US is the country where a foreign journalist is shot by a cop in the light of the day and still US dares to lecture the World on Human Rights, Freedom of Speech and what the hell not.
#LosAngeles#LosAngelesProtests#LosAngelesRiots
देश के छात्रों ने system के फैलाए अंधेरे के बीच, अपने डर का सामना कर, रौशनी की मशाल जलाई है।
ये मशाल अब पूरे देश को अपने अधिकारों का रास्ता दिखा रही है।
BJP-RSS और अडानी के System को अब खतम, tata, bye-bye कहने का वक्त आ गया है।
RSS के आदेश पर राजस्थान में भाजपा सरकार द्वारा साज़िशन OBC समाज के संवैधानिक अधिकारों पर कैंची चलाई जा रही है।
OBC आयोग की मनमानी सर्वे रिपोर्ट की आड़ में भाजपा सरकार द्वारा 21% OBC आरक्षण की व्यवस्था को कम करना और कई क्षेत्रों में इसे सिर्फ 5% तक सीमित करना सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ ओबीसी समाज के अधिकारों पर सीधा हमला है।
ये निर्णय प्रदेश की 50% से ज्यादा OBC समाज की आबादी के युवाओं और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ सीधा अन्याय है। सामाजिक न्याय का अर्थ किसी एक वर्ग का हक़ छीनकर दूसरे को देना नहीं है। उत्तराखंड हो या महाराष्ट्र, OBC आयोग ने जिन राज्यों से ये फॉर्मूला लिया है वहां OBC के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27% की सिफारिश की गई। फिर राजस्थान में हक क्यों छीना जा रहा है?
आज राजस्थान में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब 19% और अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी करीब 17% है। लेकिन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर उन्हें जो आरक्षण मिल रहा है, वो आज की आबादी के अनुपात में पर्याप्त नहीं है। संवैधानिक अधिकारों के तहत उनका हक भी पूरी तरह सुरक्षित रहना चाहिए। लेकिन सवाल ये है कि आखिर OBC समाज का हक़ क्यों छीना जा रहा है? जब OBC की जनसंख्या 50% से ज्यादा है तो फिर आरक्षण कम क्यों किया जा रहा है?
अगर सरकार सामाजिक न्याय की बात करती है, तो सभी वर्गों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, किसी भी वर्ग के आरक्षण में कटौती नहीं होनी चाहिए। OBC के आरक्षण से छेड़छाड़ अस्वीकार्य है, कांग्रेस पार्टी और प्रदेश का युवा सड़क से सदन तक इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष करेंगे और ईंट से ईंट बजा देंगे।
सरकार को चाहिए कि वो आरक्षण व्यवस्था में लगी कैप को हटाएं और आबादी के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित करें।
This Independence Day, we want the Prime Minister to address India’s youth.
We request the PM to explain what the government is doing for youth regarding education, unemployment, and the cost of living.
If you support this, sign the petition:
https://t.co/omESNh6RSA
इसका मतलब क्या है-सरकार UPI ट्रांजेक्शन को हतोत्साहित करना चाहती है!
सीधी-सी बात है-छोटा दुकानदार या कारोबारी यह अतिरिक्त खर्च अपनी जेब से नहीं उठाएगा। वह इसे ग्राहक से ही वसूलेगा। क्रेडिट और डेबिट कार्ड का उदाहरण एकदम सही उदाहरण है।
मोदी सरकार द्वारा लाया गया टैक्सेशन एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 उस वैधानिक गारंटी को समाप्त कर देता है, जो अब तक UPI लेनदेन को शुल्क-मुक्त बनाए हुए थी। यह मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता खोलता है, जिसे भविष्य में आसानी से सभी प्रकार के डिजिटल भुगतान पर लागू किया जा सकता है। इसका बोझ अंततः आम लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें अब UPI के इस्तेमाल के लिए भी भुगतान करना पड़ सकता है।
मोदी सरकार का यह दावा कि UPI को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने का यही एकमात्र रास्ता है, पूरी तरह गलत है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास UPI प्रणाली को बिना व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाए, वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने की पर्याप्त क्षमता है। 2025-26 में RBI ने मोदी सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर किया था। इस राशि का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही इस महत्वपूर्ण डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट देने के लिए पर्याप्त होता।
दरअसल, इस संशोधन के पीछे की असली वजह शायद और भी अधिक चिंताजनक है। यह कदम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें UPI और RuPay के शुल्क-मुक्त होने की आलोचना की गई थी और आरोप लगाया गया था कि उन्होंने Visa और MasterCard जैसे अमेरिकी भुगतान प्लेटफॉर्मों को बाजार से बाहर कर दिया है। क्या मोदी सरकार अपने अच्छे मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में UPI को कमजोर कर डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहती है?
