It’s terrifying to even open social media right now. Everywhere you look, it’s images of bloodshed in Bengal.
What have the people of Bengal done to deserve this?
क्यों ज्ञानेश कुमार, आचार संहिता हट गई है क्या? बंगाल को भाजपा के हवाले कर चद्दर ओढ कर सो गए? यह जो बंगाल में तृणमूल के पार्षद को पीट रहे हैं उसके परिवार वालों की चीखें सुन तो ही रहे होगे। इंसानियत भी शर्माती होगी।
बस एक रास्ता है अब किसी भी चुनाव को तब तक विपक्ष को नही लड़ना चाहिए जब तक चुनाव आयोग पूरी तरह निष्पक्ष न हो।
बिल्कुल समान लेवल फिल्ड हो, चुनाव आयोग पारदर्शी त��ीके से एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था की तरह काम करे तभी विपक्ष लड़े
और जब तक ऐसा न हो सभी चुनाव का बहिष्कार करे।
जलन नहीं, मेघा जी,
अफ़सोस होता है और तरस भी आता है! अफ़सोस पत्रकारिता पर, और तरस आप लोगों पर।
ऐसी नकेल कसी गई है कि Press Freedom Index में देश 157वें स्थान पर खिसक गया।
अब जब पत्रकारिता करने की इजाज़त न हो, तो साड़ी पहनकर खुद ही शोपीस बनना पड़ता होगा; इसलिए तरस आता है।
हम आज मशीनतंत्र से हारे हैं, कल जीतेंगे भी। लेकिन आप अपना सोचिए। 2014 के बाद वाली ‘पत्रकारिता की तकनीक’ से जो आपकी इज़्ज़त गई, वह इस जन्म में वा��स आती नहीं दिखती।
और जिस तरह की पत्रकारिता आप कर रही हैं, उस पर मंटो काफ़ी कुछ लिख गए हैं। नहीं पढ़ा हो तो किताबें मुझसे उधार ले लीजिएगा; शायद उन्हें पढ़कर भीतर का मुर्दा पत्रकार जाग जाए।
और हाँ, बहुजन महिलाओं के पास साड़ी और मेकअप से ज़्यादा गंभीर मुद्दे हैं; उनसे उलझने और उन्हें सुलझाने के लिए। इसलिए साड़ी और मेकअप अपने पास रखिए; साहस और विचार की ज़रूरत हो तो हमारे पास ज़रूर आइएगा।
थोड़ी मदद तो हम सभी कर ही सकते हैं।
हर साल आज के दिन @BhojpuriQUEEN जी को सुनती हूँ और उनकी आवाज़ में हर मजदूर-किसान भाई-बहनों का दर्द महसूस करती हूँ, जिन्हें सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया गया था।
देश के प्रधानमंत्री ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया था और आधी रात लॉकडाउन लगाकर हमारे गरीब भाई-बहनों को सड़कों पर चलने के लिए मजबूर कर दिया।
रेल की पटरियों पर बिखरी हुई वे रोटियाँ आज भी मेरे दिमाग के किसी कोने में कैद हैं। इन्हीं मेहनतकश वर्गों के कारण हिंदुस्तान आज खड़ा है, लेकिन इनकी थालियाँ सूनी हैं, बच्चे भूखे सोने को मजबूर हैं और तन ढकने के लिए कपड़े तक नहीं हैं।
इनकी बाजुओं ने भारत को ��ारत बनाया है।
तमाम बिल्डिंगें, कपड़े, दुकानें, अस्पताल और मकान बनाए, पर खुद उनसे अलग-थलग रह गए।
जैसे कोविड में पैदल चलने को मजबूर हुए ठीक वैसे ही गैस के किल्लत झेलते-झेलते अपने गांव लौटने मजबूर हुए। आज ही कमर्शियल सिलेंडर का दाम बढ़ा कर उनके पेट पर लात मारा गया!
