लोग पूछ रहे हैं कि NOBO ने किया ही क्या है?
उन्हें बस इतना याद दिला दीजिए—NOBO से पहले का दौर याद करिए, जब कर्मचारियों पर Levy देने की मजबूरी थी। लेकिन आज वही Levy Culture इतिहास बन चुका है |NOBO ने सिर्फ सवाल नहीं उठाए, गलत परंपराओं को बदलने की लड़ाई भी लड़ी है।
लोग पूछ रहे हैं कि NOBO ने किया ही क्या है?
उन्हें बस इतना याद दिला दीजिए—NOBO से पहले का दौर याद करिए, जब कर्मचारियों पर Levy देने की मजबूरी थी। लेकिन आज वही Levy Culture इतिहास बन चुका है |NOBO ने सिर्फ सवाल नहीं उठाए, गलत परंपराओं को बदलने की लड़ाई भी लड़ी है।
मेरा UFBU से एक मात्र प्रश्न हैं की दिसंबर 2021 के बाद से 2025 तक आपने 5 days बैंकिंग के लिए एक भी strike नहीं किया और अब जा के 2026 मे जागे हैँ??
इतने वर्षों आप कहाँ थे??
अब NOBO/NOBW आ गए हैं, अब आपको भी जमीन पे आना पड़ेगा
#BMSkendra@BOIOO_UP
#BOIOO
मेरा UFBU से एक मात्र प्रश्न हैं की दिसंबर 2021 के बाद से 2025 तक आपने 5 days बैंकिंग के लिए एक भी strike नहीं किया और अब जा के 2026 मे जागे हैँ??
इतने वर्षों आप किस बिल मे घुसे हुए थे??
UFBU Doesn’t Want a Solution?”
BMS All India Secretary & Banking and Finance Sector In-charge Shri Girish Chandra Arya speaks on #5DayBanking, #PLI, #worklifebalance, women employees and pensioners’ issues, and the way forward.
BMS believes in results, not token strikes — and is capable of independently pursuing #5DayBanking .
Watch & share 👇
https://t.co/iFEgbYsiP4
#BMS #5DayBanking #Banking #PLI #NOBO #NOBW
@UFBUIndia@DFS_India@BMSkendra@GirishArya_bms@gsnobo1977@aiboc_in@AIBEAofficial@nsitharaman@FinMinIndia
https://t.co/kKmpyvHiUh
@boioo_boi 1992 के पहले से UFBU के घटक trade यूनियन कि राजनीती कर रहे हैँ बीच मे सरकार भी इनके favourable रही फिर क्यों बैंकर्स कि दुर्दशा होती रही है???
जो काम आज BMS कर रही है बिना strike के यहीं काम उन्होंने पहले क्यों नहीं किया
@boioo_boi जितने भी UFBU के supporter हैँ उन्हें एक बात समझनी चाहिए, यदि सरकार BMS को assurance दे रही कि 5 days बैंकिंग देंगे और fair PLI भी देंगे तो BMS क्या करे जबरदस्ती strike करें???
और 1990 से पहले UFBU के घटक trade यूनि
NOBO को गोदी यूनियन कहने से पहले अपने गिरेबान मे झाकाना चाहिए, 1992 से बैंकर्स के नाम पर नेतागिरी चमकाने वाले खुद से सवाल करें क्या कारण है कि 1992 से बैंकर्स कि दुर्दशा होते आ रही 2014 से पहले तो तुम्हारी हि सरकार थी तब तुमने क्या उखाड़ लिया था | गोदी यूनियन vs पप्पू यूनियन
NOBO–NOBW को “गोदी यूनियन” कहने वालों, ज़रा यह पुराना वीडियो भी देखिए! 👇
यह वीडियो आज का नहीं, AIBOC Leaders की LOP राहुल गांधी के साथ हुई पुरानी मुलाकात का है। उस समय Banking Issues पर चर्चा हुई थी और Congress के official social-media platforms पर इसका वीडियो भी पोस्ट किया गया था।
🎥 Meeting Video:
https://t.co/at5qPgcxnx
लेकिन सवाल आज का है।
विपक्ष के LOP से वार्ता — और आज Government के खिलाफ Strike!
