>ब्रो का नाम अनुराग सुजानिया है
>ब्रो 2014 बैच का IPS अधिकारी है
>ब्रो वर्तमान में सागर ,मध्यप्रदेश का SP है
>ब्रो के जिले सागर में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मृत्यु हो गयी
>ब्रो 2021 में मुरैना जिले का SP था
>ब्रो के मुरैना कार्यकाल के दौरान भी अवैध शराब पीने से कई लोगों की मृत्यु हुई थी
>ब्रो को उस कांड के बाद मुरैना SP पद से हटा दिया गया था
>ब्रो और अवैध शराब का क्या रिश्ता है?
>ब्रो जहां जहां जाता है वहाँ अवैध व जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत क्यूँ होती है?
>मुझे पूरा भरोसा है कि ब्रो जवाब जरूर देगा
@CMMadhyaPradesh
Criminal Abhishek Thakur is openly admitting that the person who shot at Chandrashekhar Azad in Bulandshahr is his brother, and the shot was fired on his signal,
@Uppolice Take immediate cognizance, how long will you continue to protect criminals
This teenager died on the street that leads to his home
The officer pulled him over for rolling the stop sign, and the kid complies every step along the way until the cop reaches inside of his pants on a Terri frisk and grabs his dick.
And that scared him so he ran, and the cops shot him in the back
He ran about 40 yards like a deer and died in his own blood. 🇺🇸
A child with a very large, dark, itchy and dry mole covering his back, abdomen and leg.
This is a congenital melanocytic nevus, an often hairy birthmark that is present at birth or appears shortly afterwards.
It carries a a high risk of developing into skin cancer.
Have you seen this before? 🤔
मुंबई में सुपरकार रैली के चलते ट्रैफिक जाम।
एक महिला बेबस होकर कह रही थी:
"प्लीज़ जाने दीजिए… घर में इमरजेंसी है।"
सामने अमृता फडणवीस मुस्कुराती हुई खड़ी हैं।
VIP रैली ज़रूरी थी या उस महिला की इमरजेंसी?
🚨 BREAKING:
UN Special Rapporteur Francesca Albanese:
"My credit card doesn't work, I can't pay or make transfers; my health insurance was canceled, and I can't book hotels. I feel like Pablo Escobar. All because I said, 'Israel is committing genocide in Gaza.'"
तू तड़ाक मत बोलो सर बोलो सर मैं आम आदमी हूं, और आम आदमी के टैक्स से आपको वेतन मिलता है, गरीब आदमी से लेते होंगे 500, 1000 मै फूटी कौड़ी नहीं दूंगा आप चालान काट दो.... कार चालक ने यूपी पुलिस के दारोगा से कहा।
पहले की जेनरेशन पर मुकदमा कर दो या जेल भेज दो तो वो चुप हो जाती थी, लेकिन GenZ ऐसा नहीं करती हैं,
GenZ को जीतना चुप कराने की कोशिश किया जाएगा ये उतनी ही मजबूती से विरोध करेंगे, क्योंकि ये उल्टी खोपड़ी वाले हैं।
सीतापुर के रहने वाले उत्तम कश्यप ने अपने गांव के बदहाल स्कूल का विडियो बनाया था, जिसके बाद पुलिस रात को इसके भाई के साथ उठा ले गई।
सरकार को लगा कि अब चुप हो जाएगा लेकिन वापस आने के बाद फिर विडियो बनाकर पोल खोलना शुरू कर चुका हैं।
सरकार को GenZ से पंगा नहीं लेना चाहिए, नहीं तो ये लोग नंगा करके छोड़ेंगे।
Elle s’appelait Wafaa Akila.
Elle s’apprêtait à reprendre l’école.
Elle a été assassinée avec son père aujourd’hui par l’armée israélienne à Gaza.
Plus personne n’en parle ici en France : le génocide des Palestiniens, et en particulier des enfants, se poursuit.
रिपोर्टर: ड्राइविंग लाइसेंस बनबाने में कितना खर्चा आता है?
बाबू: टू व्हीलर 225 रुपए और टू व्हीलर+ फोर व्हीलर 425 रुपए में !
रिपोर्टर: अच्छा अभी आपके सामने लोगों से 3000 ,4000 रुपए लिए जा रहे हैं दलालों द्वारा ये क्या है?
