रामविलास पासवान 11 बार सांसद रहे, एक बार विधायक रहे। 7 बार केंद्रीय मंत्री की शपथ ली। लोकसभा में 'लीडर ऑफ द हाउस' भी रहे। 2 दशक तक एक राजनीतिक दल के अध्यक्ष रहे।
उन्होंने वाणिज्य मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत अधिकारी की बेटी से शादी की। सामान्य वर्ग की महिला से। इन दोनों के ही बेटे हैं - चिराग पासवान। तीसरी बार सांसद बने हैं, केंद्रीय मंत्री भी हैं। अपने पिता द्वारा स्थापित पार्टी के मुखिया भी हैं (पार्टी अब नए रूप में है)।
चिराग पासवान जिस हाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं, वो दलितों के लिए आरक्षित है। इससे पहले वो जिस जमुई लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे, वो भी SC के लिए आरक्षित थी।
लुब्ब-ए-लुबाब ये कि चिराग पासवान आरक्षण का पूरा लाभ उठा रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बावजूद, ऐसी पृष्ठभूमि होने के बावजूद - उनकी आने वाली पीढ़ियाँ भी आरक्षण का लाभ अनंतकाल तक उठाती रहेंगी। यही चिराग पासवान संसद में और सोशल मीडिया पर कहते हैं कि आरक्षण कोई भीख में मिली खैरात नहीं है, उनके जीते-जी इसे कोई नहीं हटा सकता। चिराग पासवान केवल एक उदाहरण हैं, अपवाद नहीं। ऐसे-ऐसे कई उदाहरण मिल जाएँगे आपको।
जिस दुसाध समाज से चिराग आते हैं, बिहार की जातीय जनगणना में उनकी जनसंख्या 70 लाख बताई गई है। सत्तर लाख लोगों में LJP(R) का नेतृत्व केवल चिराग पासवान के हाथों में ही रहेगा। हाजीपुर और जमुई से उनके ही परिवार के लोग लड़ेंगे। पिता के बाद पुत्र ही केंद्रीय मंत्री बनेगा। यही कारण है कि इनके लिए आरक्षण ज़रूरी है।
He is the son of a nine-time MP and a three-time MP himself. How much more empowerment does he need?
He has wealth, power, and political clout, so why does he continue to contest from reserved seats? Why not fight from an open seat? By monopolizing a reserved constituency, isn't he actively preventing a less privileged Dalit brother or sister from his party from entering Parliament?
And he isn't alone. There are many like him in every field. This argument is not a conspiracy by the GCs; they gain nothing either way. It is a question of internal accountability. Your own influential elites are holding the broader community back by refusing to step aside. So Dalits should start asking questions about where the real issue lies, instead of blaming GCs for their lack of opportunities.
"ब्राह्मणों की लड़कियों का विवाह दलितों से होगा तभी जातिवाद खत्म होगा और तभी आरक्षण खत्म होगा" ऐसा बहुत से दलित थिंकर्स, दलित लीडर्स , दलित इंफ्लूएंसर कहते बोलते देखे जा सकते हैं।
इस पर कुछ बिंदु।
