@aksharmaBharat
जनपद हमीरपुर की तहसील राठ में दोपहर 1 बजे लाइट नहीं आ रही है अधिकारियों के cug नंबर switchoff है आम जनमानस त्रस्त है
ऐसे अधिकारी सरकार की छवि खराब करते हैं
सबसे अधिक भ्रष्टाचार इसी विभाग में है बिजली चोरी चरम पर हैअधिकारी मौज कर रहे हैं
सादर जयसियाराम
#NoTetBeforeRteAct
माननीय श्री राजनाथ सिंह जी रक्षा मन्त्री भारत सरकार से भेंट करके टेट के प्रकरण पर विस्तृत जानकारी दी ।माननीय जी को वार्ता के दौरान स्मरण कराया कि जब वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की 36 दिन की हड़ताल और 167 शिक्षकों की सेवा समाप्ति के बाद भी जिस समस्या का समाधान नहीं हुआ था,उसका समाधान आपने उत्तर प्रदेश में अपने मुख्य मंत्रित्व काल में किया था,जिसके चलते आज उत्तर प्रदेश के शिक्षक केन्द्र के समान वेतनमान लेते हैं ।
आज भी प्रधानमन्त्री जी के नेतृत्व में संसद द्वारा क़ानून पारित करा कर,आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता सम्बन्धी अन्याय को समाप्त किया जा सकता है ।देश के शिक्षकों को आप पर पूर्ण विश्वास है ।मेरे साथ teachers federation of india के उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी भी वार्ता में उपस्थित रहे ।
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के तहत अंडा दिया ही जाना चाहिए। इस पर विवाद बेकार है।
इस मुद्दे को केवल खान-पान की पसंद या सांस्कृतिक बहस के दायरे में नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और उनके भविष्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
अंडा प्रोटीन का सबसे सस्ता, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाला स्रोत माना जाता है। भारत जैसे देश में, जहां बड़ी आबादी आज भी कुपोषण और प्रोटीन की कमी से जूझ रही है, वहां अंडे को लेकर अनावश्यक विवाद बेकार है।
पहले राष्ट्रीय स्तर पर भी अंडों के उपभोग को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर कैंपेन चलाए जाते रहे हैं। जो कि सही था।
हमारे देश की एक सच्चाई यह भी है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। इन परिवारों की आय इतनी नहीं होती कि बच्चों के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नियमित रूप से शामिल हो सके।
ऐसे में मिड-डे मील उनके लिए बेहतर पोषण पाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन जाता है।
बचपन और किशोरावस्था वह अवस्था होती है, जब शरीर और मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है। इस दौर में प्रोटीन की कमी बच्चों की सीखने की क्षमता, एकाग्रता, शारीरिक विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। यदि स्कूलों में सप्ताह में कुछ दिन भी अंडा उपलब्ध कराया जाता है, तो यह लाखों बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
निश्चित रूप से जिन बच्चों या परिवारों को धार्मिक, सांस्कृतिक या व्यक्तिगत कारणों से अंडा नहीं खाना है, उनके लिए वैकल्पिक पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन कुछ लोगों की पसंद या सांस्कृतिक समझ के आधार पर सभी बच्चों को इस पोषण से वंचित करना उचित नहीं है।
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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महानिदेशक स्कूल शिक्षा के पत्र में चौथे नंबर पर स्पष्ट लिखा गया है की ग्रीष्म अवकाश या शीतावकाश में सक्षम अधिकारी (शासन स्तर /राज्य स्तर) के आदेश पर कार्य करने पर उपार्जित अवकाश मिलेगा।
इस समय हम लोग ग्रीष्म अवकाश में सक्षम अधिकारी के आदेश पर जनगणना का कार्य कर रहे हैं।
इस तरह हम लोगों को अर्जित अवकाश मिलना चाहिए।
अगर अर्जित अवकाश देय नहीं है तो ,किन वजहों से देय नहीं हो सकता है?
