तथाकथित लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ मीडिया अपने वास्तविक कार्य से विमुख हो गयी है। पत्रकारिता का राजनीतिकरण होना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।स्वस्थ्य जनमत का निर्माण कर अपने अस्तित्व को बचाएं।
तेजस्वी यादव जी बिहार के नियोजित शिक्षकों से अपने किए गए समान काम-समान वेतन के वादे के विषय में भी सोचिए। सभी शिक्षक अपने अधिकार की माँग लम्बे समय से कर रहे हैं।
@yadavtejashwi
पुरानी पेंशन योजना अगर गलत है तो 2004 के पहले वाले कर्मचारियों सहित राजनेताओं का भी पेंशन बंद होना चाहिए। एक देश में दो तरह का नियम संविधान विरुद्ध है ये नहीं चलेगा।
@PMOIndia
पुरानी पेंशन पर दो ही सवाल, पहला 2004 के बाद वाले कर्मचारियों को भी OPS का लाभ मिले।दूसरा- 2004 के पहले वाले कर्मचारियों का भी पेंशन बंद हो क्योंकि एक ही देश में दो तरह का नियम नहीं चलेगा। ये भेदभाव समता के अधिकार का अतिक्रमण है।
@myogioffice@NitishKumar
संविधान को पवित्र पुस्तक मानने वाले लोग ही संविधान का घोर उल्लंघन कर रहे हैं।बिहार के नियोजित शिक्षकों के साथ भेदभाव करते हुए समानता के अधिकार का अतिक्रमण जारी है।समान काम-समान वेतन देने का नारा लगाने वाली पार्टी अब चुप क्यों है?
@aajtak@News18Bihar