Giving birth to 9-10 kids is Allah's blessing, and if those kids can't find job, remain illiterate or become terrOrist
then it's Modi's fault.
If good happens its coz of Allah bullah, if bad happens blame Modi Modi.
Rip logic 🙏🏿🙏🏿🙏🏿
Don't mess with me, Marxist Anand Mangnale.
I have your entire Kundali.
You were working with Iron Sharmila, who made false allegations against our army.
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Ram is the history of India 🇮🇳
Everyone who lives in this sacred land should say Jai Shri Ram
Whether they are Hindu, Muslim, or christian it doesn’t matter
Here’s a glimpse into Pratham Sankalp, an evening that marked the beginning of our journey from Bharat to the World. 🏹
@malhotra_namit's Ramayana
Directed by @niteshtiwari22
In cinemas, globally - Diwali 2026 & 2027
Doomsday arrives December 18th.
Experience Avengers: Doomsday on bigger, brighter, & more immersive screens. Tickets are now on sale exclusively for Infinity Vision certified theaters: https://t.co/2HHPv9pj8t
राजनीति से असहमति रखिए, राजनेताओं की आलोचना कीजिए, सत्ता से प्रश्न पूछिए, क्योंकि लोकतंत्र का प्राण ही प्रश्न है। लेकिन जब आपका विरोध उस मर्यादा तक पहुँच जाए जहाँ आप राम जैसे आदर्श को ही अपना शत्रु मान बैठें, तब समझ लीजिए कि संघर्ष बाहर नहीं, भीतर शुरू हो चुका है। तब समस्या किसी दल, किसी सरकार या किसी विचारधारा की नहीं रह जाती, बल्कि उस चेतना की हो जाती है जो अपने ही सांस्कृतिक आधार को काटने लगती है।
राम केवल एक नाम नहीं हैं। वे भारतीय मानस में मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, संयम और न्याय के प्रतीक हैं। कोई उन्हें भगवान मानता है, कोई आदर्श पुरुष, कोई सांस्कृतिक धुरी, तो कोई महाकाव्य का नायक। मतभेद हो सकते हैं, व्याख्याएँ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन किसी भी सभ्यता के मूल प्रतीकों के प्रति घृणा पाल लेना उस सभ्यता से अपने संबंध को ही कमजोर कर देता है।
पौराणिक कथाएँ बार-बार यही बताती हैं कि जिनके भीतर अहंकार ने विवेक को निगल लिया, उन्होंने अंततः स्वयं अपना विनाश लिखा। रावण जैसा महाज्ञानी भी अपने ज्ञान से नहीं, अपने अहंकार से पराजित हुआ। हिरण्यकशिपु ने स्वयं को सत्य से ऊपर समझा, कंस ने भय में निर्दोषों का रक्त बहाया, शिशुपाल ने अपनी कटुता को ही अपनी पहचान बना लिया। उनके पतन का कारण केवल किसी देवता का विरोध नहीं था, बल्कि वह अहंकार था जिसने उन्हें मर्यादा, करुणा और धर्म के अर्थ से दूर कर दिया।
इसलिए यदि कोई राम के नाम पर हिंसा करे, अन्याय करे या घृणा फैलाए, तो उसका विरोध होना चाहिए। पर यदि विरोध इस रूप में बदल जाए कि राम का नाम ही उपहास का विषय बन जाए, तो वह विचार नहीं, प्रतिक्रिया बन जाता है। प्रतिक्रिया क्षणिक विजय दे सकती है, लेकिन समाज को स्थायी विभाजन की ओर भी ले जा सकती है।
इतिहास और मिथक दोनों यह संकेत देते हैं कि जो समाज अपने सांस्कृतिक प्रतीकों को केवल राजनीतिक चश्मे से देखने लगता है, वह धीरे-धीरे अपनी स्मृति खो देता है। स्मृति खोने वाला समाज केवल भूगोल बचाता है, आत्मा नहीं।
राम से लड़ने का अर्थ किसी मूर्ति से लड़ना नहीं है; यदि कोई राम को मर्यादा, सत्य, वचनपालन और लोककल्याण के आदर्श के रूप में देखता है, तो उन मूल्यों का तिरस्कार अंततः समाज को ही कमजोर करता है। विचारों से मतभेद रखिए, सत्ता से सवाल पूछिए, किसी भी व्यक्ति की आलोचना कीजिए, पर अपने विवेक को कटुता का बंधक मत बनने दीजिए।
सभ्यताओं का निर्माण शस्त्रों से कम और प्रतीकों से अधिक होता है। प्रतीकों को तोड़ना सरल है, उनके स्थान पर वैसी ही प्रेरणा खड़ी करना अत्यंत कठिन। इसलिए विरोध कीजिए, पर विवेक के साथ। असहमति रखिए, पर मर्यादा के साथ। क्योंकि जब संघर्ष आदर्शों से नहीं, केवल घृणा से संचालित होने लगता है, तब उसका परिणाम किसी एक व्यक्ति या एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों के विचार, संवाद और सामाजिक विश्वास पर भी पड़ता है।
यही कारण है कि भारतीय कथाओं में बार-बार ये संदेश मिलता है कि अहंकार का दंड केवल व्यक्ति नहीं, उसके वंश, उसके राज्य और उसके भविष्य तक पहुँच सकता है। इस कथन का आशय किसी शाब्दिक श्राप से नहीं, बल्कि ये स्मरण कराना है कि कटुता और विभाजन के बीज बोए जाएँ तो उनके परिणाम आने वाली पीढ़ियाँ भी भुगत सकती हैं।
राम से नहीं, अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और अज्ञान से लड़िए। वही सबसे बड़ा रण है, और उसी की विजय सबसे कठिन। 🙏
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
अर्थात् जो संकटों का नाश करने वाले, समस्त संपदाओं के दाता और समस्त लोकों को प्रिय हैं, उन श्रीराम को बार-बार प्रणाम करता हूँ। 🙏❣️
राघवेन्द्र चतुर्वेदी 🔥
47 tribals returned to Sanatan Dharma in Ghar Wapsi ceremony in Dang, Gujarat.
They performed Hindu rituals and puja at Jalebi Hanuman Mandir after leaving Christianity.
Update: We have legally intervened in the ongoing matter in Supreme Court where a bench recently made remarks that 15-18 is age of experimentation and should not necessarily result in POCSO on adult partners.
Petitions filed. Hearing likely today
Will share updates. It’s a most crucial fight. @sewanyaya #ageofconsent
Yes, I Barkha Trehan am the woman who threw ink on that radical Urban Naxal Abhijeet Dipke because he laughed when my Prabhu Shri Ram Ji was insulted on his Cockroach Janta Party stage.
I am a Kattar Hindu. I was very upset. This was my protest and I am proud of it.
Jai Hind. Jai Shri Ram 🙏
Many Congratulations to my friends @yamigautam & @AdityaDharFilms for 3 major National Awards announced today for our film Article 370. As a consultant for the film, feel thrilled.
Best Actress - Yami Gautam
Best Feature Film - Article 370
Best Music Director - @shashwatology
Big hug to Director @AdityaSJambhale and @monalthaakar. 🤗
This is just the beginning!