#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
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आदरणीय प्रदेश अध्यक्ष जी श्री दिनेश चन्द्र शर्मा जी के मार्गदर्शन में,सड़कों पर उतर कर ,संघर्ष के बल ही जीत/विजय प्राप्त हो सकती है।आने वाले समय में संघर्ष के लिए कमर कस लेनी चाहिए सभी शिक्षकों को।।
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जब हम सेवा में आए थे तो उस समय की सेवा सम्बन्धी सभी अहर्ताएं पूरी की थी । 2010 में सभी शिक्षकों को टेट क्वालिफाई करने का नियम लाया गया , 45 से 56 वर्ष की उम्र में शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने के लिए टेट परीक्षा उत्तीर्ण करने का आदेश अमानवीय है ।
माननीय जज महोदय से निवेदन है की जज व राजनीति व हर बड़े पद पर स्थित लोगों की परीक्षा पुनः 5 वर्ष में ली जाना चाहिए ताकि योग्य लोगों को कार्य करने का मौका मिले
देश को सही न्याय, विकास, सुशासन
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भारत सरकार से विनम्र अनुरोध है देश का शिक्षक माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय से मानसिक अवसाद मे हो शीघ्र न्यायोचित निर्णय न लिया गया तो ,परिणाम देशहित मे नही होगे
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साथियों माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हमें अवसाद ग्रस्त नहीं होना है ,क्योंकि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने हमेशा कहा कि हमें टीईटी से मुक्ति संसद से ही मिलेगी जिसके लिए हमें और मुखर होकर संघर्ष करना होगा जिसके लिए हर शिक्षक भाई बहन को TFI के बैनर तले एकता का परिचय देना है।
*माननीय उच्चतम न्यायालय का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है किंतु उससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण सरकार का रवैया है, क्योंकि 2017 मे शिक्षा अधिकार अधिनियम मे संशोधन के कारण यह स्थित हुयी है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उस असंवैधानिक संशोधन को समाप्त करे।साथियों! अभी रास्ते बंद नहीं हुये ह
न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता जी (Deepanker Datta) ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए कोई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
भारत में उच्च न्यायपालिका (HC/SC) के जजों की नियुक्ति Collegium प्रणाली से होती है, न कि किसी प्रतियोगी परीक्षा से। बार से practicing advocate को सीधे हाईकोर्ट जज बनाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति दत्ता जी 1989 में LLB पास कर advocate बने, ~16 साल वकालत की (कलकत्ता HC सहित)। 2006 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया (बार से elevation)। 2020 में बॉम्बे HC के Chief Justice और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
यह सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।
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@DrDCSHARMAUPPSS डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जिंदाबाद जिंदाबाद
माननीय अध्यक्ष जी आप संघर्ष करें पूरा देश आपके साथ है। सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता केवल और केवल आप में ही है इसीलिए शिक्षकों का भरोसा केवल आप पर है।
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