“आंबेडकर ने आरक्षण सिर्फ़ 10 साल के लिए दिया था” - यह झूठ इतने आत्मविश्वास से बोला जाता है, जैसे संविधान की मूल प्रति इन्हीं के घर की अलमारी में रखी हो!
संविधान खोलने की जहमत उठा लीजिए। 10 साल की समय-सीमा नौकरी और शिक्षा के आरक्षण के लिए थी ही नहीं। यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में SC-ST की आरक्षित सीटों यानी राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी थी। मूल अनुच्छेद 334 में इसकी शुरुआती अवधि 10 वर्ष थी। सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण का आधार अनुच्छेद 16(4) है - उसमें 10 साल की कोई समय-सीमा नहीं।
अब दूसरा ज्ञान दिया जाता है - “तो 10 साल बाद राजनीतिक आरक्षण भी खत्म क्यों नहीं हुआ?”
क्योंकि संविधान कोई मोबाइल रिचार्ज नहीं था कि दस साल की वैधता खत्म हुई और सेवा बंद! दस साल पूरे होने से पहले संसद ने माना कि SC-ST के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की विशेष व्यवस्था की जरूरत समाप्त नहीं हुई थी। इसलिए 8वें संविधान संशोधन, 1959 से इसे अगले दस वर्षों के लिए बढ़ाया गया। बाद में संसद ने संवैधानिक संशोधनों के जरिए इसे आगे बढ़ाया।
इसलिए अगली बार कोई बाबा साहब के नाम पर यह ज्ञान परोसे कि “आरक्षण तो सिर्फ़ 10 साल के लिए था”, तो उससे बस दो सवाल पूछिए -
कौन-सा आरक्षण? और संविधान के किस अनुच्छेद में लिखा है कि नौकरी और शिक्षा का आरक्षण 10 साल बाद खत्म हो जाएगा?
आरोपी को बचाने निकले भाजपा नेता की नौटंकी!
रीवा में नशीली कफ सिरप के मामले में आरोपी के पकड़े जाने के बाद भाजपा नेता ने बनाया दबाव, लेकिन थाना प्रभारी ने लगाया दिमाग ठिकाने।
आखिर आरोपी को बचाने की कोशिश क्यों? क्या पुलिस पर दबाव बनाना ही भाजपा की राजनीति का नया तरीका है?
@DrMohanYadav51@rshuklabjp@RewaCollector@INCMP@INCIndia
#US12585
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह पतन के गर्त में चली गई है। वर्षों सुनवाई ना होने के बाद छोटे बच्चे-बच्चियों को अपनी मांगें मनवाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
सागर जिले के एक स्कूल के बच्चों को इसलिए प्रदर्शन करना पड़ा कि उनके हैंड पम्प पर ही कब्जा कर लिया गया था। यही नहीं उनका स्कूल एक गोदाम में चल रहा था।
इसी तरह बड़वानी जिले के जामली में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में आदिवासी विद्यार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है और उन पर जातिसूचक टिप्पड़ियां की जा रही हैं। इसके खिलाफ बच्चों ने प्रदर्शन किया।
क्या 21वीं सदी में इसी तरह की शिक्षा व्यवस्था कर हम बच्चों का भविष्य बनाना चाहते हैं। अगर बच्चों को न्यूनतम आवश्यकता और सहज मानवीय सम्मान के लिए भी पढ़ाई छोड़कर आंदोलन करना पड़ रहा है, तो यह अत्यंत शर्म की बात है।
कांचा इलैया शेफर्ड अपनी महान रचना Why I am Not a Hindu में सवाल उठाते हैं
किसान, पशुपालक, कारीगर, मजदूर और अन्य श्रम से जुड़े लोग शूद्र या अस्पृश्य कैसे हो सकते हैं ?
जो समाज प्रोडक्शन कर रहा है. लोहा काट रहा है, धरती से अनाज उगा रहा है. मेहनत मजदूरी कर रहा है उन्हें निम्न स्तर कहना किसी बदमाश की साजिश है.
जो समाज पूरे समुदाय के लिए भोजन पैदा और वस्तुएं पैदा करता है वो Productive Class हैं.
जो कुछ नही करने का दावा करता है वो Non Productive क्लास है.
सीना तानकर कर कहो, हम Productive Class हैं. जय कांचा इलैया शेफर्ड.
भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं।
अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो।
लेकिन सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए open-ended प्रश्न का तरीका चुना है, जो भ्रामक है।
श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी व श्री राहुल गांधी जी ने मांग रखी है कि तेलंगाना व बिहार में हुए जाति सर्वेक्षण में जो तरीका अपनाया गया है, वही जातिगत जनगणना में भी लागू किया जाए।
: इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे व नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र-
“दलितों को कुएँ से पानी नहीं मिलता था तो वे ज़िंदा कैसे रहे?”
वाह! जातिवाद को धोने के लिए क्या ग़ज़ब का तर्क खोजा है! दलित ज़िंदा बच गए, इसलिए छुआछूत भी झूठी मान लें?
सवाल पानी मिलने का नहीं, सार्वजनिक कुएँ-तालाब पर बराबर अधिकार का था। जाति के कारण दलितों को साझा जलस्रोतों से पानी लेने से रोका जाता था। 1927 का महाड़ सत्याग्रह इसी अधिकार के लिए हुआ। आंबेडकर को हजारों लोगों के साथ चवदार तालाब से पानी पीकर अधिकार जताना पड़ा।
और इतिहास से भी शिकायत हो तो Protection of Civil Rights Act, 1955 की धारा 4 पढ़ लीजिए - अस्पृश्यता के आधार पर कुएँ, तालाब, नदी, नल आदि के इस्तेमाल से रोकना दंडनीय बनाया गया।
दलित ज़िंदा कैसे रहे, यह नहीं; सवाल है - उन्हें बराबरी से जीने क्यों नहीं दिया गया?
मोदी को सवालों से कितना डर लगता है, सबूत देखिए 👇
अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, G7 में ट्रंप से मुलाकात से पहले भारत ने अनुरोध किया था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवाल न लिए जाएं।
यानी 56 इंच वाले पत्रकारों के सवालों से भी डर! 😶
शायद यही वजह है कि मोदी आज तक खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते रहे हैं।
BJP वाले मनुस्मृति के समर्थन में कूद पड़े हैं - यह कोई हैरानी वाली बात नहीं है
मनुस्मृति में महिलाओं को सिर्फ दोयम दर्जे का या पुरुष पर निर्भर रहने के लिए ही नहीं कहा गया है - बल्कि तमाम और वाहियात घटिया बातें कहीं हैं -सुनकर खून खौल जाए 👇
▪️मनुस्मृति के पांचवें अध्याय के 148वें श्लोक में कहा गया है कि "एक स्त्री को हमेशा अपने पिता के संरक्षण में रहना चाहिए, विवाह पश्चात पति द्वारा उसका संरक्षण होना चाहिए, पति की मृत्यु के बाद उसे अपने बच्चों की दया पर निर्भर रहना चाहिए. लेकिन किसी भी स्थिति में एक महिला स्वतंत्र नहीं रह सकती"
यानी स्त्री के पास अपने बारे में भी निर्णय लेने के अधिकार नहीं है
▪️मनुस्मृति में महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं है. सिर्फ वे महिलाएं ही वेदों का अध्ययन कर सकती हैं, जिनका यज्ञोपवीत संस्कार होता है. यानी उच्च वर्ण की कुछ महिलाओं को छोड़कर किसी को कोई शिक्षा लेना का अधिकार नहीं है
▪️मनुस्मृति के 15वें नियम में कहा गया है कि 'महिलाओं का चंचल मन और स्वाभाविक हृदयहीनता की वजह से अपने पति के प्रति धोखेबाज हो सकती हैं. ऐसे में उन्हें निगरानी में रखना चाहिए
▪️मनुस्मृति के दूसरे अध्याय में कहा गया है कि 'पुरुषों को उत्तेजित करना और उनको बहकाना महिलाओं का स्वभाव है. ऐसे में समझदार लोगों को महिलाओं के आसपास संभलकर रहना चाहिए. किसी भी पुरूष को अपनी मां, बहन या बेटी के साथ भी एकांत में नहीं रहना चाहिए, वर्ना स्त्रियों की वजह से पुरूष का धर्म भ्रष्ट हो सकता है
▪️मनुस्मृति में कहा गया है कि राजा धन और स्त्रियों की रक्षा करता है. मगर विपत्ति में धन या स्त्रियों के प्रयोग से भी राज्य को सुरक्षित रख सकता है. यानी स्त्रियों का उपयोग वस्तु की तरह किया जा सकता है
▪️मनुस्मृति में कहा गया है कि महिला को अपने माता-पिता या पति की संपत्ति पर प्रत्यक्ष अधिकार नहीं है. अगर वह धन अर्जित करती है तो वो धन उसके पति या पुत्रों को जाएगा. यदि स्त्री के भाई हैं, तो उसे माता-पिता की संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा
▪️मनुस्मृति के तीसरे अध्याय में मनु ने महिलाओं की तुलना कुत्ते और सुअर से की है. कहा है कि “जब ब्राह्मण भोजन करें तब उन्हें किसी सुअर, मुर्गे, कुत्ते या किन्नर या ऐसी महिला जो रजस्वला (पीरियड्स) में हो, उसको देखना भी नहीं चाहिए”
तीसरे अध्याय में ही कहा गया है कि उस महिला से विवाह न किया जाए, जिसके बाल और आंखें लाल हो. या एक ऐसी महिला जो नीची जाति की हो
▪️मनुस्मृति के ग्यारहवें श्लोक में कहा गया है कि जिस स्त्री के भाई न हो या जिसके पिता को कोई न जानता हो यानी वो लड़की किसकी है ये किसी को न मालूम हो तो उस स्त्री से विवाह करने वाला आदमी मूर्ख होता है. जबकि बिना बाप वाले पुत्र से विवाह करने में कोई दिक्कत नही है
आख़िर कौन हैं वो महिलायें जिनका खून नहीं खौलता यह सब सुनकर?
