भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में भूजल प्रदूषण के स्रोत क्या हैं? भूजल प्रदूषण को रोकना क्यों आवश्यक है? बाधाओं को उजागर करें और भूजल प्रदूषण की रोकथाम के उपाय सुझाएं। 12 अंक (200 शब्द)
Question of the Day
Enumerate the guiding principles for children in the move in the context of climate change and discuss the disproportionate impact of climate change on children. 12 marks (200 words)
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वलसाड (गुजरात) के अबराम शहर के पास 800 साल पुराने मंदिर में 6 फीट लम्बा शिवलिंग स्थापित है। यह शिवलिंग वंकी नदी के तट से लाया गया था। मंदिर शिखर विहीन है, जिससे दोपहर में सूर्य की किरणें सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं। दो बार छत बनाई गई, लेकिन महादेव की इच्छा के चलते छत नहीं टिकी।
When rays of sun hit Jagdish Mandir, it enhances it's beauty.
Marvelous example of Hindu Iconography, consisting of three stories of hand carved stone, with a steeple nearly 79 feet high and is the largest Mandir of Udaipur.
Such masterpieces carved out by those miraculous hands.
It is said that history repeats itself but can such history be repeated, I wonder.
Somethings are history in themselves.
Kiradu Mandir, Badmer Rajasthan
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गुवाहाटी का प्राचीन नाम प्रागज्योतिषपुरा था। यहां ब्रह्मपुत्र के किनारे चित्रसिला पर्वत पर नौ शिवलिंग स्थापित हैं। इस नवग्रह मंदिर में स्थापित सभी महादेव को प्रतिदिन अलग रंग के वस्त्र पहनाए जाते हैं। इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार 1752 ईस्वी में राज�� राजेश्वर सिंह ने कराया था।
उदयपुर के तितरडी गांव के पास ओड़ा पर्वत की चोटी पर बनी गुफा में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। यह गुफा कितनी बड़ी है, यह अभी तक रहस्य ही है। इस पर्वत में हर समय मंत्र गूंजता रहता है। यहां पहुंचने पर स्वयं में दिव्य अनु��ूति होती है।
प्रतापगढ़ (राजस्थान) के छोटीसादरी तहसील में एक गांव सांगरीखेड़ा है। यहां घने वन क्षेत्र में जल के अंदर शिवलिंग है। इस कुंड में पानी लगातार बुलबुले के रूप में निकलता रहता है। वनवासी समाज का यह प्रमुख तीर्थस्थल है।
उदयपुर से 5 किमी की दूरी पर थूर नामक जगह में 14वीं सदी के मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। कहते हैं कि मेवाड़ के राजा राणा कुंभा जब भी युद्ध में जाते यहां महादेव का दर्शन करने आया करते थे। यहां कई विशाल वटवृक्ष हैं, जो इस स्थान को मनोहारी बनाते हैं।
डुंगरपुर से 24 किमी की दूरी पर देव गांव है, जहां 12वीं सदी के मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। यह मंदिर गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर बना है। अद्भुत नक्काशीदार स्तंभ मंदिर की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं।
दौसा का देवगिरी पर्वत के कारण देवनगरी नाम था। यहां लालसोट मार्ग पर स्थित गुप्तेश्वर शिवलिंग है। इस नगर में इसके अलावा चार और शिवलिंग सहजनाथ, सोमनाथ, बैजनाथ और नीलकंठ हैं। यह क्षेत्र 9वीं से 12वीं सदीं तक चौहान, कच्छवाह राजाओं के शासनकाल में काफी समृद्धशाली रहा है।
भीलवाड़ा से 6 किमी की दूरी पर स्वयंभू शिवलिंग है। प्राचीनकाल में ���ह क्षेत्र अरण्य वन था। गुफा में विराजे महादेव का पता करीब 800 साल पूर्व चला था, तब से यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
पुष्कर का प्राचीन नाम हाटकेश्वर था। कहते हैं कि ब्रम्हाजी से आज्ञा लेकर महादेव यहां विराजे थे। 12वीं सदी में मराठा शासनकाल के दौरान यहां मंदिर का निर्माण कराया गया था�� पुष्कर में ब्रम्हा मंदिर के अलावा 500 अन्य मंदिर हैं।
राजसमंद और पाली के सीमावर्ती क्षेत्र में अरावली पर्वत में सतह से 4000 फीट की ऊंचाई पर बनी गुफा में शिवलिंग स्थापित है। कहते हैं यह शिवलिंग परशुराम ने स्थापित कर तपस्या की थी। इस शिवलिंग में एक छिद्र में चाहे जितना जल डालो छिद्र नहीं भरता, जबकि एक छिद्र के अंदर दूध नहीं जाता।