राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत बहुत ही चतुर और चालाक हैं।
खबर है कि चंपत राय राम मंदिर परिसर में बैठकर दिल्ली,नागपुर और लखनऊ में तमाम प्रभावशाली व्यक्तियों को कॉल कर रहे हैं और ख़ुद को पाक साफ़ बताकर बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
चंपत राय सुख,सुविधा के मोह में ऐसे समा गए हैं कि वे भूल गए हैं कि वह संघ के स्वयंसेवक और प्रचारक रहे हैं।
चंपत राय के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बहुत असहज है,हिंदू समाज असहज है।
संघ चाहता है कि चंपत राय इस्तीफ़ा देकर राम मंदिर परिसर से नौ दो ग्यारह हो जाए,लेकिन चंपत के लिए कुर्सी का मोह मान सम्मान से बड़ा हो गया है।
चंपत राय के अहंकार,राम मंदिर में उनके तानाशाही से भरे रवैये, मैं हूँ तो सब है, वरना कुछ भी नहीं है के दंभ ने राम मंदिर परिसर की पवित्रता को गंभीर और गहरी चोट पहुंचाई है।
एक व्यक्ति की ज़िद और अड़ियल रूख ने संपूर्ण हिंदू समाज को शर्मिंदा कर दिया है।
चंपत राय के लिए कुर्सी,हिंदू समाज और हिंदू संगठनों के सम्मान से बढ़कर हो गयी है।
चंपत सब चौपट करने पर तुले हुए हैं।
बिजली विभाग के वायर बेतरतीब थे ,बिल्डिंग के पास NOC नहीं थी ,फायर नॉर्म्स नहीं थे आग लगने के बाद हर जगह सेम स्टोरी।
जिनके घर से लोग जाते है उनके लिए तो पूरा जीवन यही ट्रॉमा रहेगा अब।
#Lucknow#FireAccident
लखनऊ में 15 बच्चे ज़िंदा जल गए।
जल कर मरे तो मरे।मरना तो है ही।कब तक बचते? इतना हो हल्ला क्यो? इस आग से बचते तो सांप्रदायिकता की आग में मरते,धार्मिक उन्माद में जलते।परीक्षा पेपर लीक से मरते।मिलावटी तेल, पनीर से मरते।सड़क पर बिना फिटनेस की दौड़ती गाड़ी से कुचलकर मरते।अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी से मरते।नकली इंजेक्शन से मरते। नक़ली दवाई से मरते।नक़ली कफ सिरप से मरते। स्कूल में मिड डे मिल में सड़ा हुआ अनाज खाकर मरते।स्कूल में जर्जर छत गिरने से मरते। स्कूल की टंकी से जहरीला पानी पीकर मरते।ट्यूबवेल के लिए खुदे गड्डे में गिरकर मरते।मंदिर में भगदड़ से मरते।कब तक बचते?
किसी तरह बच जाते तो महंगाई मार देती, बेरोजगारी में दम तोड़ देते।सड़क पर खुले गड्डे में गिरकर मरते।सरकार की लापरवाही से मरते।टूटे ब्रिज में दबकर मरते।नाव में डूबकर मरते।जर्जर और खतरनाक इमारतों में दबकर मरते।
उपर से नीचे तक फैले भ्रष्टाचार से मरते।मरना तो तय है।इस सिस्टम में बच नहीं सकते।सिस्टम से लड़ने वाले मर गए,तुम तो बच्चे हो।
अब सरकार की जान लोगे क्या? मुआवजा मिल जाएगा।कमेटी बना देंगे।2-4 को निलंबित कर देंगे।घटना स्थल पर आंसू बहा देंगे। सरकार से ओर क्या उम्मीद करते हो? अगर ज़्यादा उम्मीद है तो बड़े नादान हो।
आराम से सो जाइए।
बाप का दर्द आँसू बन कर बह रहे है
गोदी में पाला बेटा छीन कर ले गए और मुल्ला बना दिया धर्म परिवर्तन करा दिया बुद्धि बांध दी
तबलीगी जमात पर कब बैन लगेगा? @AmitShah
शेयर भी नहीं कर सकते तो छोड़ दो सोशल मीडिया
बांग्लादेश में मजहबी भीड़ द्वारा भगवान राम का अपमान और राममूर्ति के काम को रुकवाने के विरोध में |
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की सड़कों पर लाखों हिंदुओं की भीड़ उतर कर भयंकर विरोध कर रही है |
भारत के हिंदुओं अगर हो सके तो इनके संघर्ष को सोशल मीडिया से बैकअप जरूर दे देना | ✊
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की रूबिया शेख आठवी पास है। उसने उपाध्याय नाम से क़ानून की एक फर्जी डिग्री ली और एक वकील की सहायक बन गई।
फिर उसने हिंदू महिलाओं की सहायता का बीड़ा उठाया। Such noble intentions!!
