उत्तराखंड शिक्षा विभाग, 200 सरकारी स्कूल, 300 व्यावसायिक प्रशिक्षक, लगभग 35000 विद्यार्थी, 78 दिन, नो सैलरी, कार्यमुक्त, घर पर बैठाया गया। माननीय मुख्यमंत्री श्री @pushkardhami जी, शिक्षा मंत्री श्री @drdhansinghuk जी, आखिर क्या कारण? किसका क्या लाभ?? सरकार का? कम्पनी का? क्यों?
@narendramodi ये सब होने के बाद भी तो पेपर लीक हो जा रहे हैं?? क्या करें विद्यार्थी?300 व्यावसायिक प्रशिक्षक 1 अप्रैल से बिना सैलरी के घर बैठे हैं। ज्ञान, विवेक तो था हमारे पास,लेकिन दूरदर्शिता नहीं थी,समझ नहीं पाए कि बीजेपी सरकार सिर्फ प्राइवेटाइजेशन को ही महत्व देती है, सरकारी तंत्र को नहीं।
80 दिन, 300 व्यावसायिक प्रशिक्षक, बिना सैलरी के, 35000 विद्यार्थी, बिना व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई के। क्या होगा व्यावसायिक शिक्षा का?? क्या होगा हमारे भविष्य का?? @narendramodi जी, @pushkardhami जी, @drdhansinghuk जी कुछ तो कहिये? 5 साल से शोषण सह के भी कार्य कर रहे थे, इसीलिए?
@dpradhanbjp उत्तराखंड सरकार ने 300 व्यावसायिक प्रशिक्षकों को रोजगार की विद्या देने से ही रोक दिया प्रधान जी। 1 अप्रैल से बिना सैलरी के घर पे बिठा रखा है। अब बताओ आपके इस ज्ञान से क्या हमारा घर चल जाएगा??? व्यावसायिक प्रशिक्षकों को घर बैठा के किसका फायदा? सरकार का? कंपनी का? विद्यार्थियों का?
बिल्कुल सही कहा। नहीं तो और क्या कारण है कि जबरदस्ती प्राइवेट कंपनी को बीच में लाया जा रहा है ताकि "ये हमारे आदमी नहीं" कहा जा सके। वरना क्या 5 साल बाद भी उत्तराखंड का शिक्षा विभाग खुद व्यावसायिक शिक्षा नहीं चला सकता??? 78 दिन में टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं की सकी??
@vtuttarakhand49@pushkardhami@drdhansinghuk सब कमिशन खोरी की बात है किसको कितना मिलेगा।कोई नहीं आने वाले चुनाव में सब पता चल जाएगा अब बीजेपी के लोगो को गलत नीतियों के कारण दूसरी पार्टी को समर्थन दे के चुनाव जीतना ही मकशद होना चाहिए।
@dpradhanbjp 300 व्यावसायिक प्रशिक्षक 78 दिन से बिना सैलरी के घर बैठे हैं उत्तराखंड में। क्या आपके इस श्लोक से उनका घर चल जाएगा??? जो काम आपको दिया गया है वो कीजिए ढंग से। ये श्लोक हम ऑनलाइन पढ़ लेंगे। पेपर लीक रुकते नहीं, चले हैं ज्ञान पेलने।
@pushkardhami मुख्यमंत्री जी, ये काम तो सफाई कर्मचारी कर लेंगे। आपका असली काम राज्य को एक सही दिशा देना है। 300 व्यावसायिक प्रशिक्षकों को 78 दिन से बिना सैलरी के घर बैठाया गया है। कब तक ऐसे ही चलेगा?? बिना सैलरी के घर कैसे चलाना है? वो भी बता दीजिए। @AmarUjalaNews@JagranNews@Live_Hindustan
उत्तराखंड शिक्षा विभाग, 200 सरकारी स्कूल, 300 व्यावसायिक प्रशिक्षक, लगभग 35000 विद्यार्थी, 78 दिन, नो सैलरी, कार्यमुक्त, घर पर बैठाया गया। माननीय मुख्यमंत्री श्री @pushkardhami जी, शिक्षा मंत्री श्री @drdhansinghuk जी, आखिर क्या कारण? किसका क्या लाभ?? सरकार का? कम्पनी का? क्यों?
@vtuttarakhand49@RahulGandhi आदरणीय @RahulGandhi जी, उत्तराखंड काँग्रेस को जागृत कीजिए और मुद्दे उठाने के लिए प्रेरित कीजिए। चुनाव इसी साल भी हो सकते हैं। व्यावसायिक शिक्षा के लगभग 600+ प्रशिक्षक आपसे सहयोग की आशा करते हैं। अगर काँग्रेस प्रशिक्षकों के उज्जवल भविष्य का वादा करती है तो हम भी आपके साथ हैं।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी, सभी जगह बीजेपी सरकार ने व्यावसायिक प्रशिक्षकों के साथ ऐसा ही कर रखा है। उत्तराखंड में भी व्यावसायिक प्रशिक्षक परेशान हैं। 69 दिन से घर बैठे हैं। कौन चलाएगा हमारा घर?? सिलेंडर भी 29 रुपये महंगा कर दिया है आपकी सरकार ने। देशहित में कितना?
