राहुल जी, खटिया पर बैठकर हर आते-जाते पर पत्थर फेंकने से कुछ नहीं होगा।
उम्र आपके साथ है। कुछ न करें, तब भी संभावना है कि किसी दिन प्रधानमंत्री बन जाएँ। वंशवाद पर जितनी भी आलोचना हो, भारतीय राजनीति में वह एक स्थापित परंपरा रही है। नरेंद्र मोदी उस परंपरा को तोड़कर आए हैं।
लेकिन समस्या यह है कि आपकी राजनीति अक्सर विरोध के लिए विरोध, अराजकता, निहिलिज्म और तोड़फोड़ के आसपास होती है। देश अपनी कमान किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं सौंपता जो अराजक, मनमौजी या केवल व्यवस्था को ध्वस्त करने में रुचि रखता हो। परिवार और मोहल्ले तक अपने मुखिया के लिए स्थिरता और जिम्मेदारी देखते हैं।
आज जनता इस सरकार के साथ है। कल उसका मन बदले, यह भी संभव है। लेकिन तब भी यह जरूरी नहीं कि जनता सीधे आपको ही चुने। वह किसी दूसरे कांग्रेसी नेता को आगे बढ़ा सकती है। कांग्रेस भी किसी दिन थक-हारकर किसी और को अपना नेतृत्व सौंप सकती है।
मैं होता तो @RahulGandhi जी को एडमंड बर्क पढ़ने की सलाह देता। शासन केवल विरोध से नहीं चलता, संस्थाओं को समझने और संभालने की क्षमता से चलता है।
जब भी अवसर मिले, शासन में कोई जिम्मेदारी लेकर सरकार चलाने का अनुभव लीजिए। 2004 से 2014 के बीच आप शिक्षा मंत्री बन सकते थे, किसी बड़े मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल सकते थे। बहुत कुछ करने का अवसर था। लेकिन आपने जिम्मेदारी लेने के बजाय उससे दूरी बनाए रखी।
आख़िरकार, खटिया पर बैठकर हर आते-जाते पर पत्थर फेंकने से कुछ नहीं होता। नेतृत्व का दावा विरोध से नहीं, जिम्मेदारी निभाने से सिद्ध होता है।
- सारी लड़ाई FCRA विधेयक को लेके है… जोकि अमरीका को कतई पसंद नहीं।
अमरीकन फॉरेन सेक्रेटरी से लेके CIA तक FCRA लाइसेंस रद्द होने की छटपटाहट… विदेश चंदे (अमरीकन फंड्स) के लाभार्थी वांगचुक को मोहरा बनाया गया है।
नए नियम जहां भारत में CIA के ऑपरेशन को बंद करेंगे ही वहीं वांगचुक जैसों की कमाई का सोर्स बंद कर देंगे।
- बचा हुआ इंडी गठबंधन (सपा, कांग्रेस, AAP) घबराया हुआ है परिसीमन विधेयक से।
संसद में तो रोका नहीं जा सकता, सो सड़क पर तमाशा करके इंडी गठबंधन छोड़ने वाले सांसदों को रोकने की कोशिश है।
- महिला आरक्षण सहित परिसीमन देश में हो गया तो 2029 में हार सुनिश्चित है इंडी गठबंधन की।
FCRA विधेयक और महिला आरक्षण सहित परिसीमन विधेयक… यह 2 बातें इंडी गठबंधन के छटपटाहट का कारण हैं।
राहुल और अखिलेश
1. दिल्ली पुलिस ने राहुल और अखिलेश को एक ही बस में बिठाया था। बीच रास्ते अखिलेश यादव ने पुलिस से कहा, मुझे उतार दो। मेरी गाड़ी पीछे-पीछे आ रही है। पुलिस ने अखिलेश और उनकी टीम को बस से उतार दिया।
