आर्य | Enthusiast | Analyst | Critical Thinker | वेदों की ओर लोटो | जय आर्यावर्त्त । प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा, मध्य प्रदेश @AMahaSangh
पहाड़ के गांवों में माताओं-बहनों के द्वारा इससे भी अधिक घास आदि पीठ पर लादकर पांच-पांच, दस-दस किलोमीटर तक पहुंचाया जाता रहा है।अब दुर्दशा यह कि गांव लगभग खाली हो चुके हैं और परिश्रम में लोगों को अपमान लगने लगा है।रील न जाने क्या-क्या लील कर रहेगी ?परिश्रम का विकल्प नहीं होता है
जातिवाद को जन्म से मानने वाले लोग मज़हबी रोग से ग्रस्त हैं। प्रभु ने कर्म प्रधान सृष्टि का निर्माण किया है और सदैव मानव कर्म के आधार पर ही पूज्यता को प्राप्त कर पाया है।कर्महीन होने से तथाकथित ब्राह्मण दो दो कौड़ी के म्लेच्छों के गुलाम बने और कर्म से ही स्वाधीनता प्राप्त हुई ।
अन्धविश्वास से अपने इन आत्मीय स्वजनों को यदि कोई ठीक ठीक मुक्ति दिला सकता है तो वह एकमात्र आर्य है । अतः अपने परिश्रम को और पहुंच को बढाइए ! राह कठिन है,मंजिल दूर है ,किन्तु असम्भव कुछ नहीं है ।।
#जय_आर्य, #जय_आर्यावर्त्त
आर्य वंशजों ने जब से धर्म से मुख मोडा है तब से संसार भर के लोग मानवता से दूर निकल गए और हम लोग कहते स्वयं को विश्व गुरु हैं किन्तु विश्व क्या खा रहा है और शाकाहारी प्राणियों को भी क्या क्या खिला रहा है ? यह ठीक-ठीक पता ही नहीं है । जागो विश्व गुरु जागो !!https://t.co/4xefykQjf3
एक अपराधी के मरने पर मीडिया का तथा कुछ नेताओं का करुण क्रन्दन(स्यापा) एवं महिमा मंडन देखकर ऐसा लगता है जैसे इनके द्वारा भावी पीढ़ी को अपराधी बनाने का सुनियोजित डिजिटल षड्यंत्र किया जा रहा है।
तनिक तो शर्म होनी चाहिए ।।https://t.co/czAXXte1mZ
यह आसमानी किताब का परिणाम है। 'मज़हबी आतंकवाद' हर क्षेत्र में फैलता ही जा रहा है, निर्दोष मासूम बच्चों की ऐसी नृशंस हत्त्या की कल्पना करना भी भयंकर जहालत है।
मानव समाज को मिलकर इस क्रूर घिनौने दानवों का समाधान खोजना ही होगा। अन्यथा कहां और कैसे जीवन चलेगा?
हमारे देश के निवासी मुस्लिम मज़हब वाले अधिकांश लोग आर्य ऋषि मुनि एवं महान् शूरवीरों के ही वंशज हैं,उनको यह बोध करवाना हम सभी का कर्तव्य है जिससे पुनः सनातन जीवनमूल्यों को अपना सकें ।
मित्रों हम गणतंत्र में, खुल कर करें विचार।
इसके सारे लाभ का, मिलकर करें प्रचार।।
मिलकर करें प्रचार, तन्त्र यह मानवता का।
सत्ता करें प्रयत्न, दमन हो दानवता का।।
लोक सिद्धि का अहो, ठहरा मूल एक मन्त्र।
शिक्षा से समृद्ध करें, मित्रों हम यह गणतंत्र।।
पाखंडों और चमत्कारों के दावे अपने अपने हैं।
सब धर्म शास्त्र और विश्वासों के दावे अपने अपने हैं।
ईश्वर ऊपर अधिकार जताते सम्प्रदाय के व्यापारी।
अब काम काम का दाम काम के दावे अपने अपने हैं।।
किसने सिखलाया है तुमको, चाह लगाई चाम से।
ना होता है मान मुखों का, मान सभी का काम से।
सम्बन्ध ठीक से जी लेना, लोक सुख का मार्ग यही।
सम्बन्धों को जीना सीखो, सबके प्यारे राम से।।
भारत में वैदिक संस्कृति का पतन क्यों हुआ था?
यदि इस बात पर विचार किया जाए तो एक ही निष्कर्ष निकलता है कि जब अध्यापक वर्ग ने अथवा ब्राह्मण वर्ग ने अपने धर्म से अलग हटकर कार्य करना आरंभ किया तो पतन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी । इस संबंध में स्वामी दयानंद जी का क्या विचार था ?
आंगन -आंगन दीप जले थे उस दिन दुनिया सारी में।
आंगन -आंगन लोग लगे थे उत्सव की तैयारी में।
विस्तृत जीवन अल्प समय में जीकर जाने वाले थे।
ऋषि ने प्राण पुनः फूँके थे भारत की सूखी क्यारी में।।
सभी को ढेरों शुभकामनाएं।
पत्नी पति सम्बन्ध में, हुई अनोखी ग्रोथ।
भर्ता पूजित हो गया, आई करवा चोथ।।
आई करवा चोथ, अनोखे पल जीवन के।
आयु लम्बी चाहें, काम सब लम्पटपन के।
वेद उलट त्योहार, करें पैसा की छटनी।
तिलक लगा मुख फुला, खड़ी घर घर में पत्नी।।
#करवा_चौथ
भाषा के वरदान बिन, क्या होता संसार।
ना कोई प्रतिकार था, ना कोई उपकार।।
ईश्वर की भाषा रही, देववाणी प्रसिद्ध।
उससे ही सब सीखकर, बने हुए हैं सिद्ध।।
आर्यों की भाषा बनी, संस्कृत जिसकी मात।
हिंदी लोक प्रसिद्ध है, जिसमें माँ की बात।।
#हिंदीदिवस2023