बड़ी खबर मेहसाणा जिले के गांभु गाँव से आ रही है। लोग कुआँ खोद रहे थे कि जमीन से बुद्ध की मूर्तियाँ मिलने लगी हैं।
मेहसाणा जिले में ही वडनगर है। वडनगर प्रधानमंत्री का जन्म - स्थल है। विगत कुछ बरसों से लगातार यह सुर्खियों में है।
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ये फोटो 90 के दशक का हैं जब जब बहन मायावती जी उत्तर प्रदेश सहारनपुर के गाँव छुटमलपुर में समाज के लोगों में चेतना जागृत कर रही थी समाज को सत्ता की ताक़त का एहसास करा रही थी समाज को संगठित कर रही थी समाज को बहुजन महापुरुषों की विचारधारा को बताने का काम कर रही थी।
आज इसी छुटमलपुर के नेताओं के नई नई उम्र के समर्थक कहते हैं कि हमारे फलाने नेता आए हैं तब से समाज जागरूक हुआ हैं ताक़त आई है और अरे नासमझो पहले बहनजी का संघर्ष पढ़ों तब मालूम चलेगा कि आपमें ये आवाज़ उठाने की हिम्मत किसकी बदौलत मिली किसकी वजह आज आप क़ानून के सामने आँख में आँख डालकर सवाल करने की हिम्मत जुटा पा रहें हैं।
Cockroach Janata Party के सुप्रीम लीडर अभिजीत दीपके Dehydration के कारण लड़खड़ाने लगे.
वहां मौजूद लोगों ने पकड़कर गाड़ी में बिठाया.
अभिजीत दीपके अमेरिका के Boston शहर में जहां पढ़ते हैं, वहां दिन का तापमान 32℃ और रात का तापमान लगभग 20℃ के आसपास होता है.
आज ही अमेरिका से लौट कर दिल्ली की 40℃ की भीषण गर्मी में नेता बनने के लिए आंदोलन में कूद पड़े. दिहाती भाषा में कहा जाए तो नेताजी को लू लग गयी.
गांव छोला छाप डॉक्टर लोग लू लगने पर 20 रुपए का ग्लूकोस चढ़ाकर 500 रुपए लुटता है.
यह हैं Abhijeet Dipke जिन्हें Cockroach Janta Party के बेरोज़गार युवाओं का सरदार कहा जाता है
पिछले 25 दिनों में इनके Instagram पर 22M और X पर 200K नए फॉलोअर्स जुड़े हैं
आज इन्हें $11,239 (करीब 11 लाख रुपये) का पेआउट मिला है
इनको फॉलो करने वाले 299 वाला रिचार्ज नहीं..Read news
@himanshujha499 "जिस व्यक्ति ने यह किताब लिखी है, उसी का नाम इस किताब पर होना चाहिए, न कि उसका जिसने यह किताब लिखी नहीं है,
मेरा मकसद यहाँ किताब के बारे में बोलना है, न कि उसके आंदोलन के बारे में।
दोस्तों,कॉकरोच वाले लफड़े में फंसकर अपना भविष्य मत बर्बाद करो।
ये शुद्ध राजनीति है, RSS की बी-टीम का खेल है। ये खोखले छर्रे कोई क्रांति नहीं लाएंगे।
तुम पर केस लगेगा,जिंदगी खराब हो जाएगी।ये सब निकल लेंगे।
सारा विपक्ष सिर्फ़ 2027 में बहन मायावती जी को रोकने के लिए एक हो गया है।
"मैं बाबा साहब की केवल एक किताब पढ़ कर पागल हो गया और घर बार छोड़कर बाबा साहब के मिशन को पूरा करने में लग गया,
पता नहीं यह कैसे अंबेडकरवादी हैं
जो बाबा साहब की इतनी किताबें पढ़कर और उनके विचारों को सुनकर भी टस से मस नहीं होते।"
बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम साहब
#mayavati#बसपा #BSP
यादव समाज सपा को छोड़ रहा है उसकी पहली पसंद बनती जा रही है बसपा देखिए कैसे 👇
पत्रकार - सबसे पहले मायावती जी अखिलेश यादव और योगी बाबा इन तीनों की पूर्ण बहुमत से सरकार रखिए रहिए रही है इनमें सबसे बेहतर आपको कौन लगा?