सहायता का तरीका एक ही था। हिंदू महिलाओं को दरगाह पर ले जाती, वहाँ मुयलमान पुरुषों से उनकी भेंट करवाती। उपाध्याय मॉम पर कौन संदेह करता। इस तरह उसने 175 से अधिक हिंदू महिलाओं को ट्रैप कर दिया है इलसाम में।
हिंदू पुरुष सरकारी चपरासी/सिपाही की परीक्षा की तैयारी करते हुए नपुंसक हो जाते है। फलत: महिलाये सहायता पाने के लिए दरगाहों पर पहुँच जाती है।
हिंदू शासक वर्ग के लोगो से अर्थव्यवस्था को मुक्त करने को कहो, ताकि पुरुष उद्यमी बने और उनका पौरुष जगे, तो वो कहते है कि ये नहीं हो सकता, क्यूँकि अर्थव्यवस्था और बढ़ी तो अंबानी अड़ानी ही पीएम बन जाएँगे।
उनसे कहो कि हिंदुओं को संगठित करना है कुछ आर्थिक योगदान दीजिए तो वे कहते है कि संगठन के लिए धन क्यों चाहिए?
होगा तो वही जो माँ काली चाहेगी। सिचुएशन अभी तो बहुत grim है लेकिन हम जैसे विक्षिप्त भी give up तो नहीं ही करेंगे।
भारत तिवारी का एनकाउंटर नहीं होना चाहिए था, उस समय तो बिलकुल नहीं जब उसने पिस्तौल वापस कर दी थी। तिवारी फ़्रस्ट्रेशन में था, गाँव के लिए लगातार लिख-बोल रहा था।
दूसरा सत्य यह है कि उसने पुलिस पर पिस्तौल तानी थी। किसी भी दूसरे देश में पिस्तौल हाथ में देखते ही पुलिस पहले गोली मारती है, फिर बात करती है। उसने यह कार्य दो बार किया था।
फेसबुक पर पिस्तौल के साथ उसकी तस्वीरें हैं। यदि वह निहत्था था, तो यह पुलिस हत्यारी ही कही जाएगी। पुलिस ने यदि पहली ही बार में, पिस्तौल तानते ही गोली मार दी होती तो वह कानूनी रूप से उचित होता।
बिहार पुलिस दूध की धुली नहीं है, पर पुलिस पर पिस्तौल तानना यदि हम उचित कहने लगें फिर नक्सलियों पर हम क्यों आतंकी, उग्रवादी की ठप्पा लगाते हैं?
यदि चंपत राय दूध के धुले हैं तो उनको पद से, जाँच होने तक, हट कर जाँच में सहयोग देना चाहिए न कि पद पर बने रह कर जाँच को प्रभावित करना चाहिए।
पूर्व में किए गए सत्कर्म, वर्तमान में हो रहे दुष्कर्म पर हावी नहीं हो सकते। ये कुतर्क है। मैं चंपत राय को दोषी नहीं मान रहा, मैं कह रहा हूँ कि दो कौड़ी के घटिया भित्तिचित्रों से ले कर ‘ज्योति स्वरूप’ जैसे आँखों के काँटा सदृश हुए कार्य इसी महानुभाव के समय में हुए हैं।
दो तिहाई जीवन राम मंदिर के लिए समर्पित करने का तात्पर्य यह नहीं है कि बचे जीवन में लूट को देखते रहें। उनमें थोड़ी भी नैतिकता है, तो @ShriRamTeerth से हट कर निष्पक्ष जाँच में सहयोग देना चाहिए।
बाकी हर बात छलावा है।
Visited the residence of BJP Tamil Nadu Youth Wing President Thiru @SuryahSG avl to offer my heartfelt condolences on the passing of his beloved mother.