बाबू: इनको हम नहीं जानते ये कौन लोग हैं?
रिपोर्टर: ये बाहर की दुकानों से परमानेंट दलाल आ रहे हैं इनसे आपको कोई मतलब नहीं है फिर इनको आने की परमिशन क्यों देते हैं?
बाबू: ये आते रहते हैं फॉर्म देने कौन है हम नहीं जानते ?
रिपोर्टर : फोर व्हीलर का 425 रुपए लगता है इसके अतिरिक्त कोई और चार्ज नहीं है ना कितने दिन में लाइसेंस मिल कट जाता है?
बाबू : 425 रुपए कुल सरकारी खर्च है दो तीन दिन में फोटो खिंचते ही लाइसेंस की लर्निंग जारी हो जाती है!
आज भारत के किसी भी हिस्से में बिना दलाल के कोई ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवा सकता है! 4000 दलाल लेता है जिसमें से लिपिक से लेकर RTO तक सबका हिस्सा रहता है!
यह मुखपुत्रों और शूरवीरों को क्या हो गया भाई 🔥🔥
गुजरात का हिमांशु पांचाल, फ़र्ज़ी IAS बनकर धोखाधड़ी करता था, यह इंदौर के होटल में घुसा जब पैसे देने की बारी आई तो IAS का रौब झाड़ा और कहा IAS से कैसे पैसा मांग सकते हो, जाँच हुई तो दबोचा गया,
वही दूसरी ओर तृप्ति सिंह राजपूत भी फर्ज़ी IAS बनकर लोगो से लाखों रुपए ऐंठ लिए नौकरी दिलाने के नाम पर, इसने अपने आपको मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड का एडिशनल सचिव बताया,
यह लोग मेहनत परिश्रम नहीं कर सकते इसलिए फ्रॉड करते हैं, धोखाधड़ी भ्रष्टाचार में यही लोग लिप्त रहते हैं,
यह प्रिविलेज मनु इनको देकर गया है, कुछ भी हो जाए मेहनत नहीं करना है, शोषण भ्रष्टाचार से जीवन यापन करना है, शर्मनाक।
वो ह राम खोर इतिहासकार जिन्होंने ने जाति देखकर स्वतंत्रता सेनानी बनाए,अपनी लेखनी में एससी-एसटी ब्रिटिश बागियों का नाम तक नहीं लिखा। सोचो कितना जातिवाद भरा रहा होगा।
वो तो अंग्रेजो ने भी इतिहास लिखा इसलिए पता चल रहा है।
नाम याद कर लो स्वतंत्रता सेनानी बांके चमार 🔥
उत्तर प्रदेश में 'जंगलराज' चरम पर है!
कौशांबी में 25 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद जब एक लाचार मां न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंची, तो पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया।
मृतक की मां का गंभीर आरोप है कि ग्राम प्रधान समेत अन्य दबंगों ने उनके बेटे को ज़हर देकर मार डाला। लेकिन जब पीड़िता आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने थाने पहुंची, तो न्याय देने के बजाय दारोगा ने उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दीं और घसीटकर थाने से बाहर फेंक दिया।
यूपी में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है!
मुकदमों के साथ ही अफसर अब पत्रकारो के साथ मारपीट पर उतर आए है। उन्नाव के इस वीडियो को देखिए, कैसे एक आईएएस अफसर दिव्यांशु पटेल पत्रकार पर हमला कर रहा है।
@PCITweets@PressClubDC
उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर में 4 पुलिसवालों ने ज्वेलर्स सुन्दरम क्षत्रिय की बाइक में स्मैक रख दी। फिर उसको स्मैक बेचने के जुर्म में पुलिस चौकी पर ले गए। मारपीट की। प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालने का आरोप भी है। ज्वेलर का दावा है कि पुलिसवालों को 2 लाख रुपए दिए गए, तब जाकर छोड़ा।
SP की जांच में 4 पुलिसवाले दोषी पाए गए। कांस्टेबल अरुण चित्तौड़िया, पंकज, तुषार, वीरेंद्र पर FIR दर्ज हुई। 2 सिपाही गिरफ्तार हैं, 2 फरार हैं। हालांकि पुलिस अफसरों ने पेट्रोल डालने वाली बात से इनकार किया है।
भयावह हुआ!!
