Dear Murali @mmpream3 , knowing that you have chosen to name your little one Mridul is an honour that is difficult to put into words. More than any award or recognition, it is the affection and trust of people that makes this journey in public service truly meaningful.
My heartfelt gratitude to you and your family. May little Mridul Agrawal be blessed with a long, healthy and wonderful life, grow into a kind and strong human being, and bring immense happiness and pride to your family.
Lots of love and blessings to the little one. ❤️
मैं ऐसा पहली बार देख रहा हूँ कि मारवाड़ राजपूत सभा के अध्यक्ष का चुनाव इतनी चर्चाओं के बीच आ गया है।
बुद्धिजीवियों और पत्रकारों के साथ एक दिक्कत यह है कि वे ऐसे चुनावों को जातियों, खाप आदि का चुनाव कहकर चर्चाओं से इतिश्री कर लेते हैं लेकिन ऐसे चुनावों, खेमेबंदियों पर जरूर चर्चा होनी चाहिए। क्योंकि जाति इस व्यवस्था का सच है, आप, हम नकार नहीं सकते। जाति को आधार मानकर पार्टियां टिकिट, नियुक्ति और RPSC,UPSC तक के फैसले ले रहीं हैं और हम हैं कि ऐसी घटनाओं को जाति का कहकर उस पर चर्चा तक से बच रहे हैं।
राजस्थान में भी जाति की राजनीति के 50 नुकसान जरूर होंगे लेकिन ये ना भूला जाए कि भूस्वामी आंदोलन से लेकर आर्य समाज जैसे विचार सिर्फ जातियों की लामबंदी के कारण यहां सफलता का आसमान छू गए थे। कर्नल बैंसला जैसा नायक जाति की जाजम से निकलकर सामने आया था।
बहरहाल, मारवाड़ राजपूत सभा का चुनाव दिलचस्प होने की दहलीज पर है। कारण है कि इस बार युवाओं ने यहां रुचि ले ली है। ऐसे चुनाव युवाओं की रुचि लेने का कारण क्यों हुए ? इसलिए कि सवाल बहुत जमा हो चुके हैं और उनके जवाब उन लोगों के पास नहीं है जो जिम्मेदार है।
मेरा तो स्पष्ट मानना है कि किसी पद पर रहकर या तो आप लोकप्रिय हो सकते हैं या अलोकप्रिय, या तो निर्विवाद हो सकते है या विवादित लेकिन किसी भी स्थिति में निरपेक्ष नहीं हो सकते। और अगर हैं तो आप उस पद पर क्यों हैं ? अभी के अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा के साथ यही वस्तुस्थिति है। वे बार - बार क्यों निर्वाचित होते हैं, एकदम समझ से बाहर की बात है। उनका क्या मैकेनिज्म है, कोई अता - पता नहीं है। अंतिम परिणीति ये है कि समोसे में आलू की तरह हनुमान सिंह खांगटा मारवाड़ राजपूत सभा में जमे हुए है।
विचारवान युवाओं को ऐसी मोनोपली से दिक्कत होती है, होनी चाहिए। क्योंकि ऐसी संस्थाएं बहुत बड़े रिसोर्स खर्च करने के बाद खड़ी की जाती हैं। वहां नए प्रयोग होने चाहिए, नए लोगों को जगह मिलनी चाहिए, नए काम होने चाहिए। डाउन टू अर्थ और सॉफ्ट इमेज स्ट्रेटजी आपको रामजी की गाय साबित कर सकती है लेकिन रिसोर्स विजन और इनोवेशन के लिए खड़े किए जाते हैं।
मैं उन युवाओं को साधुवाद जरूर दूंगा जिन्होंने ये हिम्मत की है कि इस बार हम स्थापित लोग और स्थापित धारणा को चुनौती देंगे।
इसलिए वर्षों से चली आ रही मोनोपली तो तोड़ने के लिए इस बार तो कम से कम युवाओं को रविन्द्र सिंह राणावत के पक्ष में लामबंद हो जाना चाहिए।
विधानसभा क्षेत्र शिव अपने विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे होने के कारण सामरिक एवं आवागमन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सीमावर्ती क्षेत्र में सेना के साथ-साथ आमजन को बेहतर आवागमन की सुविधा मिले, इसके लिए सड़क चौड़ाईकरण व सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों को विधानसभा पटल से लेकर संबंधित विभाग के माननीय मंत्री जी तक लगातार उठाने का प्रयास किया।
सीमावर्ती क्षेत्र के महत्वपूर्ण सड़क मार्ग रामसर से चौहटन {खारिया (किता-गोगली) -सेतराऊ-चाड़ार -चाड़ी-पराडिया}जो पूर्व में सिंगल सड़क थी, उसे अब डबल लाइन की स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही गडरारोड़ से राणासर फांटा तथा बिजड़ियार चौराहा से कैलनोर सड़क के सशक्तिकरण एवं डबल लाइन की स्वीकृति भी मिली है। जिससे सैन्य आवागमन के साथ-साथ विधानसभा परिवार के आमजन का आवागमन भी सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक होगा।