क्या इसे सिर्फ संयोग माना जाए? या विपक्ष के साथ राजनीतिक connection और आज की Strike के बीच किसी मिलीभगत की संभावना पर सवाल उठना स्वाभाविक है?
अगर Banking Issues और Five-Day Banking वास्तव में प्राथमिकता हैं, तो सरकार और Finance Ministry के साथ लगातार सार्थक वार्ता क्यों नहीं?
विपक्ष के साथ dialogue और Government के साथ confrontation—वाह रे दोहरा चरित्र!
Five-Day Banking वर्षों से लंबित है। यदि इतनी ही ऊर्जा Government के साथ constructive dialogue और negotiations में लगाई जाती, तो शायद आज तस्वीर अलग होती।
और अब 11 September की Strike, वह भी ऐसे समय जब भारत BRICS Summit जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी कर रहा है। ऐसे समय में विपक्ष के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाना और Strike करना क्या देशहित और भारत की छवि पर भी सवाल नहीं खड़े करता?
बैंकर्स अब खुद सवाल करें—
यह केवल Banking Issues की लड़ाई है या इसके पीछे कोई Political Agenda भी है?
NOBO–NOBW का रास्ता स्पष्ट है:
🇮🇳 राजनीति नहीं — संवाद
🇮🇳 प्रचार नहीं — समाधान
🇮🇳 टकराव नहीं — Constructive Engagement
🇮🇳 सबसे ऊपर — राष्ट्रहित
बैंकिंग के हित में, बैंकर्स के हित में और राष्ट्रहित में। 🇮🇳
@nsitharaman@nsitharamanoffc@PMOIndia@FinMinIndia@AmitShah@BMSkendra
#AIBOC #NOBO #NOBW #FiveDayBanking #BankStrike #BMS
NOBO–NOBW को “गोदी यूनियन” कहने वालों, ज़रा यह पुराना वीडियो भी देखिए! 👇
यह वीडियो आज का नहीं, AIBOC Leaders की LOP राहुल गांधी के साथ हुई पुरानी मुलाकात का है। उस समय Banking Issues पर चर्चा हुई थी और Congress के official social-media platforms पर इसका वीडियो भी पोस्ट किया गया था।
🎥 Meeting Video:
https://t.co/at5qPgcxnx
लेकिन सवाल आज का है।
विपक्ष के LOP से वार्ता — और आज Government के खिलाफ Strike!
क्या इसे सिर्फ संयोग माना जाए? या विपक्ष के साथ राजनीतिक connection और आज की Strike के बीच किसी मिलीभगत की संभावना पर सवाल उठना स्वाभाविक है?
अगर Banking Issues और Five-Day Banking वास्तव में प्राथमिकता हैं, तो सरकार और Finance Ministry के साथ लगातार सार्थक वार्ता क्यों नहीं?
विपक्ष के साथ dialogue और Government के साथ confrontation—वाह रे दोहरा चरित्र!
Five-Day Banking वर्षों से लंबित है। यदि इतनी ही ऊर्जा Government के साथ constructive dialogue और negotiations में लगाई जाती, तो शायद आज तस्वीर अलग होती।
और अब 11 September की Strike, वह भी ऐसे समय जब भारत BRICS Summit जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी कर रहा है। ऐसे समय में विपक्ष के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाना और Strike करना क्या देशहित और भारत की छवि पर भी सवाल नहीं खड़े करता?
बैंकर्स अब खुद सवाल करें—
यह केवल Banking Issues की लड़ाई है या इसके पीछे कोई Political Agenda भी है?
NOBO–NOBW का रास्ता स्पष्ट है:
🇮🇳 राजनीति नहीं — संवाद
🇮🇳 प्रचार नहीं — समाधान
🇮🇳 टकराव नहीं — Constructive Engagement
🇮🇳 सबसे ऊपर — राष्ट्रहित
बैंकिंग के हित में, बैंकर्स के हित में और राष्ट्रहित में। 🇮🇳
@nsitharaman@nsitharamanoffc@PMOIndia@FinMinIndia@AmitShah@BMSkendra
#AIBOC #NOBO #NOBW #FiveDayBanking #BankStrike #BMS