चंपत राय ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया? राम मंदिर के चढ़ावे में डकैती का मामला है, चंपत राय को कौन बचा रहा है ? एक मिनट, कहीं ऐसा तो नहीं कि चंपत राय किसी को बचा रहे हैं । ED, NIA, CBI का जैकेट पहन कर किसी विपक्षी नेता के घर के बाहर दिखने वाली टीम कहाँ है? ED का छापा क्यों नहीं पड़ा? डकैती की पुष्टि होते ही FIR क्यों नहीं हुई? कैश बरामद करन वाले कौन थे? अयोध्या में कितनी ज़मीन की ख़रीद बिक्री कैश में हुई है? सबका हिसाब कौन देगा?
देश जल रहा है।
महंगाई, बेरोज़गारी, पेपर लीक से जनता पिस रही है।
छात्र सड़कों पर हैं।
3 भारतीय नाविक मारे गए।
और प्रधानमंत्री फ्रांस में स्वागत, नृत्य और कैमरों की चमक में व्यस्त हैं।
जोकर चुना था,
अब सर्कस पर हैरान क्यों हो? 🤡
देश नहीं, तमाशा चल रहा है।
देव्यानी खोब्रागड़े के साथ अमेरिका के दुर्व्यवहार के जवाब में मनमोहन सिंह सरकार ने अमेरिकी दूतावास के सामने से स्थायी बैरिकेड्स हटवा दिए थे और अमेरिकी राजनयिकों को मिलने वाली कई विशेष सुविधाओं की समीक्षा की थी। अमेरिका को स्पष्ट और करारा संदेश दिया गया था।
लेकिन आज, जब इज़राइल - अमेरिकी हमलों के कारण भारतीय नागरिक मारे गए हैं, देश के आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर हैं और भारतीय कलाकारों के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं.
यह शर्म से डूब मरने की बात है कि अपने नागरिकों की मौत पर भी सरकार की प्राथमिकता कहीं और दिखाई दे रही है। यह देश के सभी नागरिकों के लिए चिंता और शर्म का विषय होना चाहिए.
मनमोहन सरकार ने झुका दिया था अमेरिका को,
आखिर अमेरिका को भारत से माफ़ी मांगनी पड़ी थी !
ईंट का जवाब पत्थर से भी मिल सकता है ये अहसास अमेरिका को पहली बार मिला है - अंजना ओम कश्यप (2013)
इतनी ताकतवर थी उस समय कांग्रेस सरकार
तब सिर्फ भारतीय राजदूत से बदसलूकी हुई थी अमेरिका में, अब तो अमेरिकी सेना ने 3 भारतीय नागरिक मार दिए !
सोचो आज मनमोहन सरकार होती तो क्या हाल होता अमेरिका का !
लोग कह रहे हैं कि मोदीजी को कम से कम असम के विमान हादसे में वायुसेना के 5 जवानों की शहादत पर तो नाच–गाने की महफिल रोकनी चाहिए थी।
लेकिन क्या करें। महफिलें तो पुलवामा में 40 जवानों की शहादत के बाद भी नहीं रुकी थी।
वे जवान तो 2019 में उनकी चुनावी जीत के लिए शहीद हुए थे।
पिछले 12 सालों में Narendra Modi:
2014 — मुझे बस 60 महीने दो, मैं तुम्हारी ज़िंदगी बदल दूंगा
2016 — मुझे बस 50 दिन दो, मैं सब कुछ अच्छे के लिए बदल दूंगा
2023 — मुझे बस 5 साल दो, मैं सारा करप्शन का पैसा बाहर निकाल लूंगा
2026 — 2047 का इंतज़ार करो 😭
क्या अब भी आप 2029 तक इस आदमी पर भरोसा करोगे?