मनुस्मृति जिसकी घटिया बातों से यह कहकर ध्यान भटकाने की कोशिश है कि बाक़ी धर्मों की बात नहीं हो रही - ऐसे लोग तो राजा राममोहन रॉय को सती प्रथा ख़त्म करते वक़्त कहते बाक़ी धर्मों की कुरीतियाँ ख़त्म कीजिए. ये कैसी बचकानी बेहूदी और महिला विरोधी बात है
आख़िर BJP वाले मनुस्मृति का बचाव कैसे कर सकते हैं?
शाबाश बिटिया.... @CollectrBarwani
को इन आदिवासी बच्चीयों से चर्चा करने में 6 घंटे बाद फुर्सत मिली है,जब बच्चीयां 15 किमी पैदल चलकर पहुंची।
अव्यवस्थाओं को देख रही थीं फिर हल क्यों नहीं निकला?
@DrMohanYadav51 जी इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
@jitupatwari
https://t.co/locplv2HU6
मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार बार-बार यह साबित कर रही है कि वह शासन चलाने में पूरी तरह अयोग्य है।
प्रदेश के सरकारी विभागों में जिस तरह 600 करोड़ रुपए की रकम खजाने में जाने की जगह कर्मचारियों और उनके
परिजनों के खाते में डाल दी गई, उससे पता चलता है कि अधिकारी-कर्मचारियों को सरकार का बिल्कुल भय नहीं है।
पिछले 3 साल से ये घोटाला चल रहा है। यहाँ तक कि 160 करोड़ का घोटाला होने के बाद ट्रेजरी कमिश्नर ने डीजीपी को आगाह भी किया, लेकिन घोटाला रुकने के बजाय कई गुना बढ़ गया।
मैं माँग करता हूँ कि इस विषय में सख्त कार्रवाई की जाए। सरकारी पैसा मय ब्याज के वसूला जाए और भ्रष्टाचार करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
1885 में कांग्रेस पार्टी की स्थापना हुई. कांग्रेस की स्थापना को 141 साल हो चुके हैं.
इन 141 साल में आज तक कांग्रेस पार्टी ने कभी मनुस्मृति की आलोचना नही की.
पुणे में राहुल गांधी ने "Women Special Chhatron ki Goonj" कार्यक्रम में मनुस्मृति की जमकर आलोचना की.
पुणे पेशवाओं का गढ़ था. पुणे बालगंगाधर तिलक की कार्य भूमि है. इसी कारण कांग्रेस पार्टी ने मनुस्मृति की आलोचना के लिए पुणे को चुना.
राहुल गांधी ने पुरानी कांग्रेस को खत्म कर दिया है. नई कांग्रेस बनी नही है, वो अभी बन रही है. मनुस्मृति का नाम आज कल कई नेता लेने से डरते हैं. राहुल गांधी ने मनुस्मृति की कड़ी आलोचना कर बड़ा जिगर दिखाया है.
चोर दरवाज़े से मोदी सरकार ने आरक्षण ख़त्म करने की योजना रची !!
