बैंक में जो भी ग्राहक आते हैं उनमें हर दुसरा ग्राहक कुछ न कुछ इमेरजेंसी लेके आता है, और बिजी तो वो इतना होता है कि 5 मिनट वेट करने में उसका करोड़ों का नुक़सान हो रहा हो। और जब स्टाफ़ लंच के लिए उठने वाला होता है तब तो लगभग 90% ग्राहक इमेरजेंसी ग्राहक बन जाते हैं। अगर सच में स्टाफ़ हर ग्राहक की बात पर भरोसा करके काम करता रहे तो वो कभी लंच कर ही नहीं पायेगा। क्योंकि उनमें से 99% फ़ेक इमेरजेंसी होते हैं। इसलिए लंच का एक फ़िक्स समय निर्धारित किया जाये जिससे ग्राहकों और बैंक कर्मियों दोनों को कोई परेशानी ना हो।
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