चोबिस वे अंतिम दिगंबर जैन तीर्थंकर जी भगवान वर्धमान महावीर जी की मोक्षभूमी पवित्र पावापुरजी को पुनश्च पावानगर किया गया है.
धन्यवाद योगी आदित्यनाथ जी.
सत्यमेव जयते.
वंदेमातरम्.
अंबाजी माता की जय.
जयतु अखंड भारत.https://t.co/AdPPjDPmMf
@Jain_Itihaas@72jinalay भगवान बाहुबली जी एवम् प्रथम दिगंबर जैन तीर्थंकर जी भगवान ऋषभदेव जी को मोक्षप्राप्ती पश्चात चक्रवर्ती भरतेश्वर जी ने चैत्र शुद्ध प्रतिपदा के दिन पवित्र जिनचक्र मार्गक्रमित किया था, वह द्विवर्तुलोंका था. अंतस्थ छोटा वर्तुल भगवान बाहुबली जी का प्रतिक था और बहिस्त बडा वर्तुल
@ocjain4 सब अपने कब्र खोद रहे है जो स्त्रियोंपर निर्बंध लादनेवालोंकी इस प्रकार मदद कर रहे है.
सत्यमेव जयते.
वंदेमातरम्.
अंबाजी माता की जय.
जयतु अखंड भारत
प्रथम दिगंबरजैन तीर्थंकरजी भगवान ऋषभदेवजी के एवम् चक्रवर्ती भरतेश्वरजी- द्वितीय एवम् तृतीय तीर्थंकरजी के नामोल्लेख पवित्र ऋग्वेद,शिव,विष्णू,भागवत,स्कंद मार्कंडेय आदी अतिप्राचीन पुराणोंमे आदरपूर्वक है
जब भारत दिगंबरजैन विचारोंका सन्मान करता तब उन्नत होता है.https://t.co/muzD7AtbpX
After eight century nearly 1008 Digambar Jain temples and stups are confiscated by the others, since then downfall of India -Bharat has started, unity of Bharat was broken and Bhartiya started fighting with each others. So defeated by fistful of Arab and British invaders.
Padmaja Joshi, a television anchor and journalist known for her work in Indian media feels Jains and Buddhist should also reclaim their place of worship ! What does a Common Jain feel.
Converting towards pure vegetarianism is one step towards Jain culture. Being strict vegetarian is an identity of Jains and the great Bhartiya spirituality.
Satyamev Jayate.
Vandemataram.
Ambaji mata ki jai.
A Muslim woman who gave up non veg chants namokara mantra promote unity in diversity way of life.
ನಮೋಕಾರ ಮಂತ್ರವನ್ನು ಹೇಳಿ ಮಾಂಸ ತ್ಯಾಗ ಮಾಡಿದ ಮುಸ್ಲಿಂ ಮಹಿಳೆ ವಿವಿಧತೆಯಲ್ಲಿ ಏಕತೆಯನ್ನು ಸಾರಿದರು.
This is nothing but the violation of NON VIOLATION principle of the great Bhartiya spirituality. Protection of every creature is the prime thing of the Jain principles Government should not call for such inhuman tender.
Satyamev Jayate.
Vandemataram.
माननीय @RajCMO एवं@CollectorBan जी, बांसवाड़ा स्थित पवित्र तीर्थ स्थल 'अंधेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर' के तालाब में मत्स्य पालन का टेंडर निकालना करोड़ों जैन धर्मावलंबियों की आस्था पर चोट है। यह स्थल अहिंसा और शुद्धता का प्रतीक है। कृपया इस टेंडर को तुरंत निरस्त करें। #SaveAndheshwarTirth
#BanswaraFisheriesTender
#AhimsaParmoDharma
#JainTirthSanrakshan
#AndheshwarJiBanswara
#RajasthanGovernment
#NoFishingInHolyPond
#AndheshwarPashwanath
अतिप्राचीन काल से दिगंबर जैन संस्कृतीने सृष्टी निर्माणको स्वयंसिद्ध माना है और कहा है की सृष्टी का कोई निर्माणकर्ता, पालनकर्ता एवम् विनाशक नही है. जैनोंके तीर्थंकर जी मानव है, जो केवल सदाचार की सिख देते है. वे कोई भौतिक वस्तूए नही देते बल्की आध्यात्मिक उन्नती का मार्ग दिखाते है.
