राजेश प��यलट: मिट्टी से उठकर राजनीति के आकाश में चमका एक नक्षत्र
राजेश पायलट।
कल्पना कीजिए, सफ़ेद बालों, उसी दृढ़ चेहरे और किसान-जवान के प्रश्नों पर गरजती हुई आवाज़ के साथ व��� आज की राजनीति को किस निगाह से देख रहे होते! उस राजनीति को, जिसमें साधनहीन प्रतिभाओं के लिए दरवाज़े संकरे और धन, वंश तथा चाटुकारिता के लिए राजमार्ग चौड़े होते जा रहे हैं।
राजेश पायलट का मूल नाम राजेश्वर प्रसाद था। अत्यंत साधारण और अभावग्रस्त पशुपालक परिवार में पले इस मेधावी युवक ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज तक अपनी राह बनाई। वह कॉलेज, जहाँ से निर्मल वर्मा, सुचेता कृपलानी, ��ोपालकृष्ण गांधी, राजमोहन गांधी, गोपीचंद नारंग, अमिताव घोष और रामचंद्र गुहा जैसी विलक्षण प्रतिभाएँ निकलीं। राजेश्वर प्रसाद का वहाँ पहुँचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं था; वह उस ग्रामीण भारत की विजय थी, जिसके बच्चों के पाँव में धूल अधिक और अवसर बहुत कम होते हैं।
उन्होंने भारतीय वायुसेना में पायलट की प्रतिष्ठित नौकरी प्राप्त की, लेकिन आकाश में उड़ते हुए भी उनकी दृष्टि नीचे खेतों पर टिकी रही। किसानों की बदहाली ने उनके भीतर यह प्रश्न जगाया कि इस जीवन में ही इन परिस्थितियों को बदलने का रास्ता क्या है। उन्हें उत्तर राजनीति में दिखाई दिया। उन्होंने सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी ���ोड़कर उस अनिश्चित संसार में प्रवेश किया, जहाँ प्रतिभा से अधिक खेमे, षड्यंत्र और विरासतें काम करती हैं।
वे बागपत से चौधरी चरणसिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। निराशा के उसी क्षण संजय गांधी ने उन्हें भरतपुर से चुनाव लड़ने भेजा। भरतपुर उनके लिए अपरि��ित था। जयपुर में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया; उनके नामांकन में त्रुटियाँ छोड़कर रास्ता रोकने तक के प्रयास हुए। लेकिन आम कार्यकर्ताओं और जनता ने उस अनजान युवक में अपना भविष्य देखा। राजेश्वर प्रसाद, राजेश पायलट बनकर उभरे और राजस्थान की राजनीति में एक नई धारा प्रवाहित हुई।
भरतपुर से शुरू हुई उनकी यात्रा दौसा पहुँची। वे 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार लोकसभा पहुँचे। तूफ���ानों से लड़ते, गिरते और फिर उठते हुए उन्होंने स्वयं को मिट्टी से सोना निकालने और इस्पात मोड़ने वाली शख़्सियत सिद्ध किया। उनमें किसान की सरलता, सैनिक का अनुशासन और लोकतांत्रिक नेता का साहस था।
राजेश पायलट को किसान और जवान से गहरा प्रेम था। वे उस संस्कृति से निकले थे, जिसमें गाय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, परिवार की सदस्य होती है; जिसमें गोधूलि कोई काव्यात्��क शब्द नहीं, श्रम, पशुधन और ग्रामीण जीवन की साँस होती है। इसीलिए उनकी राजनीति में खेत की गंध और साधारण मनुष्य की पीड़ा थी।
11 जून 2000 को एक सड़क दुर्घटना ने उस यात्रा को अचानक रोक दिया। वे अपनी राजनीति को उसके अंतिम गंतव्य तक पहुँचाने से पहले चले गए। राजस्थान की लोकतांत्रिक राजनीति को मिले श्रेष्ठ नेताओं में राजेश पायलट का स्थान सदैव विशिष्ट रहेगा।
केदारनाथ अग्रवाल की पंक्तियों के साथ उस दम���ते नक्षत्र को असीम प्रणाम :
“हम जिएँ न जिएँ दोस्त, तुम जियो
एक नौजवान की तरह,
खेत में झूम रहे धान की तरह,
मौत को मार रहे बाण की तरह।”
#RajeshPilot #SachinPilot
संजय गांधी की चिट्ठी:– “तुम्हें चुनाव लड़ना है, लेकिन उत्तर प्रदेश से नहीं राजस्थान के भरतपुर से।”
वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर बनने के बाद राजेश्वर को उड़ान की तकनीक सिखाने वाले कैप्टन रॉल्फ थे, जिन्होंने संजय गांधी को भी प्रशिक्षित किया था। राजेश्वर ने यह भी सुना था कि संजय गांधी जोखिम उठाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करते हैं। इसी दौरान उनके मन में जनसेवा के लिए राजनीति में उतरने की तीव्र इच्छा जाग उठी।
एक दिन वे “आयरन लेडी” इंदिरा गांधी से मिले और बेबाकी से कहा,
“मैं बागपत से चौधरी चरण सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहता हूँ।”
इंदिरा गांधी ने उत्तर दिया,
“वह जाट बहुल इलाका है, और तुम गुज्जर हो।”
राजेश्वर ने तुरंत कहा,
“मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
उनके इरादे को परखते हुए इंदिरा ��ी ने कहा,
“वहाँ हिंसा होगी, लाठियाँ चलेंगी।”
जनसेवा की अडिग भावना से भरे राजेश्वर ने दृढ़ स्वर में जवाब दिया,
“जो बमों से नहीं डरा, वह लाठियों से भला क्यों डरेगा?”
