मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है। मगर विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं, हंगामा करना है।
विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष जी के पास चर्चा का पत्र दे, आज दोपहर 3 बजे से कल दोपहर 3 बजे तक हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं। मैं कल विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब दूँगा।
फिर जनता तय करेगी कि कौन चर्चा करना चाह रहा है और कौन भाग रहा है।
OBC के नेता किधर सो रहे हैं.......??
Obc की सारी सीटें Ews को दी जा रही हैं पूर्व की भर्ती में भी दी गई थी
पटवार 2025 में दी थी और विरोध के बाद वापस सही की थी.........!
राजस्थान में रोस्टर एक भयंकर कैंसर बीमारी का रूप ले चुका है जो अंतिम स्टेज पर है। इस वजह से ओबीसी आरक्षण को 21% से खत्म करके 1-7% पर ला दिया है।
ओबीसी नेता कुम्भकरण की नींद सो रहे हैं।
युवा भी सो रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार ओबीसी के युवा है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ नही सकते
राजस्थान में रोस्टर प्रणाली के नाम पर OBC एवं आरक्षित वर्गों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं।
LDC भर्ती परीक्षा में 21% की जगह मात्र 14% सीट दी गई थी लेकिन विपक्ष सोया रहा ।
आज विद्युत विभाग LDC में फिर से ओबीसी को .25% आरक्षण दिया गया हैं।
@BhajanlalBjp
जी खिलवाड़ बंद कीजिए।
@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar@RajGovOfficial
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय से 11,000+ उपप्राचार्यों के सेवा हित प्रभावित होने की आशंका है। राज्य सरकार से आग्रह है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में शीघ्र SLP दायर कर कर्मचारियों के वैध सेवा अधिकार को संरक्षण प्रदान करे।
प्रश्न पत्र बनवाने की जिम्मेदारी बोर्ड में सिर्फ मेरी ही है, और L 1 एग्जाम में प्रश्नों का डिलीट होना दुःखद है, जैसा मैने कुछ समय पहले बताया कि ये एक कमी ठीक नहीं हो पाई है, प्रयास कर रहे हैं इसे सुधारने का।
सैटर्स को एक्सपर्ट्स को blacklist करना, जुर्माना वो सब कर दिया है।
यदि आप यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल मेहनत ही सफलता का निर्धारण करती है, तो मुझे लगता है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है।
राजस्थान में विशेष रूप से कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में अक्सर 10 12 तक प्रश्न बाद में डिलीट कर दिए जाते हैं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह है कि यदि वे प्रश्न गलत थे, तो उन्हें प्रश्नपत्र में शामिल ही क्यों किया गया? और यदि शामिल किए गए, तो प्रारंभ में उन्हें सही मानकर परीक्षा का हिस्सा क्यों बनाया गया?
जब अभ्यर्थी आपत्तियाँ दर्ज कराते हैं, तब उन प्रश्नों को हटा दिया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जिन्होंने उन प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे। एक गलत प्रश्न-निर्माण की कीमत वे बच्चे चुकाते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से तैयारी की थी।
कई बार यही डिलीट हुए प्रश्न किसी अभ्यर्थी को चयन सूची से बाहर कर देते हैं। यह केवल अंक खोने की बात नहीं होती, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके वर्षों की मेहनत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। जो अभ्यर्थी इस पीड़ा से गुज़रा है, वही समझ सकता है कि अंतिम चयन से कुछ अंकों से बाहर हो जाना कितना दर्द देता है।
आख़िर आयोग की गलती ईमानदार बच्चा क्यों भुगते
डॉ धीर सिंह धाभाई
#rsmmb #thirdgradeteacher #result
NEET। CBSE। SSC। और आज CUET।
चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई।
दावे "विश्वगुरु" के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।
जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ।
एक काम कीजिए - खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”
देखा? समझ आया?
BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है - उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।
साफ़ है - मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।
जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
NEET 2026 की परीक्षा रद्द हो गयी।
22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया।
किसी पिता ने कर्ज़ लिया,
किसी माँ ने गहने बेचे,
लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की,
और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।
यह सिर्फ़ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है।
हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं।
अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे।
अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुँच से तय होगा, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?
प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।
पेट्रोल डीजल और सोना कम खरीदने की अपील से पहले आपको ये सब करना था -
1- आप कोई भी रैली नहीं करते
2- सभी राज्यों के मुख्यमंत्री विधायक को रैली के लिए नहीं बुलाते
3- सांसदों के फ्री विदेश यात्रा में रोक लगा देते
4- गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन वर्चुअल करते, 3000 बसे नहीं बुलवाते
5- जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन वर्चुअल करते
6- विधायकों सांसदों को फ्री पानी बिजली सब बंद करते
7- सुधीर चौधरी का 14 करोड़ वाला पैकेज बंद करते
8- चुनाव में फ्रीबीज का वादा न करते
9-मुख्यमंत्रियों को हेलिकॉप्टर में उड़ने पर प्रतिबंध लगाते।
लेकिन नहीं, आप सोचते हैं कि बस जनता ही सारी कुर्बानी दे, नेता मौज काटें।