और ऐसा पहली बार नहीं होगा। डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से 100 से अधिक बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने अमेरिकी टैरिफ की धमकी देकर मोदी सरकार पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अचानक युद्धविराम कराने का दबाव बनाया था। अमेरिका यह भी दावा कर चुका है कि भारत द्वारा रूस से तेल आयात में धीरे-धीरे की जा रही कटौती भी राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देशों का परिणाम है। हम यह भी जानते हैं कि मोदी सरकार ने राष्ट्रपति ट्रंप के दादागिरी के आगे झुकते हुए भारत-अमेरिका के बीच ऐसा व्यापार समझौता स्वीकार किया, जिसे व्यापक रूप से अनुचित माना गया और जिसमें विशेष रूप से हमारे किसानों तथा छोटे कारोबारियों के हितों की बलि दी गई।
मोदी सरकार का नया कानून आया है। अगर सरकार किसी भी social media platform को कोई पोस्ट delete करने के लिए कहती है, तो उन्हें 3 घंटे के भीतर उसे delete करना होगा।
Gen Z के आंदोलन के बाद से ही मोदी जी को बहुत डर लगने लगा है। मोदी जी, आप जितना देश के लोगों की आवाज़ दबाएंगे, उनका गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।
वन ईयर वेटिंग को लेकर सरकार लीगल इश्यू मान रही है तो एक नियम लागू कर सकते हैं कि नोटिफिकेशन के बाद जिस भर्ती का फ़ाईनल रिजल्ट जारी हुआ है उसपर लागू कर दें । इसमें फोर्थ ग्रेड वाले आ जाएंगे।@RajCMO@BhajanlalBjp
🚨#SOS: Certain YouTubers and media channels have broken into my house and are showing the visuals from inside. It’s not just an invasion of my privacy but also a grave security threat for me and my family.
If anti-social elements attack me at my residence as a result of this, these YouTubers and their troll handlers who are coordinating this will be directly responsible! @DelhiPolice
ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा… कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल किया जा रहा है ये भी हास्यास्पद है। 2-3 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा?
सवाल ये भी है कि ‘अटल प्रोग्रेस वे’ योजना में ही रहेगा या कभी बनेगा भी… या काग़ज़ों में बनकर उसका ‘हिस्सा-बाँट’ हो चुका है।
भाजपा राज में हुआ हर निर्माण चलता कम है… धँसता, ढहता, गिरता ज़्यादा है।
ऊर्जा विभाग भर्ती में विसंगतियों की भरमार है -
(1) भर्ती परीक्षा RSSB,RPSC से न करवाकर बाहरी एजेंसी से करवाई जा रही है जिस पर पहले से कई सारे आरोप लग चुके है ।।
(2) आरक्षण के नाम पर धोखा किया गया है OBC और SC को नाममात्र के पद दिए गए है ये मानकर चालों दोनों वर्ग के लिए इस भर्ती में कोई स्थान ही नहीं है ।।
(3)OTR होने के बावजूद आवेदन शुल्क ज़्यादा
(4) सिलेबस में स्थानीय युवाओं के लिए राजस्थान GK नाममात्र का वेटेज ।
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी को संज्ञान लेना चाहिए प्रदेश के युवा पीड़ा में है नाराज है दुःखी है इस प्रकार की विसंगतियां होने से युवाओं में आक्रोश भी है ।।
माँग को बुलंद करने के लिए @DainikBhaskar सर @pantlp जी सर @vinodmittal9 जी का बहुत बहुत धन्यवाद और आभार ।।
@RajCMO@hlnagar@Ravindrachdry
Hi @Meta@metaindia
Why have you restricted my account? Verbal enquiries at your India office revealed that my account has been restricted in India and is unavailable in India. Why? Noone in your office is giving any reasons. Noone is suggesting how restrictions can be removed. All emails written have elicited no response other than routine acknowledgement.
Thats pretty bad service.
Don’t bow down to our Prime Minister so much. Else he will allow u to run only his own account in India.
E20 पेट्रोल से खराब होगा इंजन... रिपोर्ट से मचा हड़कंप! आया SIAM और सरकार का जवाब
E20 पेट्रोल इस समय देश भर में बिक रहा है. इस बीच देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल संगठन SIAM की रिपोर्ट से हडकंप मच गया है. जिसमें दावा किया जा रहा है कि, SIAM ने पहले ही सरकार को आगाह किया था कि, पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले इस फ्यूल से वाहनों के पार्ट्स खराब हो सकते हैं.
पूरी ख़बर- https://t.co/7jBqF4tlXK
#E20 #EthanolBlendedFuel #SIAM #Petrol
राजस्थान में रोस्टर प्रणाली के नाम पर OBC एवं आरक्षित वर्गों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं।
पहले LDC भर्ती में 21% की जगह 14% और आज विद्युत विभाग की LDC भर्ती में फिर से ओबीसी को 1% से भी कम मात्र .25% आरक्षण दिया गया हैं।
OBC वालों तुम सोते रहेंगे तो यदि होगा।
"मैं शुभम रेवाड़, अपने अनशन के 13वें दिन से एसएमएस अस्पताल में किसी भी प्रकार का इलाज लेने से पूरी तरह मना करता हूँ और अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करता हूँ। जब तक राज्य सरकार हमारी जायज मांगों (राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना और छात्र संघ चुनाव बहाली) को स्वीकार नहीं करती, तब तक मेरा यह कड़ा रुख जारी रहेगा। यदि इस दौरान मेरे स्वास्थ्य या जीवन को कोई क्षति पहुँचती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।"
#ShubhamRewarRU
#Rajasthanuniversity