@pushkardhami 69 दिन से 300 व्यावसायिक प्रशिक्षकों को घर बिठाया हुआ है आपकी सरकार ने। कौन चलाएगा हमारा घर?? सैलरी भी नहीं आ रही है। पुनः नियुक्ति भी नहीं मिल रही है। कब जाएंगे हम दोबारा स्कूल??
@dpradhanbjp@narendramodi क्या बात कर दी आपने तो 😂 आपके जैसे शिक्षा मंत्री ने जो शिक्षा विभाग की हालत कर दी है, वो कोई और नहीं कर सकता। एक निकम्मे शिक्षा विभाग से पेपर लीक नहीं रुक पा रहे। सीबीएसई में गड़बड़ी, हर एग्जाम में गड़बड़ी। 12 साल बहुत होते हैं परफॉर्म करने के लिए। लेकिन बीजेपी असफल रही है।
Without abuse, does your governemnt even care about any protest?? In Uttarakhand, 300 vocational trainers were relieved from their duties on April 1st immediately after the company's contract expired and have been sitting at home ever since. There seems to be no one willing to listen to their concerns.
Ironically, on the very same day, the Education Minister of Uttarakhand publicly stated that the existing company would continue running vocational education programs until a new tender was finalized. Yet, despite this assurance, no official order for the trainers' reinstatement has been issued till now.
Today marks the 68th day since these trainers were forced out of work.
Who is benefiting from keeping trained professionals at home?
The students, whose vocational education has been disrupted?
The trainers, who have been left without work and income?
The government, whose skill development initiatives are being affected?
Or the company involved?
If vocational education is truly a priority, then why are hundreds of trainers still waiting for a solution? Who will answer these questions? And more importantly, when?
Youth is sensible and responsible too but Is government acting in the same way? If your children would be in the same situation, would you say the same thing to them?? Be responsible and sensible?
#VocationalEducation #SkillDevelopment #VocationalTrainers #Education #Uttarakhand #StudentsFirst #Accountability #EducationMatters
जो काम करना चाहते हैं, उनको घर बैठा देती है, बीजेपी सरकार। @NitinNabin जी, उत्तराखंड की धामी सरकार के शिक्षा विभाग ने 200 विद्यालयों के 300 व्यावसायिक प्रशिक्षकों को कंपनी का टेंडर ख़त्म होते ही 1 अप्रैल से कार्यमुक्त करके घर बैठा दिया गया।
कोई सुनने वाला नहीं। शिक्षा मंत्री जी ने 1 अप्रैल को ही प्रेस वार्ता करके कह दिया था कि नया टेंडर होने तक पुरानी कंपनी ही व्यावसायिक शिक्षा को चलाएगी लेकिन फिर भी पुनः नियुक्ति का कोई आदेश नहीं आया है। आज 67वाँ दिन है। प्रशिक्षकों को घर बैठा कर किसका फायदा हो रहा है?? विद्यार्थियों का? प्रशिक्षकों का? सरकार का? कंपनी का? कौन देगा इसका जवाब?
प्रशिक्षक अपना घर कैसे चलाएं? कंपनी सैलरी दे नहीं रही क्योंकि व्यावसायिक प्रशिक्षक स्कूल ही नहीं जा पा रहे हैं। 300 प्रशिक्षकों के परिवार की इस दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है?? देश के निर्माण के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षक विगत 5 सालों से काम कर रहे थे। रोजगार की शिक्षा देने वाले प्रशिक्षकों का ही भविष्य सुरक्षित नहीं है, विद्यार्थियों को कैसे कहेंगे कि उनका भविष्य सुरक्षित होगा??
हर ट्रेड में लगभग 100% रिजल्ट देने के बाद भी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को अभी तक पुनः नियुक्ति नहीं दी गई, क्या ऐसे ही बनेगा विकसित भारत?
@narendramodi शिक्षा मंत्री ने कहा कि नया टेंडर होने तक पुरानी कंपनी ही व्यावसायिक शिक्षा को चलाएगी लेकिन फिर भी पुनः नियुक्ति का कोई आदेश नहीं आया है। आज 67वाँ दिन है। प्रशिक्षकों को घर बैठा कर किसका फायदा हो रहा है?? विद्यार्थियों का? प्रशिक्षकों का? सरकार का? कंपनी का? कौन देगा इसका जवाब?