I have personally witnessed the unwavering care and devotion with which Thiru Suryah stood by his mother through the most challenging times. I pray to the almighty to grant him and his family the strength to endure this irreplaceable loss, and to bless her soul with Sadgati.
Om Shanti.
This christian lady is sprinkling coconut oil on an empty govt land and asking Jesus to do his magic and give that land to her so that she can construct a church.
Parachute coconut oil manufactured by Hindus, coconuts sourced from Hindu farmers is used as Jesus’ holy oil. 🤷🏻♂️🤦🏻♂️🤣
A baby selling, medicine denying, soul harvesting Albanian ghoul gets the Nobel Peace Prize, but @Amritanandamayi who has been doing genuine humanitarian work in multiple countries in the world is never considered for the award. That’s white privilege for you! @NobelPrize
The 1978 Ranga-Billa case involved the brutal kidnapping and murder of teenage siblings Geeta and Sanjay Chopra in Delhi by career criminals Kuljeet Singh (Ranga) and Jasbir Singh (Billa).
The horrific crime shocked the nation, leading to a massive manhunt and the swift conviction of both killers, who were ultimately hanged in 1982.
The investigation was led by Inspector VP Gupta of the Delhi Police, with SI Ram Chander serving on the team. A bystander, who had tried to save the children, and later helped the police identify the killers by providing their descriptions was Babulal. The journalist who covered the case was Prabha Dutt.
Amazon Prime's series Raakh, which is based on this incident, replaces Inspector VP Gupta with SI Jayprakash Jatav, explicitly portrayed as a Dalit officer navigating institutional bias. Furthermore, SI Ram Chander is replaced by SI Javed Murtaza, Babulal by Saleem, and Prabha Dutt by Nisar, while a lazy hawaldar character named Mishra has been added to the narrative.
This isn't creative liberty. Creative liberty is meant to enhance a story, not distort historical facts to fit a specific ideological agenda. Another stark reminder of how easily history can be rewritten in plain sight under the convenient guise of creative freedom.
अरे क्या राजभर साहब !
यहां ममता दीदी की टीएमसी और उद्धव भैया का शिवसेना साफ हो गया है और आप कोरी बयानबाजी कर के ब्रेकिंग न्यूज़ में अपना नाम चलाने में लगे हुए हैं. वैसे एक अच्छे घटक दल का नेता बनने की आपकी ये कोशिश बढ़िया है.
लेकिन क्या लगता है आपको बीजेपी और पीएम मोदी आपकी पुरानी बयानबाजी भूल गए हैं क्या?
याद है आप ही ने कहा था, 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में कि अगर भाजपा नेता वोट मांगने आएं, तो उन्हें पीटकर चारपाई पर वापस भेजो.. वो आप ही थे न राजभर साहब जो प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया का सबसे बड़ा झूठा नेता बताते थे, अरे! आपने ही न मऊ में एक मंच से कहा था कि नरेंद्र मोदी भिखारी है, कि मोदी झोला लेकर आए थे और कटोरा लेकर भीख मांगते हुए चले जायेंगे.
और तो और साल 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भी तो ओम प्रकाश राजभर ही थे जो भाजपा गठबंधन पर ही हार का ठीकरा फोड़ते हुए कह रहे थे कि जनता ने मोदी और योगी को नकार दिया है.