१. क्या ब्राह्मण की बेटी से विवाह करके दलित की जाति बदल जाएगी? यदि ऐसा है तो चिराग़ पासवान की माता का नाम रीना शर्मा है, वो एक पंजाबी ब्राह्मण परिवार से आती हैं। किंतु आज भी चिराग पासवान एक दलित आरक्षित सीट से चुनाव लड़ता है। जब ब्राह्मण की बेटी से विवाह करके चिराग पासवान की जाति नहीं बदली, वो अभी भी दलित ही हैं तो बाकी के दलितों की जाति या सम्मान में वृद्धि कैसे होगी? दूसरा उदाहरण, अखिलेश यादव ओबीसी हैं, उनका विवाह क्षत्राणी डिंपल से हुआ डिंपल अब यादव हो गईं, अखिलेश डिंपल के बच्चे अभी भी ओबीसी हैं, तो जाति लड़की की बदली ना कि पुरुष की और ना ही बच्चों की।
तो ब्राह्मण, क्षत्रिय महिलाओं से विवाह करके तुम जातिवाद को कैसे हरा पाओगे? हां अपनी बेटियां ब्राह्मण, बनिया, क्षत्रियों को ब्याहोगे तो बच्चे सवर्ण पैदा हो सकते हैं । आपका तरीका थोड़ा उल्टा है।
२. विवाह पर आप किसी पर रोक नहीं लगा सकते हो कि आपको दलितों से ही, सवर्णों से ही विवाह करना होगा। लड़की की, लड़के की इच्छा को सम्मान करना आवश्यक है। हां, यदि ब्राह्मण की लड़की किसी जाटव से प्रेम में है और जाटव की लड़की ब्राह्मण से प्रेम में है और दोनों विवाह करने की इच्छा रखते हैं तो मात्र जातीय आधार पर इस विवाह को रुकवाना गलत है (हां अन्य कई कारण हो सकते हैं परन्तु मात्र जाति नहीं)
३. आप ब्राह्मण की बेटी केवल ब्राह्मणों को उकसाने के लिए मांग रहे हैं, इसका और कोई भी कारण नहीं है
४. दलित अपनी से अधिक दलित जाति में स्वयं विवाह नहीं करा रहे जैसे जाटव पासी में विवाह नहीं करा रहे परंतु गलत ब्राह्मण है।
कौन-सा संघर्ष रहा रामविलास पासवान जी का? यही न कि कैसे UPA में भी मंत्री बनें और कैसे NDA का भी हिस्सा बन जाएँ?
पासवान और चमार, बिहार का सबसे अधिक SC आरक्षण पाते रहे हैं। आप स्वयं अपना विकास आरक्षित सीट से कर रहे हैं। आपने मुसहर, डोम, चंडाल, भुइयाँ के कितने नेताओं को आगे बढ़ाया है?
मैं भी बिहार से हूँ। हाँफ-हाँफ कर मोदी जी का नाम लेने से कुछ नहीं होता।
बकवास बंद कीजिए और महादलितों का हक दीजिए। अब बहुत हो गया। पर आपका सही है, सत्ता बदलेगी फिर भी आप मंत्री बन ही जाओगे! आपको कुछ भी कहना बेकार ही है।
ये कैसा घमंड है? कैसी बेशर्मी है?
देखिये कैसे राष्ट्रगान का अपमान किया जा रहा है.
ये है उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना.
क्या नए BNS के तहत महाना को सजा नहीं होनी चाहिए?
क्या महाना को होगी तीन साल की जेल और फाइन होगा?
लेकिन क्या कुछ भी होगा?
CJP को बढ़ाने का काम BJP कर रही है. आज जो हुआ वो उसी स्क्रिप्ट का हिस्सा है.
आने वाले वक्त में ऐसे planned event और होंगे. ताकि अपनी पसंद का विपक्ष बनाया जा सके.
सारी कवायद युवाओं को बांटने की है, भ्रम जाल फैलाने की है.
सोचिए - पूरे देश में युवाओं पर मुकदमे हुए, CJP को मैनेज करने वाले एक बंदे पर FIR नहीं हुई.
पूरे देश में युवाओं ने लाठी खाई, CJP की मैनेजमेंट में किसी को एक खरोच तक नहीं आई.
जहां लोगों को एक घंटे भी धरना देने नहीं दिया जाता, वहां खुद एयरपोर्ट पर जाकर परमिशन दी जा रही है.
सोनम वांगचुक जो सरकार के चहेते बन चुके हैं. जिन्हें अमित शाह ने जेल से निकाला. जो खुद सरकार की तारीफ करते हैं, वो इससे जुड़े और आचानक गायब हो गए.
क्या NEET में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवार को 1 करोड़ मिला?
क्या देश भर में युवाओं के खिलाफ मुकदमे नहीं हुए?
