हर कहानी मेरी कहानी थी।
जी ना बहला किसी कहानी से।
सिर्फ सुकून ही मिल पाता है
प्यास ना बुझती पानी से।
मुझे क्या-क्या ना दुख मिले।
मेरे अपनों की मेहरबानी से।
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@umda_panktiyan कोई ऐसी बारिश हो जाए।
अनचाही यादें धुल जाए।
हर बूंद हो प्रेम से सनी हुई।
धारा सद्भाव से बनी हुई।
नफरतें स्नेह में बदल जाए।
अनचाही यादें धुल जाए।
जब काम,क्रोध से मन घिरे,
शील, क्षमा बिजलियाँ गिरे।
लोभ, मोह सब जल जाए।
अनचाही यादें धुल जाए।
✍ पूजा यादव
@kavishala जीवन का जो सबसे प्यारा और अनोखा काल,
उस बचपन को फिर से जी लूँ,
बनकर नन्हा बाल।
दुनियादारी के झंझट से,
रहते कोसों दूर।
खेलों के संसार में अपने,
रहते बस मगरूर।
अपनी वो छोटी सी दुनिया
थी कितनी खुशहाल।
उस बचपन को फिर से जी लूँ,
बनकर नन्हा बाल।
✍ पूजा यादव
है खेल मुझे शब्दों का लगता प्यारा,
मेरे सुख-दुख का कविता बनी सहारा,
शायद पन्नों में कैद मेरी खुशियाँ हों,
यही सोच, हर पुस्तक पढ़ लेती दोबारा।
✍ पूजा यादव
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