2. अखिलेश यादव पुलिस की बस से तो उतर गए और फिर रात नौ बजे अपनी बस लेकर छत्रसाल स्टेडियम पहुंच गए। बस बिल्कुल लदी हुई थी। ड्राइवर के बगल में अखिलेश बैठे थे और अंदर अखिलेश की पार्टी के सांसद। अखिलेश के बस की छत पर सपा के कार्यकर्ता जमे हुए थे। ऐसे ही पूरी बस छत्रसाल स्टेडियम के अंदर आ गई और फिर थोड़ी देर बाद राहुल गाधी को छोड़ दिया गया ।
जरूरी सूचना - कल दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई करवाएँगे
यदि आपके पास जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़, पुलिस वैन को नुकसान या पुलिसकर्मियों पर हमले की फोटो/वीडियो है, तो कृपया तुरंत DM करें।
आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी - Pl Rt
@ANI@PTI_News@ians_india
#JanrarManrar : 21 जुलाई: रात 11 बजे के बाद
1. हिरासत से सारे नेता छोड़ दिए गए हैं। लेकिन आज रतजगा है
2. CJP के प्रोटेस्ट में पकड़े गए प्रदर्शनकारियों को भी छोड़ दिया गया है । लेकिन वो इधर ही हैं
3. अगले 24 घंटे फिर कुछ बड़ा होने वाला है । तीन बड़ी पार्टियां साथ आ गई हैं
4. तेरे प्रदर्शन से बड़ा मेरा प्रदर्शन ये प्रतियोगिता शुरू हो चुकी है
5. चार राज्यों से रातोंरात लोगों को बुलाया जा रहा है
6. इन सबके दिमाग में इस वक्त भी
नेपाल और बांग्लादेश ही भरा गया है
7. नाम मंत्री का ले रहे हैं लेकिन असली टारगेट प्रधानमंत्री को बनाने की तैयारी है
8. आज अचानक मोदी के घर को घेर लेना एक रिहर्सल जैसा हो सकता है
9. नेता अचानक मोदी के घर की तरफ चल देंगे ये दो लोगों के अलावा तीसरे को भी पता नहीं था
वरिष्ठ पत्रकार को फोन किया- दो पेग डाउन लगे। मैंने पूछा सर अब क्या होगा कांग्रेस और AAP भिड़ गए हैं ? बोले बेटा तुम हमेशा छोटा सोचते हो, इकोसिस्टम के पत्रकारों/संपादकों का सोचो वो क्या करेंगे? किसका पक्ष लेंगे ? उनकी जान फँसी है और तुमको कांग्रेस-AAP की पड़ी है । फोन काट दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना का विशाल AH-64 Apache हेलीकॉप्टर गश्त कर रहा था। - शायद तकनीकी खराबी या ईरान का स्टील्थ ड्रोन हमला। देखते ही देखते वह ताकतवर हेलीकॉप्टर समंदर के उफनते पानी में गिर गया।
दो पायलट अथाह और ठंडे पानी में अपनी जान के लिए जूझ रहे थे। रात अंधेरी और तूफानी थी। पारंपरिक तरीके से बचाव जहाज या हेलीकॉप्टर भेजना मतलब और जानें जोखिम में डालना। लेकिन दूर, अमेरिकी 5वें बेड़े के टास्क फोर्स 59 के मुख्यालय में कंप्यूटर स्क्रीनें चमक रही थीं। वहां एक मानवरहित, स्वायत्त नाव - नाम Corsair - को तुरंत आदेश दिया गया।
24 फुट की वह नाव, जिसमें कोई इंसान नहीं था, लहरों को चीरती हुई निकली। उसकी अपनी आंखें नहीं थीं, पर उस पर लगे अत्याधुनिक रडार और AI कैमरे देख रहे थे। दो घंटों के भीतर, घुप्प अंधेरे में उसने लोकेशन ढूंढ ली और दोनों पायलटों के सामने आ खड़ी हुई। दोनों ने जान पर खेलकर नाव पर चढ़कर अपनी जान बचाई। Corsair उन्हें सुरक्षित किनारे तक ले आई। रक्षा उद्योग के इतिहास में पहली बार था कि बिना मानव ऑपरेटर वाली मशीन ने इंसान की जान बचाई हो!
