आज के समय में भी किसी IPS अधिकारी के पास अपना घर न हो, ये बहुत बड़ी बात है।
हालांकि सवाल यहां यह भी है कि आखिर बना क्यों नहीं पाए? क्योंकि सैलरी तो एक लाख के ऊपर होगी। पुलिस की नौकरी के दौरान रहने, खाने, बच्चों के पढ़ने, इलाज करवाने का पैसा अलग से मिलता है।
एक डॉयलॉग बड़ा मशहूर है- जो डर गया समझो मर गया।
गृहमंत्री अमित शाह के घर के बाहर की सुरक्षा है।
मायावती जी CM थीं जब वह एयरपोर्ट जाती थीं तो PM की सुरक्षा जैसे पूरे रास्ते 100-100 मीटर पर पुलिस के जवान तैनात किये जाते थे।
दूसरी एक बात की बड़ी चर्चा थी कि उन्हें dust allergy है ऐसे में धूल धुंआ से बचने की सलाह डॉक्टर देते हैं वह जहां भी जाती थीं पूरे रास्ते नगर निगम के टैंकर पानी छिड़कते थे जबकि मैडम बन्द बुलेट प्रूफ गाड़ी में बैठकर जाती थीं।
साहब आपकी सरकार है घर सेना लगा लीजिये आप दोनों की मर्जी।
किशन सहाय सर,
कहने को तो आज आप पुलिस की सर्वोच्च सेवा, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद से सेवानिवृत्त हो गए हैं, लेकिन वास्तव में कोई व्यक्ति तब तक रिटायर नहीं होता, जब तक उसके विचार और समाज सेवा का भाव उसके भीतर जीवित रहता है।
पुलिस सेवा में रहते हुए भी आप समाज के उन व्यक्तियों में से रहे, जिनके दरवाज़े हमेशा सभी के लिए खुले रहे। आपने हर व्यक्ति की भरपूर मदद की और हर संभव सहयोग दिया।
हम उम्मीद करते हैं कि आगे भी आपका मार्गदर्शन समाज के नौजवानों और युवा पीढ़ी को मिलता रहेगा। आपके जीवन के आगामी सफर के लिए आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
देखिए, एक सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल जब सिंगापुर के स्कूलों से ट्रेनिंग लेकर लौटा, तो उसने सिर्फ़ अपने स्कूल की इमारत नहीं बदलीं…
उसने बदली अपने स्कूल के बच्चों की सोच, उनका आत्मविश्वास, और उनका समाज को देखने का नज़रिया।
जानिए, कैसे एक प्रिंसिपल की सीख ने पूरे स्कूल की तस्वीर बदल दी।
छात्रों के प्रोटेस्ट से मोदी सरकार के डर का सबूत देखिए.
जंतर - मंतर की किलेबंदी की जा रही है .
बेरीकेडिंग ऊंची कर दी गई है . लोहे की दीवार सी खड़ी की जा रही है ताकि फिर छात्रों के जत्थे वहां किसी मांग को लेकर न पहुंच जाएं .
RAF के सौ से ज़्यादा जवान चौबीसों घंटे तैनात हैं . दिल्ली पुलिस के दर्जनों जवान और अधिकारी वहां मुस्तैद हैं . धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से हिली सरकार अब जंतर मंतर पर 'पक्के इंतज़ाम ' करने जुटी है ताकि वहां से सरकार को अब चुनौती नहीं मिल सके.
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
शशि थरूर से बहुत लोग असहमत रहते हैं, मैं भी उनमें से हूँ, मगर हाल में उन्होंने अपने लेख में एक अच्छी बात कही है, जिस पर सभी को ग़ौर करना चाहिए। ये लेख लोकसभा की सीटें बढ़ाने को लेकर है। ये तो आप जानते ही हैं कि लोकसभा की सीटें फिलहाल 543 हैं जो कि 1972 से जमी हुई है 1971 की जनगणना के आधार पर है।
सरकार का तर्क है कि भारत की आबादी दोगुनी से ज्यादा हो गई है अब जनसंख्या के अनुपात में सीटें बढ़ानी चाहिए। लेकिन थरूर कहते हैं कि यह सिर्फ गणितीय तर्क है, इसके पीछे बड़ा संस्थागत खतरा छिपा है।
थरूर के मुख्य तर्क हैं-
दुनिया में कोई परिपक्व लोकतंत्र इतनी बड़ी विधायिका नहीं रखता-
थरूर लिखते हैं कि हर विकसित लोकतंत्र में संसद का आकार इतना ही रखा जाता है कि असली बहस, जांच और व्यक्तिगत भागीदारी संभव हो। 850 सीटों वाली लोकसभा दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक सदन से बड़ी होगी। इससे सदन “विचार-विमर्श का मंच” नहीं रहकर “अराजक कोलोसियम” बन जाएगा, जहां चुनिंदा लोग ही बोल पाएंगे और बाकी सिर्फ वोटिंग मशीन पर संख्या बनकर रह जाएंगे।
अमेरिका का उदाहरण-
