ये दिन आ गए हैं कांग्रेस के कि मसखरी करके छपरीपन को कूल समझ के ऐसी हरकतें करते हैं..और इन्हें लगता है कि सामान्य लोग इन्हें देश की सत्ता पर बिठा देंगे? लग रहा है पूरी पार्टी अब सोशल मीडिया के छपरियों से ही चल रही है.
🚨🇨🇦 Khalistanis Attacked Canadians for Filming Them
Gavin Barry and his crew drove past a gurdwara displaying a Khalistan flag and began recording what was happening in public.
Instead of simply being filmed, they were confronted.
Men approached the vehicle. Phones came out. Khalistanis surrounded the car and clearly did not want the cameras there.
Think about that.
A movement operating openly in Canada, and some of its supporters appear unwilling to let Canadians document what they see.
You don’t get to demand a public platform and then decide who is allowed to film you.
Watch the clip.
ये जितने लोग मोदी बनाम योगी, योगी बनाम मोदी, मोदी तेरी खैर नहीं, योगी तेरी खैर नहीं, योगी तो ठीक हैं लेकिन मोदी मुस्लिम परस्त हैं, मोदी तो ठीक हैं लेकिन योगी ठाकुरवादी हैं. बाकी सब तो अच्छा है लेकिन अधिकारी गड़बड़ कर रहे हैं, हम अखिलेश को पसंद नहीं करते लेकिन भाजपा जो गलती कर रही है उसका विरोध करेंगे, अखिलेश राहुल भले निजी क्षेत्र में भी आरक्षण देने के लिए बेकरार हैं पर हम तो भाजपा से सीधे आरक्षण हटवाने की अपील करेंगे और जो नहीं मानी तो उसे हटा देंगे, ये सारे लोग या तो समाजवादी पार्टी के एजेंट हैं अथवा समाजवादी पार्टी के लिए यूजफुल इडियट्स हैं। इसके अतिरिक्त इन्हें कोई संज्ञा नहीं दी जा सकती।
उत्तर प्रदेश में चुनाव सिर पर आ गया है और कुछ तो अभी यूजीसी नाम की मरे सांप की माला को एक्ट और कानून बताकर पागलों की तरह घूम रहे हैं। इसी तरह जिनका घर चुनाव जीतते ही अखिलेश जी के समर्थकों ने इसलिए आगे के हवाले कर दिया था क्यूंकि पहली बार उनके नेता ने उत्तर प्रदेश पर राज कर लिया था, वह संविधान और आरक्षण बचाने के नाम पर नाच रहे हैं। योगी जी की सरकार में उत्तर प्रदेश बहुत तेजी से आगे बढ़ा है, अधिकांश जगहों को 10 साल पहले और 10 साल बाद देखा जाये तो पहचान करना मुश्किल हो गया है। 2 लाख करोड़ का बजट मात्र 10 साल में 8 लाख करोड़ का पहुच गया, उधारी वाला राज्य सरप्लस में पहुच गया, उत्तर प्रदेश को स्थिरता मिली है। उत्तर प्रदेश दंगों और दबंगों से मुक्त हुआ है। सड़कों और हवाई अड्डों का जाल स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है। 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां मिली हैं। महिलाएं बेटियां सुरक्षित महसूस करती हैं। मेडिकल कालेज जिले जिले तक पहुचे हैं।
कमियां हर जगह होती हैं और सुधार की सम्भावना भी सदैव होती है, अब जब चुनाव का 06 महीना भी नहीं बचा है तब समय समीक्षा का नहीं है, युद्ध के मैदान में उतरकर आप यदि अपने ही पक्ष में कमी निकाल रहे हैं तो स्पष्ट अर्थ है कि या तो आप दूसरे पक्ष से मिले हुए हैं अथवा आप यूजफुल इडियट्स हैं।
जो लोग उत्तर प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित देखना चाहते हैं वह अपने मूर्खताओं को त्याग करके नकारात्मकता छोड़कर सकारात्मकता कार्यों में लगे और यूजफुल इडियट्स बनकर अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं का समय आपको मनाने में जाया करवाने के बजाय उल्टा आप खुद चार लोगों को पार्टी और विचारधारा के पक्ष में जोड़ने का काम करिए। EVM मशीन में केवल एक विकल्प होता है और वह होता है कि आप या तो अमुक व्यक्ति को वोट देंगे अथवा नहीं देंगे, ऐसा नहीं होता कि दो तिहाई भाजपा को देंगे एक तिहाई अखिलेश जी को...
