नही मिलना कभी मुमकिन
मगर तुम साथ हो मेरे,
जो मिलकर भी नही मिलते
वही एहसास हो मेरे।
तुम्हारी यादों का दरिया
मेरे दिल मे समाया है,
कभी आंखों में बन आसूँ
नज़र सागर सा आया है।
जगा था, रात भर मैं तो
चाँद भी मुस्कराया था,
कहाँ मिलते हैं रात और दिन
कहानी गुनगुनाया था।
#सागर#सरस#पहल
कह दोगी तुम अगर
परिधियों में बंधा है प्यार तेरा
मैं उन्मुक्त चला जाऊँगा निज डगर
कह दोगी तुम ठहर
वीथियों में खोया है प्यार तेरा
मैं #अतृप्त कंठ प्यासा है अधर
कह दोगी तुम सहर
मारीचिका-सा है प्यार तेरा
मैं गीत-सा गूंजता रहूँगा बन भर्मर.....!!!!!!!!!
#��ागर
#सरस
#पहल
जब #हम_तुम मिले थे कहीं किसी मोड़ पर,
प्रेम अंकुर फूटे थे इस गठजोड़ पर।
#हम ना भूलेंगे पहली मुलाकात को,
आंखों आंखों में बा���ें हुयी रात को।
तार दिल के मेरे तब झंकृत हुये थे,
परिणय के पुष्प मन में तब पुष्पित हुये थे।
#सागर
#सरस
#पहल
#प्रेम ना तो
कोई दे सकता है
और
ना कोई ले सकता है
#प्रेम तो निरंतर
प्रवाहित होता रहता है
जिसमें कोई तो
गोता लगाता है,
कोई किनारे पर खड़ा रहता है
नहीं रुकता #प्रेम कभी भी
कभी थमता भी नहीं
बिना #संवाद के भी
जारी है
निरंतर #संवाद#मौन की भाषा
पढ़ती हैं आंखें,
#मौन के #संवाद#सरस#पहल
सोच में अक्सर गुम रहते है
ठहर जाते हैं लिखते लिखते
आँसू भी बेहिसाब गिरते है
खुद को बेहिस बेचते बेचते
वे मिरे सारे पुराने ज़ख्म
उखड़ जाते है टिकते टिकते
सस्ती हो चली साँसें सच में
बिखर जाते है बिकते बिकते
..कमल पुंडी़र
#बज़्म#���रस #शायरांश
#काव्य_कृति
#हिंदी_शब्द @jiplibrary