आज जब Labour Laws को पूरी तरह तबाह किया जा रहा है, हमें कुछ पल बैठकर सोचने की ज़रूरत है कि कमेरे वर्ग ने अपना खूब पसीना बहाया, लेकिन हम उन्हे�� क्या दे रहे हैं?
कथावाचक श्रवण दास जिस लड़की से बलात्कार के आरोप में जेल गया था, उसी से मंदिर में विवाह कर लिया।
लेकिन ये लड़की तो नाबालिग है, लड़की खुश भी नही दिख रही है ।
आखिर पुलिस इसको नाबालिग ��े शादी के जुर्म में गिरफ्तार क्यो नही कर रही है ?
#महाजंगलराज
शंकराचार्य साबित करें कि वे शंकराचार्य हैं
नागरिक साबित करे कि वो नागरिक है
वोटर साबित करे कि वो वोटर है
किसान साबित करे कि वो किसान है
निर्दोष साबित करे कि वो निर्दोष है
देशभक्त साबित करे कि वो देशभक्त है
अक्लमंद साबित करे कि वो अक्लमंद है
पहाड़ स���बित करे कि वो पहाड़ है
नदी साबित करे कि वो नदी है
जंगल साबित करे कि वो जंगल है
इतिहास साबित करे कि वो इतिहास है
इंसान साबित करे कि वो इंसान है
टिंडा साबित करे कि वो टिंडा है
संभल हिंसा मामले में ASP अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश देने वाले CJM विभांशु सुधीर जी का तबादला!
तबादले के साथ उन्हें CJM पद से हटाकर सिविल जज बनाया गया! माने डिमोशन!
एक फैसला सरकार के “प्रिय अधिकारियों” के ख़िलाफ़ और आप गए!
संभल में गजब हो रहा है।
संभल हिंसा के केस में जज विभांशु सुधीर ने सीओ अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश दिया���
इसके तुरंत बाद विभांशु सुधीर का ट्रांसफर करके उन्हें सुल्तानपुर भेज दिया गया। यही नहीं, उन्हें सीजेएम पद से डिमोट करके सिविल जज बना दिया गया है।
अब वकील लोग इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
जो भाजपा नेता व समर्थक हरियाणा, दिल्ली मे वोट किया था वो बिहार मे भी वोट किया
लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि उन भाजपा के लोगो ने सिर्फ 1 वोट किया हो?
क्या पता ऐसे लोगो ने 50-50 वोट किया हो?
जब संविधान की शपथ लेने वाले अधिकारी अपना कर्तव्य छोड़कर एक पार्टी विशेष के लिए काम करने लगे तो ऐसे घटनाओ से इन्कार नही किया जा सकत���।
चुनाव के बीच में पैसा बांटा जाने लगे, वोटर लिस्ट में लाखों नाम जोड़ने घटाने का खेल हो, लाखों फर्जी वोटों का जुगाड़ हो तो दुनिया की कोई पार्टी चुनाव नहीं हारेगी। चुनाव के नियम इसीलिए बनाए गए थे ताकि सब कुछ निष्पक्ष तरीके से हो।
चुनाव चोरों ने 75 साल से स्���ापित पूरा भारतीय लोकतंत्र हड़प लिया है।
मोहाली में कांग्रेस की ओर से LED लगाकर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाई गई।
यह काम बड़े पैमाने पर होना चाहिए। तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरे देश में एक एक भारतीय तक पहुंचनी चाहिए।
जनता जाने तो सही कि उनका साबका कैसे लुटेरों से पड़ा है!
जब देश पर पाक ने हमला कर दिया 25 से ज्यादा जवान शहीद ह�� गये उस वक्त मोदी जी जंगल सफारी को लेकर शूटिंग कर रहे थे।
राहुल गांधी जी न��� 60 से ज्यादा विधान सभाओं में रैली की है।
RG ने महीनों बिहार का सघन दौरा किया है।