जिन लोगो से इतिहास भूले नहीं भूलता वे लोग कभी नरेंद्र मोदी की उपलब्धि नहीं भूल पाएंगे।
ज़ब 26/11 का हमला हुआ तब मन मे सबसे बड़ी टीस यही थी कि हमने अमेरिका की तरह कार्रवाई क्यों नहीं की???
120 करोड़ की आबादी वाला देश अमेरिका और जॉर्ज बुश का मुँह ताकता रहा??
- आज शिकायत है कि सर्जिकल स्ट्राइक की थोड़ा और अंदर घुस जाते, ये है मोदी का न्यू नॉर्मल।
- G-20 के समय मुझे याद है कि मनमोहन सिंह को कोने मे खड़ा किया जाता था और G-7 का तो न्योता भी नहीं आता था आज शिकायत है कि आप गले क्यों मिलते हो? ये भी मोदी जी का न्यू नॉर्मल है।
- जहाँ सड़क मे गड्ढे नहीं गड्ढों मे सड़के होना भी विकास था वहाँ शिकायत है कि हाइवे मे गड्ढे क्यों हो गए, हाइवे बोलकर आप खुद कह चुके है कि ये न्यू नॉर्मल हो चुका है।
- मोदीजी के जन्मदिन पर प्रार्थना है कि शिकायते भले ही चलती रहे मगर ये न्यू नॉर्मल वाला ट्रेंड कभी खत्म ना हो, धन्यवाद एक ऐसे न्यू नॉर्मल के लिए जहाँ मेट्रो मे बम फटने का डर नहीं लगता।
- धन्यवाद उस न्यू नॉर्मल के लिए जहाँ हम खुलकर इस्लामिक आतंकवाद पर बोल पाते है।
- धन्यवाद उस न्यू नॉर्मल के लिए जहाँ फ्लाइट और A/C कोच की शिकायते हम कर पा रहे है जबकि कांग्रेस राज मे जनरल के धक्के भी विकास थे।
दिल्ली की गद्दी को अलंकृत कीजिए और ज़ब आप की इच्छा हो तभी उसे अगले राष्ट्रसेवक के लिए छोड़ प्रजा मंडल मे शेष जीवन बिताइये।
आज़ाद भारत के सबसे सफल प्रधानमंत्री को, पूरी दुनिया से आ रहीं करोड़ो जन्मदिन की बधाईयों के बीच एक छोटी सी शुभकामना हमारी ओर से भी…
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं राष्ट्रनायक 🙏
अभिव्यक्ति कि स्वतन्त्रता का मतलब यह नहीं कि कोई भी संवैधानिक पद पर आसीन मुख्यमन्त्री को सार्वजनिक मंच से ऐसे अपशब्द कहे।
आशा है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन इसका संज्ञान लेते हुए इस वामपन्थी बिगड़ैल छात्रा आयशा बोरा पर उचित कार्रवाई करेगा🙄😐😑
दो कौड़ी की औक़ात नहीं है इस तिलचट्टे, बोस्टन के संडास सफ़ाई कर्मचारी की और इसके तेवर देखो, मालिक के राज्य के बारे में पूछ लिया तो भड़क गया, मीडिया भी इन्हें ज़्यादा ही बाव दे रहा है, ये सब बेरोजगार अनपढ़ भिखारी हैं, मालिक के नौकर 🙄😐😑
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करता हूँ ।देशवासियों की अपेक्षाओं को पूर्ण करने में एवं नए भारत के निर्माण में ईश्वर सदैव आपको यश वैभव एवं उन्नति प्रदान करें।
Dear Mr Javed Akhtar. Alhamdulillah. The quote is from Maulana Azad's Calcutta Speech. The speech was published in Khutbat-e-Azad. Here is the link: https://t.co/yXkvYTTW1j
The Maulana is exhorting the Indian Muslims to unite with Muslims around the world and save the Caliphate. He begins by stating that all relationships in the world can break down, father can turn against son, brother against brother, mother can shun her child but the relationship of a Muslim with a Muslim can never be severed.
The Maulana then continues: if even a grain of the soul of Islam is still alive in its followers, then if a thorn enters the foot of a Turk on the field of battle, I swear by Allah that no Muslim of Hindustan is a Muslim until he feels that prick in his own heart. For the Millat of Islam is one body, and Muslims, wherever they are, are its limbs. If a finger of the hand is cut, the rest of the body cannot remain at peace until it has felt the blow. This is not rhetoric. It is the plain meaning of the well-known hadith which Imam Ahmad related: the Messenger of God, peace and blessings be upon him, said that the likeness of the believers in their mutual love, mercy and compassion is that of one body: when one limb complains, the whole body responds with sleeplessness and fever. And there is the other hadith, related by Abu Musa al-Ash‘ari: The believer to the believer is like a building; each part supports the other. This is the first and last distinguishing mark of the people of Islam, to which the Qur’an itself has pointed.
