पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने की आशंकाओं के बीच भारत सरकार ने देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को Panic Buying की आवश्यकता नहीं है।
सरकार ने छोटे सिलेंडरों की पहुंच आसान बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब 5 kg वाले FTL (Free Trade LPG) सिलेंडर खरीदने के लिए किसी Address Proof की जरूरत नहीं होगी। ग्राहक किसी भी वैध पहचान पत्र को दिखाकर गैस वितरकों से इसे खरीद सकते हैं। यह कदम विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों और उन लोगों के लिए उठाया गया है जिनके पास स्थायी पते के दस्तावेज नहीं होते।
#LPG #FuelSupply #NoPanicBuying #StraitOfHormuz #MiddleEastTensions
एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया।
नेहरू ने श्रेय ले लिया।
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया।
इतिहास की किताबें लिखती हैं “नेहरू ने AIIMS बनाया”।
यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है।
Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।
AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।
AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने
जमीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया
जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।
वह ज़मीन, जिसका जिक्र कभी नहीं होता
AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती जमीन पर खड़ा है।
यह जमीन:
न सरकार ने खरीदी
न अधिग्रहित की
यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी
जो उन्होंने दान में दी।
आज के मूल्य पर यह जमीन हजारों-हजार करोड़ रुपये की है।
कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।
वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था
आजादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।
कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी सिर्फ नारे थे।
तब अमृत कौर ने:
न्यूजीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाय
उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था की
अगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की जरूरत ही क्यों पड़ती?
वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रही
AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।
उन्होंने लड़ाई लड़ी:
अफसरशाही की सुस्ती से
मंत्रिमंडल की उदासीनता से
कांग्रेस की ढिलाई से
फाइलें चलीं क्योंकि उन्होंने जबरदस्ती चलवाईं।
नेहरू ने वास्तव में क्या किया?
पहले से बने काम को मंजूरी दी
भाषण दिए
फीते काटे इसे संस्थान-निर्माण नहीं कहते।
इसे ऑप्टिक्स कहते हैं।
कांग्रेस ने उन्हें क्यों भुला दिया?
क्योंकि यह सच तीन मिथक तोड़ देता है:
कांग्रेस ने भारत बनाया
नेहरू ने संस्थान खड़े किए
सत्ता = योगदान
AIIMS इन सबका उल्टा प्रमाण है।
एक शाही महिला ने
अपनी विरासत जनस्वास्थ्य के लिए कुर्बान कर दी।
कांग्रेस ने श्रेय हड़प लिया।
हकीकत
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने सिर्फ नामपट्टिका लगाई।
बलिदान किसी और का।
इश्तिहार कांग्रेस का।
सबके मन में सवाल ये है कि ये जंग कब तक चलेगी? ईरान भी जानता है कि उसके पास इतनी ताकत नहीं बची है कि वो इस लड़ाई को ज्यादा दिन जारी रख पाए. उसकी रणनीति पश्चिमी एशिया के मुल्कों को डराने की है ताकि वो अमेरिका पर इस जंग को खत्म करने के लिए दबाव डालें.
इजराइल को सुरक्षा का पूरा आश्वासन मिले और अमेरिका का ईरान पर अपना दबदबा कायम हो, तभी ये जंग खत्म होगी. https://t.co/AvETp5fuHy
नन्हे रामभक्त ने राम मंदिर ध्वजारोहण पर पढ़ी कविता।।
जय श्री राम 🙏 श्री गणेश
#ConstitutionDay Temple
Retire Ukraine to Russia Collar
Strong Roots Value Education
Kash Patel Witkoff
ये संयोग है या देवयोग ?
@narendramodi जी ने 1990 में श्री लाल कृष्ण आडवाणी के राम रथ यात्रा का प्रबन्धन किया
@myogiadityanath का राम मंदिर के विषय पर ही अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ से पहली बार मिलना हुआ । उनके दादा गुरु महंत दिग्विजय नाथ और उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ राम मंदिर आंदोलन में अग्रणी रहे।
राम लाला भी शायद इन्ही दोनों के केंद्र व उत्तर प्रदेश में सत्तासीन होने ही प्रतीक्षा में थे
जय श्री राम 🙏
स्वर्गीय अटल जी ने सदन में कांग्रेसियों को बहुत
समझाया था की जितना लड़ना है बीजेपी से लड़िये
लेकिन “राम से मत लड़िये” — फिर भी नहीं माने
राम से जो भी लड़ा--उसकी हार के साथ दुर्गति ही हुई
हर विपक्षी और चमचे वीडियो दिखाइये
जय श्री राम !!
