@RajCMO@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
दो जगह=निजी एवं सरकारी क्षेत्र की लैबो में रिएजेंट की खरीदारी,
दोनों जगह अलग अलग मेंटेनेंस का भुगतान
जांचों की गुणवत्ता पर मार,
सरकार पर अतिरिक्त भार,
फिर भी निजीकरण पर इतनी मेहरबानी
आखिर क्यों?
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
आज जांचों का भी निजीकरण किया गया हैं
गलत जांच रिपोर्ट विभाग की छवि धूमिल कर रही हैं
क्या मरीज हित में बात रखना गलत है ?
ऐसे क्या कोई सही बोलने की हिम्मत जुटा पाएगा?
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@RajCMO
राजस्थान में सरकारी जांच��ं का निजीकरण कर दिया गया है प्राइवेट फ़र्म सरकारी क्षेत्र को संभाल रही है
महंगी मशीनों अब धूल फांकेंगी, ट्रेंड स्टाफ साइड करना शुरू कर दिया है
तो सरकारी अस्पताल में IAS, RAS व अन्य प्रशासकों की क्या जरूरत है?
एक झटके में गई 6,500 नौकरियां, राजस्थ��न में नर्सिंगकर्मियों का प्रदर्शन, एक ने दी जान | @sharatjpr
राजस्थान में एक झटके में करीब 6,500 संविदा नर्सिंगकर्मियों को नौकरी से हटाए जाने के बाद हड़कंप मच गया है. इस फैसले के बाद जयपुर के महिला चिकित्सालय में कार्यरत 30 वर्षीय नर्सिंगकर्मी दीपक ने जहर खाकर अपनी जान दे दी.
पूरी ख़बर: https://t.co/kDSXf10Z2w
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जयपुर के महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट में संविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मी श्री दीपक खारवाल ने नौकरी समाप्त होने से उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली। संविदा पर नियुक्त नर्सिंग कर्मचारियों को हटाने के राज्य सरकार के फैसले से पहले ही व्यापक रोष व्य��प्त था और अब इस दुःखद घटना के कारण पूरे राज्य के संविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मियों में आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। इस घटना ने प्रदेश सरकार का असंवेदनशील रवैया पुनः उ��ागर किया है।
सरकार शोकाकुल परिजनों की मांगों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुने। साथ ही, संविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मियों की मांगों और समस्याओं पर पुनर्विचार करना चाहिए।
https://t.co/b50kVEemQ3
📢 प्रदेश के चिकित्सा तंत्र की रीढ़ बने संविदा एवं आउटसोर्स नर्सिंग कर्मियों के साथ अन्याय कब तक?
माननीय@sharatjpr जी एवं @hemantkumarnews जी,@ml_vikas जी
आपका ध्यान प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के अधीन संचालित चिकित्सालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा, आउटसोर्स एवं मैनपावर एजेंसियों के माध्यम से कार��यरत नर्सिंग कर्मचारियों की गंभीर स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।
एक ओर राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन हेतु संविदा नर्सिंग कार्मिकों की सेवाओं की निरंतरता के लिए बजट स्वीकृत करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कर्मचारियों को बिना किसी ठोस कारण, बिना वैकल्पिक व्यवस्था एवं बिना न्यायोचित प्रक्रिया अपनाए कार्यमुक्त किया जा रहा है। यह न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों क�� उल्लंघन है बल्कि कर्मचारियों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों पर भी सीधा आघात है।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर संविदा कार्मिकों के हितों की रक्षा एवं सेवा निरंतरता के संबंध में दिए गए आदेशों एवं निर्देशों की भी कई स्थानों पर प्रभावी पालना नहीं हो रही है। यदि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की जा रही है तो यह विधि के शासन (Rule of Law) एवं न्यायपालिका की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है, मरीजों का भार लगातार बढ़ रहा है और सरकार स्वयं सेवाओं की आवश्यकता स्वीकार कर रही है, तो फिर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी नर्सिंग कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने का औचित्य क्या है?
