सताम् आचारः सदाचार�� कथ्यते।
अर्थात् -सत्य और सद् आचरण को ही सदाचार कहा गया हैं।
यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचोस्तथा क्रिया।
जैसा मन वैसी वाणी जैसी वाणी वैस�� कर्म यही जीवन की वास्तविक सात्विकता हैं।
#सदाचारः
#वैदिक_विचार
#महर्षि_मनु
छिन्ने मूले वृक्षो नश्यति तथा,
पापे क्षीणे दुःखं नश्यति।
अर्थात् -- जैसे मूल कट जाने से वृक्ष नष्ट हो जाता हैं, वैसे ही पाप को छोडने से दुःख नष्ट होता हैं।
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भगः सकलैश्वर्यं सेवनं वा विद्यते यस्य स भगवान्।
अर्थात् --जो समग्र ऐश्वर्य से युक्त वा भजने योग्य हैं इसीलिए उस ईश्वर का नाम 'भगवान्' हैं।
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"साध्नोति पराणि धर्मकार्याणि स साधुः"
अर्थात् --जो धर्मयुक्त उत्तम काम करें, सदा परोपकार में प्रवृत्त हो, कोई दुर्गुण जिसमें ना हों, विद्वान्, सत्योपदेश से सबका उपकार करें, उस को 'साधु' कहते हैं।
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#सत्यार्थ_प्रकाश
॥ वैदिकैश्चैव कर्मभिः ॥
अर्थात् --- मनु जी ने वैदिक कर्म जो धर्मयुक्त सत्य कर्म हैं, सन्यासियों को भी अवश्य करना लिखा हैं।
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सदा इस बात को दृढ रखें ।कि कभी भी बुद्धिमान, कुलीन,शूरवीर,चतुर,दाता,किए हुए को जाननेहारे और धैर्यवान् पुरूष को अपना शत्रु न बनावें।क्योंकि जो ऐसे को शत्रु बनावेगा वह दुःख ही पावेगा।
"महर्षि दयानंद सरस्वती"(सत्यार्थ प्रकाश)
#वैदिक_तथ्य#वैदिक_मान्यताएं
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्द्धन्त आयुर्विद्या यशो बलम्॥ मनु.॥
भवार्थः -जो सदा नम्र व सुशील होकर विद्वान और वृद्धों की सेवा और अभिवादन करता हैं,उसकी आयु, विद्या, किर्ती और बल ये चार सदा बढते हैं।
#GuruPoornima#गुरुपूर्णिमा#GuruPurnima2020
वेदनिंदकः नास्तिकः
वेदों की निंदा/अवमानना करने वाला नास्तिक होता हैं।
वेदसमर्थकः आस्तिकः
वेदों को मानने जानने वा आचरण में लाने वाला आस्तिक है।
वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक हैं वेद का पढना पढाना सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम कर्तव्य हैं।
#वैदिक_प्रेस
वैदिक विचारों को घर घर पहुँचाने हेतु राहुल आर्य जी ने जो अपने श्रेष्ठ पूर्वजों का अनुसरण करके पुस्तक लिखी है उसके लिए उन्हें हार्दिक बधाईयाँ 💐🚩
अब ये हमारी नैतिक कर्तव्य बनता है कि घर घर तक उनके पुरुषार्थ से लिखी हुई पुस्तक #सर्वश्रेष्ठ_कौन को पहुँचाये ।
@RahulAary