आरक्षण भीख ही है:
१. मेरिट पर सीट ले नहीं पाते, कोई छोड़ता है तब मिलता है
२. फॉर्म का दाम कम, हॉस्टल-कोर्स फी फ्री, सवर्णों के टैक्स के पैसे से सब्सिडाइज होता है
३. फ्री कोचिंग भी भीख ही है क्योंकि टैक्स का पैसा जाता है
४. हर स्तर पर जितनी भी आर्थिक छूट है, वह भीख ही है जो मेरे जैसे टैक्सदाताओं के पैसे से दी जाती है।
जाति का सर्टिफिकेट माँगने वाले, स्वयं की जाति को 'बैकवर्ड' में सम्मिलित करने के लिए आंदोलन करने वाले कह रहे हैं कि आरक्षण किसी की दया नहीं है! वर्तमान रूप में, दया ही है, भीख ही है, बैसाखी ही है! कमाने वाले सवर्ण जिस दिन टैक्स देना बंद कर देंगे, तुम्हारी फ़ीस सरकार अपनी जेब से नहीं भरेगी। इसलिए, कृतज्ञता दिखाओ, बकचोदी मत करो।
ट्रेन में कोई कोना नहीं होता। मुसलमान आने-जाने के रास्ते केपी ब्लॉक करते हैं, ट्रेन में भी, सड़कों पर भी। कांवड़ियों की सारी सीट है, हिंदू बैठे हैं, बोल-बम का नारा लगा रहे हैं, तुम्हें क्यों पेट में दर्द हो रहा है? तुम्हारे मस्जिद में या मक्का की फ्लाइट में तो बोल-बम नहीं बजा दिया ना? हिंदू अपने देश में ट्रेन में नाचे नहीं कह कि कोई मुल्ला नाराज़ हो जाएगा! कहाँ है यहाँ कोई मुल्ला?