@mgvcl_mgvcl
પ્રાઈમ કુટિર સોસાયટી , નર્મદપુરા રોડ , વાઘોડિયા રોડ પર આવેલી છે. છેલ્લા 42 દિવસથી દરરોજ પાવર કટ થઈ રહ્યો છે.
જે દિવસે થોડો પણ વરસાદ કે પવન આવે તો 12 કલાક સુધી લાઈટ નથી આવતી. તથા દરરોજ એક , બે , કે ચાર કલાક સુધી પાવર કટ હોય છે. કાયમી ઉકેલ લાવવા વિનંતિ.
@CMOGuj
देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन से गहरा दुख हुआ। उन्होंने अपने नेतृत्व और आर्थिक सुधारों से भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। वाहे गुरु उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। #ManmohanSingh
दिल्ली की सड़क पर कोई भी गुंडा कभी आकर आपकी जान ले लें @DelhiPolice सोती रहेगी। आज सुबह एक खौफनाक हादसा मेरे साथ हुआ । मैं अपनी कार से मणिपाल हॉस्पिटल द्वारका जा रही थी। भगत चंद्र अस्पताल पालम डाबरी रोड पर काफी जाम था। एक व्यक्ति अचानक इसी जाम में मेरी गाड़ी के बोनट पर बड़े बड़े
रक्त से सींची धरती ने, जयघोष किया था,
भारत माता के वीरों ने, बलिदान महान किया था।
कारगिल विजय दिवस पर माँ भारती के सभी जांबाज सपूतों का मैं हृदय से वंदन करता हूँ।
#KargilVijayDiwas
प्रधानमंत्री ग़ुलामी की मानसिकता से आज़ादी की बात करते हैं। सबसे पहले तो उन्हें अपने दल के नेताओं को आदेश देना चाहिए कि ये लोकतंत्र है। किसी नेता के लिए राजतंत्र के टाइटल का इस्तेमाल न करें। जननायक, लोकनायक के देश में क्या श्रीमंत महाराज लोकतांत्रिक टाइटल है? कहाँ के महाराज हैं आप? ज्योतिरादित्य को भी आदेश जारी करना चाहिए कि ऐसे पोस्टर हटवा दिए जाएँ। सिंधिया को भी श्रीमंत महाराज और राजमाता का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। भारत माता के देश में कोई राजमाता नहीं है। कोई महाराज नहीं है।
डॉ॰ बाबसाहब आंबेडकर जी और भारत के महान संविधान का मे आभारी हूँ।
डॉ॰आंबेडकर जी ने संविधान के माध्यम से हमें पढ़ने, लिखने, आगे बढ़ने और बराबरी के साथ सम्मान से जीने का अधिकार दिया। भारतीय समाज के स्तर पर
आज जब मे ब्लैक कोट और टाई पहनकर अदालत में खड़ा रहता हूँ तो अपने आप को एक सक्षम व्यक्ति के रूप में महसूस करता हूँ। न सिर्फ़ ख़ुद के लिए बोल पाना, लेकिन किसी ओर के लिए बोल पाने की मानसिक शक्ति मुझे पढ़ाई से मिली और किसी की पैरवी करने की क़ानूनी शक्ति संविधान से मिली।
अपने लिए या किसी के लिए बोल पाने की शक्ति / सक्षमता का अहसास क्या होता है यह मे शब्दों में नहीं बता सकता। बस डॉ॰आंबेडकर और भारत के महान संविधान को नमन करता हूँ।
एक छोटे से गाँव देहात में पैदा हुए मेरे जैसे करोड़ों युवा गाँव की छोटी सी दुनिया में ही जीवन ख़त्म कर जाते है। अपने गाँव के नज़दीक के 2Tier शहर देखना भी एक बड़े सपने से कम नहीं होता। कभी यह हाल मेरा भी था। आज में जिस स्थिति में हूँ उसका तो सपने में भी सपना नहीं देखा था।