संविदा नर्सिंग कर्मियों ने कोरोना जैसी महामारी,अनेक आपात परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा की है। आज वही कर्मी अपने रोज��ार, परिवार एवं भविष्य क�� लेकर असुरक्षा की स्थिति में खड़े हैं।
राजस्थान नर्सिंग यूनियन @RajGovOfficial से मांग करती हैं कि—
✅ कार्यमुक्त किए गए सभी संविदा/आउटसोर्स नर्सिंग कर्मियों की सेवाएं तत्काल बहाल की जाएं।
✅ उच्च न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए।
✅ सेवा निरंतरता एवं रोजगार सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट नीति जारी की जाए।
✅ दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही की जाए।
न्यायालय के आदेशों की अवहेलना, स्वीकृत पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को हटाना तथा स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है बल्कि प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ है।
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निजी लैब की मनमानी चरम पर
या तो सरकार को आर्थिक चू��ा लगाने की, चांदी कूटने की अधिकारी परमिशन दे
नहीं तो लैब बंद
सरकार के पास शुरू से साधन संसाधान सब है फिर प्रदेश की जनता के जांचों की गुणवत्ता से खिलवाड़ ?
#Dausa : राजमेश नर्सिंग ऑफिसर और लैब टेक्नीशियन हटाने पर बवाल
प्रदेश भर में 16 माह पूर्व लगाए कार्मिक किए कार्यमुक्त, इसके विरोध में स्थाई नर्सिंगकर्मियों ने भी खोला मोर्चा, जिला अस्पताल में एक घंटे रखा कार्य बहिष्कार, स्थाई न���्सिंगकर्मियों ने कहा राजमेश कि वजह से व्यवस्था हुई थी बहाल, लेकिन इनको हटाने से मरीजों को हो रही परेशानी, स्थाई कार्मिकों की संख्या कम के चलते राजमेश से मिली थी राहत, स्थाई नर्सिंग संघ पदाधिकारियों ने दी चेतावनी, राजमेश के कार्मिकों को नहीं लिया वापस तो करेंगे बड़ा आंदोलन
@DausaPolice @DausaZee #LatestNews #RajasthanNews #RajasthanWithZee
लैब टेक्निशियन कैडर के निजीकरण, संविदाकरण और नियमित पदों के क्षरण ने हजारों प्रशिक्षित युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। समय रहते निर्णय नहीं बदले गए ��ो इतिहास एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संवर्ग के धीरे-धीरे समाप्त होने का साक्षी बनेगा, इससे दु:खुद पीड़ा कुछ नहीं है।
आदरणीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी,
राजस्थान नर्सिंग ऑफिसर यूनियन की ओर से आपका हार्दिक आभार कि आपने प्रदेश के युवाओं के भविष्य की चिंता की और यह भरोसा दिलाया कि 'डबल इंजन' की सरकार युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है।
परन्तु इसी भरोसे के साथ, यूनियन आपका ध्यान चिकित्सा विभाग में अल्प वेतन पर काम कर रहे संविदा कार्मिकों की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहती है:
ठेका प्रथा बंद हो और नियमितीकरण किया जाए: शोषणकारी ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर समस्त संविदा कार्मिकों को स्थायी/नियमित किया जाए।
भर्ती प्रक्रिया में संविदा कार्मिकों को प्राथमिकता: 13,500 नर्सिंग ऑफिसर और 15,000 पैरामेडिकल पदों पर होने वाली भर्ती को मेरिट व बोनस अंकों के आधार पर निकालकर, इन अनुभवी संविदा कार्मिकों का भविष्य सुरक्षित किया जाए।
मनमर्जी से कार्यमुक्त करन��� पर रोक: प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ को बिना किसी ठोस कारण के कार्यमुक्त कर दिया जाता है। शिकायतें करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती।
राजमेस (RAJMES) में समायोजन: जब राजमेस के माध्यम से नए कार्मिक ही लेने हैं, तो बरसों से सेवा दे रहे इन्हीं अनुभवी कार्मिकों को वहां समायोजित क्यों नहीं किया जा सकता?
उम्मीद: पंजाब की सरकार की तर्ज पर राजस्थान की 'डबल इंजन' सरकार ठेका प्रथा को बंद करके संविदा व निविदा कर्मचारियों को स्थायी करने का ऐतिहासिक काम कब करेगी?