लेकिन इस पूरी अद्भुत कहानी का असली हीरो ओमान के समंदर में नहीं था। वह हजारों मील दूर, अमेरिका के टेक्सास राज्य की एक लैब में बैठा था। उस नौजवान का नाम था - विभव अलतेकर, भारत से
विभव एक साधारण भारतीय पृष्ठभूमि से, महाराष्ट्र से आया था, आंखों में विज्ञान और तकनीक के सपने लिए। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पढ़ते हुए विभव को केबल और तारों से परे सोचने वाली तकनीक ने मोहित कर लिया।
कुछ साल पहले, सितंबर 2022 में, पूर्व Navy SEAL 'डिनो मावरूकास' ने एक नए विचार को जन्म दिया - 'Saronic Technologies'। वह ऐसे रोबोट बनाना चाहते थे जो समंदर में काम कर सकें और कठिन परिस्थितियों में टिक सकें। लेकिन इस विचार को हकीकत बनाने के लिए उन्हें एक तेज दिमाग चाहिए था। वह दिमाग उन्हें विभव के रूप में मिला। विभव कंपनी के को-फाउंडर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) बन गए।
रात-रात भर जागकर, सैकड़ों लाइन कोड लिखकर और जटिल मशीन लर्निंग प्रयोग करके, विभव ने इस 'Corsair' ड्रोन का 'दिमाग' और 'दिल' बनाया। इससे पहले, 'Anduril' कंपनी में काम करते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के 'Ghost Shark' ड्रोन पनडुब्बी पर भी अपना कौशल दिखाया था। आज उनकी उपलब्धियों के कारण अमेरिकी नौसेना ने उनकी कंपनी के साथ 3,200 करोड़ रुपये ($392 मिलियन) का विशाल अनुबंध किया है।
विभव दके सहयोग से बनाई गई यह 'Corsair' नाव विज्ञान का चमत्कार है। अगर हम इसके डिजाइन को देखें तो विभव की इंजीनियरिंग की सटीकता आश्चर्यचकित करती है:
सख्त डिजाइन : यह नाव, जो केवल 24 फुट लंबी है, 65 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से लहरों पर दौड़ सकती है।
असीम क्षमता : अपने छोटे वजन के बावजूद, यह आसानी से 454 किलोग्राम तक वजन ले जा सकती है - इसीलिए यह भारी G-सूट पहने दो पायलटों को ले जाने में सक्षम थी।
दृष्टि : एक बार ईंधन भरने के बाद, यह बिना किसी मानवीय सहायता के, खुद निर्णय लेते हुए लगभग 1,850 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर सकती है।
एक विचार..
युद्ध और आपदाओं ने मानव इतिहास में हमेशा लोगों की जान ली है। लेकिन विभव अलतेकर जैसे भारतीय युवक ने अपनी बुद्धि की शक्ति से प्रकृति और युद्ध के क्रूर नियमों को चुनौती दी है। 'Corsair' द्वारा बचाई गई दो जानें सिर्फ 2 सैनिक नहीं थीं, बल्कि विज्ञान का मानवता के लिए एक सुंदर उपहार थीं। जब विज्ञान का उपयोग विनाश के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए किया जाता है, तभी वास्तव में एक नए युग की शुरुआत होती है, विभव ने दुनिया को यह दिखाया है।
ब्रिटेन का जल उद्योग परेशान है और इसका कारण है AI. एआई की उन्नति के लिए चाहिए डेटा सेंटर्स और इन डेटा सेंटरों को चाहिए पानी।
बिन पानी सब सून... शायद इसीलिए रहीम कह गए थे! असल में डेटा सेंटरों में जो सर्वर होते हैं वो बड़ी मात्रा में उष्मा पैदा करते हैं। कूलिंग टॉवर से लेकर चिलर तक सब पानी खाते हैं। हवा में नमी बनाए रखने के लिए भी पानी का इस्तेमाल होता है।
