यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के दूरदर्शी निर्माता।
आज विश्व में होने वाले समस्त रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन का लगभग आधा हिस्सा अकेले भारत में होता है। इसका कारण केवल भारत की विशाल जनसंख्या नहीं है, बल्कि एक ऐसी भुगतान प्रणाली है, जो पूर्णतः निःशुल्क है, चौबीसों घंटे वर्षभर निर्बाध रूप से कार्य करती है, और वाराणसी के एक छोटे से ठेले वाले से लेकर मुंबई के किसी कॉर्पोरेट कार्यालय तक, सभी के लिए समान रूप से सुलभ एवं प्रभावी है।
इस प्रणाली की परिकल्पना कर उसे सफलतापूर्वक विकसित एवं क्रियान्वित करने वाले अभियंता हैं— दिलीप आसबे।
प्रतिदिन UPI का उपयोग करने वाले अधिकांश भारतीयों ने सम्भवतः उनका नाम भी नहीं सुना होगा।
UPI से पहले डिजिटल भुगतान आम नागरिक की पहुँच से बहुत दूर था। जब भी किसी कार्ड से भुगतान किया जाता था, तो प्रत्येक लेन-देन पर व्यापारियों को वीज़ा (Visa) या मास्टरकार्ड (Mastercard) को 1 से 2 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ता था। ये विदेशी कंपनियाँ भारत में होने वाले प्रत्येक भुगतान से लाभ अर्जित कर रही थीं। छोटे व्यापारियों के लिए यह व्यय वहन करना अत्यंत कठिन था। बैंक हस्तांतरण (Bank Transfer) में कई घंटे लग जाते थे और वे केवल बैंकिंग कार्य-दिवसों तक ही सीमित रहते थे।
फलस्वरूप, भारत के करोड़ों लोगों के लिए नकद (Cash) का उपयोग विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता बन गया था।
मुंबई के एक इलेक्ट्रॉनिक्स अभियंता दिलीप आसबे ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्रारम्भिक दिनों में ही वहाँ कार्य करना शुरू किया। उन्होंने लगभग एक दशक तक भारत की मूल भुगतान अवसंरचना (Core Payment Infrastructure) के निर्माण में योगदान दिया, जिसमें IMPS, NEFT तथा RuPay जैसी प्रणालियाँ सम्मिलित हैं।
वर्ष 2009 तक उनकी टीम ने इस संभावना पर कार्य आरम्भ कर दिया था कि क्या आधार (Aadhaar) ढाँचे के ऊपर एक नई भुगतान प्रणाली विकसित की जा सकती है।
वर्ष 2015 तक यह स्पष्ट हो गया कि केवल IMPS प्रणाली पर्याप्त नहीं होगी। इसके बाद अप्रैल 2016 में UPI का शुभारम्भ किया गया। यह एक निःशुल्क, चौबीसों घंटे संचालित होने वाली ऐसी प्रणाली थी, जो एक साथ सभी बैंकों से जुड़ी हुई थी तथा जिसके ऊपर कोई भी एप्लिकेशन सरलता से विकसित किया जा सकता था।
शुल्क (Fee) को लेकर दिलीप आसबे का सिद्धांत बिल्कुल स्पष्ट था— “यदि उपभोक्ताओं से कोई शुल्क लिया जाएगा, तो पूरा मॉडल ही असफल हो जाएगा।”
आज UPI 675 बैंकों के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं तथा 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवाएँ प्रदान कर रहा है। यह प्रतिमाह 18 अरब (18 बिलियन) से अधिक लेन-देन संसाधित करता है, जिनका कुल मूल्य 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को “तेज़ भुगतान प्रणालियों (Fast Payments) में वैश्विक अग्रणी” (Global Leader in Fast Payments) की संज्ञा दी है।
दिलीप आसबे वर्ष 2018 से NPCI के प्रबंध निदेशक (Managing Director) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) के रूप में कार्यरत हैं।
एक मराठी सरकारी अभियंता ने, एक गैर-लाभकारी (Non-Profit) संस्था में कार्य करते हुए, 1.4 अरब से अधिक लोगों के लिए इस वित्तीय क्रांति का निर्माण किया।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस UPI के पीछे न कोई IPO है, न कोई यूनिकॉर्न (Unicorn) कंपनी—केवल UPI है।
अंत में एक संक्षिप्त किन्तु महत्त्वपूर्ण तथ्य—
नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में UPI की परिकल्पना की आधारशिला रखी गई थी, और दिलीप आसबे तथा उनकी टीम ने अथक परिश्रम करके अप्रैल 2016 में इस प्रणाली को सफलतापूर्वक प्रारम्भ किया—एक ऐसी प्रणाली, जो आज भी निर्बाध रूप से संचालित हो रही है।
अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नंदन नीलेकणी को परीक्षा प्रश्नपत्र लीक (Exam Paper Leak) की समस्या को रोकने हेतु प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। अतः यह विश्वास किया जा सकता है कि इस उद्देश्य के लिए भी एक समग्र, सुरक्षित एवं पूर्णतः लीक-रोधी व्यवस्था निश्चित रूप से विकसित की जाएगी। 🙏
दिलीप आसबे : यूपीआई (UPI) के शिल्पकार
Lamine Yamal on Lionel Messi after Spain’s FIFA World Cup triumph over Argentina.
