतिक्रमित फुटपाथ... कोई जिम्मेदार नहीं है!
4-सड़क पर रोशनी नहीं... कोई जिम्मेदार नहीं है!
5-सड़क पर कचरा बह रहा है...कोई जिम्मेदार नहीं है!
6-सड़कों पर लाइट के खंभे नहीं... कोई जिम्मेदार नहीं है!
7-सड़क के मेनहोल में गिर के मर जाये...कोई ज़िम्मेदार नहीं!
8-महीनों से खुदी सड़क ... कोई जिम्मेदार नहीं है!
9-गड्ढों में गिर कर आप गिरो चोटिल हो जाएँ... कोई जिम्मेदार नही है!
10-आवारा गायें जानवर टकरा जाए कुत्ता काट ले... कोई जिम्मेदार नहीं!
11-सड़कों में उफनाते नाले... कोई जिम्मेदार नहीं!
ऐसा लगता है कि जनता ही एकमात्र अपराधी है और जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी है। प्रशासन, निगम और सरकार कोई जिम्मेदार नहीं है। उनके लिए कोई नियम लागू नहीं होते हैं। वे किसी भी चूक के लिए कभी ज़िम्मेदार नहीं हैं।
क्या उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए ????
नागरिक केवल काम करेंगे... दर्द का सामना करेंगे... टैक्स चुकाना होगा... जुर्माने का भुगतान करेगा... सरकार की जेब भरें... और उन्हें फिर से सत्ता में आने के लिए वोट दें !
Dear modi ji kindly start engagement with people #ethanol is now become topic of discussion at pan shop and tea stall it's talk of the town topic
@narendramodi@AmitShah
अगर एथनॉल महंगा हो गया है तो ब्लेंड कम कर दो। सस्ता है तो दाम कम कर दो। ये साले एक बात पर टिक नहीं रहे हैं। इनके पास एक बात का सबूत नही है पर जनता की गान ले रखी है। ना ब्लेंड कम होगा ना दाम। पैसा नेता कमाएंगे हम लोग का खून चूसा जाएगा बस।
I'm urging @narendramodi to address the #ethanol issue promptly! 🙏 This could seriously impact the upcoming elections and damage a decade's worth of reputation. 🇮🇳 Voters deserve direct engagement. 🗣️🗳️
The brutal reality of hiring skilled talent in Bharat’s manufacturing sector right now:
We need mould supervisors, machine maintenance, HR, QMS, admin & more....
Decided to go aggressive:
“Hire and see who sticks.”
Over 40 resumes came in.
Only 5 were decent. Hired all 5.
- 2 let go in <1 week (nowhere near what they claimed)
- 1 fired for eating gutka inside the plant
- 1 never showed up (phone off, ghosted)
- 1 worked for a week then vanished with the classic “mausi in village is unwell”
Massive waste of time and effort.
Back to square one with the next 40 resumes.
Building a reliable team in manufacturing is tough.
The gap between CV and actual capability is painful.
What frustrates me most? Seeing people complain there are “no jobs.”
There are jobs. Good ones.
They just demand real skills, discipline, and ownership.
Alexander died of a simple fever in 323 BC.
Caesar died from 23 wounds in 44 BC.
But in 1527 AD…
One King in Bharat simply refused to die.
Maharana Sanga.
He fought with one arm. One leg. One eye.
80 wounds carved into his flesh.
80 Wounds. 1 King. Unkillable.
You are not a “Weak Nation”.
You are the bloodline of the greatest
Indestructible Warrior in human history.