Then, to reinforce Muslim unity, Maulana Azad provides his commentary after quoting the Quranic verse 48: 29.
The Messenger of Allah and those with him are severe against the Kafirs, merciful among themselves.
Whatever hardness they have is for falsehood and unbelief; whatever love and tenderness they have is for truth, sincerity, Islam and Tawhid. So be extremely hard against disbelievers but extremely sympathetic and kind among ourselves; take heed, then, and do not pass over this as if you had not heard it.
P.S. This is the second time I am enlightening you on your heroes and their lifelong sociopolitical stances. The first time was when you refused to believe that books were banned, editors sacked, films blocked, and Majrooh jailed, under Nehru's rule. Please don't ask me about Gandhi next - the Mahatma, not Rahul, though both are probably your heroes. Cheers, WDTP
UP ही असली बैटल ग्राउंड है. सारा तामझाम यूपी के मद्देनज़र ही है. सब बाजुएं फड़काते हुए अब नए राजनैतिक विकल्प की बातें करते नज़र आएंगे. और धीरे धीरे सवर्ण एकता के चूरन की असली सच्चाई सवर्णों के कुछ गुटों को समझ आनी शुरू हो जायेगी कि कैसे उनके कन्धों पर रख कर निशाने साधे गए. पर सब फेयर है, राजनीती में प्रपंच चलते हैं, चक्रव्यूह हमेशा से रहे हैं..असली पराक्रमी वो है जो व्यूह रचना से सफलता पूर्वक बाहर आये.
मैंने 25 अगस्त को ही कहा था कि चन्द्रशेखर और अजीत दोनों अपने अपने समाज के आम लोगों को मूर्ख बनाने का धंधा करते हैं, अजीत पर FIR करवाने तो पूरा भीड़ पहुंच गया लेकिन उसकी गिरफ्तारी न हो, इसका ध्यान चन्द्रशेखर अवश्य रखेगा। यदि दूसरे किसी ने चन्द्रशेखर को गाली दिया होता तो उसका घर घेर कर अब तक गिरफ्तार करा चुका होता.......
Madam Sikh rights activist,
First of all, the offender in question is a Sikh.
Second, the incident is not from America; it’s from Canada.
But what have facts got to do with Khalistanis anyway?
Thirdly, since she’s from the same community as you, you can ask her directly why she started assaulting her tenant over beef steaks, since Sikhs organise regular beef burger parties outside the Virginia gurdwara in the USA.
Fourth, yes, it must have been quite a surprise for her to actually get arrested in Canada. In India, she would probably have had a community-sponsored lawyer at her side before the police could even finish the paperwork, followed by bail after some of her paisaabs descended on the police station and started blackmailing the cops.
पहले धर्मेंद्र प्रधान टारगेट हुए और अब मोहन यादव… आख़िर आम आदमी पार्टी का छोटा रिचार्ज @abhijeet_dipke केवल OBC नेताओं को ही टारगेट क्यों कर रहा है?????
हिन्दुत्व का चूरन..
जिनको नहीं चाटना
हिन्दुत्व का चूरन...
वो न चाटें..
हमारे लिए
हिन्दुत्व कभी चूरन था ही नहीं..
न हमने इसे 2014 में खोजा
न नरेंद्र मोदी ने हमें हिन्दू बनाया..
राम मोदी से पहले थे
काशी मोदी से पहले थी
केदार, महाकाल, गीता, उपनिषद
शंकराचार्य, तुलसी, मीरा
हमारे पर्व, हमारे तीर्थ
हमारी स्मृतियां..
ये किसी राजनीतिक दल की देन नहीं हैं...
तो फिर मोदी में ऐसा क्या था
जिसके कारण मेरे जैसे व्यक्ति ने
उनकी राजनीति को अपनी
सभ्यतागत आकांक्षा के करीब पाया?
शायद इसका उत्तर
किसी एक कानून में नहीं है..
यह उस परिवर्तन में है
जिसमें हिन्दू होना
राष्ट्रीय सार्वजनिक जीवन में
धीरे धीरे क्षमा मांगने वाली पहचान नहीं रहा..
मोदी ने हिन्दुत्व नहीं बनाया..
लेकिन उनके समय में
सत्ता की भाषा बदली..
प्रधानमंत्री काशी में
हर हर महादेव बोल सकता है..
केदारनाथ में
आदि शंकराचार्य की समाधि का पुनर्निर्माण
राष्ट्रीय परियोजना का हिस्सा बन सकता है..