युवक - मायावती जी, दूसरे नंबर पर सपा योगी बाबा तो सबको कटोरा दे रहे हैं बसपा की तारीफ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनका काम निष्पक्ष था किसी के दबाव में नहीं था।
पत्रकार - अगर आपको अखिलेश यादव और मायावती जी में से एक को चुनना पड़े तो किसे चुनेंगे?
युवक - मायावती जी
चंद्रशेखर आजाद जी को सांसद बने हुए 1 साल से ज्यादा का समय हो गया |
इस एक साल में सांसद निधि से 1 भी बाबा साहेब की मूर्ति लगी हो नगीना में तो बताओ |
बहिन जी में अपनी पहली सरकार बीजेपी के सहयोग से बनाई थी, पहली ही कैबिनेट बैठक में दलितों को पट्टे और sc st एक्ट में तुंरत जेल |
जब तक कॉकरोच जनता पार्टी अपनी पॉलिसी स्पष्ट नहीं करेगी तब तक बहुजनों को इससे दूर रहना चाहिए,
आरक्षण प्रतिनिधित्व पर नीति स्पष्ट करनी होगी, अन्यथा इसे सिर्फ एक सुवर्ण आंदोलन ही समझा जाए तो बेहतर होगा 🔥🔥
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपनी पूरी आत्मकथा कभी नहीं लिखी। उन्होंने केवल Waiting for a Visa लिखी, जो उनकी असली और विश्वसनीय जीवनी मानी जाती है।
अभिजीत दीपके इस किताब को दिखाकर खुद को आंबेडकरवादी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि वे आंबेडकर साहित्य पढ़ रहे हैं, लेकिन सिर्फ एक किताब दिखाने से कोई आंबेडकरवादी नहीं बन जाता।
अगर दीपके में सच्चा दम है, तो बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ दोहराकर दिखाएँ। Annihilation of Caste और Waiting for a Visa आज भी सवर्ण एलीट के गले की हड्डी बनी हुई हैं। इसलिए अभिजीत इन्हें नहीं दिखा रहे हैं।
बाजार में उपलब्ध 99% आंबेडकर जीवनी पुस्तकों में तथ्यों की बजाय झूठ और भर दिया गया है।
जब तक कॉकरोच जनता पार्टी आरक्षण और प्रतिनिधित्व पर अपनी नीति स्पष्ट रूप से घोषित नहीं करती, तब तक दलित-आदिवासी-पिछड़े वर्गों को इससे दूर रहना चाहिए।
अन्यथा यह महज एक सुवर्ण-प्रधान आंदोलन बनकर रह जाएगा।
याद रखिए बाबासाहेब अंबेडकर को मानने वाला हर व्यक्ति आंबेडकरवादी नहीं होता है वह घोर मनुवादी हो सकता है,
केजरीवाल ने बाबासाहेब अंबेडकर को आगे रखकर चुनाव लड़ा, जीत गए दफ्तरों में बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीरें लगाई,
लेकिन जब दलित पिछड़ा को अधिकार देने की बात आई तो पीछे हट गए, एक भी दलित आदिवासी को राज्यसभा तक नहीं भेजा,
जितने भी पॉवरफुल मंत्रालय थे सुवर्ण को दे दिए, तमाम बोर्ड आयोगों में सुवर्ण की नियुक्ति कर दी,
इस बार अभिजीत दीपके आया है, सोंच समझकर आगे बढ़िए यह जाल भी हो सकता है 🔥🔥🔥
कल लखनऊ में एक पत्रकार ने कहा अखिलेश जी नजर इस समय बहनजी के दफ्तर पर हैं।
बसपा में टिकट होता देख सपा से 100 टिकट फ़ाइनल होने की खबरें आ रही है।
सपा बीट के एक पत्रकार ने बतया अखिलेश के यहां नंबर बढ़वाने के लिए कुछ दरबारी पानी पी पी कर बहनजी को कोस रहे हैं
जो सपा कल तक भाजपा से लड़ रही थी आज एक विधायक और जीरो सांसद वाली पार्टी के ख़िलाफ़ वोट कटवा होने का नरेटिव सेट कर रही है