भाजपा शासित राज्यों पर सवालों की बौछार!
असम से लेकर महाराष्ट्र तक विवादों की लंबी फेहरिस्त।
यूपी में राम मंदिर चंदा विवाद, एमपी में जमीन आवंटन पर आरोप।
बिहार में कानून व्यवस्था पर सरकार घिरी।
असम में पासपोर्ट मामले को लेकर विपक्ष हमलावर।
महाराष्ट्र में सियासी साझेदारियों पर उठ रहे सवाल।
क्या ये सिर्फ अलग-अलग घटनाएं हैं या बड़ा राजनीतिक संकट?
डबल इंजन सरकार में करप्शन बढ़ चुका है।
लेकिन गोदी मीडिया की हिम्मत नहीं है कि वह मोदी जी और योगी जी के राज में हो रहे करप्शन को दिखा सके।
लेकिन अब सच सामने आ रहा है और जनता तक सीधे पहुंच रहा है।
4PM की खबर का बड़ा असर
कैमरे पर घूस मांगने वाले अधिकारी को आखिरकार पद से हटा दिया गया।
4PM ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद में फैले भ्रष्टाचार का खुलासा किया था।
गाजियाबाद के सहायक अधिकारी (आवास) सतीश कुमार कैमरे पर खुलेआम रिश्वत मांगते दिखाई दिए थे।
कैमरे में दर्ज वह सच्चाई थी जिसे अब अनदेखा करना संभव नहीं था।
खबर सामने आते ही पूरे विभाग में हड़कंप मच गया।
जनता के सामने सच आने के बाद प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी
अधिकारी को पद से हटा दिया गया
पासपोर्ट को अब तक पहचान और नागरिकता का सबसे भरोसेमंद सरकारी दस्तावेज माना जाता रहा है।
लेकिन अब सरकार का कहना है कि पासपोर्ट सिर्फ़ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब असम चुनाव के दौरान पवन खेड़ा ने हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार पर कई पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था, जिसकी जांच और कानूनी प्रक्रिया अब भी चर्चा में है।
क्या यह सिर्फ़ एक कानूनी स्पष्टीकरण है, या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदर्भ भी है?
सरकार, जनता को मार रही है।
सरकार अपना काम नहीं कर रही है।
जनता के मरने से सरकार को फर्क नहीं पड़ रहा है।
घटना होने के बाद दिखावटी रस्में निभाई जाती हैं।
लखनऊ के अलीगंज सेक्टर डी के गेमिंग जोन में हुई घटना अत्यंत हृदयविदारक है, जिसने अंदर तक झकझोर कर रख दिया है... मन बहुत दुःखी है... भगवान सभी पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें... और परिवार को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें... ॐ शांति...
पार्टी तोड़ो और लोकतंत्र का बखान करो!
यूँ ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब सारी क्षेत्रीय पार्टियां खत्म हो जाएंगी और सिर्फ बीजेपी बचेगी।
बिहार से बंगाल और महाराष्ट्र तक एक ही खेल चल रहा है। पार्टियां तोड़ो, सांसदों को अपनी ओर खींचो, डर दिखाओ और पैसा फेंको।
NEET RE-EXAM अब मोदी सरकार के लिए सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उसकी साख की परीक्षा बन चुका है।
एक प्रवेश परीक्षा में हुई गड़बड़ियों ने पहले ही सरकार की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा डगमगा चुका है।
अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि देशभर में NEET RE-EXAM बिना किसी पेपर लीक, अव्यवस्था या विवाद के सफलतापूर्वक आयोजित हो।
पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या वह छात्रों का खोया हुआ विश्वास दोबारा जीत पाती है।
कोटा से राहुल गांधी ने नया बिगुल फूँक दिया है।
राहुल गांधी ने कोटा में आयोजित "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, कोचिंग संस्कृति और प्रतियोगी परीक्षाओं की लागत पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी का यह कार्यक्रम उनके नए राजनीतिक अंदाज़ को दिखाता है।
अब वे सिर्फ़ चुनावी भाषणों की बजाय छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर सीधे संवाद कर रहे हैं।
कोटा से उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, कोचिंग खर्च और पेपर लीक जैसे विषयों को केंद्र में रखा।
उन्होंने मंच को राजनीतिक सभा की बजाय "युवाओं की आवाज़" बताया।
उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसदों के टूटने की खबर है।
सवाल उठता है कि आखिर लोकतंत्र बचा कहाँ है?
क्या जनता ने सांसदों को दल बदलने के लिए चुना था?
क्या चुनाव जीतने के बाद जनादेश की कोई कीमत नहीं रह गई?
अगर विपक्ष के नेताओं को तोड़ना ही राजनीति है, तो चुनाव कराने का मतलब क्या है?
सत्ता के दम पर विपक्ष को कमजोर करना लोकतंत्र नहीं, लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है।
15,00,000 करोड़ का घोटाला, लेकिन ना FIR, ना ED का छापा, ना जेल! देश में आखिर चल क्या रहा है?
राजेश एक्सपोर्ट्स पर कार्रवाई करने से क्यों बच रही है मोदी सरकार?
4PM Business चैनल ने लॉन्च के बाद अपने पहले ही वीडियो में राजेश एक्सपोर्ट्स के काले कारनामों की पूरी कहानी उजागर की
4PM Business ने दिखाया कि कैसे आम लोगों के पैसे की हेराफेरी करके एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया गया.