गाँव की टूटी फूटी सरकारी स्कूल में पढ़ना, बाहरी दुनिया से ज़्यादा ताल्लुक़ न होना, कोई एक्सपोज़र नहीं होना, बड़े सपने देखने तक की हिम्मत नहीं होना, छोटी नौकरी / किसानी / मज़दूरी में बड़ी ज़िंदगी गुज़ारना ही मेरे जैसे करोड़ों युवाओं के नसीब में लिखा रहता है।
आज में जब अपने आप को इस मुक़ाम पर देखता हूँ तो संविधान के प्रति अपनी कृतज्ञता का भाव आना सहज है। सरकारें तो आज भी नहीं चाहती की सबको पढ़ने का / बराबरी का मौक़ा देना नहीं चाहती लेकिन संविधान है इसलिए मजबूरन कुछ न कुछ तो करना पड़ता है।
सरकारें मजबूरन पढ़ाती है तभी तो मेरे जैसे कुछ लोग छोटी दुनिया से बाहर निकल पाते है, सोचो अगर सरकारे दिल लगाकर संविधान का पालन करना चालू करें तो क्या चमत्कार होगा! बस यही सोच के संघर्ष किए जा रहे है कि जो अवसर मुझे मिला है वो हज़ारो बच्चों को कैसे मिल सके!
अच्छा लगता है। यह काला कोट सिर्फ़ कपड़ा नहीं लेकिन आत्मविश्वास और मनोबल का प्रतीक है।
नारी शक्ति वंदना अधिनियम। यह नाम ड्राफ़्ट का हिस्सा नहीं है मगर प्रधानमंत्री ने इसे यही नाम दिया है। आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है। दैविक वरदान नहीं है। आरक्षण की जगह वंदना का इस्तेमाल उचित नहीं है। वंदना आप करते रहें, मणिपुर से लेकर महिला पहलवानों के मामले में देश ने वंदना देख ली है। वंदना के इस्तेमाल से आरक्षण और संवैधानिक अधिकार का बोध ख़त्म हो जाता है। इस नाम के सहारे इस आंदोलन के इतिहास को ही काट देने की कोशिश की गई है।
ज्यादा सयाणा बनके बात को इधर उधर मत घुमा भाई, तेरा ट्वीट उस दिन का है जब जहांगीरपुरी बस्ती में बुल्डोजर चल रहा था।
बच्चे बूढ़े बिलख रहे थे, तब तू और तेरा नोएडा गैंग नाच रहा था बुलडोजर पर चढ़के। फिर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी। क्या वैध है-क्या अवैध, इसका फैसला तू करेगा क्या?
संविधान निर्माता, बोधिसत्व, महामानव, भारत रत्न श्री डॉ॰ बाबासाहेब आम्बेडकर जी के जन्म जयंती पर उन्हें शत शत नमन।
बाबासाहब ने करोड़ों शोषित वंचित व पिछड़ो की लड़ाई लड़ी और उनका अधिकार दिलाने में अपना पुरा जीवन समर्पित किया एसे महापुरुष के विचार हमे आज भी प्रेरणा देते है। जय भीम
બાબાસાહેબની પ્રતિમાને હારતોરા કરી શ્રદ્ધાંજલિ આપવાનો દંભ વર્ષોવર્ષ થાય છે પણ વાસ્તવિકતા એ છે કે આજે પણ દેશના લાખો ગામોમાં દલિતવાસો ગામની બહારના વિસ્તારોમાં હોય છે જ્યાં રસ્તા, ગટર, પાણીની સુવિધાઓ નિમ્નસ્તરની હોય છે.
શહેરોમાં તેમને સારી સોસાયટીઓમાં મકાન વેચાતું કે ભાડે અપાતું નથી.
Our krantikari salaams to Babasaheb Ambedkar on the eve of his 132nd birth anniversary. We reaffirm our commitment to take his caravan forward despite the hurdles that come our way. We pledge that in no circumstances shall we allow his caravan to go back!!
#AmbedkarJayanti2023