ब्रिटेन के कई इलाक़े कम बरसात और अत्यधिक गर्मी से पीड़ित हैं, वहीं डेटा सेंटर्स बन रहे हैं। कुछ डेटा सेंटर महीने में 30 लाख लीटर एक पानी माँग रहे थे।
10वे भाव में बुध:-
यदि 10वे में बुध हो तो व्यक्ति अपने कर्म क्षेत्र में बहुत कुशाग्रबुद्धि वाला होता है। किसी भी काम को बेहद आसान से आसान तरीकें से करने की क्षमता रखता है। अपना काम बनाने के लिए अपनी वाणी को भी समयानुसार परिवर्तित कर लेता है।
#astrology
निशाना नरेंद्र मोदी का घर: पहला चैप्टर :
1. नेपाल..बांग्लादेश और फिर हिंदुस्तान? प्रधानमंत्री आवास के बाहर जो हुआ वो फ्लैश प्रोटेस्ट नहीं लगा..इससे कुछ बड़ा था। संसद के अंदर काफी जगह है। नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसदों को धरना करना था तो वो संसद के अंदर भी कर सकते थे। लेकिन संसद से चुपचाप निकलकर प्रधानमंत्री के घर के ठीक बगल का सरकारी बंगला ढूंढा गया। पुलिस को शक ना हो, इसलिए एक बुजुर्ग नेता के बर्थडे का दिन चुना गया। पुलिस और सरकारी एजेंसियां भांप ना पाएं इसलिए नेताओं और समर्थकों को जन्मदिन मनाने के नाम पर बुलाया गया। मीडिया को भी यही कहा गया- केट कटने वाला है आ जाइए। बात लीक ना हो, इसलिए फोन तक अलग रखवाए गए और फिर अचानक....
2. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी..और उनके दो तीन लोगों को ही सही बात पता थी। पूरा ऑपरेशन बहुत सोच समझकर लोकेशन देखकर प्लान किया गया था। तीन बजे से तीन पच्चीस तक लोगों को इकट्ठा किया गया। फिर प्रधानमंत्री का आउटगेट चुना गया। एक ऐसी जगह जिसे हाई सिक्योरिटी जोन कहा जाता है। यहां रुकना भी मना होता है। लेकिन सपने में भी पुलिस नहीं सोच सकती थी, देश के नेता विपक्ष खुद सारी परंपरा तोड़ते हुए प्रधानमंत्री के घर के दरवाजे पर आकर बैठ जाएंगे।
3. मंत्री का इस्तीफा लेकर आओ। ये डिमांड प्रधानमंत्री के घर के गेट पर आकर की गई। राहुल, प्रियंका ये सारे नेता खुद सिक्योरिटी के साथ आए थे। देश के दो राज्यों के चीफ मिनिस्टर भी मौजूद थे। बीस से ज़्यादा सांसदों को वहां जमा किया गया था। सोचिए, पुलिस बात कर रही थी. नेता सुन नहीं रहे थे। मंत्री मना रहे थे, राहुल मना कर रहे थे। देखते-देखते सीधे प्रधानमंत्री के घर पहुंचने की कॉल दे दी गई। ठीक ऐसा ही तो पड़ोस में हुआ था।
मैं डर रहा हूं कि शनि जब डायरेक्ट होगा 4-5 महीने बाद , तब फिर क्या होगा ? अभी तो पांच छः दिन बाद ये सारा प्रोटेस्ट रुक जाएगा । सबको लगेगा, गया सब ठंढे बस्ते में ।
खैर नीच की तरफ जाते शनि के मज़े लीजिए । मई 2014 को जब बीजेपी की सरकार बनी थी, शनि उच्च के थे ।
अब वो नीच के होने जा रहे अगले साल । समय बदल गया ।
2014 में ज्यूपीटर मिथुन में थे जब सरकार बनी । मैं आपको कई बार बता चुका मिथुन का ज्यूपीटर चोरी , गलतबयानी इत्यादि इत्यादि को दिखाता है ।
अब वही ज्यूपीटर मिथुन में चक्र पूरा करके कर्क की ओर बढ़ लिया । न्याय और दंड का रिश्ता है शनि और गुरु के बीच में ।
जो गलतबयानी की, उसके भुगतान का समय आ गया ।