आपको याद होगा - यूपी में नमक रोटी की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार साथी को जेल भेज दिया गया था, यहां स्कूलों में बुला बुलाकर इवेंट कराया जा रहा है.
आखिर इतना सब क्यों?
ऐसा इसलिए ताकी 2029 में ये भ्रम बनाया जा सके कि युवा बंट गए. होना खेल EVM से ही है, लेकिन भ्रम बनाना भी जरूरी है. ताकि आपको लगे सब लोकतांत्रिक तरीके से हुआ है.
जिनके नाम पर योजनाएँ, स्टेडियम, सड़कें कम पड़ गईं, अब मंदिर भी?
बना दो मंदिर। साहब को भगवान घोषित कर दो।पूजा अनिवार्य करदो ।
ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इतिहास में पढ़ें कि एक दौर ऐसा भी था-
जब “भगवान” चुनाव लड़ते थे,
रैलियाँ करते थे,
वोट माँगते थे,
विपक्ष पर तीखा भाषण देते थे,
उनकी नीतियों के खिलाफ़ देशभर में paper leak आंदोलन हुआ था जिसमे उनको एक देवता को इस्तीफ़ा कराना पड़ा ।।
विदेश यात्राएँ करते थे भगवान
अब हर लोकप्रिय प्रधानमंत्री का मंदिर बनेगा, अगली सरकार आएगी तो नया मंदिर बनेगा, पुराना तुड़वाया जाएगा?
बस यही होता रहेगा - बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य भाड़ में जाये, पहले मंदिर की राजनीति पूरी कर लेते हैं।
इस बार तो दिल्ली पुलिस ने कमाल ही कर दिया
1. पैलेट गन के इस्तेमाल की रिपोर्ट को फेक
न्यूज़ बताते रहे. फिर जो है वो सामने हैं
2. पत्थर से भरा ट्रक जंतर मंतर पर कैसे
आया ! इस पर मनोहर कहानियाँ बनती
रहीं. फिर पता चला सारा खेल पुलिस का
है.
3. बिना वर्दी के लाठी मारने वाले कौन थे !
जवाब आना बाक़ी है
जनवरी 2014 में अपनी आखिरी प्रेस वार्ता में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि,उन्हें पूरा विश्वास है कि मीडिया और विपक्ष की तुलना में इतिहास उनके प्रति अधिक न्यायप्रिय होगा और उनके द्वारा किए गए कार्यों का सही मूल्यांकन करेगा।
मैं पहले दिन से इस बात पर कायम हूं कि CJP को BJP ने ही बनाया है.
पहले दिन से प्लान था कि विपक्ष को डिस्क्रेडिट करके, अपने हिसाब का विपक्ष तैयार कर दिया जाए.
एयरपोर्ट पर परमिशन देना हो, या जंतर-मंतर पर धरना चलते देना हो. सब कुछ प्लान के हिसाब से था.
मैं ये गारंटी के साथ कह सकता हूं- 20 तारीख से पहले मोदी सरकार चाह देती तो 1 घंटे धरना ना चल पाता, लेकिन सरकार ने स्क्रिप्ट के हिसाब से चलने दिया.
वांगचुक जिन्हें खुद अमित शाह ने जेल से निकाला था, उनका भूख हड़ताल करना, और अचानक से एक सुबह उन्हें उठा लेना. सब कुछ स्क्रिप्ट के हिसाब से था.
बस 20 तारीख को जो हुआ, वो ना BJP को पता था, ना ही CJP को अंदाजा. बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंच गए.
यहां से सब कुछ स्क्रिप्ट के बाहर चला गया. इसलीए CJP की पूरी टीम ही मौके से गायब हो गई. किसी को एक लाठी नहीं पड़ी.
देश भर से आए बच्चों ने सब कुछ झेला, और उसके बाद ये मामला बहुत बड़ा हो गया. जो अब BJP और CJP के कंट्रोल से बाहर था.
स्क्रिप्ट का अंत करीब-करीब ऐसा ही था, जिसमें सरकार संवेदनशील लगे और विपक्ष के नाम पर कुछ लोग खड़े कर दिए जाएं, जो सरकार के हिसाब से हों.