🗣️ Lamine Yamal: “Tonight I lifted the World Cup for Spain, but I also experienced something I’ll tell my children one day. The man who once held me as a baby was standing on the other side of the pitch, fighting for the same dream. Football has a beautiful way of bringing stories full circle.”
“When I looked at Messi after the final whistle, I didn’t just see an opponent. I saw the player who made millions of kids, including me, believe football could be art. I saw the man whose videos I watched over and over, trying to copy things that nobody else could do.”
“I know this defeat will hurt him. You don’t play with that much passion, carry your country again and again, and lose a World Cup final without feeling pain. Even in defeat, he kept demanding the ball, creating chances and refusing to stop believing. That’s what champions do.”
“People will talk about Spain winning this World Cup, and they should. But they’ll also remember that, at an age when most legends have already retired, Messi was still making the world’s best defenders panic every time he touched the ball. That’s extraordinary.”
“The photo of Messi bathing me became one of football’s most iconic images. Today we took another picture together, but this time I could thank him face to face. Without players like him, kids like me wouldn’t dare dream this big.”
“One day another generation will replace mine too. That’s football. But there will never be another Lionel Messi. Records can be broken and trophies can be won, but inspiring an entire generation to fall in love with the game is something only a few people in history will ever achieve.”
“Tonight belongs to Spain. Tomorrow, the debates will continue. But my respect for Lionel Messi will never change. He didn’t need to win this final to prove who he is. For me, he’ll always be one of the greatest players football has ever seen, and sharing the pitch with him was a privilege I’ll carry for the rest of my life.”
EPFO का पासबुक पोर्टल चालू हो गया। सबसे सुखद आश्चर्य यह है कि पिछले साल का ब्याज आ गया है। यह एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन है कि इसमें देरी नहीं हुई। साथ ही, अब आवश्यकता पड़ने पर पैसा निकालना भी आसान हो गया है। केवल शिकायत समाधान एक ऐसा मुद्दा है जिस पर अब भी काम करने की ज़रूरत है।
@navneetmishra99 Par aap quality me germany wala material bolo aur wahi purana black material laga do, see EPE WPE delhi mumbai eway, u can't drive the car properly
आईपीएस अधिकारी रहे चर्चित दंपति काम्या मिश्रा और अवधेश सरोज दीक्षित की प्रेम कहानी एक बार फिर चर्चा में है।
एक इंटरव्यू में काम्या मिश्रा ने बताया कि उनके रिश्ते की शुरुआत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। उन्होंने खुलासा किया कि सबसे पहले उन्होंने ही अवधेश दीक्षित को प्रपोज किया था और घास से बनी एक छोटी-सी अंगूठी पहनाकर अपने रिश्ते की शुरुआत की थी।
काम्या मिश्रा, जो 2019 बैच की आईपीएस अधिकारी थीं, ने वर्ष 2024 में अपने पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालने के लिए सेवा से इस्तीफा दे दिया था। उनकी अंतिम पोस्टिंग बिहार के दरभंगा में ग्रामीण एसपी के रूप में रही थी।
काम्या ने बताया कि उनकी और अवधेश दीक्षित की पहली मुलाकात मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में फाउंडेशन कोर्स के दौरान हुई थी। फील्ड विजिट के दौरान मध्य प्रदेश के रतलाम में उन्होंने अपनी भावनाएं सबसे पहले अवधेश के सामने जाहिर कीं।
उन्होंने बताया कि उस समय उनके पास अंगूठी नहीं थी, इसलिए उन्होंने घास से एक छोटी-सी अंगूठी बनाकर उसे "प्रॉमिस रिंग" के रूप में अवधेश को पहनाया। बाद में हैदराबाद में प्रशिक्षण के दौरान दोनों का रिश्ता और मजबूत हुआ और आगे चलकर दोनों ने विवाह कर लिया।
काम्या ने अपने पति की तारीफ करते हुए कहा कि अवधेश बेहद शांत और संकोची स्वभाव के हैं। उनका मानना है कि यदि उन्होंने पहल नहीं की होती, तो शायद अवधेश कभी अपने मन की बात नहीं कह पाते। उन्होंने उनकी ईमानदारी, समर्पण और कार्यशैली की भी सराहना की।
यह प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों को खूब पसंद आ रही है, जहां कई लोग इसे सादगी, विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित प्रेरणादायक कहानी बता रहे हैं।
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