पुरुष पे कविता…
चुपचाप बैठकर सोचना कई बार खुद से जुड़ने और मन को टटोलने का सबसे खूबसूरत तरीका होता है पर आज यूँ ही चुपचाप बैठी सोच रही हूँ, कि आखिर क्यों एक भी कविता, एक भी शायरी, किसी पुरुष के नाम नहीं लिखी जाती? वे भी तो कितने दिल के सुंदर और मन के अच्छे होते हैं ना… कभी चुपचाप सूरज की पहली किरण की तरह, कभी रात के अंधेरे में चाँदनी की तरह नरम, कभी तूफान की तरह उग्र और कभी समंदर की लहरों की तरह गहरे।प्रेम में डूबे हुए उनकी आँखों में पूरा सागर समाया होता है, फिर भी वे उसे छुपाए रखते हैं।
वे अपनों के लिए बिना शोर किए परीक्षाएँ देते हैं, रातों की नींद त्यागकर जिम्मेदारियों का बोझ कंधों पर उठा लेते हैं।वो हिफाजत करते हुए तलवार की तरह खड़े रहते हैं, लेकिन कभी इसे दिखाकर शान नहीं झाड़ते।खामोशी ओढ़े, गम को अंदर ही अंदर ज़ब्त किए हुए, बाहर से मुस्कुराते रहते हैं, जैसे संसार में कुछ हुआ ही नहीं। उनकी मुस्कान में दर्द छुपा होता है, उनकी आँखों में सपने दबे होते हैं, और उनके सीने में वो दिल धड़कता है जो कभी किसी को दिखाया नहीं जाता।
फिर भी हमने खुद को क्यों सीमित कर लिया? हमने क्यों सोच लिया कि कविता सिर्फ़ स्त्री सौंदर्य, स्त्री पीड़ा या स्त्री प्रेम के इर्द-गिर्द ही लिखी जा सकती है? आखिर पुरुष के सीने में भी वही दिल तो धड़कता है, वही भावनाएँ तो उमड़ती हैं, वही आँसू तो अंदर ही अंदर बहते हैं। हर पुरुष गलत नहीं होता, हर पुरुष पत्थर नहीं होता, हर पुरुष भावनाहीन नहीं होता। कुछ फूलों की तरह नाजुक होते हैं, कुछ तो पहाड़ों की तरह मजबूत, कुछ तो नदियों की तरह बहते चले जाते हैं बिना किसी से शिकायत किए।
शायद पुरुष पर लिखना इतना सरल नहीं होता। शायद उसमें तालियाँ कम बजती हैं, शायद किताबें कम बिकती हैं, शायद बाजार में उसकी माँग ही नहीं। हमने पुरुष को हमेशा मजबूत, हमेशा अटल, हमेशा भावनारहित मान लिया।
उनकी चुप्पी भी उतनी ही गहरी है जितनी उनकी बातें। उनकी आँखों का वो समंदर भी उतना ही विशाल है जितना किसी और का…
पर आज मैं तोड़ रही हूँ इस परंपरा को। आज मैं लिख रही हूँ उन सबके लिए, जिन्हें कभी कोई कविता नहीं मिली।उन पिताओं के लिए जो अपनी थकान छुपाकर बच्चों को खेलते देख मुस्कुराते हैं।उन पतियों के लिए जो चुपचाप पत्नी की हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करते हैं। उन बेटों के लिए जो माँ-बाप की सेवा में अपनी जवानी गँवा देते हैं। उन दोस्तों के लिए जो बिना कहे साथ खड़े रहते हैं। उन प्रेमियों के लिए जो चुपके से प्रेम की रक्षा करते हैं।
तुम अच्छे हो, बहुत ही अच्छे जो शब्दों से परे है। तुम्हारी ताकत, तुम्हारी कमजोरी, तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारी खामोशी, सब कुछ पर में कविता लिखूँगी। तुम्हारे लिए, तुम्हारे उन अनकहे एहसासों के लिए, तुम्हारी उन अनकही कहानियों के लिए।✨🧡
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
15 आदतें जो आपकी ज़िंदगी बेहतर बना सकती हैं:
- सुबह जल्दी उठें
- रोज़ कुछ नया पढ़ें
- शरीर को सक्रिय रखें
- पर्याप्त पानी पिएँ
- रोज़ थोड़ा व्यायाम करें
- अपने लक्ष्य लिखें
- समय की कद्र करें
- सोशल मीडिया कम करें
- नकारात्मक लोगों से दूरी रखें
- रोज़ कुछ नया सीखें
- कृतज्ञ रहना सीखें
- अच्छी नींद लें
- अनुशासन बनाए रखें
- शिकायत कम, काम ज़्यादा करें
- निरंतरता बनाए रखें