@oprajbhar साहब ऐसा है कि सियासत में जुबान से हल्के आदमी का हश्र बहुत खराब होता है और आज की सियासत में तो पूछिए ही मत... इसलिए ये सब लिखने और बोलने से पहले सोच लीजिए कि अभी अगर चुनाव में बीजेपी ने आपकी पार्टी को हाशिए पर धकेल दिया तो फिर इसी समाजवादी पार्टी के दरवाजे बैठना होगा जिसका आप बीजेपी में विलय कराने पर तुले हैं.
यकीन मानिए कॉकरोच जनता पार्टी तक में भी आपकी एंट्री मुश्किल हो जाएगी जो ये समाजवादी पार्टी के मुखिया अड़ जाएं.
इस बारे में आप पता कर लीजिएगा.
UP- मेरठ के SSP अविनाश पांडेय संडे को मॉर्निंग वॉक करते महिला थाने पहुंच गये. पूरे थाने में सिर्फ एक महिला पुलिसकर्मी मिली, वह भी सो रही थी. SSP ने क्राइम रजिस्टर उठाया और लौट आये. आफिस पहुंचने पर रजिस्टर मांगा तो थाने में गुम रजिस्टर की तलबी से हड़कंप मच गया. CCTV देखने के बाद थानेदार को पता चला कि SSP निरीक्षण कर गये है.
SSP ने 19 लापरवाह महिला पुलिसकर्मियों के जिले के थानों में ट्रांसफर कर दिये है.
अन्नामलै ने इस महीने तमिलनाडु में हुई 3-4 यौन हिंसा की घटनाओं में संलिप्त लोगों को ‘नॉर्थ इंडियन’ कहते हुए अपने ट्वीट में सात बार बताया है कि ‘नॉर्थ इंडियन’ ऐसा कर रहे हैं।
NCRB के आँकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में हर दिन औसतन 30 रेप/यौन हिंसा की घटनाएँ होती हैं। यानी जून में 450 घटनाएँ घटित हुई होंगी, इस वर्ष 5,000, और अन्ना को नॉर्थ इंडियन्स को घेरना है। बाकी के हर रेप में तमिल व्यक्ति ही संलिप्त होगा, उसका तो डेटा रखते होंगे तुम लोग?
अन्नामलै चाहते तो बिहार-यूपी-झारखंड-बंगाल या जिस भी राज्य के थे, वैसे लिख सकते थे। उन्होंने चुना ‘नॉर्थ इंडियन’ क्योंकि यही शब्द वहाँ की निम्नस्तरीय राजनीति के लिए चलन में है।
अपराध हर जगह होते हैं, हर राज्य का व्यक्ति करता है। कहीं कम, कहीं अधिक। हाँ, अपनी नई राजनीति को मेनस्ट्रीम करने के लिए अन्नामलै किसी दिन हाथ में टिन का डब्बा और काला पेंट ले कर ‘हिन्थी’ साइनबोर्ड को काला करने सड़क पर दिख जाएँ, तो हमें आश्चर्य नहीं होगा।
इसे ही हम ‘हिन्दू हृदय सम्राट’ से ले कर पता नहीं क्या-क्या बना रहे थे। ‘नॉर्थ इंडिया’ में इसकी लोकप्रियता आज भी है, पर यह अधम श्रेणी का कार्य है।
जहा अधर्म है,वहाँ धर्म नहीं रहता।जहाँ अनैतिकता का निवास होता है वहां से नैतिकता पलायन कर जाती है। जहाँ राक्षसों का बोलबाला होता है, वहाँ राम नहीं रहते।
राम मंदिर में रावण कौन है? वह कौन है जिसने पूरे हिंदू समाज को शर्मिंदा किया? चरित्रवान राम के घर में चरित्रहीन लोगों ने कैसे कब्जा कर लिया?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कारण कितने रुपये की चपत लगी है यह सामने आना बाकी है।
चंपत तो खोटा सिक्का निकला।खोटे सिक्के को अशर्फी बनाकर राम मंदिर ट्रस्ट में किसने बैठाया?