अल्प वेतन में भी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को संभालने वाले इन चिकित्सा वीरों को आपसे सिर्फ उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आप इस मामले का संज्ञान लेंगे और जल्द ही नियमितीकरण की घोषणा कर इनके साथ न्याय करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी,आज बड़े ही दुखी मन से आपका ध्यान प्रदे�� के उन चिकित्सा वीरों की ओर आकर्षित करना पड़ रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के अधीन अस्पतालों में अपनी सेवाएं दीं, लेकिन आज उन्हें बेरोजगार कर दिया गया है।
अ��्यंत खेद का विषय है कि आपके गृह जिले भरतपुर सहित प्रदेश के कई अन्य जिलों में इन संविदा नर्सिंग ऑफिसर और पैरामेडिकल कार्मिकों को अचानक कार्यमुक्त कर दिया गया है।
हमारी मांग है आपसे : जब इन अस्पतालों में राजमेस (RAJMES) के माध्यम से नए कार्मिकों की भर्ती की ही जा रही है, तो इन अनुभवी और बरसों से अल्प वेतन पर काम कर रहे कार्मिकों को निकालने के बजाय वहीं समायोजित (Adjust) किया जाए।
माननीय मुख्यमंत्री जी, र���जस्थान नर्सिंग ऑफिसर यूनियन की आपसे मांग है कि एक तरफ आपकी सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ इन अनुभवी युवाओं को बेरोजगार किया जा रहा है। आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और गृह जिले भरतपुर सहित पूरे प्रदेश के संविदा कार्मिकों को राजमेस में समायोजित कर राहत प्रदान करें।
आज प्रदेश की चिकित्सालयों में कार्यरत संविदा नर्सिं���/पैरामेडिकल कार्मिको के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ कोई जनप्रतिनिधि माँग नहीं उठा रहा
@ml_vikas
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लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग, रेडियोग्राफर आदि का स्टॉपिंग पैटर्न 18 साल पुराना 2008का है
पद बढ़ाये नहीं
यह तो सुना था कि संविदा प्रथा को खत्म कर परमानेंट होंगे
लेकिन पहली बार हो रहा है कि परमानेंट हटाकर संविदा कार्मिक लगाए जा रहे हैं
(1.) मुख्यमंत्री जी के गृह जिले भरतपुर से लेकर बाड़मेर तक, वर्षों ���े सेवाएं दे रहे अस्थाई स्वास्थ्य कार्मिकों को एक झटके में कार्यमुक्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है। बेहतर होता कि इन अनुभवी कार्मिकों को नियमित भर्ती प्रक्रिया में उचित अवसर देकर संविदा-निविदा के दंश से मुक्त किया जाता
(2)/प्रदेश के युवाओं ने वर्तमान सरकार को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब कर्मियों को रोजगार सुरक्षा, सम्मान और न्याय की अपेक्षा है। स्वास्थ्य कर्मियों की नई नियमित भर्तियां जारी की जाने की मांग करते है।
@BhajanlalBjp@PMOIndia @bjp
हमारी सरकार ने 'राजस्थान कॉन्ट्रैक्टुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2022' बनाकर प्रदेश के संविदा कर्मियों को नियमित करने और भविष्य सुरक्षित करने का ऐतिहासिक काम किया था। लेकिन आज भाजपा सरकार उसी नियम की आड़ में युवाओं को बेरोजगार कर रही है!
मुख्यमंत्री जी के खुद के गृह जिले भरतपुर का यह हाल है कि RBM और जनाना अस्पताल से एक झटके में 171 नर्सिंग कर्मियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसके विरोध में रात भर युवा अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे रहे और कार्य बहिष्कार करना पड़ा।
NICU-PICU जैसे संवेदनशील वार्डों का स्टाफ हटाने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है और जनता परेशान है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, युवाओं के पेट पर लात मारना बंद कीजिए और इन अल्प आय वर्ग के कार्मिकों के हित में फैसला कीजिए।
@BhajanlalBjp@RajCMO@GajendraKhimsar
नीट
रीट
SI
कृषि लेक्चरर
इतनों के ��ेपर लीक
तो फिर पेपर किसके लिए ?
योग्य तो यहाँ भी अधूरी आश के साथ
फिर मेरिट बोनस में क्या दिक्कत?
कम से कम साफ सुथरी मेरिट तो दिखेगी
और योग्य को न्याय भी मिलेगा
@RajCMO@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar
कौन सा ऐसा जिला जहां हब एंड स्पोक मॉडल की गलत जांचों का प्रिंट - इलेक्ट्रानिक - सोशल मीडिया में खबर न छपी हो,
अधिकारियों द्वारा लिखित में शिकायत न की गई हो
फिर कार्यवाही क्यों नहीं?
गलत का बचाव किसके लिए?
@svoruganti1466@akhilarora93