आपको लग रहा होगा कि फ्रांस में रहने वाले भारतीय पीएम मोदी का भव्य स्वागत कर रहे हैं। दरअसल यह जानकारी फिर से ले लीजिए इस यात्रा की तैयारी दो महीने से हो रही है।
देश से 13 तारीख को शिक्षा विभाग के 200 अधिकारी बहुतों को लेकर फ्रांस के शहर नीस पहुंचे हैं। इन सबकी तैयारी के लिए भी एक दौरा हुआ था और कथित रोड शो हुआ था। शिक्षा मंत्रालय ने इस दौरे का नाम दिया है "इंडिया इनोवेट्स", देखिए इनोवेशन
विश्व के पहले प्रधानमंत्री, जिन्हें इस बात का डर है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई उनकी आवाज़ न सुन ले।
अंग्रेज़ी नहीं आती, इसमें कमतर महसूस करने जैसी कोई बात नहीं, लेकिन हिंदी में बात करने में कैसा डर?
करोड़ों होटल पर उड़ा रहे हैं, एक ढंग का ट्रांसलेटर तो अफ़ोर्ड कर ही सकते हैं!
असली वैश्विक सम्मान vs फर्जी डायस्पोरा मैनेजमेंट🔥
🇮🇳 1949, न्यूयॉर्क।
जब जवाहरलाल नेहरू अमेरिका पहुंचे, तो न्यूयॉर्क की सड़कें अमेरिकी जनता से पट गईं। Ticker Tape Parade निकला -कागज के टुकड़े बरस रहे थे, लोग चीयर कर रहे थे। कोई बस से NRIs नहीं उतारे गए, कोई PR एजेंसी नहीं लगाई, कोई टैक्सपेयर का पैसा नहीं लगाया।
असली spontaneous स्वागत -लोकल अमेरिकन्स खुद उमड़ पड़े थे, क्योंकि नेहरू की शांति, स्वतंत्रता और एशियाई एकता की छवि दुनिया भर में थी।
फिर आया मोदी युग…
“Howdy Modi”, “Namaste Trump” स्टेडियम भरने के लिए NRIs को बसों-हवाई जहाजों से लाया जाता है, पैसे देकर बिठाया जाता है, नारे लगवाए जाते हैं।
लोकल अमेरिकन्स? सड़कें खाली। बस फोटो खिंचवाने और मीडिया हाइप।
नेहरू: दुनिया की जनता उनके लिए खुद निकलती थी।
मोदी: दुनिया भर के भारतीयों को आयातित भीड़ बनाकर प्रोपगंडा।
12 नहीं 15 साल भी हो जाएंगे फिर भी “नेहरू” की बराबरी इस जन्म में नामुमकिन है ।🤭
अंतरराष्ट्रीय खबरें गरम है
झप्पी के पीछे क्या है
दुनिया 5th जनरेशन की तरफ जा रहा है
मोदी फ्रांस के 4.5 जेनरेशन रफल खरीददार है
मर्सिडीज़ की कीमत देकर वेगेनार खरीद रहे है
इतनी सामंतवादी मानसिकता से भरे हैं कि हर देश में जाकर भारतीय समुदाय को बुलवाकर नृत्य करवाया जाता है. पुराने ज़माने के राजा-महाराजा ऐसा किया करते थे.
पीएम मोदी को शर्म आनी चाहिए कि दूसरे देशों में इस तरह अपनी ही कम्युनिटी को बुलाकर जलसे करवाने से उनकी छवि नहीं बढ़ती, बल्कि लोग उन्हें एक फितूरी इंसान के रूप में देखते हैं और उसी का फ़ायदा भारत के हितों की कीमत पर उठाते हैं.
“केवल भारतीय नाविकों पर हमला हो रहा है”
ईरान में भारतीय नाविक मदद की गुहार लगा रहे हैं
उनका कहना है कि अमेरिका जानबूझकर उन जहाजों पर हमला कर रहा है जिन पर भारतीय मौजूद हैं
नरेंद्र मोदी के compromised होने की कीमत पूरा देश चुका रहा है