#भक्ति_से_भगवान_तक🌾मानव जीवन का मूल उद्देश्य "भक्ति से भगवान" तक जाकर पूर्ण मोक्ष पाना है।
जो की सिर्फ संत रामपालजी महाराज द्वारा बताई शास्त्रानुसार सत्य साधना करने से ही संभव है।
भक्ति से भगवान तक पहुँचने का शास्त्रानुकूल मार्ग जानने के लिए देखें साधना चैनल शाम 07:30 बजे।
भक्तिहीन प्राणी को यम के दूत पकड़कर ले जाते हैं और नरक मे डाल देते हैं। नरक के बाद वे प्राणी चौरासी लाख योनियों में जाते हैं। अगर आपको इन सब दुखों से बचना है तो सतभक्ति करो। वर्तमान में सतभक्ति संत रामपाल जी महाराज जी ही दे रहे हैं। जिससे सभी प्रकार के रोग क।#भक्ति_से_भगवान_तक
#भक्ति_से_भगवान_तकगीता जी में तीन प्रकार के भगवान बताए गए हैं - क्षर पुरुष, अक्षर पुरुष, परम अक्षर पुरुष।
परम अक्षर पुरुष ही परमात्मा सतपुरुष हैं। उनकी भक्ति करने से कर्मों की मार समाप्त होकर मानसिक शांति व पूर्ण मोक्ष मिलता है।
🌾समाज में जो साधना प्रचलित है वह ना तो परमात्मा को पाने की है और ना ही वह मानसिक शांति दे सकती है। ना ही उससे कर्म की मार समाप्त हो सकती है।
तो वह कौन सी साधना है जिससे हम भक्ति करके भगवान को प्राप्त हो सकते हैं।
जानने के लिए अवश्य देखिए साधना चैनल शाम 07:30
#भक्ति_से_भगवान_तक
#भक्ति_से_भगवान_तक🌾अध्यात्म में मूल रूप से पूजा, पूज्य, साधक तथा साधना शब्द आते हैं जिनको जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने विस्तार से समझाया है और भक्ति से भगवान तक की राह बताई है।
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संत रामपाल जी महाराज ने श्री ब्रह्मा जी, श्री शिव जी तथा श्री विष्णु जी इन तीनों गुणों के बारे में विस्तार से समझाया है जो आज तक कोई नहीं समझा सका।
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मानव जीवन का मूल उद्देश्य "भक्ति से भगवान" तक जाकर पूर्ण मोक्ष पाना है।
जो की सिर्फ संत रामपालजी महाराज द्वारा बताई शास्त्रानुसार सत्य साधना करने से ही संभव है।
#भक्ति_से_भगवान_तक🌾सूक्ष्मवेद में कहा है:-
“यह संसार समझदा नाहीं, कहंदा शाम दुपहरे नूँ।
गरीबदास यह वक्त जात है, रोवोगे इस पहरे नूँ।।”
आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव से परमात्मा के विधान से परीचित न होने के कारण यह प्राणी इस दुःखों के घर संसार में महान कष्ट झेल रहा है और इसी पर।
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गीता जी में तीन प्रकार के भगवान बताए गए हैं- क्षर पुरुष, अक्षर पुरुष, परम अक्षर पुरुष । परम अक्षर पुरुष ही परमात्मा सतपुरुष हैं। उनकी भक्ति करने से कर्मों की मार समाप्त होकर मानसिक शांति व पूर्ण 🙇🙇मोक्ष मिलता है।
🌾भक्ति से भगवान तक पहुँचने का शास्त्रानुकूल मार्ग सिर्फ तत्वदर्शी संत ही बता सकते हैं।
श्रीमदभगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तथा 16,17 में कहा है कि यह संसार ऐसा है जैसे पीपल का वृक्ष है। जो संत इस संसार रूपी पीपल के वृक्ष की जड़ों से लेकर तीनों गुणों रूपी शाखाओं तक सर्वां
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ब्रह्मा, विष्णु ,महेश ये तीनो भगवान के ऊपर काल भगवान है, काल भगवान के ऊपर कबीर साहेब है। कबीर देव ने ही सभी ब्रह्मांड और सभी भगवान सभी जीव की रचना किए है, वेदों में कबीर साहेब को ही पूज्यनीय देव बताया गया है।
#भक्ति_से_भगवान_तकपूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी के प्रयासों से भेदभाव की स्थिति समाप्त हो रही है। समाज में शांति स्थापित हो रही है। संत रामपाल जी महाराज जी कहते हैं:-
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।