Telegram बैन करके मोदी सरकार ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है।
युवा पहले ही बेरोज़गारी, पेपर लीक से परेशान हैं। ऐसे में Telegram पर प्रतिबंध लगाना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी को छिपाने की एक दिखावटी कोशिश लगता है।
अगर कुछ चैनलों पर गलत गतिविधियां हो रही थीं, तो उन पर कार्रवाई होती। लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म को निशाना बनाना लाखों छात्रों और युवाओं को सज़ा देने जैसा है।
सरकार एक बार फिर यह साबित करती दिख रही है कि वह समस्याओं की जड़ पर प्रहार करने के बजाय, आसान और प्रतीकात्मक फैसले लेने में ज्यादा विश्वास रखती है।
सोशल मीडिया पर इस फैसले के खिलाफ विरोध भी शुरू हो चुका है।
बंगाल की सियासत में नई खिचड़ी नहीं, पूरी बिरयानी पक रही है!
टीएमसी के बागियों ने भाजपा नहीं, तीसरा रास्ता चुना।
क्या यह सिर्फ पार्टी बदलने की कहानी है या 2026 और 2029 के बड़े राजनीतिक समीकरणों की तैयारी?
बंगाल से बिहार तक बढ़ रही इस हलचल पर सबकी नजरें टिकी हैं।
जब राम मंदिर की ज़मीन खरीदी जा रही थी, तब मैंने एक स्टोरी की थी..
सवाल सीधा था कि दो करोड़ रुपये की ज़मीन कुछ ही घंटों में अठारह करोड़ रुपये की कैसे हो गई !
और फिर उसी ज़मीन को मंदिर ट्रस्ट ने क्यों खरीदा !
सवाल यह भी था कि अयोध्या में ज़मीनों की खरीद-फरोख्त के दौर में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों रुपये की ज़मीनें खरीदे जाने की बातें सामने आईं.
दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए, रजिस्ट्रियों की चर्चा हुई, लेकिन जवाब कभी नहीं मिला.
जाँच के नाम पर समितियाँ बनती रहीं। बयान आते रहे. लेकिन नतीजा क्या निकला !
आज तक देश को नहीं बताया गया कि आखिर सच क्या था.
करोड़ों रामभक्तों ने अपनी श्रद्धा से चढ़ावा दिया. किसी ने सौ रुपये दिए, किसी ने हजार, किसी ने लाखों. लोगों ने यह सोचकर दान दिया कि यह भगवान राम का काम है.
लेकिन जब उसी आस्था से जुड़े लेन-देन पर सवाल उठे, तो जवाबदेही क्यों गायब हो गई.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी, वे आखिर इतने वर्षों से खामोश क्यों हैं !
राम के नाम पर वोट माँगना आसान है। राम के नाम पर उठे सवालों का जवाब देना मुश्किल क्यों हो जाता है.
क्योंकि यह केवल ज़मीन का मामला नहीं है। यह करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है. और आस्था के नाम पर उठे सवालों को दबाने से सवाल खत्म नहीं होते, वे और बड़े हो जाते हैं.
पश्चिम बंगाल में विपक्षी नेताओं के यहां छापे, क्या यही है भाजपा का विकास?
अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम पहुंची।
टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर भी कार्रवाई हुई।
नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच ने फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
सत्ता पक्ष इसे कानून का राज बता रहा है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध का नाम दे रहा है।
4 महीने में दूसरी बार मोहन भागवत के सफर पर पत्थर!
संयोग, लापरवाही या किसी बड़े खेल की आहट?
8 टीमें जांच में जुटी, 1 गिरफ्तार
पूर्व में हरदोई रूट पर फेंके गये थे पत्थर, कौन है मास्टर माइंड?
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होना लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक घटना है।
एक के बाद एक, चुनाव आयोग के ऐसे फैसले, देश के लिए बहुत नुकसानदायक है।
चुनाव आयोग का काम निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, लेकिन हाल के वर्षों में उसके कई फैसलों ने उसकी विश्वसनीयता को लेकर बहस छेड़ दी है।
जब विपक्षी नेताओं के खिलाफ बार-बार ऐसे विवाद सामने आते हैं, तो जनता के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है।
लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ वोट डालने का नाम नहीं, बल्कि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर देने की व्यवस्था है।
यदि तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के लिए होता दिखाई दे, तो यह बेहद चिंताजनक संकेत है।
चुनाव आयोग को हर विवादित फैसले पर विस्तृत और सार्वजनिक जवाबदेही दिखानी चाहिए।
संवैधानिक संस्थाओं की ताकत उनकी निष्पक्षता की धारणा में निहित होती है।
यदि जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर होती है।
ईरान द्वारा अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने के दावे के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका की फिफ्थ फ्लीट बहरीन में स्थित है और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।
हालांकि अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को रोक दिए जाने का दावा किया गया है, लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि होर्मुज संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।
किसी भी नए हमले या जवाबी कार्रवाई से क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है।
अंजना ओम कश्यप को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई राहत नहीं दी है।
अंजना चाहती थी कि 4PM के साथ साथ तमाम यूट्यूब टीचर्स के वो वीडियो delete कराए जायें जिसमें अंजना की आलोचना की गई है।
अक्सर विवादों में रहने वाली आजतक की एंकर @anjanaomkashyap ने आलोचकों का मुंह बंद करने के लिए मानहानि के मुकदमे का सहारा लिया है। 4PM के खिलाफ भी मुकदमा किया। खान सर के खिलाफ भी मुकदमा किया।
लेकिन बड़ी बात ये है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अंजना के वीडियो डिलीट कराने के रिक्वेस्ट पर अंतरिम आदेश देने से साफ मना कर दिया।
इस मामले की शुरुआत खुद अंजना के अजीबोगरीब बयान से हुई थी। जब उन्होंने स्टार टीचर्स को 2 कौड़ी का कहा। लेकिन टीचर्स ने जवाब दिया तो अंजना वीडियो डिलीट कराने की मांग लेकर कोर्ट चली गई।