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता जी (Deepanker Datta) ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए कोई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
भारत में उच्च न्यायपालिका (HC/SC) के जजों की नियुक्ति Collegium प्रणाली से होती है, न कि किसी प्रतियोगी परीक्षा से। बार से practicing advocate को सीधे हाईकोर्ट जज बनाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति दत्ता जी 1989 में LLB पास कर advocate बने, ~16 साल वकालत की (कलकत्ता HC सहित)। 2006 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया (बार से elevation)। 2020 में बॉम्बे HC के Chief Justice और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
यह सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।
@Saurabh_Pinch इतनी भीषण गर्मी में रात को रोस्टिंग के नाम पर अनावश्यक कटौती दिन में रोस्टिंग के नाम पर अनावश्यक कटौती बाकी जो लाइट आती है उसमें ट्रांसफॉर्म कहीं जल गया कहीं फेस चला गया आए दिन लाइट की समस्या बनी रहती है राठ हमीरपुर में अधिकारी कोई फोन नहीं उठाते हैं नहीं ना कोई उत्तर देते हैं
हमारे मीडिया के बंधु भी आदरणीय मुख्यमंत्री जी के इस वक्तव्य का अनुसरण करेंगे और आगे आने वाली समय में किसी विद्यालय से बच्चों के श्रम दान जैसी खबरें मिलने पर विद्यालय के स्टाफ का मनोबल और उत्साह बढ़ाने का कार्य करें।
आदरणीय मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद
कर्तव्य पथ पर अग्रसर उत्तर प्रदेश का शिक्षक हमेशा शासन के साथ खड़ा रहता है। दिल्ली और मध्य प्रदेश की तर्ज पर इस बार मकान जनगणना ड्यूटी के बदले हमें भी अर्जित अवकाश (EL) की संस्तुति प्रदान की जाए।
#UP_शिक्षकों_को_EL_दो@myogiadityanath@UPGovt@CMOfficeUP
गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट की अनिवार्यता के संबंध में दिनांक 1 सितम्बर 2025 को दिये गये निर्णय के बाद इस मुद्दे पर संघ द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में सबाल करने वाले साथियों को हमने सदैव कहा कि लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है ।हमारी समस्या का निराकरण संसद द्वारा ही होगा ।इसलिए टीएफआई द्वारा देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंप कर अपनी बात संसद तक पहुँचायी गई ।संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और समस्या के निराकरण की मांग की ।टीएफआई द्वारा सभी जनपदों के मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मा प्रधान मंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किये गये ।
टीएफआई द्वारा 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करके भारत सरकार तक अपनी बात पहुँचाई गई ।रैली में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी को आमंत्रित किया गया और श्री पाल साहब ने आपकी लाखों की उपस्थिति और आप के मुद्दे की जानकारी सरकार तक पहुँचाई ।
माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी , भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष
श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर उच्च स्तरीय वार्ता एवं निराकरण की मांग की गई ।
चूँकि आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया है इसलिए कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ना आवश्यक है ।रिव्यू स्वीकार होने पर ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए टीएफआई ने सीनियर एडवोकेट श्री पी एस पटवालिया एवं श्री वी गिरि जी को कोर्ट में उतारा ।श्री पटवालिया जी ने टीएफआई के महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर के राज्य संगठन अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के रिव्यू में तथा श्री वी गिरी जी द्वारा उ प्र प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य के नाम से दाखिल रिव्यू में अपना पक्ष रखा ।जिसको आप वीडियो में देख सकते हैं ।
सुनवाई के दौरान सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने भारत सरकार (श्री मनमोहन सिंह सरकार)के दौरान संसद द्वारा आरटीई एक्ट के लागू होने पर दिनांक 23 अगस्त 2010 के द्वारा इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट देने का तर्क दिया गया ।लेकिन जज साहब भारत सरकार (श्री मोदी सरकार) के दौरान संसद द्वारा पारित किए गए संशोधन के क्रम में निर्गत राजपत्र दिनांक 10 अगस्त 2017 के द्वारा 31 मार्च 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टेट परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करने पर ही अडिग दिखे ।
सुनवाई के दौरान 10 राज्य सरकारों के अधिवक्ता मौजूद थे लेकिन किसी ने भी यह स्वीकार नहीं किया कि गत 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों पर टेट लागू करने हेतु कोई भी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया है ।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है जिसके शीघ्र ही आने की उम्मीद है ।वकीलों का अपना मत है लेकिन हम कामना करते हैं कि निर्णय आपके पक्ष में हो ।
निर्णय अनुकूल होने पर सभी को बधाई और यदि प्रतिकूल हो तो हतोत्साहित न हो ।हम अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ेंगे और श्री मोदी सरकार से कहेंगे कि जो पाप/अन्याय /संशोधन आपकी सरकार के दौरान हुआ है ।ऐसे संशोधन को वापस लेकर देश के 25 लाख शिक्षकों के करोड़ों परिजनों के साथ न्याय करें ।🙏🙏