इंडियन एक्सप्रेस की ये रिपोर्ट बताती है कि यूपी में नोएडा के मजदूरों के साथ क्या हुआ!!
जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल युवाओं पर से केस खत्म कर दिए गए।
मगर नोएडा में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गरीब गुरबा मजदूरों पर जबरदस्त क्रैकडाउन किया।
एक से बढ़कर एक गंभीर धाराओं में उन्हें बंद कर दिया गया।
जब ये मामले कोर्ट में पहुंचे तो योगी सरकार की कलई खुल गई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि इन गरीब मजदूरों की 222 बेल एप्लीकेशन की सुनवाई के दौरान पुलिस की थ्योरी भर भराकर गिर पड़ी।
कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा दर्ज मामलों में तीन बड़ी खामियां हैं।
एक- सिर्फ घटनास्थल पर मौजूदगी अपराध में शामिल होने का आधार नहीं।
मतलब ये कि आपने राजा को खुश करने की खातिर जो भी मौके पर मिला, उसे गंभीर धाराओं में अंदर ठूंस दिया जो कोर्ट में टिक न सका।
दो- पुलिस के पास मजदूरों के खिलाफ स्पेसिफिक एविडेंस नहीं थे।
न वीडियो था, न फोरेंसिक प्रूफ था। महज भीड़ को आरोपित कर उन्हें पकड़ लिया गया और जेलों में ठूंस दिया गया।
तीन- आम मजदूरों और आयोजकों में कोई अंतर नहीं किया गया। उठा उठाकर जेलों में ठूंस दिया गया।
पुलिस की ये सारी थ्योरी कोर्ट में भरभराकर गिर गई,
मगर सोचिए, इस बीच उन गरीब गुरबा मजदूरों के साथ क्या हुआ?
लीगल फीस और जमानत के इंतजाम में किसी का घर बिक गया, किसी की जमीन जाती रही, कोई भारी कर्जे में डूब गया।
उनका अपराध सिर्फ इतना था कि वे 10x10 के कमरे में महज 10-12 हजार रुपया महीना में घुटती अपनी जिंदगी से निजात पाना चाहते थे।
2-4 हजार बढ़कर कमाना चाहते थे!!
मगर उन्हें ये मोहलत भी न मिली।
राजा को ये बर्दाश्त न हुआ कि उनके राज में कोई सत्ता का विरोध कर दे।
फिर क्या था, राजा को प्रसन्न करने के लिए पुलिस इन गरीब गुरबा मजदूरों पर टूट पड़ी!
मैं बार बार लिख रहा हूं, नियति इन सभी पापों का हिसाब करेगी।
सत्ता के तराजू में ज़मीर बेचने वालों को भला कब माफ करेगी!!
@narendramodi@myogiadityanath
समझौता न करने पर दलित की हत्या! 💔
यूपी के हापुड़ में जातीय कुंठा एवं रंजिश के चलते हिंसक भीड़ ने दलितों के घरों में घुसकर पथराव किया, हमला किया और गोलीबारी करके एक दलित युवक की हत्या कर दी।
ज्ञात हो कि इन हैवानों ने करीब तीन महीने पहले भी दलितों पर हमला किया था। इस मामले में संदीप चौधरी समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। हमलावर लोग परिवार पर समझौते का दबाव बना रहे थे और समझौता न करने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। दलितों ने समझौता नहीं किया। इसी जातिगत रंजिश के चलते उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया। अगर पुलिस ने समय रहते दोषियों पर कार्रवाई की होती, तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।
प्रशासन से हमारी मांग है कि संदीप चौधरी, जिनेंद्र चौधरी, विपिन चौधरी, सचिन चौधरी सहित सभी हमलावरों एवं हत्यारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही, परिवार को तत्काल हर संभव सुरक्षा प्रदान की जाए।
यह अत्यंत शर्म और जाहिलियत की बात है कि जातिवादी तत्व अक्सर यह कहते हैं कि SC-ST Act के ज्यादातर मामले फर्जी होते हैं। यह घटना बताती है कि दलितों पर किस तरह समझौते का दबाव बनाया जाता है। सरकार एवं प्रशासन सही तरीके से कार्रवाई नहीं करते हैं और ये जातिवादी गुर्गे उन्हें समझौते के लिए मजबूर करते हैं। जो दलित समझौता नहीं करता, उसे इसी तरह का दंश झेलना पड़ता है।