2015 में केंद्र सरकार में 4.21 लाख पद खाली थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 8.24 लाख हो गई।
रेलवे में 2.40 लाख पद खाली हैं। डिफेंस में 2.41 लाख। गृह मंत्रालय में 1.10 लाख।
PSU में 5.1 लाख स्थायी नौकरियां खत्म हो गईं। ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 19% से बढ़कर 49% हो गई।
सवाल सिर्फ रोजगार का नहीं, सामाजिक न्याय का है।
सरकारी पद खाली रखो तो आरक्षण का अवसर खत्म।
PSU बेचो तो आरक्षित नौकरियां खत्म।
स्थायी नौकरी को ठेके में बदलो तो आरक्षण खत्म।
आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान बदलना जरूरी नहीं, आरक्षण वाली नौकरियां खत्म कर देना ही काफ़ी है।
सामाजिक न्याय विरोधी भाजपा का यही एजेंडा है।
पद खाली रखो। PSU बेचो। ठेकेदारी बढ़ाओ।
और SC, ST, OBC, EWS से उनका संवैधानिक हक छीन लो।
बाबासाहेब के संविधान से मिले अधिकारों को षड्यंत्र के तहत खत्म करने की भाजपाई नीति का अब पर्दाफ़ाश हो चुका है।
हमें अपनी पार्टी पर गर्व है, जिसने इंदिरा गांधी जी, प्रियंका गांधी जी जैसी निडर नेता इस देश को दीं।
हमें अपनी पार्टी पर गर्व है, जहां सैकड़ों महिलाएं राजनीति में परचम लहरा रही हैं। श्रीमती सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में हमने कई चुनाव जीते और वे पार्टी की भी अध्यक्षा रहीं।
महिलाएं, पुरुषों से कहीं ज्यादा आगे हैं। पुरुष उनकी बराबरी नहीं कर पाते, इसलिए वे महिलाओं को घरों में धकेलना चाहते हैं।
हमें राहुल गांधी जी पर गर्व है, जिन्होंने दिल्ली में उन युवा महिलाओं के साथ प्रेस वार्ता की, जिन्होंने आंदोलनों में आवाज बुलंद की।
महिलाओं को अपनी बात रखने के लिए मंच देना, हम सभी की जिम्मेदारी है और हम गर्व के साथ ऐसा कर रहे हैं।
: AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद @Pawankhera जी
📍 पुणे, महाराष्ट्र
बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के खाने में निकले कीड़े! 🚨
आदरणीय मोदी जी & सम्राट चौधरी जी,
बिहार में ये क्या हो रहा है?
एक तरफ़ विकसित भारत के बड़े-बड़े दावे, दूसरी तरफ़ सरकारी स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे भोजन में कीड़े मिल रहे हैं।
बच्चों के खाने में भी लापरवाही या कमीशन का खेल? ऐसे कैसे बनेगा विकसित भारत?
खुद विपक्ष में रहते हुए गैस की टंकी लेकर सड़कों पर बैठने वाले कांग्रेस को ज्ञान न दें।
माननीय लोकसभा नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी की यह लड़ाई जनता के अधिकारों की लड़ाई है। जनता की समस्याओं के लिए उनका सड़क पर उतरना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस पार्टी जनता की आवाज़ सड़क से सदन तक उठाती है।
जनता के हक़ और अधिकारों की लड़ाई में कांग्रेस सदैव उनके साथ खड़ी है।
📍हरियाणा
@kharge@RahulGandhi@INCIndia@INCHaryana
#US12560
Women are the strength of India - its foundation, its present, and its future.
You belong to no one but yourself.
Be loud. Be proud. Fight for your space.
Smash the patriarchy!
#ChhatronKiGoonj
साहिल की FIR आखिरकार दर्ज हो गई, लेकिन किस तरह दर्ज हुई, यह आपको जरूर देखना चाहिए ।
देश की राजधानी दिल्ली में, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं जननायक राहुल गांधी जी को महज एक FIR दर्ज कराने के लिए 7 घंटे तक संघर्ष करना पड़ा ।
जब दिल्ली में यह हाल है, तो देश के दूरदराज़ इलाकों में आम लोगों को न्याय के लिए किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता होगा, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है ।
देखिए पूरा एक्सक्लूसिव वीडियो YouTube पर:
https://t.co/qVBmNJ4qvw
देश में आज भी कई परिवार अपनी बेटियों को इसलिए नहीं पढ़ा रहे हैं, क्योंकि वो 'लड़की' है।
कई लोगों को लगता है कि अगर लड़की पढ़-लिख गई तो इकोनॉमिकली इंडिपेंडेंट हो जाएगी, जिससे लड़कियों पर उनका कंट्रोल खत्म हो जाएगा।
: 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शेख आमना ने नेता विपक्ष श्री #RahulGandhi से कहा
📍 पुणे, महाराष्ट्र