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स 1929 से 435 सीटों पर स्थिर है। तब अमेरिका की आबादी 12 करोड़ थी, आज 33.5 करोड़ से ज्यादा है। फिर भी सीटें नहीं बढ़ाई गईं, क्योंकि इससे विधायी प्रक्रिया ठप हो जाती। हर सांसद ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन मजबूत स्टाफ, कम्युनिकेशन और कमिटी सिस्टम से काम चलता है। भारत के सांसद भी ऐसा कर सकते हैं।
अगर संख्या बढ़ी तो व्यक्तिगत सांसद की भूमिका खत्म हो जाएगी-
एक सामान्य सत्र में समय बहुत सीमित होता है।
चार घंटे की बहस में पार्टी की ताकत के हिसाब से अधिकतम 15-20 सांसद ही बोल पाएंगे।
बैक बेंचर और छोटी पार्टियों के सांसद लगभग चुप रह जाएंगे।
ज्यादातर सांसद पूरे पांच साल में एक भी सवाल नहीं पूछ पाएंगे, प्राइवेट मेंबर बिल नहीं ला पाएंगे या गंभीर बहस में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। वे सिर्फ पार्टी के हुक्म पर हाथ उठाने वाले “खामोश प्लेस होल्डर” बन जाएंगे।
संसद की भूमिका और कमजोर होगी-
हाल के वर्षों में संसद के बैठने के दिन घट रहे हैं, बिल बिना स्टैंडिंग कमिटी की जांच के वॉयस वोट से पास हो रहे हैं और विपक्ष को किनारे किया जा रहा है। सैकड़ों अतिरिक्त सदस्यों से यह स्थिति और बिगड़ेगी। बड़ा सदन सरकार के लिए सुविधाजनक होता है, क्योंकि उसमें असली जांच-पड़ताल मुश्किल हो जाती है। संसद “रबडर-स्टैंप” या “नोटिस-बोर्ड” बन जाती है।
सत्तावादी मॉडल से समानता-
थरूर चेतावनी देते हैं कि 850 सीटों वाली लोकसभा चीन की पोलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस या उत्तर कोरिया की सुप्रीम पीपुल्स असेंबली जैसी बन सकती है—बहुत बड़ी, भव्य दिखने वाली, लेकिन असली बहस या चुनौती देने में असमर्थ। ये सिर्फ “सहमति का नाटक” करती हैं।
बेहतर विकल्प-
सांसद का काम राष्ट्रीय कानून, विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और केंद्र सरकार की जवाबदेही है। वे स्थानीय काउंसलर या विधायक नहीं हैं।
स्थानीय मुद्दे (सड़क, पानी, कचरा आदि) राज्य विधानसभाओं और पंचायत/नगरपालिकाओं के हैं (73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत)।
जनसंख्या बढ़ने पर विधायकों (MLAs) की संख्या बढ़ाएं, लोकसभा को कॉम्पैक्ट और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रखें।
300 अतिरिक्त सांसदों पर खर्च (वेतन, आवास, यात्रा, पेंशन) बचाने के बजाय मौजूदा सांसदों के लिए उचित ऑफिस बिल्डिंग बनाएं।
कुल मिलाकर थरूर का कहना है कि असली प्रतिनिधित्व बहस की गुणवत्ता, विधायी कमेटियों की गंभीर जांच और स्थानीय सरकारों को सशक्त बनाने में है—न कि एक विशाल, अव्यवहारिक सदन बनाकर लोकतंत्र को “खाली नाटक” में बदलने में। 850 सीटों वाली लोकसभा सरकार के लिए इको चैंबर बन जाएगी, न कि शासन का मंच।
कोचिंग इंडस्ट्री अब ₹50 हजार करोड़ का बिजनेस बन चुकी है...2030 तक ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है...₹3.5 लाख तक की फीस, परिवार लोन लेकर बच्चों को भेज रहे हैं और अब ये संस्थान IPO की तैयारी में हैं : शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे..!!
💔 कैंसर से जंग हारने से पहले पिता ने अपने छोटे बेटे के लिए छोड़ा आख़िरी संदेश…
एक पिता, जो टर्मिनल कैंसर से लड़ रहा था, दुनिया छोड़ने से पहले अपने बेटे मंत्रा के लिए ऐसी बातें कह गया जिन्हें पढ़कर शायद आपकी भी आँखें नम हो जाएँ।
उसने बेटे से कहा— "हमेशा अपनी माँ की बात मानना, उनका ख़्याल रखना… और अपनी दोनों बहनों की हमेशा रक्षा करना।"
फिर उसने एक और बात कही जिसने लाखों लोगों का दिल छू लिया— "मैं कहाँ चला गया, ये मत पूछना… जब भी मेरी याद आए, समझना मैं हमेशा तुम्हारे पास हूँ।" ❤️🥺
कुछ रिश्ते मौत से नहीं टूटते… पिता का प्यार हमेशा बच्चों के साथ रहता है। 🙏
E 20 का गणित
चावल से भी Ethanol बनता है. सरकारी कंपनी FCI ने करीब ₹37 किलो भाव पर चावल ख़रीदा और Ethanol बनाने वाली Distilleries को करीब ₹23 किलो भाव पर बेचा. यह जानकारी सरकार ने राज्यसभा में दी है. इससे करीब ₹10 हज़ार करोड़ का नुक़सान होने का अनुमान है.