उनकी यह निडरता इंदिरा गांधी के मन को छू गई।
कुछ दिनों बाद जब उत्तर प्रदेश के कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची जारी हुई, तो उसमें राजेश्वर प्रसाद बिधूड़ी का नाम नहीं था। एक क्षण के लिए वे निराश हुए और यह मायूसी कई दिनों तक बनी रही।
इसी बीच खबर मिली कि अगली सुबह 5:30 बजे इंदिरा गांधी हैदराबाद चुनाव प्रचार के लिए रवाना होने वाली हैं। राजेश्वर और उनकी पत्नी रमा बिना समय गंवाए स्कूटर पर सवार होकर दिल्ली हवाई अड्डे पहुँचे। वहाँ बड़े-बड़े नेताओं की लंबी कतार लगी थी। अंततः उन्हें इंदिरा गांधी से मिलने का अवसर मिला। इंदिरा जी ने रमा की ओर देखा, एक रहस्यमयी मुस्कान दी और आगे बढ़ गईं। ��स मुलाकात में कोई बातचीत नहीं हुई, लेकिन वह मुस्कान राजेश्वर के लिए नई उम्मीद बन गई।
राजेश पायलट ने वायुसेना की ऊँचाइयों को छोड़कर जनसेवा के लिए राजनीति में कदम रखने का निर्णय कर लिया। उन्होंने इंदिरा गांधी से पुनः मुलाकात की और अपने मन की बात रखी। इंदिरा जी ने उनकी बात सुनी और फिर पूछा,
“आपकी पत्नी क्या करती हैं? उन्हें मुझसे मिलने भेजिए।”
कुछ समय बाद रमा पायलट इंदिरा गांधी के कार्यालय प���ुँचीं। इंदिरा जी ने पूछा,
“आप कौन हैं और क्यों आई हैं?”
रमा ने सादगी से उत्तर दिया,
“आपने मुझे बुलाया है। मैं राजेश की पत्नी हूँ। मेरे पति ने वायुसेना से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल होने और जनता की सेवा करने का फैसला किया है।”
इंदिरा गांधी मुस्कुराईं और कहा,
“अच्छा, पायलट!”
यह वही पहली मुलाकात थी, जिसने राजेश पायलट के राजनीतिक सफर की नींव रखी।
कुछ समय बाद अचानक फोन की घंटी बजी। दूसरी ओर ���ंजय गांधी के कार्यालय से बात की जा रही थी। रमा ने सहजता से खुद को रिश्तेदार बताते हुए कहा,
“राजेश बाहर गए हैं।”
लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि स्वयं संजय गांधी ने बुलाया है, उनके मन में उत्साह की लहर दौड़ गई।
राजेश पायलट संजय गांधी से मिलने पहुँचे। संजय गांधी ने उन्हें एक चिट्ठी थमाते हुए कहा,
“तुम्हें चुनाव लड़ना है, लेकिन उत्तर प्रदेश से नहीं राजस्थान के भरतपुर से।”
उस पत्र में प्रदेश कांग्रेस के लिए एक संदेश था। उस समय राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जगन्नाथ पहाड़िया थे। नामांकन के दौरान कुछ कांग्रेसी नेताओं ने अड़चने��� डालीं, कुछ ने खुराफात करने की कोशिश भी की, लेकिन राजेश पायलट के हौसले और जनता के स्नेह के आगे सब प्रयास फीके पड़ गए।
अंततः सब कुछ ठीक हुआ, और यहीं से राजेश पायलट के राजनीतिक जीवन की शानदार शुरुआत हुई।
Jaipur, Rajasthan: On Congress leader and former CM Ashok Gehlot's allegation that a 'conspiracy' within the Congress party prevented him from becoming the national Congress President, his former OSD Lokesh Sharma says, "Ashok Gehlot is telling a blatant lie. He is saying that a conspiracy was hatched against him. No one conspired against him. The high command, the Congress leadership, made it clear to him that they wanted to make him the National President and gave him complete information. He knew that the national leadership wanted to make him President. That is why, two days after the incident on September 25, he was supposed to go to file his nomination. Just before all this was happening, whenever we used to sit and talk with him, he used to say, 'Lokesh, I don't understand the system there. Being National President, going to Delhi — it is not within my capacity to handle or understand that entire system. Rajasthan is ingrained in me, and I want to stay here and work.' He never had the intention of becoming the National President. He did not want to give up this chair — the Chief Minister's chair..."