क्योंकि विपक्ष पिछले 3 साल में बहुत ज्यादा मजबूत हो गया था. खासकर युवाओं के बीच में अपनी पहुंच मजबूत की थी. इसी बात को तोड़ने के लिए CJP का नाटक किया गया.
जब 20 तारीख के बाद मामला स्क्रिप्ट के बाहर गया तो पहले कुछ वक्त इंतजार हुआ. फिर वांगचुक को खुद सरकार ने सूप पिलाकर मामला खत्म किया.
और आखिर में धमेंद्र का इस्तीफा हो गया.
इस्तीफे के बाद जिस तरह से सरकार के मंत्री बता रहे हैं कि धरना तत्काल खत्म किया जाए, वो बताता है कि इसे कौन चला रहा था.
आप खुद सोचिए, ये जितने सेलिब्रेटी हैं, ये अचानक से कैसे बोलने लगे. एक जैसी टीशर्ट पहनकर, कॉओर्डिनेटेड तरीक से. जिनके लिए पैसा ही सब कुछ है, वो देश की चिंता क्यों करने लगे, वो भी अचानक.
अब लोगों के बीच ये भ्रम पैदा हो गया कि CJP की सरकार सुन रही है, विपक्ष वही है. सरकार यही भ्रम लोगों में बनाए रखना चाहती है. और स्क्रिप्ट के हिसाब से ये बात लोगों में चली गई.
सरकार को अपने हिसाब का विपक्ष मिल गया, जिसे वो अपने हिसाब से चला सकती है. जो भी इस भ्रम जाल में फंस रहा है, वो अपना और देश का नुकसान कर रहा है.
इस पूरे आंदोलन में लेफ्ट के जितने भी छात्र संगठन, कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन और बाकी विपक्ष के छात्र संगठन शामिल हैं, उनकी मंशा साफ थी. वो असल में विपक्ष का काम कर रहे थे.
इस आंदोलन में जितने भी युवा थे, जो देश के अलग-अलग कोनों से जुड़े, सबकी मंशा साफ थी.
बस CJP का मामला अलग है, जिसपर बहुत संदेह है. इसे लेकर सावधान रहना ठीक.
जंतर मंतर पर जितने युवा आ रहे हैं, उनमें से 80-90% CJP के लिए नहीं आ रहे.
कल को सोनम अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दें, या CJP के लोग पूरी तरह हट जाएं तो भी धरना चलता रहेगा.
क्योंकि अब इस प्रोटेस्ट का कोई लीडर नहीं है. ये खुद से चल रहा है. ज्यादातर को ना CJP की पड़ी है, ना सोनम की.
ये अब सरकार से तंग लोगों का मेला बन गया है, जहां हर आदमी के आने की वजह बस इतनी है कि सरकार की गुंडई नहीं चलनी चाहिए.
जिस सरकार ने बच्चों को पिटवाया, उनका खून निकाला, उनके हाथ-पैर तोड़ दिए. सोनम ने उसी सरकार के मंत्रियों के हाथ से जूस लिया और गटक लिया.
ये वो हकीकत है, जिसके बारे में मैं पहले दिन से कह रहा हूं.
दीपके का यह ट्वीट बताता है कि सोनम की घोषणा के बाद भी फ़िलहाल जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट चलेगा।
अगर ये लोग प्रोटेस्ट ख़त्म करने की बात करेंगे तो वहाँ के युवा इनकी जगह ले लेंगे।
"हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है, हमारा समय बर्बाद मत करो।"
सड़कों पर छात्र पुलिस की लाठियां खा रहे हैं, और देश की सबसे बड़ी अदालत के पास पुलिस बर्बरता के सबूत देखने तक का समय नहीं है!
जब इंसाफ के दरवाजे ही छात्रों की चीखों से मुंह मोड़ लेंगे, तो देश का युवा न्याय के लिए कहां जाएगा?