बात यहीं नहीं खत्म होती है. सरकार ने ख़ुद माना है कि तेल कंपनियाँ जिस भाव पर Ethanol ख़रीदी हैं वो पेट्रोल से ज़्यादा महंगा है. इस कारण E 20 पेट्रोल सस्ता नहीं बेचा जा सकता है. Ethanol बनाने के लिए एक तरह से सरकार सब्सिडी दे रही है, ये पैसा भी टैक्स देने वाली जनता ही चुका रही है.
नितिन गडकरी अब
(ऑन 27.06.2026)
“पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से मेरा कोई लेना देना नहीं”
नितिन गडकरी तब
(ऑन 14.06.2026)
“मेरे लिए आज ख़ुशी का दिन है कि कल रात 8 PM बजे, मैंने 100% इथेनॉल के इस्तेमाल को क़ानूनी तौर पर मंज़ूरी देने के लिए नियमों को फ़ाइनल करते हुए फ़ाइल पर साइन किए…”
माउंटेन ड्यू ऐड : डर सबको लगता है, गला सबका सूखता है
Video Courtesy @ANI
किस व्यक्ति ने आंदोलन में कितना खाना पहुँचाया…
किस व्यक्ति ने आंदोलन में कौनसा खाना पहुँचाया…
इसकी पूरी खबर नेताओं को रहती हैं…
लेकिन पेपर कहाँ से लीक हुआ…
पेपर किसने लीक किया…
इसकी कोई खबर नहीं लगती…!!
ग़ज़बे हैं…!!!
❗घनघोर कांग्रेसी की शरण में नरेंद्र मोदी
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कांग्रेस नेता नंदन नीलेकणी को टास्क फोर्स का मुखिया बनाया।
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आधार कार्ड के संस्थापक के नाते नंदन को जी-भरकर कोसते थे माननीय।
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जब नंदन बंगलुरू से कांग्रेस टिकिट पर लोकसभा चुनाव लड़े तो मो दी ने पापी तक कहा था।
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हाई पावर्ड टास्क फोर्स के लिए भगवा ब्रिगेड में एक क़ाबिल आदमी नहीं मिला मोदी को।
अब उन्हें हटा कर दुबारा
विस्तृत वीडियो की लिंक कमेंट बॉक्स में।
सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है।
और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है।
अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही समान है।
मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है।
हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।
Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh
@faeloreeah @lok_singh_
NEET से लेकर Radiographers की भर्ती तक-
मोदी राज में Health System पर सवाल ही सवाल।
NEET में हर साल हो रहे घोटालों के बीच, मोदी सरकार द्वारा Radiographers की भर्ती का ये कारनामा देखिए।
दैनिक भास्कर की ये रिपोर्ट बता रही है कि टेंडर मेरिट में 17वें नंबर की कंपनी को L-1 बनाकर ठेका दे दिया गया। 70% नियमों की अनदेखी करके।
नतीजा? सरकारी अस्पतालों में ऐसे Radiographers तैनात कर दिए गए जिनको रेडियोग्राफी का abc भी नहीं आता। उनकी डिग्री तक फ़र्ज़ी हैं।
यानी जिस व्यक्ति के हाथ में आपके बच्चे, आपके माता-पिता की X-Ray, MRI मशीन है- वह बिना डिग्री, केवल घोटालों की वजह से नौकरी पर है।
@ArvindKejriwal के मुख्यमंत्री रहते दिल्ली का Health Model अपनी best practices के लिए दुनिया भर में नाम कमाता था। आज मोदी सरकार ऐसे कारनामों के लिए नाम कमा रही है।
मोदी है तो यही मुमकिन है।
यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई: फैक्ट्री का ऑपरेटर बोला- 'मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए आटे में सफेद पत्थर का चूरा मिलाते हैं', आटा देशभर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बिक रहा; रिपोर्टर ने मजदूर बनकर आटे की फैक्ट्री में 25 दिन गुजारे, जानें कैसे एक्सपोज हुआ यह खेल
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संसद में पूर्व IPS अधिकारी और वर्तमान सांसद ने कहा-मैंने इस देश को एक नागरिक के रूप में भी देखा है। मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल में मैं सुरक्षा सचिव रहा,CRPF में सेवा दी,पुलिस में DGP भी रहा।मेरे अनुभव में पहले की सरकार अधिकारियों से जवाबदेही,सुनिए 👇 @HC_meenaMP जी
@RahulGandhi