उज्जैन में महाकाल लोक का लोकार्पण
सिर्फ स्थानीय धार्मिक कार्यक्रम नहीं
राष्ट्रीय दृश्य बन सकता है..
और देश का प्रधानमंत्री
इन सबको आधुनिक भारत के विरोध में नहीं,
आधुनिक भारत की continuity के रूप में प्रस्तुत कर सकता है..
काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन 2021 में मोदी ने किया
केदारनाथ में आदि शंकराचार्य समाधि और व्यापक पुनर्विकास परियोजनाएं उनके कार्यकाल में आगे बढ़ीं
और 2022 में उन्होंने महाकाल लोक के पहले चरण को राष्ट्र को समर्पित किया..
मेरे लिए यही परिवर्तन छोटा नहीं है..
क्योंकि राष्ट्र केवल GDP से नहीं बनता
राष्ट्र स्मृति से भी बनता है..
और फिर अयोध्या है..
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में
प्रधानमंत्री स्वयं उपस्थित रहे..
मेरे लिए उसका अर्थ
सिर्फ एक मंदिर का बन जाना नहीं था।
वह इस बात का संकेत था
कि सदियों पुरानी सभ्यतागत स्मृति
अब सार्वजनिक जीवन में
संकोच से नहीं बोली जाएगी..
फिर Citizenship Amendment Act को देखता हूं..
उससे हर समस्या हल नहीं होती..
उस पर राजनीतिक और संवैधानिक बहस भी हुई..
लेकिन पहली बार भारतीय कानून में
Pakistan, Bangladesh और Afghanistan से आए
हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई
उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए
नागरिकता का विशेष रास्ता बनाया गया..
उसमें हिन्दू अकेले नहीं थे
लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में
धार्मिक अल्पसंख्यक हिन्दुओं की दशकों पुरानी समस्या को
भारतीय राज्य ने केवल humanitarian footnote मानकर छोड़ भी नहीं दिया..
इसलिए मेरे समर्थन का आधार
सिर्फ कोई नारा नहीं है..
मैं एक pattern देखता हूं..
अयोध्या
काशी
केदारनाथ
महाकाल
सभ्यतागत प्रतीकों को
राष्ट्रीय भाषा में पुनः प्रतिष्ठित करना..
उस भारतीयता को यह कहना
कि आधुनिक होने के लिए
अपनी प्राचीनता से शर्मिंदा होना जरूरी नहीं है..
कि satellite भी हमारा हो सकता है
और शंकराचार्य भी
semiconductor भी
और संस्कृत भी
AI भी
और अध्यात्म भी
expressway भी
और तीर्थ भी
मेरे लिए यही आधुनिक हिन्दू आत्मविश्वास है
मैं यह दावा नहीं करता
कि सब कुछ हो गया..
बहुत कुछ किया जाना बाकी है..
SC/ST Act हो,
UGC हो,
आरक्षण हो,
जहां लगे
कि सरकार का संतुलन गलत है,
तो बेशक सवाल करो..
एक निर्णय से नाराज़ होकर
मैं उस पूरी यात्रा को
चूरन नहीं कह सकता
जिसमें मेरी सभ्यता
राजनीतिक हाशिये से निकलकर
फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में दिखाई दी..
इसीलिए
जिनको नहीं चाटना
हिन्दुत्व का चूरन..
वो न चाटें..
मेरे लिए यह
किसी चुनाव की दवा नहीं है..
यह स्मृति है।
यह continuity है..
यह उस सभ्यता का आत्मबोध है
जो हजारों वर्षों से
अपने आपको बदलती भी आई है
और बचाती भी आई है..
और मोदी का मेरे लिए महत्व
इसलिए नहीं है
कि उन्होंने मुझे हिन्दू बनाया..
बल्कि इसलिए है
कि मेरे जीवनकाल में
उन्होंने भारत की सर्वोच्च राजनीतिक सत्ता को
अपनी हिन्दू सभ्यतागत स्मृति के साथ
सार्वजनिक रूप से सहज होने में
एक बड़ी भूमिका निभाई...
सरकार का हिसाब पांच साल का हो सकता है..
सभ्यता का हिसाब सदियों का होता है..
🚨🇨🇦 Khalistanis Hijack Brampton Roads with Illegal Tractors
I have noticed a pattern among Sikhs living in the West.
When the story is culture, success, or politics, they identify as Punjabi, not Indian.
When the story is a crime, the same cases are suddenly labelled “Indian.”
It is how a narrative is built.
You cannot be Punjabi in the good headlines and Indian in the mugshots.