कहीं काँटे बहुत सारे कहीं तूफ़ान ज़्यादा है ।
हमारा रास्ता लगता भले आसान ज़्यादा है ।
रहे अपने मुताबिक़ तू इसी में फ़ायदा होगा -
हमारे जैसा होने में तेरा नुक़्सान ज़्यादा है ।
----------------------- Sangeet Pandey
एक ख़याल ऐसा भी -
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कभी इंकार ले डूबा, कभी इक़रार ले डूबा ।
कहीं हैं नफ़रतें हावी, किसी को प्यार ले डूबा ।
डुबाता और कोई तो, न होता ग़म मगर मेरी -
कहानी को कहानी का, अहम किरदार ले डूबा ।
--------------------------------- Sangeet Pandey
रही एहसास की शिद्दत ख़यालों में न ख़्वाबों में ।
हमारी हसरतें हों क़ैद जैसे किन अज़ाबों में ।
वफ़ा ईमान की बातें लगें सब आज बेमानी -
मोहब्बत दफ़्न हो कर रह गई केवल किताबों में ।
संगीत पाण्डेय
#मुक्तक
मोहब्बत इश्क़ की मुझको, न चाहत प्यार लिखने की ।
न पायल की कभी छन-छन, न कंगन हार लिखने की ।
लिखूँ श्रृंगार फ़ुर्सत ही, नहीं मिलती कभी इतनी -
पड़ी है इस क़दर आदत, मुझे अंगार लिखने की ।
---- Sangeet Pandey
अपनी आवाज की लरजिश पे तो काबू पालो,
प्यार के बोल तो होंठो से निकल जाते हैं।
अपने तेवर तो संभालो के कोई ये ना कहे,
दिल बदलते हैं तो चेहरे भी बदल जाते हैं।