इसके अतिरिक्त बालेवा–रामसर सड़क की स्वीकृति भी आगामी दिनों में मिलने वाली है। वहीं सीमावर्ती गांवों में पीएम गति शक्ति योजना के तहत सड़कों के नवीनीकरण की स्वीकृतियां भी जल्द प्राप्त होने वाली हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के लिए हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। क्षेत्रवासियों की हर आवश्यकता और हर मांग को मजबूती से उठाना मेरी प्राथमिकता है।
आगे भी विकास कार्यों के लिए निरंतर प्रयासरत रहूंगा।
आपका बेटा, आपका भाई
रविन्द्र सिंह भाटी
अगर रविन्द्र सिंह भाटी राजनीति में नहीं आते, तो कई यूट्यूबर आज भी "कंटेंट की तलाश" में घूम रहे होते।
कुछ लोगों की पूरी दुकान ही "भाटी" के नाम पर चल रही है।
सुबह भाटी, दोपहर भाटी, शाम भाटी... और महीने के अंत में YouTube की कमाई भी भाटी।
जिस दिन भाटी पर वीडियो नहीं बनता, उस दिन कई चैनलों का एल्गोरिदम भी मानो शोक में चला जाता है।
सच तो यह है कि कुछ लोगों के लिए रविन्द्र सिंह भाटी नेता कम, और कमाई का सबसे बड़ा "कंटेंट पैकेज" ज़्यादा हैं।
भाटी नाम नहीं... कई चैनलों की करेंसी है।
वाह रे भाटी, तुम बेरोजगारों के मसीहा हो।
श्री राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में अपनी जायज मांगों को लेकर जयपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर प्रशासन द्वारा लाठीचार्ज किया जाना अत्यंत निंदनीय है। असहमति की आवाज़ का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता से होना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
@PMOIndia@RajCMO
वागड़ प्रवास के दौरान…
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर बांसवाड़ा से कोटा प्रवास के बीच मार्ग में एक दृश्य मन को गहराई तक स्पर्श कर गया। तपती धूप में अकेले खड़ा एक युवा साथी, हाथों में माला लिए महावीर जी और चेहरे पर आत्मीय स्वागत का भाव।
यह केवल स्वागत नहीं था, सैकड़ो किलोमीटर दूर भी अपनेपन का एहसास था। ऐसे साथियों का स्नेह, विश्वास और बुलंद हौसला ही जनसेवा के पथ पर आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
आपका यह प्रेम, अपनापन और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
हमने तो सुना हैं कि आप सरकार गिराने के षड्यंत्र के दौरान एसओजी के डर से बंगले से कूदकर भाग गए थे। वॉइस सैंपल देने से बचने के लिए कितनी अदालतों में गए,
ईमानदार व साहसी होते तो वॉइस सैंपल देते ।
मेरे घर केन्द्रीय एजेंसियां आईं, मैं तो कहीं नहीं भागा, उनको सहयोग किया क्योंकि मैं ईमानदार था।
दुर्गादास राठौड़ के असली अनुयायी ऐसे होते हैं आपकी तरह नहीं।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी अपनी विधानसभा के दौरे पर है, उन्हें माताओं बहनों का ख़ूब आशीर्वाद मिल रहा है। वाकई तस्वीरें दिल को छू लेने वाली आ रही है, इतना प्रेम युवा पीढ़ी में मिलना बहुत कठिन होता है, लेकिन भाटी की यह कमाई उन्हें ओर बेहतर बनाती है!
@RavindraBhati__
सितम भी सहना दुआ भी करना, ओ बेकसी का गया जमाना।
अगर है जुर्रत गिराओ बिजली, बना रहे हैं हम आशियाना,
किसी भी हालत में बागवानों, तुम्हारा एहसान हम न लेंगे
जो अपनी गैरत पर आँच आयी, तो फूँक देंगे हम आशियाना॥
आज दादू दयाल जी की तपोस्थली भैराणा धाम में पावन भूमि पर प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण के विरोध एवं सनातन धर्म की रक्षा हेतु संत समाज द्वारा किए जा रहे “भूमि रक्षा आंदोलन” में संतों के आग्रह पर सम्मिलित होने का निमंत्रण प्राप्त हुआ।
किन्तु गत तीन सप्ताह से गिरल में स्थानीय मजदूर भाइयों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन में निरंतर व्यस्त रहने के कारण स्वयं उपस्थित नहीं हो पाऊँगा।
मैं समस्त प्रदेशवासियों से विनम्र अपील करता हूँ कि आप सभी इस पुण्य कार्य में सहभागी बनकर सनातन की रक्षा एवं संत समाज के समर्थन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
धर्म, संस्कृति और संत परंपरा की रक्षा हम सभी का कर्तव्य है।