Absolutely thrilled and honored to meet the dynamic leader and former Deputy CM of Rajasthan, @SachinPilot Sir! ✨
Your vision, energy, and dedication continue to inspire millions. 🙌🔥
पूर्व ओएसडी @_lokeshsharma का बड़ा खुलासा : “गहलोत ने गांधी परिवार को लेकर भी अपशब्द बोले, राहुल गांधी के लिए कहा ‘ये राजनीति का पप्पू है’… मुझे मौक़ा मिले तो मैं @RahulGandhi , @priyankagandhi और सोनिया जी को रिकॉर्डिंग/सबूत दिखा सकता हूँ”
https://t.co/EfPLjr80Mg
सचिन पायलट पर देखो कैसे खेल हो रहा है फिर कहते है कांग्रेस लूटी क्यों , @SachinPilot लोगों के दिलो में है तस्वीरो से गायब करने से कुछ नहीं होगा . बच्चों वाली हरकते है कांग्रेसी लोगो की
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इतिहास में ऐसे कई मौके रहे, जहां किसी व्यक्ति के नेतृत्व और संघर्ष ने बड़े जनसमुदाय की दशा व दिशा बदल दी।
भारत की आज़ादी के आंदोलन को देखता हूँ तो महात्मा गांधी, नेताजी बोस जैसे नायक इस श्रेणी में नज़र आते हैं।
मेरी नज़र में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला भी इसी दर्जे की शख्सियत रहे।
गुर्जर समाज के कितने ही ऐसे युवाओं से मिला हूँ, जो आज बेहतरीन इंस्टीट्यूशंस में पढ़ाई कर रहे हैं, ब���़े पदों पर नौकरी कर रहे हैं। यह कर्नल साहब के संघर्ष और सोच के कारण संभव हुआ।
एक व्यक्ति का जीवन कितनी ज़िंदगियों को बदल सकता है, उसके बेहतरीन एग्जांपल - कर्नल बैंसला।
आज चौथी पुण्यतिथि पर कोटि - कोटि नमन।
@VijaySBainsla
हमने 50–55 दिन हैदराबाद के अस्पताल में बिताए—हर दिन, हर घंटा, हर प��� संघर्ष से भरा हुआ था। हालात इतने मुश्किल और विकट थे कि उस समय को याद करना भी दिल को भेद जाता है। पर इतनी गहन पीड़ा और असहाय स्थिति के बीच भी जो साथ, धैर्य, हिम्मत और संबल श्री सचिन पायलट ने दिया, वह असाधारण था—कहना भी कम है।
इतनी व्यस्तताओं के बावजूद @sachinpilot जी ने जिस संवेदनशीलता और मानवीयता के साथ हमारा हाथ थामा 50-55 दिन तक लगातार टच में रहना हर समय उपलब्ध रहना वह एहसान नहीं, बल्कि एक ऐसी मानवता है जिसे शब्दों में व्यक्त करना नामुमकिन है। आज भी जब पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो दर्द उतना ही गहरा है दुर्भाग्यवस बेटा दुनिया में नहीं पर उतनी ही गहरी कृतज्ञ��ा भी है कि सबसे कठिन समय में, सबके बीच, सच में साथ खड़े होने वाला कोई था तो वो पायलट!
History remembers those who reshape the future.
Wishing PM @narendramodi ji continued strength, clarity, and courage as he leads Bharat through a transformative era.
May your journey remain as fearless as your vision. 🇮🇳
#HappyBirthdayModiJi
Wishing a very happy birthday to Shri Sachin Pilot ji — a young, dynamic leader whose politics is rooted in principles, not power. May you keep raising the voice of the people, and guiding Indian politics towards honesty, courage, and progressive change.
@SachinPilot