।चंपत राय कुर्सी के मोह में ऐसा चिपका है कि इतनी बदनामी होने के बाद भी अभी तक इस्तीफ़ा नहीं दिया।ग़ज़ब के लोभी और लालची है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों
के परिवारों की,भाई, भतीजों,भांजों और सभी रिश्तेदारों के सम्पत्ति की जाँच होनी चाहिए।
राम मंदिर में कौन रावण है,यह पता लगना चाहिए।
यह हमारी आस्था और हमारे धर्म के साथ धोखा है।चुप नहीं रहना है।जो चुप है वह सब इस पाप में भागीदार है।
जहाँ अधर्म है, जहाँ अनैतिकता है,जहाँ आसुरी शक्तियों उपस्थित है,वहाँ धर्म नहीं रहता,वहाँ नैतिकता नहीं रहती, वहाँ भगवान नहीं रहते,वहाँ राम नहीं रहते।
राम मंदिर से राम का पलायन हो, इसके पहले हमें आसुरी मानसिकता के लोगों को मंदिर परिसर से बाहर निकालना होगा।
22 जनवरी 2024 को राम मंदिर के उद्घाटन पर पीएम मोदी ने कहा था कि “अधर्म और आसुरी शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ना राष्ट्र के हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
सोमनाथ की पुनरावृत्ति हम राम मंदिर में नहीं होने देंगे। हिंदू समाज की चुप्पी से यह देश लूटा है।
हिंदू समाज की चुप्पी से यह देश टूटा है।
अब हम हमारे राम मंदिर को लूटने नहीं देंगे।
जिन्होंने लूटा है उन्हें लौटाना होगा।
The Modi government’s robust security arrangements for the upcoming NEET retest reflect seriousness and accountability, not excess. After the unfortunate paper leak incident that shook the trust of lakhs of students, decisive steps were essential to restore confidence and ensure a fair process. Mobilising CRPF, CISF, IAF support for secure transport, AI-enabled CCTV, biometrics, and multi-layer checks are temporary but necessary measures for this high-stakes re-examination. These protocols protect honest aspirants from any repeat of malpractice.
Most of the stringent logistics, such as airlifting question papers and secure escorts, occur before students even reach the centers. Biometrics, facial recognition, and surveillance are now standard in major competitive exams globally to prevent proxies and leaks. Indian students and parents have every right to demand fool-proof arrangements so that merit alone decides medical seats.
On the 15-minute extension to 195 minutes: this actually gives candidates more time to attempt the paper comfortably. It is being implemented alongside urgent fixes for admit card issues by the NTA. This does not dilute the long-term goals of NEP 2020, which this government continues to advance through curriculum reforms, reduced rote learning, and multiple opportunities. One crisis-driven retest with tight security upholds the exam’s credibility rather than undermining NEP’s vision.
As a former IPS officer, you should know the importance of strong action against organised leaks and irregularities. Paper leak scams were a deep-rooted problem that the Modi government has confronted head-on with stricter laws, greater digitisation, and direct oversight. Personal monitoring from the PMO level demonstrates commitment, not overreach.
We stand firmly with the lakhs of sincere NEET aspirants and their families who have invested years of hard work. Their future must not be compromised by any mafia networks. The focus remains on delivering a transparent, leak-proof examination where merit prevails. Systemic improvements are underway for the future so that such extraordinary measures are no longer needed.
Criticism is welcome, but it should acknowledge the root issue, the leaks that hurt students, and support efforts to safeguard fairness. The BJP and NDA government will continue prioritising integrity in education. Students first. Merit first.
It is understandable that Annamalai, the self-proclaimed “honest” IPS-turned-politician who once rode the BJP wave in Tamil Nadu only to abandon ship when it suited his ambitions, is now shedding crocodile tears over “extreme security” for the NEET-UG 2026 retest to position himself as a "neutral" politician to appease his global masters whom have taught him multiple courses over the last 24 months. But spare us the drama, neither your supporters nor the masses will be interested in such rants. Continuous raking up of non issues will only make the people view you as a nuisance rather than a serious politician.