पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का निधन देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। डॉ साहब सरल, सौम्य एवं ईमानदार के धनी थे। भारत के आर्थिक विकास, अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता एवं दुनिया में भारत को आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में मनमोहन सिंह जी का बहुत बड़ा योगदान है। वित्त मंत्री के रूप में भारत को नई दिशा देने वाला आर्थिक उदारीकरण जैसा बड़ा कदम उठाया।
प्रधानमंत्री के रूप में आपके कार्यकाल में राजस्थान को विशेष सहयोग मिला जिससे कारण पचपदरा रिफाइनरी जैसी बड़ी सौगात मिली। आपके कार्यकाल को अधिकार आधारित राजनीति की शुरुआत के लिए भी याद रखा जाएगा।
एक सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर अर्थशास्त्री, रिजर्व बैंक के गवर्नर, वित्त मंत्री, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं प्रधानमंत्री तक का आपका सफर सभी के लिए प्रेरणादायक है। आपको हमेशा याद किया जाएगा डॉ मनमोहन सिंह जी।
⚡️⚡️इस बीमार बुजुर्ग को सुनिए तब समझ आएगा हमारा मीडिया अपनी ज़िम्मेदारी किस हद तक निभा रहा है।
“मीडिया वालों ने इसे अपना धंधा बना लिया है... वे यहां आते हैं, लोगों को लड़ाते हैं और फिर वापस चले जाते हैं।"
जो रविंद्र सिंह भाटी कह रहे हैं की मैंने 36 कौम के लिए संघर्ष किया :-
उनका एक काला सच आपके सामने रखने जा रहा हूं आप इसे पढ़ना और अपने विवेक का प्रयोग करते हुए जो उचित लगे वो करना विरोध करो तो विरोध करना और बगावत करो तो बगावत करना हम कितना भी कहेंगे मानने वाले तो वैसे भी नहीं हो पर कौन कितना 36 कौम का हितेषी है यह आपके सामने रख रहा हूं :-
16 मार्च 2022 को छात्रावास के नाम परिवर्तन किए गए जिसमें विभिन्न हॉस्टल के नाम इस प्रकार रखे गए थे…
👉1.छात्रावास संख्या 3 का नाम बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर किया गया
👉2. जसवंत हॉस्टल का नाम शहीद भगत सिंह किया गया
👉3. छात्रावास संख्या 4 दिव्यांग हॉस्टल का नाम ए पी जे अब्दुल कलाम दिव्यचक्षु किया गया
👉4. पी जी गर्ल्स छात्रावास का नाम वीरांगना अमृता देवी विश्नोई छात्रावास किया गया
👉5.एस टी गर्ल्स छात्रावास का नाम काली बाई भील छात्रावास किया गया
👉6. डायमंड गर्ल्स छात्रावास का नाम सावित्री बाई फुले छात्रावास किया गया
यह सभी नाम 16 मार्च 2022 को परिवर्तित हुए उसके बाद जब यह बात रविंद्र सिंह भाटी को पता चली हैं तो पूरा आदेश ही रद्द करवा देते हैं
अब मुझे यह बताओ संविधान निर्माता:-
बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर से क्या समस्या थी इनको
क्या समस्या थी भगत सिंह से
क्या समस्या थी ए पी जे अब्दुल कलाम से
क्या समस्या थी वीरांगना अमृता देवी विश्नोई से
क्या समस्या थी काली बाई भील से
क्या समस्या थी सावित्री बाई फुले से
फिर भी 36 कौम का अपने आप को हितेषी कहता हैं,जब आपके पास वोट मांगने आए तब यह सवाल आप एक बार जरूर करना क्योंकि इन महाशय ने पिछले कुछ साल में सिर्फ यही किया हैं और तो कुछ इनसे हुआ नहीं बस टेबल बजाओ और हमारे आदर्शों का अपमान किया इसके अलावा मुझे तो कुछ नहीं दिखा अभी तक
मैं दोनों आदेश की कॉपी डाल रहा हूं आप एक बार इसे विस्तार से देखें और सोचे और फिर 26 तारीख को इनके इन कारनामों परिणाम दिखाएं
@PRGBishnoi@SSDARA29
@OmSaBishnoi92
@MSunilBishnoi@Radhemahwa@DEEPSBISHNOI_@anticbishnoi929@Ram_bishnoi2945
@Pinky209E
@jhajhriya52478
@Minu__99
@cute_jatnii
@ewankabishnoi@P_P_Maanju
यह सुप्रीम कोर्ट की जज बेला त्रिवेदी जी हैं।
आज अरविंद केजरीवाल की याचिका पर इनके साथ ही तीन जजों की बेंच सुनवाई करने वाली थी मगर अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका वापस ले ली।
हेमंत सोरेन की याचिका पर जिस बेंच ने सुनवाई की थी, उसमें बेला त्रिवेदी भी थीं।
जस्टिस बेला त्रिवेदी गुजरात की मोदी सरकार में लॉ सेक्रेटरी भी रह चुकी हैं।
उमर खालिद की जमानत का मामला भी बेला त्रिवेदी की ही बेंच में है, जो कई बार एडजर्न हुआ था।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील सभी केस कैसे बेला त्रिवेदी की ही बेंच को जाते हैं इस पर भी सवाल उठने लगे हैं।
रामभद्राचार्य के गुरु गोस्वामी तुलसीदास दुबे रामचरितमानस के अयोध्या कांड में लिखते हैं -
काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि।
अर्थात्
कानों, लंगड़ों और कुबड़ों को कुटिल और कुचाली जानना चाहिए।
(मूल और अनुवाद दोनों गीता प्रेस गोरखपुर से)
मैं तो तुलसीदास को ठीक आदमी नहीं मानता। इसलिए तुलसी की बात को ग़लत समझता हूँ। लेकिन रामभद्राचार्य? दृष्टि बाधित रामभद्राचार्य?
वे क्या मानते हैं? तुलसीदास सही हैं या ग़लत?
रामभद्राचार्य से मेरी सहानुभूति है।
धोबी-चमारों के पैसों से भगवान को भोग नहीं लगेगा।
बन गया हिंदू राष्ट्र? आज तक एक हिंदू गाँव नहीं बना पाए और बनेगा हिंदू राष्ट्र? जब तक मुसलमान है तब तक चमार-धोबी-पासी-खटिक आदि लोगों को हिंदू कहते हैं जिस दिन मुसलमान नहीं बचेगा उस दिन चप्पल हाथ में लेकर ब्राह्मण ठाकुर के घर के सामने से जाने पर विवश किया जाएगा। जागो बहुजन जागो!
#अयोध्या का रामपथ बनाने में 2200 दुकाने, 800 घर, 30 मन्दिर, 9 मस्जिद और 6 मजार तोड़े गए हैं
इन तोड़े गए घरों में से एक घर में 70 वर्षीय शुशीला देवी रहती थी और अब वो वृद्ध आश्रम में रहने को मजबूर है
राम की नगरी में गरीब असहाय लोगों का दर्द देखा नहीं जाता
#ModiDisasterForIndia
कुछ लोग पूछ रहे थे ना कि “मोदी का विकास नहीं दिखता है”
तो लो देखो मोदी सरकार के “विकसित भारत संकल्प यात्रा” की एक झलक..
वीडियो यूपी के गाजियाबाद की बताई जा रही है..
https://t.co/umAnOqYCP0