किसी भगीरथ ने नहीं
ये पेड़ ही थे
जिन्होंने एक पैर पर बरसों-बरस तपस्या की
इस धरती के लिए।
हमारे लिए
पानी के लिए
जहाँ वे नहीं हैं धरती आज भी बंजर है
जब हमारी अनंत भूख
एक दिन आख़िरी पेड़ भी निगल जाएगी
उस दिन धरती हो जाएगी बाँझ
बादल उस दिन गर्भ गिरा देंगे
रेत का कफ़न ओढ़े धरती
उस दिन अंतिम बार धड़केगी
सौर मंडल के ग्रह थोड़ा और झुक जाएँगे
ब्रह्मांड का सीना थोड़ा और सिकुड़ जाएगा
और चाँद के साथ हमारे पूर्वजों की आत्माएँ बैठकर
बहाएँगीं नौ-नौ आँसू।
• दीपक जायसवाल
(https://t.co/k2hRo0z58D)
#hindwi #isak2026 #deepakjaiswal
वो सोचते थे
हर फूल
बेरहमी से तोड़ लेंगे।
बागीचा उफ़ की हिम्मत भी न करेगा।
उनका फूलों में
फूलन से मिलना बाकी था।।
(फ़ोटो : फूलन देवी)
#फूलनदेवी#पुण्यतिथि#मणिपुर#manipur
साभार:- @Kitabganj1
मेरे घर तुम खाली हाथ मत आना
मुझे दहेज चाहिए
बड़े बड़े बक्से, तीन चार सूटकेस
पूरे के पूरे भरे होने चाहिए
जिसमे भरें हों तुम्हारे बचपन के खिलौने
तुम्हारे सपने, तुम्हारी उम्मीद।
तुम्हारा बचपन ,उसके किस्से
कहानी की किताबें और दो चोटी वाली बेबाक लड़की ,जो लड़ जाती है अपने आप से ।
साहेब की कुर्सियों पर लगे
सफेद तौलिए
इतने लंबे हैं कि
हर रोज़ कुछ
कफ़न काट लेने के बाद
तुम्हारी कुर्सी ढकी रहती है।
वो कौन व्यक्ति होगा आखिरी
जिसके बाद ये उतरेगा
सफेद चोला
तुम्हारी कुर्सी का
जब हम सब ये देख पाएंगे
कि
तुम्हारी कुर्सी का असली रंग काला है
सफेद नहीं।।
#rail
साहेब की कुर्सियों पर लगे
सफेद तौलिए
इतने लंबे हैं कि
हर रोज़ कुछ
कफ़न काट लेने के बाद
तुम्हारी कुर्सी ढकी रहती है।
वो कौन व्यक्ति होगा आखिरी
जिसके बाद ये उतरेगा
सफेद चोला
तुम्हारी कुर्सी का-
जब हम सब ये देख पाएंगे
कि
तुम्हारी कुर्सी का असली रंग काला है
सफेद नहीं।।