यह है श्री दिगंबर जैन मंदिर संघी जी, जो जयपुर के प्रसिद्ध किशनपोल बाज़ार चौकड़ी मोदी खाना क्षेत्र में बना हुआ है। आज अधिकतर लोग केवल सांगानेर के संघी जी जैन मंदिर के बारे में जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि पुरानी जयपुर नगरी में भी श्री दिगंबर जैन मंदिर संघी जी के नाम से यह प्राचीन और ऐतिहासिक जैन मंदिर मौजूद है।
चौकड़ी मोदी खाना केवल एक मोहल्ला नहीं, बल्कि जयपुर की प्राचीन जैन विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहाँ आज भी अनेक प्राचीन जैन मंदिर स्थित हैं, जो अपनी अद्भुत नक्काशी, भव्य स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं।
पुराने समय में यह क्षेत्र जैन समाज की समृद्धि, धर्म और व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता था। जयपुर रियासत के दौरान कई जैन दीवान, व्यापारी और प्रतिष्ठित परिवार इसी क्षेत्र से जुड़े हुए थे। जैन समाज ने जयपुर की आर्थिक व्यवस्था, व्यापार और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इन मंदिरों की दीवारें आज भी उस गौरवशाली इतिहास की कहानी सुनाती हैं। संकरी गलियों में स्थित ये प्राचीन मंदिर अपने भीतर शांति, आध्यात्मिकता और सदियों पुरानी परंपराओं को संजोए हुए हैं।
समय के साथ बड़ी संख्या में जैन परिवार यहाँ से अन्य स्थानों पर चले गए, लेकिन इन मंदिरों की भव्यता आज भी वैसी ही बनी हुई है। यह स्थान केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि जयपुर की जैन धरोहर, इतिहास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
#Jainism #History
There are mentions of first digambar Jain Tirthankar ji Rishabh dev ji, Chakravarti Bharteshwar ji, Second , third Tirthankar ji and 22nd Tirthankar ji in sacred Rigved, Shiv, Vishnu, Bhagwat, Scand and Markandeya puranas. Bharat name has been came from Chakravarti Bharteshwar ji
भारत पुनश्च अपने भव्य दिव्य भूतकाल की ओर मार्गक्रमण कर रहा है.
जहां पवित्र दिगंबर जैन मूर्तीयोंका सन्मान-पूजा होती है वहां पवित्र गोमाता सर्वसामान्य स्त्री एवम् समस्त प्राणीमात्र सुखी सुरक्षित होते है. भारत एवम् मानवजात आध्यात्मिक, वैचारिक दृष्टिकोन से उन्नत होने से समता होती है
NCERT ने कक्षा 9 की संस्कृत की किताब 'शारदा' के पाठ 10 में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की पावन कथा को शामिल किया है। इस पाठ का शीर्षक 'णमो अरिहंताणं' रखा गया है।
ताकि नई पीढ़ी संस्कृत के साथ-साथ प्राकृत भाषा की प्राचीनता और मिठास से भी परिचित हो सके।
1. ऋषभदेव का जीवन:
राजा नाभि और मरुदेवी के पुत्र, जिन्होंने प्रजा को कृषि, भोजन बनाना, वस्त्र निर्माण, नगर निर्माण सिखाया।
2. वैराग्य:
नृत्य के दौरान नर्तकी की मृत्यु देखकर संसार की नश्वरता समझी और राजपाट त्याग दिया।
3. केवलज्ञान:
कठोर तपस्या के बाद प्रयागराज में अक्षयवट के नीचे केवलज्ञान प्राप्त किया। 'आदिनाथ' कहलाए।
4. जैन सिद्धांत:
अहिंसा परमो धर्म, अनेकांतवाद, अपरिग्रह और तीन रत्न - सम्यक दर्शन, ज्ञान, चरित्र।
5. णमोकार महामंत्र:
प्राकृत भाषा में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधुओं को नमस्कार।
यह कदम बच्चों में जैन धर्म के गौरवशाली इतिहास और प्राकृत भाषा के प्रति संस्कार पैदा करेगा। प्राकृत को प्राचीन काल में जनसंवाद की मुख्य भाषा बताया गया है।
बीच में णमोकार मंत्र का सुंदर चित्र भी दिया गया है।
#Jainism
@TheRakesh_IND भारतीय सेना माता अंबाजी माता का रूप है. भारतीय शत्रूओंका वह माता भवानी माता दूर्गा, माता काली बनके बिमोड करती है. और नैसर्गिक आपत्ती मे वह भारत माता बनके भारतीयोंको मदद करती है.
