> A 15 year old Gopal Sharma
> Kidnapped & brutally murdered in Greater Noida
> Subjected to unimaginable torture
> His eyes and tongue were gouged out
> No mainstream media coverage
And ZERO outrage from so-called Brahmin leaders in Uttar Pradesh.
SC की क्राइटेरिया डिसाइड करने में एजुकेशनल बैक वार्ड की शर्त है
ST और ओबीसी की भी क्राइटेरिया डिसाइड करने में एजुकेशनल बैकवर्ड की शर्त है
यानी एजुकेशनल फॉरवर्ड व्यक्ति एससी एसटी ओबीसी किसी भी आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता
फिर भी एक PHD एक MBBS डॉक्टर, इंजीनियर और उनके बच्चों को आरक्षण दिया जा रहा है
इसका सिर्फ एक ही कारण है कि भारत का सुप्रीम कोर्ट एससी एसटी ओबीसी से डरता है न्याय करने की हिम्मत नहीं है उसमें
क्योंकि Sc St obc देश में बहुसंख्यक है उन्हीं के वोट से सरकार बनती है उनसे नेता भी डरता है और कोर्ट भी मीडिया भी यही देश की सच्चाई है
Four years ago, I started ChangeOrg petition for "One Family One Reservation".
More than 57k people signed it. I sent it to ministries & media.
Today, Supreme court finally endorsed it.
Proof that real change comes only from organic movements- not politically backed trends.
मेरा नाम अनुराधा तिवारी है ।
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव के ब्राह्मण परिवार से आती हूँ। बचपन से हमेशा यही सुनने को मिला - “तुम ब्राह्मण हो, तुम्हारे पास तो सब कुछ होगा”, जबकि हमारी वास्तविकता संघर्ष और सीमित संसाधनों से भरी थी।
बिना किसी Reservation या govt scholarship के मैंने पढ़ाई की, सरकारी कॉलेज से इंजीनियरिंग की, खुद का startup खड़ा किया और विदेश में काम किया। TEDx speaker रही और कई सम्मान प्राप्त किए।
एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में मैंने हमेशा उन मुद्दों पर आवाज़ उठाई जो आम लोगों को प्रभावित करते हैं - poor infrastructure, food adulteration, freebies, caste-based politics ब्राह्मणों व सवर्णों के खिलाफ बढ़ती नफरत। मैंने कभी किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बोला।
लेकिन समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय अब मेरे 3-4 साल पुराने tweets खंगाले जा रहे हैं। @NCSC_GoI और Delhi Police द्वारा SC/ST Act के तहत कार्रवाई की कोशिश यह दिखाती है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।
क्या आज अपने विचार रखना भी अपराध है?
क्या आज के भारत में सवर्ण होना ही अपराध बन चुका है?
कल 26 अप्रैल को जंतर मंतर पर UGC के विरोध में प्रदर्शन का आयोजन किया गया था!
नियमानुसार 1 महीने पहले से आवेदन भी कर दिया गया था!
लेकिन ऐन मौके पर परमिशन कैंसिल कर दी गई!
जबकि भीम आर्मी को 11 फरवरी को वहीं पर UGC समर्थन में आंदोलन की इजाज़त दी गई थी!
अब सरकार बताए कि ऐसा भेदभाव क्यों?
8 मार्च को जंतर मंतर पर UGC विरोध की परमिशन कैंसिल की गई! फिर 26 अप्रैल को परमिशन कैंसिल की गई!
जबकि उसी जगह पर भीम आर्मी को उसी विषय पर लेकिन समर्थन करने पर परमिशन मिल रही है!
साफ है कि सरकार सिर्फ UGC विरोध को दबाना चाहती है!
Yogi Adityanath सत्ता में रहकर भी अवकाश बहाल नहीं कर पाए,
जबकि Akhilesh Yadav ने साफ वादा किया है कि 2027 में आते ही यह सम्मान वापस मिलेगा।
जो आस्था का सम्मान करेगा,
वही उत्तर प्रदेश पर शासन करेगा।
भगवान विष्णु के अवतार भगवान परशुराम जी की जयंती की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
समाजवादी पार्टी की सरकार में भगवान परशुराम जी की जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान हुआ था और भगवान परशुराम जी को सम्मान एवं आस्था प्रकट की गई थी।
मगर इसी ठाकुरवादी भाजपा सरकार में परशुराम जयंती की छुट्टी निरस्त कर दी गई और भगवान परशुराम जी का अपमान किया गया।
क्या ये भाजपा सरकार का जातिवाद या भेदभाव वाला वाद नहीं था?
जो ब्राह्मण भाई बंधु भाजपा के पिछलग्गू हैं वे सोचें, विचारें और तब किसी का समर्थन करें।