गजब हैं ये भाई साहब ।
दूसरों को चमचा कह रहे हैं ! जब खुद संपादक थे तो राज्यसभा की सीट के लालच में अरविंद केजरीवाल के कड़छी बन गए थे। और जब वहां से भगा दिया गया तो आजकल कांग्रेस के बेलचा बने हुए हैं। पर ज्ञान दूसरों को दे रहे हैं।
धन्यवाद @atullondhe जी!
मैं इसे गाली नहीं, सम्मान समझता हूँ।
ज्ञानेश कुमार गुप्ता —आगरा में जन्मे, IIT Kanpur से Civil Engineering। और Harvard में अध्ययन किया । 1988 में UPSC Civil Services निकालकर IAS बने।
लगभग चार दशक की public service के बाद आज देश के Chief Election Commissioner हैं।
और परिवार में merit की परंपरा देखिए—बड़ी बेटी Medha Roopam ने UPSC में AIR-10 हासिल कर IAS जॉइन किया; छोटी बेटी Abhishri IRS officer हैं।
उनके नेतृत्व में Bengal ने अपने सबसे शांतिपूर्ण चुनावों में से एक देखा और Election Commission ने करीब 95 करोड़ + मतदाताओं वाले electoral rolls पर विशाल SIR exercise की।
ऐसे disciplined, मेहनती public servant का अगर आप मुझे “भाई” कह रहे हैं—
इसे मैं compliment मानता हूँ।
ज्ञानेश कुमार गुप्ता जी का “भाई” कहलाने में मुझे कोई शर्म नहीं—सम्मान है।
जय हिन्द 🇮🇳
@afzalsabir52694@ImGauravYadav9@grok यह केवल समाजवादियों को और मुस्लिम भाइयों को लगता है।
जब तक कुछ खास समुदाय के लोग समाजवादी पार्टी को दरी बिछाकर करके भी समर्थन देते रहेंगे उनको और समाजवादियों को यही लगता रहेगा
Captain Smit Machchhar is a HERO.
In the face of the gravest danger and despite being seriously injured, he showed immense courage and an unwavering resolve to protect the lives of others.
His valour helped save hundreds of lives and avert a great tragedy.
India is proud of Captain Machchhar.
Praying for his speedy recovery, renewed strength and good health.
My salute to the Indian pilot Captain Smit Machchhar for his extraordinary bravery.
Despite being stabbed and seriously injured, he fought back, resisted, opened the cockpit door, and enabled passengers and crew to overpower the attacker — preventing a catastrophic mid-air disaster.
He saved the lives of 174 people, including Israeli citizens and other nationals.
I wish Captain Machchhar a speedy and full recovery.
He is a true hero.
साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो।
साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर।
एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली।
क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए?
आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है।
प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
मुझे आजतक ये तुलना ही नहीं समझ आई।
स्त्री पुरुष की बनावट में अंतर,प्रकृति प्रदत्त संरचना है।
हमारे भले तुम अंगोछा लपेटकर राखी बाँधो।
जब तुम्हें पुरुष की छाती और महिला की छाती में अंतर ही नहीं दिखता तो क्या कहा जाए!