भाजपा परिवार के अभिवावक एवं हम सभी कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक, देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आदरणीय आडवाणी जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र समर्पण, सिद्धांतनिष्ठा और संगठन के प्रति अद्वितीय प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा है। उन्होंने न केवल भाजपा को एक सशक्त वैचारिक आधार प्रदान किया, बल्कि जन-जन में राष्ट्रहित की भावना को प्रज्ज्वलित किया। उनका त्याग, अनुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व हर कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी से प्रार्थना है कि आदरणीय आडवाणी जी को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन प्रदान करें।
यह असली वन्देमातरम गीत है जो 150 साल पहले लिखा गया था. यह मैंने आज पहली बार इसे पूरा देखा और सुना है. आज से पहले इसके अधूरे स्वरूप को ही देखा सुना गाया था. स्कूल में अधूरा ही गाया जाता था.
सेकुलरिज्म ने इस देश का कितना नुकसान किया है.
वन्देमातरम के वास्तविक स्वरूप को देखकर समझ आया कि क्यों मुल्ले वन्देमातरम नहीं गाते.
★ अकबर महान !
★ औरंगज़ेब सर्व शक्तिमान !!
★ शाहजहाँ प्यार की पहचान !!!
परेश रावल साहब आपने ....
दिल किडनी फेफड़ा लिवर
सब जीत लिया
अपने इस डायलॉग पर
🫣💥🫣🔥🫣💥
🚩🙏🏻 सनातन धर्म की जय हो 🙏🏻🚩
इस महिला ने दुनिया भर के करोड़ों प्रवासियों की ओर से, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी.वांस से इमिग्रेशन और धर्म को लेकर स्पष्ट और सीधा सवाल पूछा — जो सवाल शायद भारतीय मूल के बड़े-बड़े CEO और पावरफ़ुल लोग भी आमने-सामने नहीं पूछ पाए।
“मैं आपसे यह पूछना चाहती हूँ कि आपकी पत्नी ईसाई नहीं हैं, और मैंने अभी उनके बारे में पढ़ा कि वे खुद को हिंदू मानती हैं।
आप दोनों के तीन बच्चे हैं, जो एक ऐसे परिवार में पले-बढ़ रहे हैं, जहाँ संस्कृति, नस्ल और धर्म सब मिश्रित हैं।
तो मेरा सवाल यह है —
आप अपने बच्चों को कैसे सिखाते हैं कि वे आपके धर्म को अपनी माँ के धर्म से ऊपर न रखें?
या फिर आप उन्हें कैसे बताते हैं कि आपके पूर्वज, जो अमेरिका में कुछ सौ सालों पहले या कुछ पीढ़ियों पहले आए, वो उनकी माँ की ओर के पूर्वजों से ज़्यादा सही या बेहतर हैं ?
और जब आप कहते हैं कि अमेरिका में बहुत ज़्यादा प्रवासी आ गए हैं — तो यह संख्या किसने तय की? कब यह फैसला लिया गया कि अब काफ़ी लोग आ चुके हैं ?”
“आप लोगों ने हम जैसे लोगों को यहाँ आने का सपना दिखाया। हमने अपनी जवानी, अपना पैसा, अपनी मेहनत इस देश में लगाई — और अब आप कह रहे हैं कि हम ही ज़्यादा हो गए?
हमने आपसे कुछ मुफ़्त नहीं माँगा।
हमने काम किया, टैक्स चुकाया, योगदान दिया।
तो अब आप कैसे कह सकते हैं कि
हम यहाँ ज़्यादा हो गए या हमें अब यहाँ नहीं रहना चाहिए?
हम यहाँ कानूनी रूप से आए,
आपकी नीतियों, प्रक्रियाओं और फ़ीस का पालन किया —
अब आप कह रहे हैं कि हम फिट नहीं होते ?”
“और एक बात —
आप बार-बार ईसाई पहचान की बात करते हैं।
लेकिन मैं खुद ईसाई नहीं हूँ,
फिर भी मैं यहाँ अमेरिका से प्यार और समर्थन दिखाने बैठी हूँ।
तो फिर ऐसा क्यों है कि इस देश से प्यार करने के लिए ईसाई होना ही शर्त बन जाती है?
क्यों बार-बार यह सवाल उठता है कि जो ईसाई नहीं हैं, क्या वे सच में अमेरिकी नहीं हैं ?”
“मैं यह सब पूरे सम्मान के साथ पूछ रही हूँ।
मेरा उद्देश्य कोई विवाद खड़ा करना नहीं है,
लेकिन ये सवाल ज़रूरी हैं।”
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