अपने साथी पदाधिकारियों श्री संजय सिंह महामंत्री,श्री शिव शंकर पांडेय कोषायक्ष,श्री देवेन्द्र श्रीवास्तव संयुक्त महामंत्री के साथ माननीय उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी से भेंट की ।@brajeshpathakup@UPPSS1921@TFI4India
#GangaExpresswayTollTaxScam
गंगा एक्सप्रेसवे पर लहरावन/बहजोई से लखनऊ के लिए यात्रा करने पर किलोमीटर 123 से किलोमीटर 378 तक कुल 255 किलोमीटर की दूरी तय करने पर ₹835 का टोल टैक्स दो हिस्सों में काटा जाता है। जिसमें लहरावन से करनपुर तक ₹55 और करनपुर से आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे तक ₹780 काटा जाता है। इसी प्रकार वापसी में भी आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे से गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करने पर किमी 378 से लेकर चंदोई/करणपुर तक ₹780 काटा जाता है। लेकिन लहरावन पर जो टोल टैक्स वाला ठेकेदार है, वह लगातार धांधली कर रहा है। और वह ₹55 के स्थान पर ₹400 काटता है। जब आप उसके पास शिकायत के लिए जाइए तो वह अपने 10-20 फालतू मुस्टंडों के साथ प्रकट होता है और आपसे दो टूक जवाब देता है कि यदि ज्यादा कट गया है तो आप उसकी शिकायत कर दीजिए। आपको वापस मिल जाएगा। अब सवाल यह है कि कितने परसेंट लोग हैं जो इस ऑनलाइन वापसी की प्रक्रिया को पूरा करते हैं ।जब सम्पूर्ण सिस्टम ऑनलाइन है और किमी 378 से किमी 146 तक सिस्टम ऑटो रीड करके ₹780 काटता है तो स्पष्ट है कि वाहन लखनऊ दिशा से आ रहा है इसलिए किमी 146 से 123 तक ₹55 काटने के स्थान पर जानबूझ कर विपरीत दिशा में स्थित मेरठ से लहरावन तक का ₹ 400 काटने वाले ठेकेदार का उत्तर दायित्व निर्धारण होगा या नहीं ।
एक तो गंगा एक्सप्रेसवे पर पहले से ही उत्तर प्रदेश के अन्य एक्सप्रेसवे की तुलना में ज्यादा टोल टैक्स की दर निर्धारित की जा चुकी है। आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 50 किलोमीटर चलने पर अर्थात् किलोमीटर 352 सेकिमी 302 तक चलने पर ₹95 काटा जाता है। जिसकी दर ₹1.90/km है। वहीं गंगा एक्सप्रेसवे पर लहरावन से लखनऊ तक 255 किलोमीटर चलने पर कुल भुगतान ₹835 लिया जाता है। जो कि ₹3.27 प्रति किलोमीटर बैठता है। इसी प्रकार यदि लहरावन से हापुड़ या दिल्ली जाते हैं तो 88 किमी की यात्रा हेतु ₹310 का भुगतान ₹3.52/ किमी की दर से किया जाता है लेकिन शिकायत अधिक दर निर्धारण की नहीं है क्योंकि एक्सप्रेस वे पर चलना अनिवार्य न होकर वैकल्पिक है क्योंकि यदि आपको मंहगा लगता तो आप एक्सप्रेस वे पर न चलकर उन सड़कों पर चलिये जिन पर चलने के लिए आपने वाहन पंजीकरण के समय 7 से 10 प्रतिशत की दर से रोड टैक्स दिया था
मेरे शिकायत यह कि गंगा एक्सप्रेस वे पर निर्धारित टोल टैक्स से अधिक वसूली वार वार क्यों की जा रही है और ऐसे ठेकेदार के विरूद्ध क्या दण्ड निर्धारित है
आप फास्टैग न होने पर दो गुने टोल टैक्स वसूली कर रहे हैं तो क्या इस प्रकार की व्यवस्था इन बेईमान ठेकेदार के विरुद्ध नहीं होनी चाहिए ।
हमारा अनुरोध है कि इन बेईमान ठेकेदारों पर लगाम लगाने के लिए अधिक बसूली गई धनराशि का १० गुना रिफण्ड निर्धारित हो और यदि इस प्रकार के अधिक बसूली के १० से अधिक मामले हों तो इनका टेण्डर निरस्त किया जाए ।क्योंकि आज इस प्रकार की व्यवस्था न होने का ही लाभ यह लोग उठा रहे हैं यह जानते हैं कि रिफण्ड हुआ तो ठीक नहीं तो यह हज़म कर लेते हैं ।
यह आज इस लिए लिखा कि तमाम लोगों के साथ मैं स्वयं भी लगातार इस बेईमानी से पीड़ित हूँ।
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Teachers Federation of India से सम्बद्ध संगठन प्राथमिक शिक्षक मण्डल गुजरात द्वारा सूरत में आयोजित अधिवेशन की अध्यक्षता की एवं #NoTetBeforeRteAct#Only_OPS तथा #OneNationOnePayFixation जैसे महत्त्व पूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की ।अधिवेशन के मुख्य अतिथि मा श्री सी आर पाटिल केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री रहे ।
टीएफआई के उपाध्यक्ष एवं प्राथमिक शिक्षक मण्डल के प्रमुख श्री राहुल अंकुश गव्हाने जी एवं उनकी टीम को अधिवेशन की सफलता हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।
@TFI4India
#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु आरटीई में संशोधन सम्बन्धित ज्ञापन मा उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को दिया गया ।@brajeshpathakup
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
@PMOIndia@narendramodi
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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बिना किसी परीक्षा के मा सुप्रीम कोर्ट में 5 नये जज नियुक्त कर दिए गए हैं ।
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
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