सत्यमेव जयते.
वंदेमातरम्.
अंबाजी माता की जय.
जयतु अखंड भारत.
इस अजैन- अजैन काल मे पवित्र दिगंबर जैन विचारोंसे भारतीयोंको भ्रमित करके दूर किया जाने से भारतीय अंतरात्मा अपमानित हुवा और मूर्छित पडा. जिससे भारतीय एकता भंग हुयी और भारतीय आपस मे लडने लगे जिससे दुर्बल हुए और केवल मुठ्ठीभर अरब-अंग्रेज आक्रांताओंसे पराभूत हुये है.
सत्यमेव जयते.
तमिळनाडू की पवित्रभूमीने अनादिकाल से भारत एवम् विश्वकी सर्वोच्च आध्यात्मिक विरासत बडे गौरव के साथ संभाली है. चोबिस सौ वर्षोंका अजैन- अजैन काल मे जो भगवान वर्धमान महावीर जी के मोक्षप्राप्त होने के तीन वर्षो से शुरू हुवा और सन १८७५ मे समाप्त हुवा, इस मे अनेक जिनालयोंके कब्जा हुए थे
दिगंबर जैन मुनीजी क्या होते है?
सूनो
जय जिनेंद्र.
दिगंबर जैनम् जयतु शासनम्
वंदेमातरम्.
अंबाजी माता की जय.
जयतु अखंड भारत.
अपरिग्रह सिद्धांत न केवल भारत बल्की समस्त विश्व की सर्वोच्च आध्यात्मिक विरासत है.जिसे केवल दिगंबर जैनत्व का आदर करनेवाले ही पा सकते है.https://t.co/BAZ56J01Ra
भगवान श्रीकृष्ण जैन थे.बावीस वे तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी के मौसेले भाई थे.भगवानजी के विवाह मे रथ का सारथ्य श्रीकृष्णजीने ही किया है.
श्रीकृष्ण जी का बाल्यावस्था मे पालन नंद वंश मे हुवा है.महान मगध वर्धमान वंश मे सम्राट धनानंद नाम के सम्राट हुए है, जिनके कारण नंद वंश भी कहा है.
जय जिनेंद्र.
जैनम् जयतु शासनम्.
अंतिम कुलकर आचार्य नाभिराय महाराज की जय.
माता मरूदेवी की जय.
चोवीस सौ भगवानजी की जय.
माता अंबाजी माता की जय.
वंदेमातरम्.
https://t.co/9eb6Pt4O0t
Sacred Girnarji Ambaji mata being war Goddess of great magadh Vardhaman clan digambar Jain emperors that temple and many more temples in Bharat were created by emperor Nandraj Vardhaman, Mahapadma Mahanand,, Dhananand, Chandragupta, Samprati but they didn't put their names.
The Mahalakshmi Temple (also called Ambabai Mandir) in Kolhapur, Maharashtra, Historical and archaeological sources indicate that the temple was Jain Basadi before.
This basadi was build by Kannada Jain Emperors .
Now it has come to surface that the Hindu management is destroying the jain artifacts . For those Jains who want to be called Hindus , you can plz leave Jainism and join Hinduism
#RealHistory
#BitterTruth
Chaturmukha Basadi in Gerusoppa is a stunning, perfectly symmetrical 16th-century Digambara Jain Basadi, Built by the Pepper Queen herself — one of Karnataka’s hidden architectural gems and a direct legacy of Rani Chennabhairadevi, the “Pepper Queen” who ran her administration from Kanoor Fort.
Located on the banks of the Sharavathi River in Honnavar Taluk (Uttara Kannada district), right near Gerusoppa Dam and surrounded by dense Western Ghats greenery, this is no ordinary basadi. “Chaturmukha” means “four-faced,” and the temple is designed with four identical entrances facing the cardinal directions (north, south, east, west), all leading into a central garbhagruha (sanctum). It’s like a stone mandala — open and welcoming from every side, symbolizing Jain principles of equality and universality.
The moola jwalamalini was shifted to NR pura and this place was engulfed by forest.
#RealHistory
#BitterTruth