@AnilYadavmedia1 Jio का डेटा पैक काफी सस्ता है।
जियो में ₹349 में 28 दिन के लिए 2GB/दिन + अनलिमिटेड 5G मिल जाता है।
स्टारलिंक अभी भारत में लॉन्च नहीं हुआ। अनुमानित मासिक कीमत ₹2500-8600 + हार्डवेयर ₹34000 के आसपास है, अनलिमिटेड डेटा के साथ।
मोबाइल डेटा के लिए जियो सस्ता।
हर काम करने का एक तरीक़ा निश्चित होता है, जो काम लट्ठ से होता है उसे लट्ठ बजा कर ही करना चाहिए, यूँ टूरिस्ट बस में दिल्ली दर्शन करवाने से कुछ नहीं होगा, पुरानी कहावत है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते 🙄😐😑
अगर कोई मुझसे जीवन की सलाह मांगें, तो बस इतना कहूँगा,
अपनी शांति, अपना समय और अपनी जगह बचाने में स्वार्थी हो जाना..
क्योंकि अंततः, आपकी ज़िंदगी की यह कीमत आपके सिवा कोई नहीं चुकाएगा,
गोडसे ने 1 को मारा।
कसाब ने 267 को मारा।
राजीव गांधी ने 17000 सिखों को मारा नेहरू और जिन्ना ने 40 लाख हिंदुओ को मारा।
फिर भी आतंकवादी गोड़से है।
तो यकीन मानिए आप अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं।
किसी के सौंदर्य की प्रशंसा करना सरल है उसकी प्रतिभा की प्रशंसा करना भी सरल है लेकिन उसके मौन में छिपे साहस को पहचान लेना..यह दृष्टि बहुत दुर्लभ है। फूल तो सुंदर है ही लेकिन उस मिट्टी को देख पाना जिसने उसे खिलने तक सहा…वही प्रशंसा की दृष्टि है।
दफ्तर में उसकी मौत की खबर आई
दो मिनट का मौन रहा
फिर उसके हिस्से का काम
औरों में बांट दिया गया।
और वह मरने वाला इस डर से छुट्टी नहीं लेता था
कि अगर वह छुट्टी करेगा
तो उसके बिना काम कैसे चलेगा
"यूं ही आबाद रहेगी दुनिया
हम ना होंगे तो हम सा कोई होगा"
Geopolitics today is a circus where everyone is performing a different balancing act:
USA 🇺🇸 needs India 🇮🇳 to balance China 🇨🇳
USA 🇺🇸 needs Pakistan 🇵🇰 to balance India 🇮🇳
China 🇨🇳 needs Pakistan 🇵🇰 to balance India 🇮🇳
India 🇮🇳 needs USA 🇺🇸 to balance China 🇨🇳
Russia 🇷🇺 needs China 🇨🇳 to balance USA 🇺🇸
India 🇮🇳 needs Russia 🇷🇺 to balance USA 🇺🇸
Planted a banyan tree with fellow BRICS leaders in Delhi.
It is a fitting symbol of what BRICS stands for…deep roots, growing strength and coming together for a shared future.
May our partnership continue to grow in the times to come.
जिस तरह घर घर इन्फ्लुएंसर्स निकल रहे हैं वह बड़ी बेचैनी और चिंता का विषय है। जिन्हें जीवन का संघर्ष नहीं पता, जिन्होंने जीवन को गहराई से देखा और समझा नहीं… वे झूठी प्रसिद्धि और मिलते धन के अंधेपन में स्वयं और अपनी पीढ़ियों को खोखला कर देंगे।
मनुष्य परिस्थितियों से नहीं, अपने मूल्यों से मनुष्य बना रहता है और सभ्यता अपनी शक्ति से नहीं अपने धर्म से जीवित रहती है।
मूल्यों को खोने का दुःख उस समय सबसे अधिक होता है जब उन्हें वापस पाने की शक्ति, अवसर और समय…तीनों समाप्त हो चुके होते हैं।